परमेश्वर की तरफ मुड़ने के लिए झूठ को तोड़ कर निकलना

28 अक्टूबर, 2020

2017 के शुरुआती दिनों में, मेरी पत्नी और बेटी दक्षिण कोरिया में मेरे साथ रहने आयीं। मैं तो बहुत जोश में था, लेकिन मेरी पत्नी अलग तरह के रहन-सहन और भाषा के कारण वहां के माहौल में रम नहीं पायी। ख़ास तौर से, उसे अपने बूढ़े माता-पिता और अपने पसंदीदा काम को पीछे छोड़ कर एक अजनबी जगह आना पड़ा, जहां कोई मित्र भी नहीं था। उसके लिए हर चीज़ अनजानी थी। वह हमेशा उदास और ज़्यादातर चुप रहती। मैं जानता तो था कि वह दुखी है, लेकिन समझ नहीं पाया कि उसे कैसे आराम दूँ। मार्च में एक दिन, उसने कहा कि वह परमेश्वर में विश्वास रखकर सभाओं में भाग लेने लगी है। मुझे लगा बहुत अच्छी बात है। मेरी दादी भी एक विश्वासी थी। मुझे कोई आपत्ति नहीं हुई। कुछ समय बाद, मैंने देखा कि वह हमेशा खुशमिजाज़ रहने लगी है, उसका पूरा आचरण पहले से बिल्कुल अलग हो गया है। मैं बहुत खुश हुआ। धीरे-धीरे मुझे उसकी कलीसिया को लेकर जिज्ञासा होने लगी, मैं सोचने लगा कि यह किसी में इतना बड़ा बदलाव कैसे ला सकता है।

एक दिन मैंने उससे पूछा कि वह किस कलीसिया में भाग ले रही है। उसने कहा कि यह सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया है। इससे मेरा ध्यान 2014 की शांदोंग की झाओयुआन घटना की ओर खिंच गया, मैं बहुत नाराज़ हो गया। मैंने उससे सख्ती से कहा, "तुम अब उन विश्वासियों के साथ कोई संपर्क नहीं रख सकती। अगर मैंने देखा कि तुम फिर उनसे संपर्क में हो, तो मैं तुम्हारा फोन तोड़ दूंगा!" उसके चेहरे पर हैरानी का भाव था, उसने पूछा कि मैं क्यों उसके आड़े आ रहा हूँ। मैंने गुस्से से कहा, "क्यों? यह तुम्हारे और हमारे परिवार के भले के लिए है। क्या तुम्हें नहीं पता कि सीसीपी सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया पर गंभीरता से कार्रवाई कर उसका दमन कर रही है? क्या तुम 28 मई 2014 के झाओयुआन मामले को नहीं जानती? यह बात ऑनलाइन है कि इस मामले का मुख्य आरोपी झांग लिदोंग इसी कलीसिया का सदस्य है। तुम उन लोगों के साथ मेल-जोल रखती हो, तो क्या तुम शेर के मुंह में हाथ नहीं दे रही हो?" उसने दृढ़ता के साथ कहा, "झांग लिदोंग और बाकी लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के साथ नहीं हैं। ऑनलाइन कही गयी उस बात पर आपको यकीन नहीं करना चाहिए। मैं कलीसिया के भाई-बहनों से पिछले दो महीनों से संपर्क में हूँ, वे सब ईमानदार लोग हैं, जो दूसरों के प्रति दयालु और निष्ठावान हैं। किसी भी तकलीफ़ में वे एक-दूसरे की मदद करते हैं। ऐसा बिल्कुल भी नहीं है जैसा ऑनलाइन कहा गया है।" लेकिन उसकी तमाम बातें सुनकर मैंने जवाब दिया, "ऑनलाइन जाकर खुद देख लो, जान जाओगी मैं सही हूँ या नहीं।"

