मैं परमेश्वर के सामने स्वर्गारोहित हो चुका हूँ

28 अक्टूबर, 2020

20 साल की उम्र में, मुझे बपतिस्मा कर मेरा रुझान प्रभु यीशु की तरफ कर दिया गया। प्रभु यीशु के प्रेम और उसकी शिक्षाओं के बारे में पादरी के धर्मोपदेशों ने मेरे दिल में खुशनुमा जगह बना ली, कलीसिया के मेरे सभी भाई-बहन एक-दूसरे के लिये बहुत मददगार थे, इसलिए उस कलीसिया में जाने में मुझे बड़ा आनंद मिलता। मैं पादरी को अक्सर यह कहते सुनता, "प्रभु यीशु को हमारे छुटकारे के लिए सूली पर चढ़ा दिया गया, वह हमारे लिए जगह बनाने की खातिर पुनर्जीवित होकर स्वर्ग में ऊपर उठ गया। तैयारियाँ पूरी हो जाने के बाद, वह हमारे लिए आयेगा और हमें स्वर्ग में साथ ले जाएगा। क्योंकि प्रभु यीशु ने वचन दिया है: 'मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूँ। और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूँ, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहाँ ले जाऊँगा कि जहाँ मैं रहूँ वहाँ तुम भी रहो' (यूहन्ना 14:2-3)। फिर 1 थिस्सलुनीकियों 4:17 में कहा गया है: 'तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे उनके साथ बादलों पर उठा लिये जाएँगे कि हवा में प्रभु से मिलें; और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे।'" पादरी हमसे अक्सर कहते : "अगर हम प्रभु में विश्वास रखें, तो वह आने पर हमें स्वर्ग ले जाएगा, फिर हम सदा उसी के साथ रहेंगे। स्वर्ग में, कोई भी दुख, बीमारी और आंसू नहीं हैं, है तो सिर्फ आनंद और सुकून ..." इन पदों में मुझे आशा और सहारा मिला। मुझे यकीन हो गया कि अगर मैं प्रभु का अनुसरण करूं और बिल्कुल अंत तक टिका रहूँ, तो मैं यकीनन स्वर्गारोहित हो जाऊंगा और प्रभु के आशीषों का आनंद ले पाऊंगा। मैं हमेशा उम्मीद करता कि प्रभु जल्द आयेगा और मुझे स्वर्ग में आरोहित करेगा।

फिर सितंबर 2017 में वह दिन आया, जब मैं फेसबुक के जरिये भाई वांग से मिला। उन्होंने मुझे बताया : "प्रभु यीशु, अंत के दिनों में सत्य व्यक्त करने और न्याय और शुद्धिकरण का कार्य करने के लिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर के रूप में पहले ही वापस आ चुका है।" यह खबर सुनकर मैं सचमुच चौंक गया : प्रभु यीशु पहले ही वापस आ चुका है? ऐसा कैसे हो सकता है? प्रभु का वचन अभी पूरा नहीं हुआ है, फिर वह वापस कैसे आ चुका होगा? भाई वांग की बात पूरी होने से पहले ही, मैं बीच में बोल पडा : "प्रभु यीशु के वापस आने पर, हम सभी को उससे मिलने के लिए बादलों में स्वर्गारोहित किया जाएगा। लेकिन हम सब यहीं धरती पर हैं, कोई भी स्वर्गारोहित नहीं हुआ, तो फिर प्रभु यीशु वापस कैसे आ चुका होगा?" भाई वांग ने मुझे सलाह दी कि मैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य की जांच-पड़ताल करूं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मेरे कुछ सवाल हों, तो वे मेरे साथ संगति कर सकते हैं। लेकिन उनकी बात मेरी समझ से अलग होने, और काम में काफी व्यस्त होने के कारण, मैंने भाई वांग से कभी भी वापस संपर्क नहीं किया।

