क्या सर्वशक्तिमान परमेश्वर और प्रभु यीशु एक ही परमेश्वर हैं?

04 नवम्बर, 2017

जब मानव जाति शैतान द्वारा भ्रष्ट हो गई, तो परमेश्वर ने मानवता के उद्धार के लिए उनकी प्रबंधन योजना शुरू की। परमेश्वर ने मानव जाति के उद्धार के कार्य को तीन चरणों में पूरा किया है। व्यवस्था के युग के दौरान, यहोवा परमेश्वर ने नियमों को जारी किया और मानव जाति के जीवन को निर्देशित किया, ताकि लोगों को पता चले कि उन्हें परमेश्वर की पूजा करनी चाहिए और उन्हें यह मालूम हो कि पाप क्या है। लेकिन व्यवस्था के युग के अंतिम चरणों के आने पर मानव जाति का भ्रष्टाचार और भी अधिक गहरा हो गया, और लोगों ने अक्सर नियमों का उल्लंघन किया और यहोवा के खिलाफ पाप किया। उनको यह खतरा था कि उनके उल्लंघन की वजह से उन्हें निंदा और मौत का सामना करना पड़े। इस प्रकार, मानव जाति की जरूरतों के उत्तर में, अनुग्रह के युग के दौरान परमेश्वर ने मनुष्य का रूप धारण किया और वे प्रभु यीशु बने। मानव जाति की खातिर उन्हें क्रूस पर जड़ दिया गया था, और उन्होंने मनुष्य को पाप से छुड़ाया, जिससे कि लोग परमेश्वर के सामने आकर उनसे प्रार्थना करें, कबूल करें और पश्चाताप करें, अपने पापों के लिए क्षमा पाएँ, और परमेश्वर की कृपा और आशीषों के वैभव के तले रहें। लेकिन चूंकि लोगों का पापी स्वभाव अभी तक हल नहीं हुआ था, और वे अब भी अक्सर पाप करते और परमेश्वर का विरोध करते थे, परमेश्वर राज्य के युग में एक बार फिर देह बन गए, प्रभु यीशु के छुटकारे के कार्य को नींव बनाकर और सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम का उपयोग कर मानव जाति के उद्धार और शुद्धि के लिए सभी सच्चाइयों को व्यक्त करते हुए, मानव जाति की पापपूर्ण प्रकृति को मिटाते हुए, जिससे मानव जाति परमेश्वर के प्रति अवज्ञा और विरोध को समाप्त करे, लोग वास्तव में परमेश्वर के आज्ञा का पालन और उनकी आराधना कर सकें, और अंत में मानव जाति को एक खूबसूरत गंतव्य तक पहुंचाया जा सके। हालाँकि परमेश्वर ने व्यवस्था के युग, अनुग्रह के युग, और राज्य के युग में जो-जो कार्य किये, वे भिन्न हैं, और उन्होंने जो नाम लिए और जो स्वभाव दिखाये वे अलग-अलग हैं, उनके कार्य का तत्व और उद्देश्य समान हैं—वे सभी मानव जाति को बचाने के लिए हैं, और सारा कार्य स्वयं परमेश्वर के द्वारा किया जाता है। जैसा कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने कहा, "यहोवा के कार्य से लेकर यीशु के कार्य तक, और यीशु के कार्य से लेकर इस वर्तमान चरण तक, ये तीन चरण परमेश्वर के प्रबंधन के पूर्ण विस्तार को एक सतत सूत्र में पिरोते हैं, और वे सब एक ही पवित्रात्मा का कार्य हैं। दुनिया के सृजन से परमेश्वर हमेशा मानवजाति का प्रबंधन करता आ रहा है। वही आरंभ और अंत है, वही प्रथम और अंतिम है, और वही एक है जो युग का आरंभ करता है और वही एक है जो युग का अंत करता है। विभिन्न युगों और विभिन्न स्थानों में कार्य के तीन चरण अचूक रूप में एक ही पवित्रात्मा का कार्य हैं। इन तीन चरणों को पृथक करने वाले सभी लोग परमेश्वर के विरोध में खड़े हैं" ("वचन देह में प्रकट होता है" में 'परमेश्वर के कार्य का दर्शन (3)')।