फिर मेरी पत्नी ने मुझे एक जगह बिठा कर कहा, "आप चीज़ों पर बहुत सोच-विचार करने वाले इंसान हैं। आपको इस पर उचित ढंग से गौर करके सच्चाई के अनुसार बोलना चाहिए—आप सिर्फ़ एक तरफ की बात सुनकर पक्का नहीं कर सकते! क्या आपको 1989 के टियानमेन स्क्वेयर विरोध प्रदर्शन याद हैं? छात्र देशभक्ति के साथ, भ्रष्टाचार के विरुद्ध प्रदर्शन कर लोकतांत्रिक आज़ादी के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन सीसीपी ने कुछ अनजाने लोगों से छात्र होने का नाटक करवा कर, उनसे तोड़-फोड़, लूटपाट, आगजनी और सैनिक वाहनों को उलटने-पलटने का काम करवाया। उन्होंने बहुत अराजकता फैलायी, फिर सीसीपी ने इन अपराधों के लिए छात्रों को आरोपी बना दिया। इसके बाद, सीसीपी ने सीसीटीवी और रेडियो जैसे मीडिया का इस्तेमाल कर अपनी रपटें बहुत फैलायीं, उन छात्रों को क्रान्ति-विरोधी दंगाइयों के रूप में बदनाम किया, फिर हज़ारों जीवित छात्रों को अपने टैंकों के नीचे दबा कर कुचल दिया। जिस किसी को सीसीपी का इतिहास मालूम है, वह जनता है कि यह ऐसी तानाशाही है, जिसके न्याय-विरोधी होने का पूरा इतिहास है। जब भी किसी का कोई अलग राजनीतिक विचार या नज़रिया होता है, उसे हमेशा दबाया जाता है, ऐसे समूहों या लोगों की निंदा की जाती है, यहाँ तक कि उनका दमन कर उन्हें मिटा दिया जाता है। जब भी सीसीपी हिंसक तरीके से किसी धार्मिक आस्था, लोकतांत्रिक अधिकारों के अभियान, या प्रजातीय अल्पसंख्यकों के विरोध प्रदर्शनों का दमन करती है, वह सबसे पहले झूठे मामले गढ़ना शुरू करती है, फिर लोगों को बरगला कर ज़बरदस्त विरोध खड़ा करती है, फिर वह हिंसक दमन का इस्तेमाल करती है। यह एक सच्चाई है। 28 मई का झाओयुआन मामला सिर्फ़ सीसीपी द्वारा सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को फंसाने का मामला था—उन्होंने सावधानी से एक और झूठा मामला गढ़ डाला।" लेकिन मुझे उसकी बात नहीं सुननी थी। मैंने गुस्से से कहा, "मुझे परवाह नहीं। तुम अब सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास नहीं रख सकती। मुझे अपने परिवार की सुरक्षा का ख़याल रखना है, मैं तुम्हें और अपनी बेटी को किसी भी नुकसान से बचाना चाहता हूँ। मुझे किसी और बात की फ़िक्र नहीं। मैं तुम्हें आखिरी बार बता रहा हूँ : तुम अब उनसे कोई संपर्क नहीं रख सकती। बस घर पर एक अच्छी पत्नी और माँ बन कर रहो, वरना तुम्हें अंदर बंद कर दूं, तो मुझे दोष मत न देना।" फिर मैं दरवाज़ा जोर से बंद कर घर से बाहर चला गया।