फिर नवंबर में, मेरी कंपनी में नवीकरण-कार्य के कारण मुझे महीने-भर की छुट्टी दे दी गयी, तो मुझे एकाएक बहुत सारा खाली वक्त मिल गया। मैं अक्सर फेसबुक पर जाकर दोस्तों के साथ चैट करता। मैंने देखा कि मेरे बहुत-से दोस्त सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की फ़िल्में, वीडियो, गवाही-लेख, संगीत वीडियो, भजन वगैरह पोस्ट कर रहे हैं, मुझे भाई वांग की बात याद आयी कि प्रभु यीशु पहले ही वापस आ चुका है। मेरी जिज्ञासा बढ़ गयी : दरअसल सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया किस किस्म की है? यह इतनी तेज़ी से बढ़ती हुई क्यों लग रही है? मेरे मन में एक जानी-पहचानी कहावत कौंध गयी : "परमेश्वर से आयी चीज़ सदा बढ़ती ही है!" क्या ऐसा हो सकता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर सचमुच वापस आया हुआ प्रभु यीशु हो? फिर मैंने सोचा, "हम अभी तक स्वर्गारोहित नहीं हुए हैं, परमेश्वर का वचन अभी पूरा नहीं हुआ है। तो फिर आखिर क्या चल रहा है?" मैं बहुत पशोपेश में पड़ गया। फिर एक दिन, फेसबुक पर अपनी मित्र बहन ली से चैट करते वक्त, मैंने पूछा: "क्या तुमने सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के बारे में सुना है?" उसने कहा कि उसे कलीसिया के बारे में मालूम है, यही एकमात्र कलीसिया है, जो खुले तौर पर गवाही देती है कि प्रभु यीशु पहले ही वापस आ चुका है, उसकी चचेरी बहन ने अभी-अभी सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार किया है, वह उसे धर्मोपदेश सुनाने के लिए दो बार वहां ले जा चुकी है। उसने कहा कि कलीसिया में सुनाये गये धर्मोपदेश बहुत नये और प्रबुद्ध करने वाले हैं, इनसे अपनी आस्था के बारे में जो सवाल उसके मन में थे, उनका समाधान हो गया। इसलिए उसने सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की जांच-पड़ताल करने का फैसला किया।

यह सुनकर कि बहन ली कलीसिया की जाँच-पड़ताल करने वाली है, मैं थोड़ा बेचैन हो गया, और जल्दी से जवाब दे डाला : "1 थिस्सलुनीकियों 4:17 में कहा गया है : 'तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे उनके साथ बादलों पर उठा लिये जाएँगे कि हवा में प्रभु से मिलें।' लेकिन हम सब अभी भी धरती पर हैं, हमें ऊपर नहीं उठाया गया है, तो फिर प्रभु वापस कैसे आ चुका होगा? तुम्हें आँखों पर पट्टी बाँध कर भटक नहीं जाना चाहिए।" बहन ली ने कहा, "हमारी आँखों पर पट्टी नहीं बंधी होनी चाहिए, लेकिन इस पर गौर किये बिना आँखें बंद करके इसे ठुकरा देना भी गलत होगा। प्रभु की ऐसी इच्छा नहीं है! अगर सर्वशक्तिमान परमेश्वर सच में वापस आया हुआ प्रभु यीशु है, और जांच-पड़ताल करने से इनकार करने के कारण हम उस पर ध्यान नहीं देते, तो हमें वाकई पछताना पड़ेगा। प्रभु यीशु ने कहा था, 'जो ढूँढ़ता है, वह पाता है; और जो खटखटाता है, उसके लिये खोला जाएगा' (मत्ती 7:8)। अगर हम खुले मन से खोजेंगे तो यकीनन हमें इनाम मिलेगा।" मुझे लगा कि बहन ली ने बड़ी समझदारी की बात कही है। प्रभु का स्वागत करने का सीधा संबंध स्वर्ग के राज्य में हमारे प्रवेश से है, इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

इसलिए मैं इस पर और अधिक गौर करने के लिए बहन ली के साथ सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की वेबसाइट पर गया। हमने 'संकट में स्वर्गारोहण' नामक एक फिल्म देखी, जिसमें तीन लोगों के बीच के एक वार्तालाप ने मुझ पर गहरा प्रभाव डाला। उस दृश्य में भाई गुओ ने प्रकाशितवाक्य से कुछ भविष्यवाणियाँ पढ़कर सुनायीं : "तब मैं ने उसे, जो मुझ से बोल रहा था, देखने के लिये अपना मुँह फेरा; और पीछे घूमकर मैं ने सोने की सात दीवटें देखीं, और उन दीवटों के बीच में मनुष्य के पुत्र सदृश एक पुरुष को देखा" (प्रकाशितवाक्य 1:12-13)। "जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है" (प्रकाशितवाक्य अध्याय 2, 3)। उन्होंने कहा, "ये पद हमें दिखाते हैं कि अंत के दिनों में वापस आने पर, प्रभु कलीसियाओं से बात करने के लिए मनुष्य के पुत्र के रूप में देहधारी होगा। प्रभु यीशु ने यह भी कहा, 'मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं' (यूहन्ना 10:27)। हमें बुद्धिमान कुँवारियाँ बन कर परमेश्वर की वाणी को पहचानने की कोशिश करनी होगी। जहां कहीं भी पवित्र आत्मा कलीसियाओं से बात करेगा, वहां परमेश्वर की वाणी, परमेश्वर का प्रकटन और उसका कार्य ज़रूर होगा। सिर्फ परमेश्वर की वाणी को पहचानने, उसके कार्य को स्वीकारने और परमेश्वर के सिंहासन के सामने वापस आने के बाद ही, हम स्वर्गारोहित होंगे! मैं समझता हूँ कि 'स्वर्गारोहण' में परमेश्वर की वाणी को पहचानना, देहधारी मनुष्य-पुत्र को स्वीकार करना, और परमेश्वर के सामने आना शामिल हैं। स्वर्गारोहण का यही सच्चा अर्थ है। अगर हम प्रभु के वापस आने को स्वीकार नहीं करते, तो हम स्वर्गारोहित नहीं हो पायेंगे। परमेश्वर हमें छोड़ देगा।" फिर भाई झाऊ ने संगति की, "अंत के दिनों में पृथ्वी पर अपना कार्य करने के लिए प्रभु मनुष्य के पुत्र के रूप में देहधारी होता है। देहधारी मनुष्य-पुत्र को स्वीकार करने पर हम स्वर्गारोहित होते हैं। हमें बुद्धिमान कुँवारियाँ बन कर परमेश्वर की वाणी को पहचानने की कोशिश करनी होगी। पवित्र आत्मा के वचन ढूँढ़ कर परमेश्वर को स्वीकार करने का अर्थ है कि हम सच में स्वर्गारोहित हो चुके हैं!" फिर भाई झेंग ने कहा, "अब हम स्वर्गारोहण का सही अर्थ जानते हैं। स्वर्गारोहण तब होता है जब प्रभु हमें पाने के लिए पृथ्वी पर आता है, जब हम उसकी वाणी को पहचानते हैं और आखिरकार उसके सामने वापस लौटते हैं। नीची जगह से ऊंची जगह में उठाये जाने से इसका कोई संबंध नहीं है। हम मानते थे कि प्रभु स्वर्ग में है और वह हमें स्वर्ग में आरोहित करेगा, लेकिन यह स्वर्गारोहण हमारी कल्पना की उड़ान है। इसका कोई आधार नहीं है!"