हजारों सालों से, कुछ ही लोग वास्तव में जानते हैं कि प्रभु यीशु मसीह स्वयं परमेश्वर हैं, कि वे परमेश्वर के स्वरुप हैं, और यह कि देहधारी परमेश्वर हैं। हकीकत में, बाइबल ने लंबे समय से इस बारे में स्पष्ट रूप से भविष्यवाणी की थी। प्रभु यीशु ने कहा था, "जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है" (यूहन्ना 14:9)। "पिता मुझ में है और मैं पिता में हूँ" (यूहन्ना 10:38)। "मैं और पिता एक हैं" (यूहन्ना 10:30)। जब प्रभु यीशु ने कहा था कि "मैं और पिता एक हैं", वे कह रहे थे कि वे और यहोवा एक ही आत्मा हैं। प्रभु यीशु द्वारा कहे गए वचन और यहोवा द्वारा कहे गए वचन समान हैं—वे दोनों ही सत्य हैं, वे एक ही आत्मा के उदगार हैं, और उनका स्रोत एक ही है; अर्थात, प्रभु यीशु और यहोवा एक ही परमेश्वर हैं। इसी प्रकार, आखिरी दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर और प्रभु यीशु के द्वारा व्यक्त किए गए वचनों का स्रोत एक ही है, वे पवित्र आत्मा के उदगार हैं, वे सच्चाई हैं, और वे परमेश्वर की वाणी हैं। जो लोग प्रभु में विश्वास करते हैं वे सभी जानते हैं कि बाइबल की भविष्यवाणियों की अधिकतर संख्या परमेश्वर की वापसी और आखिरी दिनों के परमेश्वर के न्याय के कार्य से संबंधित है। जैसा कि प्रभु यीशु ने कहा था, "और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूँ, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहाँ ले जाऊँगा कि जहाँ मैं रहूँ वहाँ तुम भी रहो" (यूहन्ना 14:3)। "देख, मैं शीघ्र आनेवाला हूँ" (प्रकाशितवाक्य 22:12)। "तब वे मनुष्य के पुत्र को सामर्थ्य और बड़ी महिमा के साथ बादल पर आते देखेंगे" (लूका 21:27)। "देख, मैं चोर के समान आता हूँ" (प्रकाशितवाक्य 16:15)। "जो मुझे तुच्छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहरानेवाला तो एक है: अर्थात् जो वचन मैं ने कहा है, वही पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा" (यूहन्ना 12:48)। पीटर के पहले धर्मपत्र में यह भी कहा गया था कि, "क्योंकि वह समय आ पहुँचा है कि पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्याय किया जाए" (1 पतरस 4:17)। इन शास्त्रों में बहुत स्पष्ट रूप से कहा गया था कि प्रभु यीशु आखिरी दिनों में लौट आएंगे, और वचनों को अभिव्यक्त करेंगे और न्याय का कार्य करेंगे। जब सर्वशक्तिमान परमेश्वर अंतिम दिनों के दौरान आते हैं, तो वे प्रभु यीशु के छुटकारे के कार्य की नींव पर परमेश्वर के घर से शुरू होने वाले निर्णय के कार्य को करते हैं, और मानव जाति की शुद्धि और मुक्ति के लिए सभी सच्चाइयों को व्यक्त करते हैं। यद्यपि सर्वशक्तिमान परमेश्वर और प्रभु यीशु के कार्य अलग-अलग हैं, उनका स्रोत एक ही है—एक ही परमेश्वर! यह पूरी तरह से प्रभु यीशु की भविष्यवाणी को पूरा करता है: "मुझे तुम से और भी बहुत सी बातें कहनी हैं, परन्तु अभी तुम उन्हें सह नहीं सकते। परन्तु जब वह अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा परन्तु जो कुछ सुनेगा वही कहेगा, और आनेवाली बातें तुम्हें बताएगा" (यूहन्ना 16:12-13)। आखिरी दिनों के देहधारी सर्वशक्तिमान परमेश्वर सच्चाई के तत्व के मूर्त रूप हैं; सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रभु यीशु की वापसी हैं।

अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

संबंधित सामग्री

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के लक्ष्य क्या हैं?

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया पूरी तरह बाइबल में लिखित परमेश्वर के वचनों और सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा अभिव्यक्त 'वचन देह में प्रकट...

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की मूलभूत मान्यताएँ

(1) सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के सिद्धांत ईसाई धर्म के सिद्धांत बाइबल से उत्पन्न होते हैं, और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के...