सड़क पर चलते हुए मुझे वाकई बहुत बुरा लग रहा था। शादी के पिछले दस साल में, मैं इस तरह उस पर कभी भी नाराज़ नहीं हुआ। पहली बार मिलने से लेकर, प्यार करने और शादी की रस्में निभाने तक, हमने बहुत-कुछ देखा-झेला : हमारे माता-पिता का विरोध, सांस्कृतिक अंतर, उम्र का फ़र्क और बड़ी दूर का रिश्ता। हम तमाम मुश्किलों से पार निकल आये, हमारे परिवार के लिए उसने इतने सालों में बहुत-कुछ सहा। यह सब सोच कर मुझे वाकई पीड़ा हुई, मगर सिर्फ़ परमेश्वर में विश्वास रखने के कारण मैं उस पर टूट पड़ा। मुझे पता है मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था, मगर मुझे लगा कि यह हमारे परिवार के भले के लिए ठीक है। वह मुझे क्यों नहीं समझ सकी? मैंने अपना फोन देखा, उसमें हम तीनों का खुशहाल फोटो था, जिसमें हमारी बेटी मीठी मुस्कान दे रही थी। मैंने मन में सोचा, "मैं परिवार का अभिभावक हूँ, मुझे उनकी रक्षा करनी है। कोई भी उन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सकता।"

अगले कुछ दिनों में, मुझे डर लगा कि मेरे प्रति मेरी पत्नी की भावनाओं को चोट न पहुंचे, इसलिए मैंने उससे कहा कि परमेश्वर से जुड़ी कोई भी बात मुझसे न करे। सतही तौर पर भले ही लग रहा था कि हम सामान्य मेल-जोल बनाये हुए हैं, मगर हमारे बीच एक खाई बन गयी थी।

एक दिन जैसे ही मैं काम ख़त्म करके घर में दरवाज़े से अंदर आया, मैंने कमरे से आते संगीत के आनंदमय सुर और मेरी पत्नी और बेटी के ठहाके सुने। कमाल है, मैंने सोचा, "लंबे वक्त से मैंने घर में आनंद के ऐसे स्वर नहीं सुने। यह कौन-सा गाना है, जो उन्हें इतनी खुशी दे रहा है?" मैंने बहुत धीरे-से दरवाज़ा खोला, देखा कि कंप्यूटर पर सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का बनाया एक नृत्य-संगीत का वीडियो चल रहा है, परमेश्वर का सच्चा प्रेम। छह युवतियां भावना और आनंद में डूबी डांस करते हुए गा रही थीं, उनके चेहरे खुशियों से खिली ऐसी मुस्कानों से दमक रहे थे कि मैं तुरंत आकर्षित हो गया। मुझे बड़ी जिज्ञासा हुई, मैंने सोचा, "यह कैसी कलीसिया है, ये कैसे लोग हैं? किस वजह से यह गाना और डांस इतना संक्रामक है, क्यों इतना सुकून दे रहा है? अगर वे सचमुच बुरे लोग हैं, तो उनकी मुस्कानें इतनी दयालु और सच्ची कैसे हो सकती हैं?" मेरी बेटी ने मुझे आते हुए देख लिया, और मेरी पत्नी को मेरे लिए एक और गाने और डांस का वीडियो चलने को कहा, जिसका नाम था पूरब की ओर लाया है परमेश्वर अपनी महिमा। मैं उसे रोके बिना नहीं रह सका—हमारे घर में उन दिनों ऐसा खुशनुमा माहौल बड़ी मुश्किल से आ सकता था। अपनी बेटी का हाथ पकड़े हुए मैं अपनी पत्नी के साथ बैठ कर देखने लगा। उस वीडियो ने मुझे वाकई अपनी और खींचा, उसमें टैप डांसिंग जैसा ही स्टाइल था, डांसर उड़ते हुए गरुड़ पक्षियों की तरह मनोहारी ढंग से डांस कर रहे थे। यह बहुत भव्य था, बहुत आकर्षित करने वाला था।