फिल्म में इस जगह पहुँच कर मैं थोड़ा असमंजस में पड़ गया, इसलिए मैंने बहन ली से पूछा : "यह स्वर्गारोहण की मेरी अपनी समझ से अलग है। क्या इसका यह मतलब है कि इतने समय तक मैंने स्वर्गारोहण की संकल्पना को गलत समझा? मेरे पादरी स्वर्गारोहण को हमेशा इसी तरह समझाते हैं। स्वर्गारोहण का मतलब बस प्रभु यीशु के वापस आने पर हमें उससे मिलने के लिए आकाश में ऊपर उठाया जाना है। क्या यह समझ वाकई गलत हो सकती है?"

बहन ली ने जवाब दिया : "उनकी बात में प्रबुद्धता है। आखिर बाइबल में कहा गया है कि केवल पवित्र लोग ही प्रभु को देख पायेंगे। हम अभी भी पाप करके स्वीकार करते रहने के चक्र में फंसे हुए हैं, ऐसे में क्या हम इस लायक हैं कि प्रभु को इन आँखों से देख सकें? क्या प्रभु से मिलने के लिए आकाश में स्वर्गारोहित होने की हमारी संकल्पना बहुत अस्पष्ट नहीं है? मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के भाई-बहनों को कहते सुना है कि प्रभु यीशु ने सिर्फ छुटकारे का कार्य किया, जिसमें इंसान को उसके पापों के लिए माफ़ कर दिया गया, लेकिन इंसान के भ्रष्ट स्वभाव और पापी प्रकृति का समाधान होना अभी बाकी है। लोग अभी भी अक्सर पाप करते हैं, परमेश्वर का प्रतिरोध करते हैं, इसलिए वे उसके राज्य में प्रवेश नहीं कर सकते। इंसान को बचाने के लिए परमेश्वर अंत के दिनों में देहधारी होकर आया है। प्रभु यीशु के कार्य की बुनियाद पर वह इंसान के पापों को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए सत्य व्यक्त करके इंसान का न्याय और शुद्धिकरण कर रहा है, ताकि इंसान पाप से मुक्त हो सके, बचाया जा सके और परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर सके। इसलिए मैं नहीं समझता कि स्वर्गारोहण उतना आसान है जितनी कि हम कल्पना करते हैं।"

बहन ली की बातें सुनने के बाद, मुझे भी लगा कि स्वर्गारोहण की संकल्पना के पीछे कोई रहस्य है, मैंने भी उसे समझना चाहा। इसलिए हमने सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के भाई वांग से संपर्क साधा, उन्हें अपनी उलझन के बारे में बताया। मैंने कहा, "1 थिस्सलुनीकियों 4:17 में कहा गया है : 'तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे उनके साथ बादलों पर उठा लिये जाएँगे कि हवा में प्रभु से मिलें।' हमने 'संकट में स्वर्गारोहण' नामक फिल्म में देखा कि स्वर्गारोहण का अर्थ प्रभु के वापस आने पर यहीं पृथ्वी पर प्रभु की वाणी को पहचानना, और उसके वचनों और कार्य को स्वीकार करना है। इसका अर्थ प्रभु से मिलने के लिए आकाश में उठाया जाना नहीं है, जैसा कि बाइबल में कहा गया है। क्या यह बाइबल के वचन के विपरीत नहीं है?"

