3. सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की उत्पत्ति और विकास

अनुग्रह के युग में, प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से वादा किया, "और यदि मैं जाकर तुम्हारे लिए जगह तैयार करूँ, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहाँ ले जाऊंगा कि जहाँ मैं रहूँ वहाँ तुम भी रहो।" (यूहन्‍‍ना 14:3) उन्होंने यह भविष्यवाणी भी की, "क्योंकि जैसे बिजली पूर्व से निकलकर पश्चिम तक चमकती है, वैसे ही मनुष्य के पुत्र का भी आना होगा।" (मत्ती 24:27) अंतिम दिनों में, जैसे कि उसके स्वयं प्रतिज्ञा कीऔर पहले से ही कह दिया, परमेश्वर ने वचन का उपयोग कर के, प्रभु यीशु के मोचन कार्य की नींव पर न्याय, ताड़ना, विजय और उद्धार का कार्य करने के लिए पुनः देह धारण किया है और दुनिया के पूर्व में - चीन - में अवतीर्ण हुआ है। बाइबिल की इन भविष्यवाणियों में "न्याय परमेश्वर के घर से शुरू होता है" "जिसके कान हों वह सुन ले कि आत्मा कलीसियाओं से क्या कहता है!" भी पूरा हो गया है। अंतिम दिनों केपरमेश्वर के काम ने अनुग्रह का युग समाप्त कर दिया और राज्य का युग आरंभ किया। जैसे - जैसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार मुख्यभूमि चीन में तेजी से फैला, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया अस्तित्व में आयी। जैसा कि तथ्यों से सिद्ध हुआ है, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया पूरी तरह से परमेश्वर के अंतिम दिनों के काम के परिणामस्वरूप अस्तित्व में आयी, और किसी व्यक्ति द्वारा स्थापित नहीं की गई थी। यही कारण है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया में चुने हुए लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम से प्रार्थना करते हैं, उसके काम के अनुसार चलते हैं, और उनके द्वारा व्यक्त किए गए सभी सत्यों को स्वीकार करते हैं। इस प्रकार यह स्पष्ट है कि ये चुने हुए लोग किसी मनुष्य में विश्वास करने के बजाय, मसीह में विश्वास करते हैं जो अंतिम दिनों में देहधारी हुआ है, शरीर में साकार हुई आत्मा व्यावहारिक परमेश्वर है। बाह्य रूप से, सर्वशक्तिमान परमेश्वर मनुष्य के एक साधारण पुत्र से अधिक कुछ नहीं है, किंतु सार रूप में वह परमेश्वर की आत्मा का मूर्तरूप है और सत्य, मार्ग और जीवन है। उसका काम और वचन परमेश्वर की आत्मा की प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति हैं और परमेश्वर की व्यक्तिगत रूप से उपस्थिति हैं। इसलिए, वह व्यावहारिक परमेश्वर है जो देहधारी हुआ है।

1991 में, सर्वशक्तिमान परमेश्वर, अंतिम दिनों के मसीह ने, चीन में आधिकारिक रूप से अपनी सेवकाई करनी आरंभ की। फिर, उसने लाखों शब्द व्यक्त किए और अंतिम दिनों में महान श्वेत सिंहासन के न्याय का कार्य आरंभ किया। ठीक जैसा कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "न्याय का कार्य परमेश्वर के स्वयं का कार्य है, इसलिए स्वभाविक तौर पर इसे परमेश्वर के द्वारा ही किया जाना चाहिए; इसके बजाय यह मानव के द्वारा नहीं किया जा सकता है। क्योंकि न्याय को मनुष्य द्वारा विश्वास से हासिल किया जाना है, इस पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता है कि परमेश्वर मनुष्यों के मध्य में अपना कार्य अवतार के रूप में प्रगट होकर कर सकता है। इन अंत के दिनों में इस प्रकार से कहा जाना चाहिए कि मसीह मनुष्यों को सिखाने के लिए सत्य का इस्तेमाल करे और सभी सत्य उन पर प्रगट करे। यही परमेश्वर के न्याय का कार्य है।" ("वचन देह में प्रकट होता है" में "मसीह न्याय का कार्य सत्य के साथ करता है") "अंतिम दिनों में परमेश्वर वचन का कार्य करता है, और ऐसे वचन पवित्र आत्मा के वचन हैं, क्योंकि परमेश्वर पवित्र आत्मा है और देहधारी भी हो सकता है; इसलिए, पवित्र आत्मा के वचन, जैसे अतीत में बोले गए थे, आज देहधारी परमेश्वर के वचन हैं ... कार्य को करने के लिए परमेश्वर को कथनों को बोलने के लिए, उसे अवश्य देहधारण करना चाहिए, अन्यथा उसका कार्य का उसके उद्देश्य को पूरा नहीं कर सकता है।" ("वचन देह में प्रकट होता है"में "वह मनुष्य किस प्रकार परमेश्वर के प्रकाशन को प्राप्त कर सकता है जिसने उसे अपनी ही धारणाओं में परिभाषित किया है?") अंतिम दिनों के मसीह की उपस्थिति और कथनों के कारण, बहुत अधिक लोग जो सत्य के प्यासे और सत्य की खोज करते हैं जीत लिए गए हैं और सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन से शुद्ध हो चुके हैं, और परमेश्वर के न्याय और ताड़ना, परमेश्वर की उपस्थिति और उद्धारक की वापसी को देख चुके हैं।

सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया सर्वशक्तिमान परमेश्वर - लौटे हुए परमेश्वर यीशु – अंतिम दिनों के मसीह की उपस्थिति और काम की वजह से और उसके धर्मी निर्णय और ताड़ना के अधीन, अस्तित्व में आयी। कलीसिया में उन सभी लोगों का समावेश हैजो वास्तव में अंतिम दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार करते हैं और परमेश्वर के वचन द्वारा जीते और बचाये जाते हैं। इसे पूरी तरह से सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्तिगत रूप से स्थापित किया गया था, और व्यक्तिगत रूप से उसके द्वारा नेतृत्व और मार्गदर्शन किया जाता है, और इसे किसी भी तरह से किसी भी व्यक्ति द्वारा स्थापित नहीं किया गया था। यह एक ऐसा तथ्य है जिसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया में सभी चुने हुए लोगों द्वारा स्वीकार किया गया है। देहधारी परमेश्वर द्वारा उपयोग किया जाने वाला कोई भी परमेश्वर द्वारा पूर्वनियत है, और परमेश्वर द्वारा व्यक्तिगत रूप से नियुक्त किया गया और गवाही देने के लिए है, ठीक वैसे ही जैसे कि यीशु ने व्यक्तिगत रूप से बारह शिष्यों को चुना और नियुक्त किया। जो लोग परमेश्वर द्वारा उपयोग किए जाते हैं, वे केवल उसके काम में ही सहयोग करते हैं, और उसकेबदले में परमेश्वर के कार्य को नहीं कर सकते हैं। कलीसिया उन लोगों द्वारा स्थापित नहीं की गई थी जो परमेश्वर द्वारा उपयोग किए जाते हैं, न ही परमेश्वर के चुने हुए लोग उन पर विश्वास करते हैं या उनका पालन करते हैं। अनुग्रह के युग की कलिसीयाओं की स्थापना पौलुस और अन्य प्रेरितों द्वारा नहीं की गई थी, बल्कि ये प्रभु यीशु के काम के परिणाम थे और इन्हें स्वयं प्रभु यीशु द्वारा स्थापित किया गया था। इसी तरह, अंतिम दिनों में सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया उन लोगों द्वारा स्थापित नहीं की गई है जिन्हें परमेश्वर द्वारा उपयोग किया गया था बल्कि यह सर्वशक्तिमान परमेश्वर के काम के परिणाम है। परमेश्वर द्वारा उपयोग किए जाने वाले लोग, मनुष्य का कर्तव्य करते हुए, केवल कलीसियाओं को सींचते, आपूर्ति करते और उनका मार्गदर्शन करते हैं। यद्यपि परमेश्वर के द्वारा उपयोग किए गए लोगों द्वारा परमेश्वर के चुने हुए लोगों का नेतृत्व किया जाता है, उन्हें सींचा जाता है और आपूर्ति की जाती है, तब भी वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के अलावा किसी अन्य को नहीं मानते या किसी अन्य का अनुसरण नहीं करते हैं, और उस (परमेश्वर) के वचनों और काम को स्वीकार करते और उनका पालन करते हैं। यह एक तथ्य है जिसे कोई इनकार नहीं कर सकता है। देहधारी परमेश्वर की उपस्थिति और काम की वजह से, सभी धार्मिक पंथों और संप्रदायों में परमेश्वर के कई सच्चे विश्वासियों ने अंततः परमेश्वर की आवाज सुनी है, देखा है कि प्रभु यीशु पहले ही आ चुके हैं और अंतिम दिनों में न्याय का कार्य कर चुके हैं, और उन सभी ने पुष्टिकी है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर वापस आए हुए प्रभु यीशु हैं- और परिणामस्वरूप, उन्होंने अंतिम दिनों के उसके काम को स्वीकार कर लिया है। वे सभी जो सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन द्वारा जीते जाते हैं, उसके नाम के अधीन हो जाते हैं। इसलिए, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के सभी चुने हुए लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर से प्रार्थना करते हैं, और उसका अनुसरण,आज्ञा- पालन और उसकी आराधना करते हैं। परमेश्वर के न्याय और अनुशासन के कार्य का अनुभव करके, चीन के चुने हुए लोग उसके धर्मी स्वभाव की सराहना करने के लिए आए हैं, और उन्होंने उसकी महिमा और क्रोध को देखा है, और इसलिए वे पूरी तरह से परमेश्वर के वचन द्वारा जीते जा चुके हैं और वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सामने परास्त हो गए हैं, और परमेश्वर के वचन के न्याय और ताड़ना को मानने और स्वीकार करने के इच्छुक हैं। इस प्रकार, उन्होंने परमेश्वर के उद्धार को प्राप्त कर लिया है।

क्योंकि सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त किए गए वचन मानव जाति को बचाने के लिए परमेश्वर की प्रबंधन योजना के रहस्यों का खुलासा करते हैं, परमेश्वर के चुने हुए लोगों को, परमेश्वर के शब्दों का खुलासा करने में समझने में आया कि हर युग में परमेश्वर का नया नाम है, और उसका नया नाम इस बात का प्रतीक है कि परमेश्वर नए काम कर रहा है, और इसके अलावा, यह कि परमेश्वर प्राचीन युग को समाप्त कर रहा है और एक नया युग आरंभ कर रहा है। परमेश्वर के नाम का अर्थ बहुत महान और गहन है! इसमें परमेश्वर के काम का महत्व समाहित है। परमेश्वर युग को बदलने और उस युग के अपने काम का प्रतिनिधित्व करने के लिए नामों का उपयोग करता है। व्यवस्था के युग में, व्यवस्थाओं और आज्ञाओं को जारी करने और पृथ्वी पर मानवजाति के जीवन का मार्गदर्शन करने के लिए उसने यहोवा के नाम का उपयोग किया। अनुग्रह के युग में, उसने मानवजाति को छुटकारा दिलाने वाला काम करने के लिए यीशु के नाम का उपयोग किया। राज्य के युग के आगमन के साथ, उसने परमेश्वर के घर से शुरू करते हुए न्याय का कार्य करने, मनुष्य को शुद्ध करने, मनुष्य को बदलने और मनुष्य को बचाने के लिए सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम का उपयोग किया है। परमेश्वर का नया नाम कुछ ऐसा नहीं है जिसे मानव द्वारा मनमाने ढंग से पुकारा जाता है, बल्कि अपने काम की आवश्यकताओं के कारण परमेश्वर ने स्वयं लिया था। कार्य के प्रत्येक चरण में परमेश्वर द्वारा लिये जाने वाले नाम की जड़ें बाइबिल में है, और उस नाम की भविष्यवाणी प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में बहुत समय पहले समय से की गई थी जो प्रभु यीशु तब लेंगे जब वह अंतिम दिनों में वापस आते हैं:"जो जय पाए उसे मैं अपने परमेश्‍वर के मन्दिर में एक खंभा बनाऊँगा, और वह फिर कभी बाहर न निकलेगा; और मैं अपने परमेश्‍वर का नाम और अपने परमेश्‍वर के नगर अर्थात् नए यरूशलेम का नाम, जो मेरे परमेश्‍वर के पास स्वर्ग पर उतरनेवाला है, और अपना नया नाम उस पर लिखूँगा।" (प्रकाशितवाक्य 3:12) "प्रभु परमेश्‍वर, जो है और जो था और जो आनेवाला है, जो सर्वशक्‍तिमान, यह कहता है," "मैं ही अल्फ़ा और ओमेगा हूँ।" (प्रकाशितवाक्य 1:8) "फिर मैंने बड़ी भीड़ का सा और बहुत जल का सा शब्द, और गर्जन का सा बड़ा शब्द सुना:" "हाल्लिलूय्याह! क्योंकि प्रभु हमारा परमेश्‍वर सर्वशक्‍तिमान राज्य करता है। " (प्रकाशितवाक्य 19:6) राज्य के युग में सर्वशक्तिमान परमेश्वर का नाम प्रकाशितवाक्य की पुस्तक की भविष्यवाणियों को वास्तव में पूरा करता है। परमेश्वर सर्वशक्तिमान है, उसी ने सब चीजों का सृजन किया और उन पर शासन करता है, और वही प्रथम और अंतिम है; उसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहना हम सबके लिए सर्वाधिक उचित है। तब से, लोगों ने देहधारी परमेश्वर को सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहा है और देहधारी मसीह को व्यावहारिक परमेश्वर भी कहा है। और इस प्रकार सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का नाम पड़ा।

