गायन और नृत्य

लोग मेरी जय-जयकार करते हैं, लोग मेरी स्तुति करते हैं; सभी अपने मुख से एकमात्र सच्चे ईश्वर का नाम लेते हैं, सभी लोगों की दृष्टि मेरे कर्मों को देखने के लिए उठती है। राज्य जगत में अवतरित होता है, मेरा मानव समृद्ध और उदार है। इसका उत्सव कौन न मनाएगा? कौन है जो इसके लिए आनंदित हो, नृत्य न करेगा? (वचन देह में प्रकट होता है)