उन्होंने कहा : "जहां तक स्वर्गारोहण के रहस्य की बात है, कोई भी इंसान इसे पूरी तरह से नहीं समझ सकता। सिर्फ परमेश्वर ही जानता है। हमें प्रभु के वचनों और प्रकाशितवाक्य की भविष्यवाणियों के आधार पर ही सत्य को खोजना चाहिए। यही सही तरीका है। प्रभु की प्रार्थना में क्या कहा गया है? 'हे हमारे पिता , तू जो स्वर्ग में है; तेरा नाम पवित्र माना जाए। तेरा राज्य आए। तेरी इच्छा जैसी स्वर्ग में पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो' (मत्ती 6:9-10)। प्रभु यीशु ने हमें साफ़ तौर पर बताया, परमेश्वर का राज्य अंत के दिनों में पृथ्वी पर उतरेगा। वह स्वर्ग में नहीं होगा। परमेश्वर की इच्छा पृथ्वी पर वैसे ही पूरी होगी जैसे कि वह स्वर्ग में हो। प्रकाशितवाक्य में भी कहा गया है : 'फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्‍वर के पास से उतरते देखा। ... "देख, परमेश्‍वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है। वह उनके साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्‍वर आप उनके साथ रहेगा और उनका परमेश्‍वर होगा"' (प्रकाशितवाक्य 21:2-3)। 'जगत का राज्य हमारे प्रभु का और उसके मसीह का हो गया, और वह युगानुयुग राज्य करेगा' (प्रकाशितवाक्य 11:15)। इन भविष्यवाणियों में ज़िक्र है 'परमेश्‍वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है,' 'जगत का राज्य हमारे प्रभु का और उसके मसीह का हो गया,' और 'नये यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्‍वर के पास से उतरते देखा।' इन वचनों से साबित होता है कि अंत के दिनों में परमेश्वर अपना राज्य पृथ्वी पर बनायेगा, वह इंसानों के बीच जियेगा, दुनिया के तमाम राष्ट्र मसीह का राज्य बन जाएंगे। अगर अपने विश्वास के अनुसार हम इस बात पर कायम रहें कि परमेश्वर का राज्य स्वर्ग में है और प्रभु वापस आने पर हमें स्वर्ग में आरोहित करेगा, तो क्या ये सभी भविष्यवाणियाँ बेकार साबित नहीं हो जाएँगी?"

इस बात पर मैंने मन-ही-मन सोचा : "अपने ईसाई होने के इतने वर्षों में, मैंने हमेशा प्रभु से प्रार्थना की है, कि परमेश्वर का राज्य आ जाए, और परमेश्वर की इच्छा उसी तरह पृथ्वी पर पूरी होगी जैसे कि वह स्वर्ग में हो। प्रकाशितवाक्य में स्पष्ट रूप से कहा गया है, 'परमेश्‍वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है,' 'जगत का राज्य हमारे प्रभु का और उसके मसीह का हो गया,' और 'नये यरूशलेम को स्वर्ग से परमेश्‍वर के पास से उतरते देखा।' यह दिन के उजाले की तरह साफ़ है, मैं खुद इसे कैसे नहीं समझ पाया? पादरी या प्रचारकों ने इन अध्यायों के बारे में कुछ क्यों नहीं बताया? सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के इन लोगों के धर्मोपदेश बहुत प्रबुद्ध करने वाले हैं। उन्होंने तमाम बातें इतने साफ़ तौर पर बता दी हैं कि मैं जितना अधिक सुनता हूँ मेरी दिलचस्पी उतनी ही बढ़ती जाती है।" मगर मेरे मन में अभी भी कुछ सवाल बने हुए थे, इसलिए मैंने भाई वांग से पूछा : "परमेश्वर द्वारा पृथ्वी पर अपना राज्य बनाने के बारे में आपकी चर्चा ताज़ा, नयी और बाइबल के अनुरूप है। लेकिन प्रभु यीशु ने यह भी वचन दिया : 'मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूँ। और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूँ, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहाँ ले जाऊँगा कि जहाँ मैं रहूँ वहाँ तुम भी रहो' (यूहन्ना 14:2-3)। पुनर्जीवित होकर स्वर्ग में आरोहित होने के बाद, प्रभु यीशु ने हमारे लिए एक जगह बनायी, तो फिर स्वर्ग में वह जगह होनी चाहिए। इस अंश को और किस रूप में समझा जाए?"