मुझे इतना मगन देख कर, मेरी पत्नी ने मुझसे कहा, "ये सब सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के भाई-बहनों द्वारा बनाये गये हैं। इनमें से कोई भी प्रोफेशनल नहीं है।" हैरान होकर, मैंने सोचा, "यह कैसे संभव है? व्यावसायिक प्रशिक्षण के बिना लोग इतना बढ़िया डांस कैसे कर सकते हैं? और फिर इन सभी वीडियो में ऐसी सकारात्मक भावना है। ये प्रेरक, दिल को छूने वाले और शक्तिवर्धक हैं। बुरे लोगों में ऐसी सकारात्मक शक्ति कैसे हो सकती है? मैंने जो कुछ ऑनलाइन देखा, यह उससे अलग क्यों है? असल में हो क्या रहा है?" मुस्कराते हुए, मेरी पत्नी ने कहा, "बड़ी हैरानी की बात है! परमेश्वर के कार्य और मार्गदर्शन के बिना, क्या नॉन-प्रोफेशनल लोग इस तरह डांस कर सकते हैं? आपको उनकी बनायी फ़िल्में देख कर और भी ज़्यादा हैरानी होगी। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया में पवित्र आत्मा का कार्य है—उसके पास परमेश्वर का आशीष है। इसी कारण से उसके डांस और फ़िल्में इतनी अच्छी बन पाती हैं, अपनी फिल्मों में वे जिस सत्य की संगति करते हैं, उससे लोगों को लाभ पहुंचता है। ऑनलाइन मौजूद पूरा नकारात्मक प्रचार कलीसिया के बारे में सीसीपी द्वारा फैलाया गया झूठ ही है। उसमें बिल्कुल भी सच्चाई नहीं है। सीसीपी सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को बदनाम करती है, ताकि लोग गुमराह होकर उसे ठुकरायें और अपना दुश्मन मानें। फिर वे परमेश्वर के कार्य की जांच-पड़ताल करने की हिम्मत नहीं करेंगे और परमेश्वर का उद्धार खो देंगे।"

उसकी बात सुनकर मेरी जिज्ञासा वाकई बढ़ गयी। मैं सोचने लगा यह कैसी कलीसिया है, ऑनलाइन कही गयी बातें सच हैं या नहीं। मैं नहीं समझ पाया कि अपनी पत्नी को उसकी आस्था का पालन करने दूं या नहीं। वही संघर्ष मेरे मन में फिर होने लगा। इस अंदरूनी संघर्ष के एक दौर के बाद, मैंने खुद इसकी जांच करने का फैसला किया। मैं द्वारपाल की भूमिका निभा सकता हूँ। अगर मैं कलीसिया के लोगों को अनुचित बर्ताव करते देखूं, या उन्हें कुछ भी अनुचित करते हुए देखूं, तो मैं उसी समय उसे वहां से बाहर ले आऊँगा, फिर कभी उसे वापस नहीं जाने दूंगा। अगर वहां ऑनलाइन बतायी हुई बातों जैसा नहीं दिखा, तो मैं अब उसकी राह में नहीं आऊँगा। उस हफ्ते के आख़िरी दिनों में, मैंने अपनी पत्नी के पास जाकर कहा कि मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को देखना चाहता हूँ—उसे हैरत के साथ-साथ खुशी भी हुई।