जब साम्राज्य का सुसमाचार मुख्यभूमि चीन में फैला, तो परमेश्वर ने संपूर्ण सृष्टि में आत्मा के समस्त कार्य को पुनः प्राप्त किया और इसे लोगों के उस समूह पर संकेन्द्रित किया जिसने अंतिम दिनों के परमेश्वर के काम को स्वीकार किया था, और उन पर जो पूर्वनियत और परमेश्वर द्वारा चुने गए थे और ईमानदारी से सही रास्ते की खोज में थे। क्योंकि पवित्र आत्मा का काम स्थानांतरित कर दिया गया था, इसलिए सभी पंथों और संप्रदायों ने पवित्र आत्मा के काम को खो दिया और एक बंजर भूमि बन गए, और लोगों के पास सत्य के मार्ग को खोजने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं रहा। इसने बाइबिल में की गई भविष्यवाणी को वास्तव में पूरा किया है, "देखो, ऐसे दिन आते हैं, जब मैं इस देश में महंगी करूंगा; उसमें न तो अन्‍न‍ की भूख और न पानी की प्यास होगी, परन्तु यहोवा के वचनों के सुनने ही की भूख प्यास होगी।" (आमोस 8:11) पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन में, विभिन्न पंथों और संप्रदायों के जिन लोगों ने सत्य का अनुसरण किया और वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास किया, वे मसीह विरोधियों और दुष्ट नौकरों के प्रतिबंधों और बाधाओं को तोड़कर बाहर आ गए, और अंततः उन्होंने परमेश्वर की आवाज़ को पहचाना, और अधिकाधिक लोग परमेश्वर के सिंहासन के सामने लौट आए। हर जगह सभी पंथों के एक होने और सभी राष्ट्रों का इस पर्वत की ओर प्रवाहित होने का सुखद दृश्य दिखाई दिया। जैसे ही सभी पंथों और संप्रदायों के ऐसे लोग जिन्हें वास्तव में परमेश्वर में विश्वास था बड़ी संख्या में लौट आए, तो अधिकांश पंथ और संप्रदाय ढह गए और लंबे समय से नाम मात्र पर ही अस्तित्व में हैं। परमेश्वर के काम के कदमों को कौन रोक सकता है? परमेश्वर के चुने हुए लोगों को परमेश्वर की ओर लौटने से कौन बाधित कर सकता है? यह ऐसा था मानो कि पूरे धार्मिक समुदाय को सीधे स्थापित किया गया हो। लौटने की धारा तेजी से हिलोरे लेती हुई लहरों की तरह थी। परमेश्वर के काम के रास्ते में कोई शक्ति नहीं खड़ी हो सकती थी! जबसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रकट हुए और उनका काम शुरू हुआ, तब से सीसीपी सरकार सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को अनवरत रूप से उत्पीड़ित करती आ रही है। इसने अंतिम दिनों के परमेश्वर के काम को समाप्त करने का प्रयास करते हुए, मसीह और परमेश्वर के सेवकों का बुरी तरह से शिकार किया है और परमेश्वर के चुने हुए लोगों का निर्दयतापूर्वक उत्पीड़न कियाहै। इसने इस बात की योजना बनाने के लिए कि कैसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को समाप्त किया जाए, कई आपातकालीन बैठकें बुलाई हैं। इसने कई गुप्त दस्तावेज़ तैयार और जारी किए हैं और विभिन्न उपाय शुरू किए हैं जो खोटेऔर शैतानी हैं: सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को अपमानित करते हुए हर जगह नोटिस लगाना, सार्वजनिक नोटिस जारी करना, अकारण अफ़वाहें गढ़ने, लांछन और झूठ आरोप लगाने के लिए टेलीविजन, रेडियो, अख़बारों, इंटरनेट और अन्य मीडिया का उपयोग करना; बलपूर्वक लोगों को बुरी शिक्षाओं और भ्रम के साथ राजी करना, और ज़बर्दस्ती मत परिवर्तन(ब्रेनवॉशिंग) और आत्मसातकरण करना; पर्यवेक्षण और नियंत्रण के लिए थ्री-सेल्फचर्च का उपयोग करना, खुलेआम जाँच करने और गुप्त रूप से पूछताछ करने के लिए जासूसों को भेजना, जनसाधारण पर नियंत्रण रखना, पड़ोसी देशों से निगरानी का आदेश देना, और बड़े पुरस्कार का वादा करके लोगों को शिकायत दर्ज करने के लिए प्रोत्साहित करना; लोगों के घरों की मनमाना तलाशी लेना, उनके घरों को लूटना और उनकी संपत्ति जब्त करना, जुर्मानों के जरिये धन ऐंठना और अनुचित साधनों से धन संचित करना; परमेश्वर के चुने हुए लोगों की गुप्त गिरफ्तारी करना, इच्छानुसार उन्हें श्रम शिविरों में रोक कर रखना और कैद करना, यातनाओं के माध्यम से अपराध-स्वीकारोक्ति निकालना, शरीर और दिमाग को तहस-नहस करना, और दंडाभाव के साथ लोगों को पीट कर मार डालना; यहाँ तक ​​कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया को दबाने के लिए सशस्त्र पुलिस और सैनिकों की नियुक्त भी करना; इत्यादि। सीसीपी सरकार ने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया के मसीहियों- परमेश्वर के चुने हुए लोगों - को अमानवीय रूप से गिरफ्तार किया और सताया है, जिसके कारण उन्हें अपनी संपत्ति की अनैतिक डकैती और भौतिक एवं आध्यात्मिक यातनाओं और दुःखों को भुगतना पड़ा, और यहाँ तक ​​कि कई लोगों की मृत्यु हो गई। सरकार के कार्य भयावह रहे हैं। जैसा कि प्रलेखित है, कम से कम दस मसीहियों को सता कर मारा गया है। उदाहरण के लिए ज़ाई योंगजियांग (पुरुष, 43 वर्ष, सुईजी काउंटी, एन्हुई प्रांत के वुगौऊ टाउन के एक मसीही को 30 अप्रैल 1997 के शुरुआती घंटों में चुपके से स्थानीय पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था और उसके साथ घातक रूप से दुर्व्यवहार किया गया था। 10 मई को, जब ज़ाई के परिवार ने शवदाह पर उसका शरीर देखा, तो वह सभी जगह काला और बैंगनी और खून से सना हुआ था, और उसने सिर पर कई घातक घावों का सामना किया था। ये ऐझोंग (पुरुष, 42 वर्ष), शुयांग काउंटी, जियांग्सू प्रांत के एक मसीही, को 26 मार्च 2012 को कलीसिया के लिए माल खरीदते समय सीसीपी पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया था। तीसरे दिन, उसे पीट-पीट कर मार डाला गया। जियांग गुइझी (महिला, 46 वर्ष, उस समय सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया का एक वरिष्ठ नेता), पिंग्यू काउंटी के क्विंग्हे जिले, हेनान प्रांत के एक मसीही को 4 जनवरी, 2013 को ज़िन्मी शहर, हेनानप्रांत में सीसीपी पुलिस द्वारा गुप्त रूप से गिरफ्तार और कैद कर लिया गया था। पुलिस अधिकारियों ने एक अवैध अदालत स्थापित की और अपराध-स्वीकरण निकालने के लिए यातना का उपयोग किया। पुलिस द्वारा किए गए शारीरिक शोषण के परिणामस्वरूप 12 फरवरी की सुबह-सुबह जियांग की मृत्यु हो गई... इस से परे, सीसीपी पुलिस द्वारा दसियों हजार अन्य मसीहियों को भी गिरफ्तार और कैद किया गया है। कुछ को ड्रग्स के इंजेक्शन दिए गए और उनमें सीजोफ्रेनिया विकसित हो गया; कुछ लोग यातना के द्वारा इतनी बुरी तरह से अपंग हो गए कि वे स्वयं की देखभाल करने में असमर्थ रहे; कुछ को श्रम शिविरों में कैद किया गया, और उनकी रिहाई के बाद सीसीपी सरकार द्वारा उन पर निगरानी रखी जाती थी और उन्हें उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित रखा जाता था। अपरिष्कृत आँकड़ों के अनुसार, 2011 से 2013 तक के दो अल्प वर्षों में, परमेश्वर के चुने हुए 3,80,380 लोगों को मुख्य भूमि चीन में सीसीपी सरकार द्वारा गिरफ्तार किया और हिरासत में लिया गया था। इन लोगों में से, 43,640 ने अवैध रूप से पूछताछ के दौरान सभी प्रकार की यातनाएँ सहीं; 1,11,740 पर विभिन्न आरोप लगवाए गए थे और उनसे बेशर्मी से 243,613,000 RMB से अधिक जुर्माना लिया या जबरदस्ती वसूला गया; 35,330 ने अपने घर लुटवाए, और सार्वजनिक सुरक्षा अंगों और उनके अधीनस्थों के द्वारा कम से कम 1,000,000,000 RMB (कलीसिया को चढ़ावे और व्यक्तिगत संपत्ति सहित) बलात् और आधारहीन ढंग से जब्त कर लिए गए या दुष्ट पुलिस अधिकारियों द्वारा जेब में रख लिए गए थे। जब सीसीपी सरकार की गिरफ्तारी और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के मसीहियों के उत्पीड़न की बात आती है, तो ये मोटे -मोटे आँकड़े हैं, और जब सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के सभी मसीह लोगों की बात आती है, तो वे हिमशैल का सिर्फ एक शीर्ष हैं। वास्तव में, जब से सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने अपना काम शुरू किया, तब से परमेश्वर की कलीसिया के अनगिनत मसीहियों को सीसीपी सरकार द्वारा गिरफ्तार किया, सताया, छिपाया गया, अथवा उन पर निगरानी रखी गई है। इसने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कलीसिया को रक्त पिपासा से दबाने के लिए मुख्यभूमि चीन को आतंक की दुनिया में बदलते हुए हर क्रूर साधन का उपयोग किया। इसके अलावा, सभी पंथों और संप्रदायों द्वारा कलीसिया को भी कलंकित, निंदित किया गया और उस पर हमले किए गए। यह तुरंत दूर-दूर तक फैली अफवाहों और हर तरह के कलंक, दुर्व्यवहार और अपशब्दों के तूफान का कारण बना। पूरा समाज और धार्मिक समुदाय सभी प्रकार के प्रतिकूल प्रचार से भर गए। सच्चे परमेश्वर के प्रति भ्रष्ट मानवता का प्रतिरोध और सच्चे मार्ग का उत्पीड़न अपनी चरम पर पहुँच गया था।