भाई वांग ने इस संगति के साथ जवाब दिया : "प्रभु के सभी वचनों में रहस्य है। हम अपनी धारणाओं और कल्पनाओं के आधार पर परमेश्वर के कार्य को सीमाओं में नहीं बाँध सकते, क्योंकि परमेश्वर का कार्य अथाह है। परमेश्वर के अपना सारा कार्य पूरा कर लेने और हमारे सामने प्रदर्शित करने के बाद ही, हम उसे साफ़ तौर पर देख पायेंगे। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को स्वीकार कर लेने, और परमेश्वर के कार्य के फल देखने के बाद ही मैं समझ पाया कि प्रभु का हमारे लिए जगह बनाने का क्या अर्थ है। इसका अर्थ पृथ्वी पर अपना कार्य करने के लिए परमेश्वर का अंत के दिनों में देहधारी होना है, और यह पूर्वनिर्धारित करना भी है कि हम अंत के दिनों में उसके कार्य को स्वीकार करने के लिए जन्म लेंगे। यह प्रभु यीशु के इस वचन को पूरा करता है : 'कि जहाँ मैं रहूँ वहाँ तुम भी रहो' (यूहन्ना 14:3)। इसलिए आप देख सकते हैं, कि जो जगह प्रभु यीशु ने हमारे लिए बनायी वह पृथ्वी पर ही है, स्वर्ग में नहीं।" इन बातों को सुनकर मुझे एहसास हुआ कि मैं कितना अनजान हूँ। प्रभु अंत के दिनों में वचन बोलने और अपना कार्य करने के लिए पृथ्वी पर आया, और मैं हूँ कि अब भी ऊपर बादलों की तरफ देखते हुए इंतज़ार कर रहा हूँ कि प्रभु आकर मुझे आकाश में स्वर्गारोहित करेगा। मैंने बिल्कुल गलत समझ लिया था! मैं प्रभु का स्वागत कैसे करता और कैसे स्वर्गारोहित होता?

फिर भाई वांग ने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों का एक अंश पढ़ा। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "जब परमेश्वर और मनुष्य दोनों एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे, तो इसका अर्थ होगा कि मानवता को बचा लिया गया है और शैतान का विनाश हो चुका है, कि मनुष्यों के बीच परमेश्वर का कार्य पूरी तरह समाप्त हो गया है। परमेश्वर मनुष्यों के बीच अब और कार्य नहीं करता रहेगा और वे वेअब शैतान के अधिकार क्षेत्र में और नहीं रहेंगे। वैसे तो, परमेश्वर अब और व्यस्त नहीं रहेगा और मनुष्य लगातार गतिमान नहीं रहेंगे; परमेश्वर और मानवता एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे। परमेश्वर अपने मूल स्थान पर लौट जाएगा और प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने स्थान पर लौट जाएगा। ये वे गंतव्य हैं, जहाँ परमेश्वर का समस्त प्रबंधन पूरा होने पर परमेश्वर और मनुष्य रहेंगे। परमेश्वर के पास परमेश्वर की मंज़िल है, और मानवता के पास मानवता की। विश्राम करते समय, परमेश्वर पृथ्वी पर सभी मनुष्यों के जीवन का मार्गदर्शन करता रहेगा, जबकि वे उसके प्रकाश में, स्वर्ग के एकमात्र सच्चे परमेश्वर की आराधना करेंगे। परमेश्वर अब मानवता के बीच और नहीं रहेगा, न ही मनुष्य परमेश्वर के साथ उसके गंतव्य में रहने में समर्थ होंगे। परमेश्वर और मनुष्य दोनों एक ही क्षेत्र के भीतर नहीं रह सकते; बल्कि दोनों के जीने के अपने-अपने तरीक़े हैं। परमेश्वर वह है, जो समस्त मानवता का मार्गदर्शन करता है और समस्त मानवता परमेश्वर के प्रबंधन-कार्य का ठोस स्वरूप है। मनुष्य वे हैं, जिनकी अगुआई की जाती है और वे परमेश्वर के सार के समान नहीं हैं। 'विश्राम' का अर्थ है अपने मूल स्थान में लौटना। इसलिए, जब परमेश्वर विश्राम में प्रवेश करता है, तो इसका अर्थ है कि परमेश्वर अपने मूल स्थान में लौट जाता है। वह पृथ्वी पर अब और नहीं रहेगा, या मानवता की ख़ुशियाँ या उसके दु:ख साझा नहीं करेगा। जब मनुष्य विश्राम में प्रवेश करते हैं, तो इसका अर्थ है कि वे सृष्टि की सच्ची वस्तु बन गए हैं; वे पृथ्वी से परमेश्वर की आराधना करेंगे और सामान्य मानवीय जीवन जिएंगे। लोग अब और परमेश्वर की अवज्ञा या प्रतिरोध नहीं करेंगे और वे आदम और हव्वा के मूल जीवन की ओर लौट जाएंगे। विश्राम में प्रवेश करने के बाद ये परमेश्वर और मनुष्य के अपने-अपने जीवन और गंतव्य होंगे। परमेश्वर और शैतान के बीच युद्ध में शैतान की पराजय अपरिहार्य प्रवृत्ति है। इसी तरह, अपना प्रबंधन-कार्य पूरा करने के बाद परमेश्वर का विश्राम में प्रवेश करना और मनुष्य का पूर्ण उद्धार और विश्राम में प्रवेश अपरिहार्य प्रवृत्ति बन गए हैं। मनुष्य के विश्राम का स्थान पृथ्वी है और परमेश्वर के विश्राम का स्थान स्वर्ग में है। जब मनुष्य विश्राम में परमेश्वर की आराधना करते हैं, वे पृथ्वी पर रहेंगे और जब परमेश्वर बाकी मानवता को विश्राम में ले जाएगा, वह स्वर्ग से उनका नेतृत्व करेगा न कि पृथ्वी से" ("वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर और मनुष्य साथ-साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे')।