वहां पहुँचने पर, भाई-बहनों ने गर्मजोशी से हमारा स्वागत किया, उनकी बातचीत से मुझे लगा कि वे दयावान और निष्ठावान हैं। मेरी घबराहट और सतर्कता धीरे-धीरे कम हो गयी। फिर एक बहन ने एक संगीत नाटिका चलायी, जिसका नाम था एंजेलिना की कहानी। मैंने उसे दिलचस्पी से देखा। एंजेलिना को तमाम उतार-चढ़ाव से गुज़रते हुए देख कर मैं गहराई से प्रेरित हुआ, मैं अपनी ज़िंदगी के बारे में सोचने लगा। मेरे परिवार में घटी घटनाओं के कारण मैं बचपन में जगह-जगह भटका था, सिर्फ़ गुज़ारा करने के लिए हर तरह की दबंगई, बेइज़्ज़ती और निठुराई झेली थी। अब मैं ज़िंदगी चलाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा हूँ, पिछले वर्षों में तरह-तरह के दुख झेलकर कर, उतार-चढ़ाव से गुज़र कर, थका हुआ और दुखी होने पर भी, मैं अपनी पत्नी और मित्रों के सामने खुद को मज़बूत दिखाता हूँ। मेरे दिल का दर्द सच में भला कौन समझ सकता है? संगीत नाटिका के अंत से पहले यह गाना चला : "सर्वशक्तिमान ने गहराई से पीड़ित इन लोगों पर दया की है; साथ ही, वह उन लोगों से तंग आ गया है, जिनमें चेतना की कमी है, क्योंकि उसे मनुष्य से जवाब पाने के लिए बहुत लंबा इंतजार करना पड़ा है। वह तुम्हारे हृदय की, तुम्हारी आत्मा की तलाश करना चाहता है, तुम्हें पानी और भोजन देना और तुम्हें जगाना चाहता है, ताकि अब तुम भूखे और प्यासे न रहो। जब तुम थके हुए होते हो और जब तुम्हें इस दुनिया की बेरंग उजाड़ता का कुछ अहसास होने लगता है, तो हारो मत, रोओ मत। द्रष्टा, सर्वशक्तिमान परमेश्वर, किसी भी समय तुम्हारे आगमन को गले लगा लेगा" (मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ)। हरेक सुर में यूं लगा जैसे एक माँ लंबे अरसे से खोये हुए अपने बच्चे की तरफ अपना हाथ बढ़ा रही है। मुझे प्रेम की पुकार महसूस की—मेरा दिल रो पड़ा। ख़त्म होने पर, मैंने सचमुच ईमानदारी से कहा, "संगीत नाटिका अद्भुत है!" मेरी पत्नी ने मुझे देख कर बड़ी भावुकता से कहा, "एंजेलिना की कहानी का आपके दिल को छूना परमेश्वर का आपको प्रेरित करना है! मैं जानता हूँ कि 28 मई के झाओयुआन मामले का आप पर प्रभाव पड़ा है, आपके मन में सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के बारे में बहुत-सी गलतफहमियां हैं। मुझे यह भी पता है कि आप अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, इसलिए आज हम गौर कर के समझ सकते हैं कि उस मामले में सच में क्या हुआ था।"

भाई-बहनों ने तब मेरे लिए एक वीडियो चलाया, 28 मई के झाओयुआन मामले के पीछे का सत्य उजागर हुआ। इस वीडियो में मामले के अनेक बड़े संदेहास्पद पहलुओं पर प्रकाश डाला गया और उनका परत-दर-परत विश्लेषण किया गया। इसमें सीसीपी के झूठ का खुलासा किया गया और सच्चाई को प्रकट किया गया। मैंने देखा कि आरोपी झांग लिदोंग और झांग फैन ने अदालत में साफ़-साफ़ कहा, "मेरा सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया से कभी संपर्क नहीं रहा। शासन झाओ वीशान के सर्वशक्तिमान परमेश्वर पर कार्रवाई करता है, उस सर्वशक्तिमान परमेश्वर पर नहीं, जिसमें हम विश्वास रखते हैं।" उन्होंने खुद अपने मुंह से नकारा कि वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के सदस्य हैं, कहा कि कलीसिया से वे बिल्कुल भी संबद्ध नहीं हैं। लेकिन सीसीपी ने संदिग्ध लोगों की गवाहियों की परवाह नहीं की और सच्चाइयों के विरुद्ध जाकर उसने सत्य को उलटा करके, जबरन यह कहा कि अपराध सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के लोगों द्वारा ही किया गया था। क्या यह सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को बेशर्मी से बदनाम करने के लिए बोला गया निर्लज्ज झूठ नहीं है?