चूँकि मानवता शैतान द्वारा भ्रष्ट कर दी गई थी, इसलिए परमेश्वर ने मानवजाति को बचाने की अपनी प्रबंधन योजना कभी नहीं रोकी। मानवजाति, हालाँकि, सत्य को नहीं जानती है, यह परमेश्वर को तो और भी कम जानती है। परिणामस्वरूप, हर बार जब भी परमेश्वर नया काम शुरू करने के लिए देहधारण करता है, उसे सत्ताधारियों और धार्मिक समूहों द्वारा अस्वीकृत कर दिया और सताया जाता है। दो हजार साल पहले, जब यीशु ने देहधारण किया, तो उसे रोमन सरकार और यहूदी विश्वास द्वारा सताया और गिरफ्तार किया गया था, और अंत में उसेसूली पर चढ़ाया गया था। अंतिम दिनों में, जब से परमेश्वर न्याय का कार्य करने के लिए चीन में देहधारण कर लौटे हैं, तब से सीसीपी सरकार द्वारा उन्हें क्रूरता से सताया और उनका पीछा किया गया है, और मसीही धर्म के सभी पंथों और संप्रदायों द्वारा भी अभिशप्त किया गया है, उन पर झूठे आरोप लगाए गए हैं, उन्हें निंदित, और अस्वीकृत किया गया है। यह मनुष्य के भ्रष्टाचार और दुष्टता का स्पष्ट संकेत है। हम कल्पना कर सकते हैं कि परमेश्वर के लिए राक्षसों के इस तरह के किले में अपना काम पूरा करना कितना कठिन है, जहाँ भारी काले बादल छाए रहते हैं और शैतान शक्ति का उपयोग करते हैं। तथापि, परमेश्वर सर्वशक्तिमान है, और उनके पास सर्वोच्च अधिकार और शक्ति है। भले ही शैतान की ताकतें कितनी ही व्याप्त हों, भले ही वे कैसे विरोध और आक्रमण करती हों, यह सब किसी लाभ का नहीं है। बस लगभग 20 वर्षों में, गंभीर दमन के अधीन पूरे चीन में सर्वशक्तिमान परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार फैल चुका है। देशभर में कई लाख कलीसियाएँ उभर आई हैं और लाखों लोगों ने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम की अधीनता स्वीकार कर ली है। लगभग तत्काल ही, सभी पंथ और संप्रदाय उजाड़ हो गए, क्योंकि परमेश्वर के अनुयायियों ने परमेश्वर की आवाज़ सुन ली है, और वे आवाज़ का पीछा करते हुए पहले ही वापस आ चुकी हैं, परमेश्वर के सामने गिर चुकी हैं, और उन्हें परमेश्वर द्वारा व्यक्तिगत रूप से सिंचित किया गया और उनका मार्गदर्शन किया गया है। इसने बाइबिल में भविष्यवाणी को पूरा किया है कि "हर जाति के लोग धारा के समान उसकी ओर चलेंगे।" यह अपरिहार्य है कि परमेश्वर में सभी सच्चे विश्वासी अंत में सर्वशक्तिमान परमेश्वर की ओर मुड़ेंगे, क्योंकि यह लंबे समय से परमेश्वर द्वारा नियोजित और पूर्वनियत किया गया है। कोई इसे बदल नहीं सकता है! वे झूठे विश्वासी, जिन्हें परमेश्वर पर विश्वास केवल इतना ही है कि वे अपनी पेट भर रोटियाँ खा सकें, और वे विभिन्न शत्रु जो दुष्टता करते हैं ,सर्वशक्तिमान परमेश्वर का विरोध और निंदा करते हैं, सब परमेश्वर के काम द्वारा समाप्त कर दिए गए हैं। परमेश्वर के काम द्वारा समस्त धार्मिक समुदाय पूरी तरह से नष्ट और विघटित कर दिया गया है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर का काम अंत में महिमा में समाप्त हो गया है। इस अवधि के दौरान, सीसीपी सरकार के उन्मत्त प्रतिरोध और रक्तरंजित दमन के बावजूद, परमेश्वर के साम्राज्य का सुसमाचार अभी भी विद्युत गति से फैल गया है। परमेश्वर के काम को हटाने और मिटाने का सीसीपी का षड़यंत्र विफलता के साथ समाप्त हो गया है। परमेश्वर का विरोध करने वाली सभी दुष्ट ताकतों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया है और परमेश्वर के तेजस्वी और कुपितन्याय के बीच में पलट दिया गया है। ठीक जैसे कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "तू मेरी ताड़ना के भीतर कैसे अस्तित्व में बना नहीं रह सकता है? वे सभी जिनसे मैं प्रेम करता हूँ वे निश्चय ही अनन्तकाल तक जीवित रहेंगे, और वे सभी जो मेरे विरूद्ध खड़े होते हैं उन्हें निश्चय ही मेरे