फिर भाई वांग ने कहा : "शुरुआत में, पृथ्वी पर ही परमेश्वर ने सबसे पहले धूल से इंसान को बनाया, और जब शैतान ने इंसान को भ्रष्ट कर दिया, तो पृथ्वी पर ही परमेश्वर ने अपने कार्य से इंसान को रास्ता दिखा कर उसे छुटकारा दिलाया। अब अंत के दिनों में, परमेश्वर फिर एक बार देहधारी हुआ है, वह इंसान का न्याय कर उसे शुद्ध करने के लिए सत्य व्यक्त कर रहा है, ताकि इंसान की पापी प्रवृत्ति का समाधान कर सके, विजेताओं का एक समूह बना सके। ये विजेता परमेश्वर के वचनों को पहचान कर उसके सामने समर्पित हो सकते हैं, उसके मार्ग का अनुसरण कर सकते हैं। यहीं पृथ्वी पर परमेश्वर की इच्छा पूरी होगी और मसीह का राज्य साकार होगा, जिससे परमेश्वर को गौरव मिलेगा। इंसान के उद्धार के लिए परमेश्वर का प्रबंधन कार्य पूरा हो जाने पर वह शैतान को हरा चुका होगा। शैतान की ताकतें अब दुनिया में गड़बड़ी नहीं कर पाएंगी, वही बचा रहेगा जिसे परमेश्वर ने बचाया होगा, अब इंसान परमेश्वर के खिलाफ प्रतिरोध नहीं करेगा, विद्रोह नहीं करेगा। इंसान शांति से जियेगा, अब युद्ध नहीं होगा, परमेश्वर और इंसान एक साथ विश्राम करने जाएंगे। परमेश्वर का विश्राम स्थल स्वर्ग में है, जबकि इंसान का आख़िरी विश्राम स्थल पृथ्वी पर है। परमेश्वर स्वर्ग में अपनी जगह से इंसान का मार्गदर्शन करेगा, और इंसान यहीं पृथ्वी पर स्वर्ग जैसे जीवन का आनंद लेते हुए, परमेश्वर की आराधना करेगा। यही है वह सामंजस्यपूर्ण शानदार जीवन, जो परमेश्वर ने इंसान के लिए तैयार किया है। आखिरकार परमेश्वर यही हासिल करेगा।"

भाई वांग की बातों में ऐसा कुछ था जो बहुत व्यावहारिक लगा। शैतान के नष्ट हो जाने पर, दुनिया अंधकार और दुष्ट शक्तियों से मुक्त हो जाएगी, परमेश्वर द्वारा हमारे लिए आयोजित जीवन सबसे शानदार जीवन होगा! स्वर्गारोहण के बारे में मेरी धारणा बहुत अस्पष्ट थी। परमेश्वर ने इंसान को पृथ्वी पर जीने के लिए बनाया, फिर इंसान इतनी आसानी से स्वर्ग में कैसे जा सकता है? अगर परमेश्वर ने वास्तव में इंसान को आकाश में स्वर्गारोहित कर दिया, तो वह भोजन और आवास के बिना कैसे ज़िंदा रह पायेगा? प्रभु से आकाश में मिलने का विचार सच में इंसान की धारणाओं और कल्पनाओं का नतीजा है। बड़ी बचकानी सोच है। मैं पादरी को अक्सर इस बारे में बोलते हुए सुनता कि स्वर्ग में परमेश्वर का राज्य किस तरह का है, मैं वाकई इस पर यकीन करता और स्वर्ग में आरोहित होने को तरसता। मेरे ख़याल से पादरी और प्रचारक भी बाइबल को नहीं समझते! वे अपनी धारणाओं के अनुसार परमेश्वर के वचन की गलत व्याख्या करते हैं। वे वाकई लोगों को गलत रास्ता दिखाते हैं!