फिर एक बहन ने मेरे साथ यह संगति साझा की : "सीसीपी सालों से अपनी कपटता के लिए कुख्यात रही है, देश-विदेश में यह बहुत बदनाम है। दुनिया भर में, ज़्यादातर लोग इसकी असलियत देख सकते हैं, अब शायद ही कोई इस पर भरोसा करता है। हम सब जानते हैं कि चीन में कम्युनिस्ट पार्टी का तानाशाही शासन है। यहाँ न न्याय पालिका को आज़ादी है, और न ही प्रेस को। चीनी मीडिया और अदालतें पूरी तरह से सीसीपी सरकार द्वारा नियंत्रित हैं, वे सिर्फ़ तानाशाही के मुखपत्र और साधन बन कर रह गये हैं। यह एक जग-ज़ाहिर सच्चाई है। झाओयुआन घटना के तीन दिन बाद, बिना किसी अदालाती सुनवाई या फैसले के, सीसीपी ने टीवी और ऑनलाइन मीडिया तंत्र का इस्तेमाल करके एक सार्वजनिक निंदा जारी कर दी। मध्य-जून में, उन्होंने अपना 'सौ दिन का युद्ध' शुरू कर दिया, सशस्त्र पुलिस को तैयार कर दिया, ताकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के ख़िलाफ़ दमन और कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कलीसिया को लक्ष्य बना कर राष्ट्रव्यापी खोजबीन की, ईसाइयों को गिरफ़्तार किया। यह सपष्ट है कि शांदोंग में 28 मई को हुआ झाओयुआन मामला, सीसीपी द्वारा धार्मिक आस्था के दमन और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को मिटा देने के लिए गढ़ा गया झूठा मामला था।"

इसे सुन कर मैंने सोचा : "सीसीपी इतनी घृणापूर्ण है। यह सत्य को उलट कर वास्तविकता को तोड़-मरोड़ कर सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को फंसाती है, ताकि सत्य न जानने वाले लोग इसके झूठ के फेर में आ जाएं और कलीसिया को गलत समझें। मैं भी सीसीपी के झूठ में फंस गया। लेकिन एक बात जो मैं अभी भी नहीं समझ पाया, वह यह है कि सीसीपी कलीसिया का यूं पागलों की तरह क्यों उत्पीड़न करती है, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया पर खून का मामला थोपने और उसके सदस्यों को गिरफ़्तार करने के लिए क्यों इस हद तक चली जाती है। वास्तव में क्या चल रहा है?" यह विचार आने पर मैंने अपनी उलझन बतायी,

