अगर धार्मिक दुनिया इसकी निंदा करती है, तो क्या यह सच्चा मार्ग नहीं है?

02 अप्रैल, 2026

अंत के दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने मानवजाति को बचाने के लिए सभी सत्य व्यक्त किए हैं, जिन्हें बहुत पहले ही ऑनलाइन डाल दिया गया था ताकि सभी लोग खोज और जाँच-पड़ताल कर सकें। परमेश्वर के प्रकटन की लालसा रखने वाले बहुत-से लोगों ने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन पढ़े हैं और उन्हें परमेश्वर की वाणी के रूप में पहचान लिया है। उन सभी ने सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार कर लिया है और वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने लौट आए हैं। लेकिन धार्मिक दुनिया के ज्यादातर पादरी और एल्डर न केवल जाँच-पड़ताल नहीं करते, बल्कि पागलों की तरह सर्वशक्तिमान परमेश्वर की यह कहकर निंदा भी करते हैं कि वह एक साधारण व्यक्ति है और वह परमेश्वर नहीं है जो प्रकट होकर कार्य करने आया है, और वे मनमाने ढंग से विश्वासियों को सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल करने से रोकते हैं। यह प्रभु में विश्वास करने वाले बहुत-से लोगों को उलझन में डाल देता है। वे सोचते हैं कि चूँकि पादरी और एल्डर कलीसियाओं में प्रभु की सेवा करते हैं और अक्सर बाइबल की व्याख्या करते हैं और उसकी बड़ाई करते हैं, तो वे ऐसे लोग होने चाहिए जो बाइबल को समझते हैं और परमेश्वर को जानते हैं और यह कि अगर सर्वशक्तिमान परमेश्वर लौटकर आया प्रभु यीशु है, तो पादरियों और एल्डरों को उसे पहचानने में सक्षम होना चाहिए—तो फिर वे उसका प्रतिरोध और निंदा कैसे कर सकते हैं? उन्हें लगता है कि अगर धार्मिक दुनिया के पादरियों और एल्डरों द्वारा किसी मार्ग की निंदा की जाती है, तो वह सच्चा मार्ग बिल्कुल नहीं हो सकता। क्या इस विचार में कोई दम है? क्या परमेश्वर के वचनों में इस कथन का कोई आधार है? वे किस आधार पर कहते हैं कि जो लोग बाइबल की व्याख्या कर सकते हैं वे परमेश्वर को जानने वाले लोग हैं? क्या इस तरह का कथन केवल मनुष्य की धारणाएँ और कल्पनाएँ नहीं है? क्या यह केवल पाखंड और भ्रांति नहीं है? यहूदी धर्म के मुख्य याजक, शास्त्री और फरीसी सभी बाइबल की व्याख्या कर सकते थे, तो फिर उन्होंने प्रभु यीशु की आलोचना और निंदा क्यों की और उसे क्रूस पर क्यों चढ़ा दिया? यहाँ समस्या क्या है? जब प्रभु यीशु प्रकट हुआ और कार्य किया, तो उसने कम से कम तीन साल तक उपदेश दिया और उसने जो कुछ भी व्यक्त किया वह सत्य था। फिर भी, भले ही यहूदियों ने माना कि प्रभु यीशु के वचनों में अधिकार और सामर्थ्य है, लेकिन उन्होंने जरा भी खोज या जाँच-पड़ताल नहीं की और न ही उन्होंने प्रभु यीशु द्वारा व्यक्त किए गए सत्यों को स्वीकार किया। उन्होंने पागलों की तरह प्रभु यीशु की निंदा की, उसे सताया और गिरफ्तार भी किया और उसे क्रूस पर चढ़ाने की जिद पर अड़े रहे। यहूदी धर्म के मुख्य याजक, शास्त्री और फरीसी सभी अक्सर बाइबल की व्याख्या करते थे। दूसरों की नजरों में, वे सभी बाइबल को समझते थे और परमेश्वर को जानते थे। तो फिर उन सभी लोगों में से वे ही क्यों थे जिन्होंने प्रभु यीशु को क्रूस पर चढ़ाया? इस तथ्य के आधार पर हम एक निष्कर्ष निकाल सकते हैं : जो लोग बाइबल की व्याख्या कर सकते हैं, यह जरूरी नहीं कि वे परमेश्वर को जानते हों या परमेश्वर के प्रति समर्पण करते हों, क्योंकि वे ठीक उसी तरह के लोग हैं जो परमेश्वर को क्रूस पर चढ़ा देंगे।

आज धार्मिक दुनिया के ये पादरी और एल्डर भी बाइबल की व्याख्या कर सकते हैं, लेकिन क्या वे सच में परमेश्वर को जानते हैं? क्या वे परमेश्वर के प्रति समर्पण करते हैं या उसका प्रतिरोध करते हैं? हमें इसका भेद कैसे पहचानना चाहिए? सबसे पहले हमें यह देखना चाहिए कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने इतने सारे सत्य व्यक्त किए हैं, जिन्हें कोई भी ऑनलाइन पढ़ सकता है। धार्मिक दुनिया के पादरी और एल्डर आखिर सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं? उनमें से कितने सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल करते हैं? उनमें से कितने अभी भी निंदा और प्रतिरोध करते हैं? उनमें से कितने तमाशबीन बने रहते हैं, जो न तो स्वीकार करते हैं और न ही प्रतिरोध करते हैं? परमेश्वर का सत्य व्यक्त करना लोगों को पूरी तरह बेनकाब कर देता है; सत्य के सामने हर कोई अपनी किस्म के अनुसार छाँटा जाता है। दरअसल, जब लोगों का सामना सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त किए गए सत्यों से होता है, तो बहुत कम लोग सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल करते हैं और सर्वशक्तिमान परमेश्वर का प्रतिरोध और निंदा करने वाले बहुत ज्यादा हैं। यह एक ऐसा तथ्य है जिसे हम सभी देख सकते हैं। पादरी और एल्डर न केवल खुद सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल नहीं करते या उसे स्वीकार नहीं करते, बल्कि वे विश्वासियों को भी इसकी जाँच-पड़ताल करने और इसे स्वीकार करने से रोकते हैं। वे विश्वासियों को विश्वास की स्वतंत्रता नहीं देते और वे उन्हें फँसाने और नियंत्रित करने की पूरी कोशिश करते हैं, वे विश्वासियों को सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन पढ़ने से, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की गवाही देने वालों की मेजबानी करने से और सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल करने से जबरन रोकते हैं। धार्मिक दुनिया के ये अगुआ बिना किसी विवेक की भावना के काम करते हैं। वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रकटन और कार्य की निंदा करने की पूरी कोशिश करते हैं। क्या यह परमेश्वर का प्रतिरोध करना नहीं है? क्या उन्होंने पवित्रात्मा की ईशनिंदा करने का पाप नहीं किया है? इस तथ्य के आधार पर कि धार्मिक दुनिया के पादरी और एल्डर विश्वासियों को सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल करने से रोकते हैं और यहाँ तक कि विश्वासियों को गुमराह करने, फँसाने और नियंत्रित करने के लिए बाइबल का गलत अर्थ निकालते हैं, हम देख सकते हैं कि भले ही वे बाइबल के कुछ शब्दों और धर्म-सिद्धांतों को समझते हैं, लेकिन वे परमेश्वर को बिल्कुल नहीं जानते। ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके क्रियाकलाप और कर्म बाइबल के पूरी तरह खिलाफ हैं और सत्य के तो और भी ज्यादा खिलाफ हैं। तो क्या वे अच्छे सेवक हैं या बुरे सेवक? चाहे कोई कुछ भी कहे, वे परमेश्वर को बिल्कुल नहीं जानते—वे परमेश्वर का प्रतिरोध करते हैं और उसे फिर से क्रूस पर चढ़ा देंगे। इसलिए सभी धार्मिक पादरी झूठे चरवाहे और बुरे सेवक हैं; परमेश्वर उनका बिल्कुल भी अनुमोदन नहीं करता। बेशक ऐसा कहने के लिए हमारे पास बाइबल का आधार है और हमारे पास प्रमाण के रूप में प्रभु यीशु के वचन हैं। प्रभु यीशु ने कहा था : “उस दिन बहुत से लोग मुझ से कहेंगे, ‘हे प्रभु, हे प्रभु, क्या हम ने तेरे नाम से भविष्यद्वाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्‍टात्माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत से आश्‍चर्यकर्म नहीं किए?’ तब मैं उनसे खुलकर कह दूँगा, ‘मैं ने तुम को कभी नहीं जाना। हे कुकर्म करनेवालो, मेरे पास से चले जाओ’(मत्ती 7:22-23)। “हे कपटी शास्त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! तुम मनुष्यों के लिए स्वर्ग के राज्य का द्वार बन्द करते हो, न तो स्वयं ही उसमें प्रवेश करते हो और न उस में प्रवेश करनेवालों को प्रवेश करने देते हो(मत्ती 23:13)। “हे कपटी शास्त्रियो और फरीसियो, तुम पर हाय! तुम एक जन को अपने मत में लाने के लिये सारे जल और थल में फिरते हो, और जब वह मत में आ जाता है तो उसे अपने से दूना नारकीय बना देते हो(मत्ती 23:15)। प्रभु यीशु के वचनों से हम स्पष्ट रूप से देख सकते हैं कि भले ही धार्मिक दुनिया के पादरी और एल्डर प्रचार और कार्य कर सकते हैं, लेकिन प्रभु उन्हें स्वीकार नहीं करता और इसके बजाय उन्हें कुकर्मी मानकर उनकी निंदा करता है। ऐसा क्यों है? ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्होंने बहुत ज्यादा बुराई की है। उन्होंने विश्वासियों को नुकसान पहुँचाया है और उन्हें बर्बाद किया है, जिससे कई लोग उनकी मंडली में शामिल होने के बाद नरक की संतान बन गए हैं। इस बात को कैसे समझाया जाए? वे शामिल होने के बाद नरक की संतान क्यों बन जाते हैं? ऐसा इसलिए है क्योंकि धर्म में रहकर प्रभु में विश्वास करने के बावजूद, जब प्रभु लौटकर आया, तो पादरियों और एल्डरों ने उन्हें गुमराह किया, बाधित किया और बाँधकर रखा। वे बस धर्म में प्रभु पर विश्वास करने से चिपके रहते हैं लेकिन प्रभु की वापसी को स्वीकार नहीं करते या अंत के दिनों में उसके द्वारा किए जाने वाले न्याय के कार्य को स्वीकार नहीं करते। फिर वे ऐसे लोग बन जाते हैं जो परमेश्वर को नकारते हैं और उसका प्रतिरोध करते हैं और परमेश्वर उन्हें हटा देता है। क्या यह उन्हें नरक की संतान नहीं बनाता? पादरियों और एल्डरों ने इन लोगों को नुकसान पहुँचाया है और बर्बाद किया है। यह ठीक प्रभु यीशु के वचनों को पूरा करता है : “उन को जाने दो; वे अंधे मार्गदर्शक हैं और अंधा यदि अंधे को मार्ग दिखाए, तो दोनों ही गड़हे में गिर पड़ेंगे(मत्ती 15:14)। इसलिए अगर धार्मिक दुनिया के पादरी और एल्डर लोगों को सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल नहीं करने देते और इसके बजाय लोगों को गुमराह करते हैं और फँसाते हैं—यहाँ तक कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के बारे में अफवाहें गढ़ते हैं, उसे बदनाम करते हैं और उसकी निंदा करते हैं—तो वे घोर पापी हैं; वे परमेश्वर के दुश्मन हैं और उनका अंतिम परिणाम निश्चित रूप से विनाश होगा। ठीक जैसा कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहता है : “ऐसे भी लोग हैं जो बड़े-बड़े गिरजाघरों में बाइबल पढ़ते हैं और दिन-भर इसका पाठ करते हैं, फिर भी उनमें से एक भी परमेश्वर के कार्य के उद्देश्य को नहीं समझता। उनमें से एक भी परमेश्वर को जानने में सक्षम नहीं है; उनमें से किसी एक के भी परमेश्वर के इरादों के अनुरूप होने की बात तो दूर रही। वे सब बेकार और अधम लोग हैं, हर कोई ‘परमेश्वर’ पर उपदेश झाड़ने के लिए ऊँचे पायदान पर खड़ा है। वे ऐसे लोग हैं जो परमेश्वर का बैनर लेकर चलते हैं, फिर भी परमेश्वर का जानबूझकर प्रतिरोध करते हैं, जो मनुष्य का मांस खाते हुए और रक्त पीते हुए परमेश्वर में विश्वास करने की चिप्पी लेकर चलते हैं। ऐसे सभी लोग बुरे दानव हैं जो मनुष्य की आत्मा को निगलते हैं, दानवों के सरदार हैं जो उचित मार्ग पर लोगों के कदम रखने को जानबूझकर बाधित करते हैं और ऐसी अड़चनें हैं जो लोगों की परमेश्वर की खोज में रुकावट बनती हैं(वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परमेश्वर को न जानने वाले सभी लोग परमेश्वर का प्रतिरोध करते हैं)। अगर लोग कभी भी धार्मिक दुनिया के पादरियों और एल्डरों का भेद पहचानना नहीं सीखते, हमेशा उनकी बातों पर विश्वास करते हैं और हमेशा उनसे बाधित और बंधे रहते हैं, तो वे सबसे मूर्ख कुंवारियाँ हैं। पादरी और एल्डर उनके उद्धार पाने के अवसर को पूरी तरह से बर्बाद कर देंगे और वे अंधकार में गिर जाएँगे, रोएँगे और दाँत पीसेंगे। मुझे बताओ, क्या धार्मिक दुनिया के पादरी और एल्डर प्रभु का स्वागत कर सकते हैं? क्या प्रभु जब आएगा, तो पहले उन्हें कोई प्रकाशन देगा? बिल्कुल नहीं। अगर तुम लोगों को सच में यह एहसास है कि धार्मिक दुनिया के पादरी और एल्डर परमेश्वर का प्रतिरोध करने वाले मसीह-विरोधी और दानव हैं जो लोगों को सच्चे मार्ग की जाँच-पड़ताल करने से रोकते हैं, तो क्या तुम लोग अभी भी इन दानवी शब्दों पर विश्वास कर सकते हो, “अगर धार्मिक दुनिया किसी मार्ग की निंदा करती है, तो वह सच्चा मार्ग नहीं है”? अगर तुम अभी भी दृढ़ता से यह विश्वास करते हो कि धार्मिक दुनिया के पादरी और एल्डर लोगों को स्वर्ग के राज्य में ले जा सकते हैं, बिना शर्त उनकी बातें सुनते हो, उनके प्रति समर्पण करते हो और अंततः सच्चे मार्ग को नकार देते हो और प्रभु यीशु की वापसी को नकार देते हो, तो क्या तुम सबसे बड़े मूर्ख नहीं हो? यह सवाल विचार करने लायक है!

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