भाई वांग ने यह कहते हुए अपनी संगति जारी रखी : "स्वर्गारोहण के सच्चे अर्थ की बात करें, तो आइए देखें सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों में क्या कहा गया है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, '"उठाया जाना" निचले स्थान से किसी ऊँचे स्थान पर ले जाया जाना नहीं है जैसा कि लोग सोच सकते हैं; यह एक बहुत बड़ी मिथ्या धारणा है। "उठाया जाना" मेरे द्वारा पूर्वनियत और फिर चयनित किए जाने को इंगित करता है। यह उन सभी के लिए है जिन्हें मैंने पूर्वनियत और चयनित किया है। उठाए गए लोग वे सभी लोग हैं जिन्होंने पहलौठे पुत्रों या पुत्रों का स्तर प्राप्त कर लिया है या जो परमेश्वर के लोग हैं। यह लोगों की धारणाओं के बिलकुल भी संगत नहीं है। वे सभी लोग जिन्हें भविष्य में मेरे घर में हिस्सा मिलेगा, ऐसे लोग हैं जो मेरे सामने उठाए जा चुके हैं। यह एक सम्पूर्ण सत्य है, कभी न बदलने वाला और जिसे झुठलाया नहीं जा सकता। यह शैतान के विरुद्ध एक जवाबी हमला है। जिस किसी को भी मैंने पूर्वनियत किया है, वह मेरे सामने उठाया जाएगा'" ("वचन देह में प्रकट होता है" में 'आरंभ में मसीह के कथन' के 'अध्याय 104')। भाई वांग ने यह कहकर संगति की : "स्वर्गारोहण वैसा नहीं होता जैसी हम कल्पना करते हैं। इसका अर्थ प्रभु से मिलने के लिए हमें पृथ्वी से उठाकर बादलों के बीच ले जाना नहीं होता, और इसका मतलब यकीनन स्वर्ग में ले जाया जाना नहीं है। यह विचार लोगों की संकल्पनाओं और उन पदों की शाब्दिक व्याख्या के जरिये पैदा हुआ। स्वर्गारोहित होने का वास्तविक अर्थ प्रभु का स्वागत करना और परमेश्वर के सामने लाया जाना है। इसके मायने परमेश्वर के पृथ्वी पर वचन बोलने और नया कार्य करने के लिए आने पर परमेश्वर की वाणी को पहचानना, परमेश्वर के नये कार्य को समर्पित होना, और मेमने के पदचिह्नों का अनुसरण करना है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर सत्य व्यक्त करने और न्याय और शुद्धिकरण का कार्य करने के लिए देहधारी होकर आया है। जो लोग अंत के दिनों में परमेश्वर की वाणी को पहचानते हैं और परमेश्वर के नये कार्य का अनुसरण करते हैं, वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने स्वर्गारोहित किये जाते हैं। ये लोग ही बुद्धिमान कुँवारियाँ हैं। ये 'सोना, चांदी और हीरे' हैं, जिन्हें प्रभु परमेश्वर के घर वापस ले जाता है। ये सभी लोग अच्छी काबिलियत वाले हैं, सत्य को स्वीकार कर समझ सकते हैं, परमेश्वर की वाणी को पहचान सकते हैं। ये लोग सचमुच स्वर्गारोहित होते हैं। ये परमेश्वर के वचनों के न्याय और ताड़ना को स्वीकार करते हैं, परमेश्वर की सही समझ हासिल करते हैं और उनके भ्रष्ट स्वभाव को शुद्ध किया जाता है। ये लोग महाविपत्तियों से पहले परमेश्वर द्वारा बनाये गये विजेता हैं, परमेश्वर अंत में उनकी शानदार मंज़िल तक पहुँचने में उनकी अगुआई करेगा। स्वर्ग में आरोहित होने का यही वास्तविक अर्थ है। जो लोग अपनी धारणाओं से चिपके रहते हैं, अपने उठाये जाने के लिए प्रभु का इंतज़ार करते रहते हैं, अंत के दिनों में परमेश्वर के न्याय-कार्य को स्वीकार करने से मना करते हैं, वे मूर्ख कुँवारियाँ हैं। उन्हें प्रभु छोड़ देता है, वे विपत्तियों में घिर जाते हैं, रोते और दांत पीसते हैं। जैसा कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों में कहा गया है : 'जो अंत के दिनों के दौरान परमेश्वर के न्याय और ताड़ना के कार्य के दौरान अडिग रहने में समर्थ हैं—यानी, शुद्धिकरण के अंतिम कार्य के दौरान—वे लोग होंगे, जो परमेश्वर के साथ अंतिम विश्राम में प्रवेश करेंगे; वैसे, वे सभी जो विश्राम में प्रवेश करेंगे, शैतान के प्रभाव से मुक्त हो चुके होंगे और परमेश्वर के शुद्धिकरण के अंतिम कार्य से गुज़रने के बाद उसके द्वारा प्राप्त किए जा चुके होंगे। ये लोग, जो अंततः परमेश्वर द्वारा प्राप्त किए जा चुके होंगे, अंतिम विश्राम में प्रवेश करेंगे। परमेश्वर की ताड़ना और न्याय के कार्य का मूलभूत उद्देश्य मानवता को शुद्ध करना है और उन्हें उनके अंतिम विश्राम के लिए तैयार करना है; इस शुद्धिकरण के बिना संपूर्ण मानवता अपने प्रकार के मुताबिक़ विभिन्न श्रेणियों में वर्गीकृत नहीं की जा सकेगी, या विश्राम में प्रवेश करने में असमर्थ होगी। यह कार्य ही मानवता के लिए विश्राम में प्रवेश करने का एकमात्र मार्ग है। ... इस कार्य के समाप्त होने पर जिन्हें बचने की अनुमति होगी, वे सभी शुद्ध किए जाएँगे, और मानवता की उच्चतर दशा में प्रवेश करेंगे जहाँ वे पृथ्वी पर और अद्भुत द्वितीय मानव जीवन का आनंद उठाएंगे; दूसरे शब्दों में, वे अपने मानवीय विश्राम का दिन शुरू करेंगे और परमेश्वर के साथ रहेंगे। जिन लोगों को रहने की अनुमति नहीं है, उनकी ताड़ना और उनका न्याय किया गया है, जिससे उनके असली रूप पूरी तरह सामने आ जाएँगे; उसके बाद वे सब के सब नष्ट कर दिए जाएँगे और शैतान के समान, उन्हें पृथ्वी पर रहने की अनुमति नहीं होगी। भविष्य की मानवता में इस प्रकार के कोई भी लोग शामिल नहीं होंगे; ऐसे लोग अंतिम विश्राम की धरती पर प्रवेश करने के योग्य नहीं हैं, न ही ये उस विश्राम के दिन में प्रवेश के योग्य हैं, जिसे परमेश्वर और मनुष्य दोनों साझा करेंगे क्योंकि वे दंड के लायक हैं और दुष्ट, अधार्मिक लोग हैं'" ("वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर और मनुष्य साथ-साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे')। फिर भाई वांग ने कहा : "जो लोग परमेश्वर में सच में विश्वास रखते हैं और परमेश्वर के प्रकट होने को तरसते हैं, उन सबने उसके वचन पढ़ने और उसकी वाणी को पहचानने के बाद सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार किया है, वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने उठा लिये गये हैं। वे परमेश्वर के वचनों का पोषण प्राप्त करते हैं, उनकी आत्माएं अब प्यासी नहीं हैं। वे अब कमज़ोर और निराश नहीं हैं, वे अब कोई रास्ता पाये बिना पाप की बेड़ियों से बंधे हुए नहीं जी रहे हैं। वे अब परमेश्वर के प्रकाश में जीते हैं। परमेश्वर के वचनों के न्याय को स्वीकार कर लेने के कारण, उनका भ्रष्ट स्वभाव धीरे-धीरे सुधरने लगता है, समय के साथ वे पाप के बंधनों को तोड़ कर बंधनमुक्त स्वाधीनता में जीते हैं। क्या यह जीवन एक स्वर्गारोहित व्यक्ति का नहीं है?"