तो एक बहन ने जवाब दिया, "सीसीपी ऐसे पागलपन से सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का दमन करती है, उस पर थोपने के लिए ह्त्या का एक झूठा मामला गढ़ती है, क्योंकि यह एक नास्तिक पार्टी है। इसके संस्थापक कार्ल मार्क्स एक शैतानवादी थे, सीसीपी सभी धार्मिक आस्थाओं को मिटा देना चाहती है, ताकि लोग उसी में विश्वास रखें, उसके प्रति समर्पित हो जाएं और उसे अपना उद्धारकर्ता मान लें। मार्क्स परमेश्वर का विरोध करने वाले वास्तविक जीवित दानव थे। सीसीपी ने सत्ता में आने के बाद से परमेश्वर को खुले तौर पर नकारा है, उसकी निंदा और उसका तिरस्कार किया है, वह ईसाई धर्म को एक कुपंथ कहती है। वह बाइबल की प्रतियों को कुपंथी साहित्य कह कर ज़ब्त करके नष्ट कर देती है, वह धार्मिक समूहों को कुपंथ कहती है, ताकि उनका दमन कर सके। अब अंत के दिनों में, सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने चीन में प्रकट होकर कार्य किया है, वचन देह में प्रकट होता है में संपूर्ण सत्य व्यक्त किया है। इस क़िताब ने सभी धर्मों और संप्रदायों को झकझोर डाला है। सत्य से प्रेम करने वाले बहुत-से सच्चे विश्वासियों ने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन पढ़े हैं, उन्होंने समझ लिया है कि ये वचन सत्य और परमेश्वर की वाणी हैं, सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही वापस आया हुआ प्रभु यीशु है। उन सबने बारी-बारी से सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार कर लिया है और परमेश्वर के सिंहासन के सामने आ गये हैं। सिर्फ़ करीब 20 साल में ही, मुख्यभूमि चीन में, लाखों लोगों ने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को स्वीकार कर लिया है, ज़्यादा-से-ज्यादा लोगों को सर्वशक्तिमान परमेश्वर में आस्था रखते देख कर, जबकि अब उसमें कोई भी विश्वास नहीं रखता न उसका अनुसरण करता है, सीसीपी क्रोधित हो गयी है। वह सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य की अंधाधुंध निंदा करती है, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को फंसाने के लिए झूठ का सहारा लेती है। उसने बहुत-से गोपनीय दस्तावेज़ जारी किये हैं और सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती की है। परमेश्वर के अंत के दिनों के सुसमाचार को रोकने की नाकाम कोशिश में, वह चीन भर में, कलीसियाओं के ईसाइयों को गिरफ़्तार करने और उनका दमन करने पर तुली हुई है। वह परमेश्वर के कार्य और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को मिटा देने की कोशिश कर रही है। इससे सीसीपी की सत्य और परमेश्वर से घृणा करने वाली शैतानी दानवी प्रकृति साफ़ तौर पर उजागर होती है। जैसा सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों में कहा गया है, 'वह चाहता है कि एक ही झपट्टे में परमेश्वर से संबंधित सब-कुछ साफ़ कर दे, और एक बार फिर उसे अपवित्र कर उसका हनन कर दे; वह उसके कार्य को टुकड़े-टुकड़े करने और उसे बाधित करने का इरादा रखता है। वह कैसे परमेश्वर को समान दर्जा दे सकता है? कैसे वह पृथ्वी पर मनुष्यों के बीच अपने काम में परमेश्वर का "हस्तक्षेप" बरदाश्त कर सकता है? कैसे वह परमेश्वर को उसके घिनौने चेहरे को उजागर करने दे सकता है? वह कैसे परमेश्वर को अपने काम को अव्यवस्थित करने की अनुमति दे सकता है? क्रोध के साथ भभकता यह शैतान कैसे परमेश्वर को पृथ्वी पर अपने शाही दरबार पर नियंत्रण करने दे सकता है? कैसे वह स्वेच्छा से परमेश्वर के श्रेष्ठतर सामर्थ्य के आगे झुक सकता है? इसके कुत्सित चेहरे की असलियत उजागर की जा चुकी है, इसलिए किसी को पता नहीं है कि वह हँसे या रोए, और यह बताना वास्तव में कठिन है। क्या यही इसका सार नहीं है?' (वचन देह में प्रकट होता है)।"

फिर बहन ने मेरे लिए साम्यवाद का झूठ नामक एक वीडियो चलाया। उसमें परमेश्वर के वचनों के एक अंश ने वाकई मुझे प्रेरणा दी। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "हमें विश्वास है कि परमेश्वर जो कुछ प्राप्त करना चाहता है, उसके मार्ग में कोई भी देश या शक्ति ठहर नहीं सकती। जो लोग परमेश्वर के कार्य में बाधा उत्पन्न करते हैं, परमेश्वर के वचन का विरोध करते हैं, और परमेश्वर की योजना में विघ्न डालते और उसे बिगाड़ते हैं, अंततः परमेश्वर द्वारा दंडित किए जाएँगे। जो परमेश्वर के कार्य की अवहेलना करता है, उसे नरक भेजा जाएगा; जो कोई राष्ट्र परमेश्वर के कार्य का विरोध करता है, उसे नष्ट कर दिया जाएगा; जो कोई राष्ट्र परमेश्वर के कार्य को अस्वीकार करने के लिए उठता है, उसे इस पृथ्वी से मिटा दिया जाएगा, और उसका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा" (वचन देह में प्रकट होता है)। उसके इन वचनों से मुझे परमेश्वर के अधिकार और प्रताप का अनुभव हो रहा था। कोई भी इंसान परमेश्वर के कार्य को रोक नहीं सकता। हालांकि सीसीपी सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को बदनाम कर उसकी निंदा करने की भरसक कोशिश कर रही है, कलीसिया के ईसाइयों को पागलों की तरह गिरफ़्तार कर उत्पीड़ित कर रही है, फिर भी वे परमेश्वर का अनुसरण करने और उसके सुसमाचार को फैलाने में लगे हुए हैं। वे और भी ज़्यादा सुसमाचार फ़िल्में, सामूहिक (कोरल) कार्यक्रम, और डांस वीडियो बना रहे हैं, और ज़्यादा-से-ज़्यादा लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास रखने लगे हैं। इतने गहरे उत्पीड़न के चलते, किसी इंसान का कोई भी काम इतनी तेज़ी से फ़ैल नहीं सकता। मुझे पता है कि यह यकीनन परमेश्वर की है, सच्चा मार्ग है, और गौर करने लायक है। ये सब बातें समझ लेने से सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के बारे में मेरी शंकाएं और गलतफहमियां दूर हो गयीं, मुझे लगा जैसे मेरे दिल से बहुत बड़ा बोझ उतर गया है।