द्वारा अनन्त काल तक प्रताड़ित किया जाएगा। क्योंकि मैं एक जलन रखनेवाला परमेश्वर हूँ, मैं उन सबके कारण जो मनुष्यों ने किया है उन्हें आसानी से नहीं छोडूंगा। मैं पूरी पृथ्वी पर निगरानी रखता हूँ, और, संसार के पूरब (पूर्व) में धार्मिकता, प्रताप, प्रचण्ड क्रोध और ताड़ना के साथ प्रगट होता हूँ, और मैं अपने आपको मानवता के असंख्य मेज़बानों पर प्रकाशित करूँगा!" (परमेश्वर का सम्पूर्ण ब्रह्मांड के लिए कथनों से वचन दे हमें प्रकट होता है के "छब्बीसवें कथन" से लिया गया) "मेरा राज्य सारे विश्व के ऊपर आकार लेने लगा है, और मेरा सिंहासन अरबों खरबों लोगों के हृदयों में कब्जा करने लगा है। स्वर्गदूतों की सहायता से, मेरी महान उपलब्धि को जल्द ही सफलतापूर्वक पूरा कर दिया जाएगा। मेरे पुत्र और मेरे लोगों की सारी भीड़, बेचैनी से मेरी वापसी का इन्तज़ार करते हैं, और मेरे साथ उनके फिर से एक होने, तथा फिर कभी जुदा न होने की कल्पना करते हैं। मेरे राज्य के सारे निवासी, जबकि मैं उन के साथ हूँ, तो एक दूसरे के साथ क्यों उत्सव मनाते हुए यहाँ वहाँ नहीं भाग सकते हैं? क्या यह एक बेशकीमती पुनःमिलन हो सकता है? मैं हर किसी की नज़रों में सम्मानित हूँ, और हर किसी के शब्दों के द्वारा मेरी घोषणा होती है। जब मैं वापस आऊँगा, तब मैं शत्रु की ताकतों पर और भी अधिक विजय पाऊँगा। समय आ गया है! मैं अपने कार्य को वेग से करना चाहता हूँ, मैं मनुष्यों के मध्य सर्वोच्चता से शासन करना चाहता हूँ! मैं वापस आ रहा हूँ! मैं जा रहा हूँ! हर कोई यही कल्पना कर रहा है, वे क्या आशा कर रहे हैं? मैं चाहता हूँ कि हर कोई मेरे दिन के आगमन को देखे और आनन्दपूर्वक मेरे दिन के आगमन का स्वागत करें।" (परमेश्‍वर का सम्पूर्ण ब्रह्मांड के लिए कथनों से वचन देह में प्रकट होता है के "सत्ताईस वाँ कथन" से लिया गया) जैसे -जैसे राज्य का सुसमाचार फैला, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया अधिक बड़ी होती गई, और विश्वासियों की संख्या बिना रुके बढ़ती गई। आज, यह इतना बढ़ रहा है जितना पहले कभी नहीं बढ़ा। सर्वशक्तिमान परमेश्वर-अंतिम दिनों के मसीह - द्वारा व्यक्त किया गया वचन लंबे समय से हजारों परिवारों तक फैल गया है, और अधिकाधिक लोगों द्वारा स्वीकार किया जा रहा है। परमेश्वर के वचन ने अपने सर्वोच्च अधिकार और शक्ति का प्रदर्शन किया है। यह निर्विवाद तथ्य पूरी तरह से सिद्ध करता है कि "सबकुछ परमेश्वर के वचन के द्वारा प्राप्त किया जाता है!"

"आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था।" (यूहन्‍ना 1:1) आरम्भ में, परमेश्वर ने वचन से आकाश और पृथ्वी और उन सभी चीजों को बनाया, और इस वचन से मानवता का मार्गदर्शन किया। अंतिम दिनों में, परमेश्वर वचन के साथ हर चीज को पूरा भी करता है। परमेश्वर के चुने हुए लोगों की पूर्णता और मसीह के राज्य की प्राप्ति दोनों ही परमेश्वर के वचन द्वारा प्राप्त की जाएँगी। अपने आप में, इस बारे में कुछ भी अपवाद नहीं है कि कैसे सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया परमेश्वर के वचन के काम से उत्पन्न हुई, सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन के मार्गदर्शन में विकसित हुई है, और, इसके अलावा, सीसीपी सरकार के निष्ठुर दमन और उत्पीड़न और धार्मिक समूहों में मसीह विरोधियों की ताकतों की उन्मत्त निंदा और विरोध के बावजूद बढ़ रही है। यह पूरी तरह से परमेश्वर के वचन के अधिकार और शक्ति को दर्शाता है। यह कहा जा सकता है कि, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की उपस्थिति और काम के बिना, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया नहीं होगी, और परमेश्वर द्वारा व्यक्त किए गए वचनों के बिना, ऐसेही सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया भी मौजूद नहीं होगी। आजवह अपने व्यक्त किए हुए लाखों वचनों के साथ अपने चुने हुए लोगों को सिंचित करऔर भोजन दे रहा है, और वे सभी लोग जिन्होंने उसके काम को स्वीकार कर लिया है, उसके वचनों के