भाई वांग की संगति ने मेरी उलझन को सुलझा दिया। स्वर्गारोहित होने का अर्थ है परमेश्वर की वाणी को पहचान कर परमेश्वर के सिंहासन के सामने वापस आना। मैंने आखिरकार स्वर्गारोहण के सच्चे अर्थ को समझ लिया। इतने सालों में, मैं सिर्फ़ बाइबल के शाब्दिक अर्थ को ही समझ पाया था। अपनी धारणाओं के आधार पर, मैं मानता था कि प्रभु हमें उठाने के लिए आयेगा और हम उससे मिल पाएंगे। मैंने परमेश्वर की वाणी को पहचानने पर ध्यान नहीं दिया और स्वर्गारोहित होने का अपना मौक़ा करीब-करीब गँवा ही दिया था। मैं कितना अनजान था! अब जाकर मुझे एहसास हुआ कि सिर्फ वही लोग जो परमेश्वर के सिंहासन के सामने स्वर्गारोहित होते हैं, परमेश्वर के वचन के न्याय को स्वीकार करते हैं, और शुद्ध होकर बदल जाते हैं, वे ही परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर उसके वायदे पाने के लायक होते हैं। परमेश्वर का कार्य सच में बुद्धिमत्तापूर्ण और सार्थक है। खोजने, जांच-पड़ताल करने और सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचनों को पढ़ने के बाद, मुझे पक्का यकीन हो गया कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही वापस आया हुआ प्रभु यीशु है, फिर मैंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अंत के दिनों के कार्य को स्वीकार कर लिया! मैं परमेश्वर के सिंहासन के सामने स्वर्गारोहित हो गया और मेमने के विवाह- भोज में शामिल हो गया। मेरा उद्धार करने के लिए परमेश्वर का धन्यवाद!

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