मैंने अपनी पत्नी की ओर देख कर कहा, "सर्वशक्तिमान परमेश्वर में तुम्हारा विश्वास रखना सही है। मुझे कोई अंदाजा नहीं था, मुझमें समझ नहीं थी, मैं सीसीपी के झूठ पर आँखें बंद कर यकीन कर बैठा, तुम्हारे आड़े आया। मैंने बहुत बड़ी ग़लती की।" उसकी आँखों में आंसू भर आये, उसने भावुक होकर कहा, "परमेश्वर की कृपा है कि आप सीसीपी के झूठ को समझ कर उलझन की धुंध से बाहर निकल सके हैं। यह परमेश्वर का मार्गदर्शन और अगुआई है!"

इसके बाद, मैं अपनी पत्नी के साथ बैठ कर कभी-कभार सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के बनाये वीडियो देखता, और उसकी आस्था के बारे में उसकी बातें सुनता। बाद में, मैं गंभीर रूप से बीमार पड़ गया, कलीसिया के भाई-बहन मेरा हाल पूछने और हमारी मदद करने आये। ऐसे ठंडे, बेपरवाह समाज में, भाई-बहनों द्वारा निष्ठा से मदद का हाथ बढ़ाने से मुझे महसूस हुआ कि हम सब एक ही खुशहाल परिवार के हैं। उनसे पहचान के कुछ समय बाद, मैं जान पाया कि वे सब बहुत ही दयालु लोग हैं, अपनी बातचीत में परमेश्वर के वचनों पर भरोसा करते हैं, अपनी बातों और कामकाज में निष्ठावान, ईमानदार और गरिमापूर्ण हैं। मैं जिनके साथ काम करता हूँ, ये उनसे बिल्कुल अलग हैं—दुनिया में उन जैसे लोग बहुत कम ही बचे हैं। मुझे लगा कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन लोगों को सचमुच बदल कर सही मार्ग दिखा सकते हैं। इसके अलावा, यह कलीसिया प्रेम से परिपूर्ण है, यह लोगों को अंदर से बहुत स्नेही बनाती है। मैंने खुशी से सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को स्वीकार कर लिया। मैं उस वक्त के बारे में सोचता हूँ जब मैं सीसीपी के झूठ से अंधा होकर अपनी पत्नी की आस्था के आड़े आया, फिर भी परमेश्वर ने मुझे छोड़ नहीं दिया, बल्कि बचाया। परमेश्वर के वचनों के जरिए भाई-बहनों ने मेरे साथ साझा किया, परमेश्वर ने मुझे सीसीपी के झूठ और उसके पीछे के डरावने सत्य को समझने लायक बनाया। अपने सामने आने का रास्ता दिखाया। मेरा उद्धार करने के लिए मैं परमेश्वर का आभार मानता हूँ!

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