मार्गदर्शन का आनंद ले रहे हैं और मनुष्य को बचाने के उसके काम का अनुभव कर रहे हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "सारे विश्व में मैं अपना कार्य कर रहा हूँ, और पूर्व में, कड़क के साथ गर्जनाएँ बिना रूके लगातार हो रही हैं, सभी पन्थों (डिनोमिनेशन) और सम्प्रदायों को झंझोर रही हैं। यह मेरी वाणी है जिसने सभी मनुष्यों को वर्तमान में ला दिया है। मैं नेअपनी वाणी को ऐसा बनाया है कि वह मनुष्यों पर विजय पाती है; वे सभी इस धारा में आ जाते हैं और सभी मेरे सामने समर्पण कर देते हैं, क्योंकि मैं ने बहुत पहले ही सारी पृथ्वी पर से अपनी महिमा को फिर से प्राप्त कर लिया था और उसे नए सिरे से पूर्व में भेजा था। कौन मेरी महिमा को देखने की तीव्र प्रतीक्षा नहीं करता है? कौन व्याकुलता से मेरे लौटने का इन्तज़ार नहीं करता है? कौन मेरे पुनःप्रकटीकरण को देखने की प्यासनहीं रखता है? कौन मेरे प्रेमीपन के लिए शोक से सूख नहीं जाता है? कौन मेरे प्रकाश में आना नहीं चाहता है? कौन कनान की समृद्धि को देखना नहीं चाहता है? कौन छुड़ानेवाले के पुनःआगमन की लालसा नहीं करता है? कौन महान सर्वशक्तिमान की तारीफ नहीं करता है? मेरी वाणी को सारी पृथ्वी में फैलना होगा; मैं अपने चुने हुए लोगों से और अधिक बात करने की इच्छा करता हूँ। जो वचन मैं कहता हूँ वह सामर्थी गर्जनों के समान पहाड़ों और नदियों को हिला देते हैं; मैं सम्पूर्ण विश्व और सारी मानवजाति से बात करता हूँ। अतः मेरे वचन मनुष्य के लिए अनमोल धन बन जाते हैं, और सभी मनुष्य उन मेंआनन्दित होते हैं। बिजली पूर्व से लेकर पश्चिम तक चमकती है। मेरे वचन ऐसे हैं कि मनुष्य उन्हें छोड़ना नहीं चाहता है और उनकी गहराई नहीं समझ पाता है, परन्तु उससे बड़कर, मनुष्य उनमें आनन्दित होता है। एक नवजात शिशु के समान, सभी मनुष्य आनन्दित और प्रसन्न हैं, और मेरे आगमन का उत्सव मना रहे हैं। अपनी वाणी के कारण, मैं सभी मनुष्यों को अपने सामने लाऊँगा। उस समय से, मैं विधिवत् रूप से मनुष्यों के बीच प्रवेश करूँगा ताकि वे मेरी आराधना करने के लिए आएँ। वह महिमा जो मैं देता हूँ और मेरे वचन मेरी वाणी को ऐसा बनाते हैं कि सभी मनुष्य मेरे सामने आते हैं और देखते हैं कि बिजली पूर्व से चमकती है,और यह कि मैं पूर्व के "जैतून के पर्वत" पर भी उतर चुका हूँ। वे देखेंगे कि मैं लम्बे समय से पृथ्वी पर हूँ, यहूदियों की सन्तानों के मध्य नहीं बल्कि पूर्व की चमकती हुई ज्योतियों के बीच। क्योंकि मैं बहुत पहले ही, जब से मेरा पुनरूत्थान हुआ है, मनुष्यों के बीच में से चला गया हूँ, और बाद में महिमा के साथ मनुष्यों के मध्य पुनःप्रगट हुआ हूँ। मैं वही हूँ जिसकी आराधना युगों पहले की जाती थी, और वह "नन्हा बालक" हूँ जिसे युगों पहले इस्राएलियों के द्वारा त्याग दिया गया था।उससे बड़कर, मैं वर्तमान युग का सदा सर्वदा महिमामय सर्वशक्तिमान परमेश्वर हूँ! सभी मेरे महिमामय रूप को देखने के लिए मेरे सिंहासन के सामने आएँ, मेरी आवाज़ को सुनें, और मेरे कार्यों को देखें। यह मेरी इच्छा की सम्पूर्णता है; यह मेरी योजना का अंत और शिखर है, साथ ही साथ मेरी प्रबन्धन की योजना भी है। सभी राष्ट्र मेरी आराधना करें, हर एक जीभ मेरा अंगीकार करे, हर एक मनुष्य मुझ पर भरोसा करे, और हर एक लोग मेरी आधीनता में आ जाएँ!" ("वचन देह में प्रकट होता है" में "मेघों की सात गर्जनें- यह भविष्यवाणी करती हैं कि राज्य का सुसमाचार पूरे विश्वभर में फैल जाएगा") सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन के कारण परमेश्वर के चुने हुए लोगों को महान उद्धार प्राप्त हुआ है। मुख्यभूमि चीन में परमेश्वर का काम अंततः महिमा में समाप्त हो गया है। अब परमेश्वर के चुने हुए लोग हर देश और जगह मेंउसके वचन को फैला रहे हैं और उसकेकामों की गवाही दे रहे हैं। परमेश्वर का वचन पूरे विश्व में फैल जाएगा, और शीघ्र ही वह सभी राष्ट्रों और सभी लोगों के सामने सार्वजनिक रूप से प्रकट होगा। परमेश्वर की उपस्थिति की लालसा करने वाले हर देश और जगह के लोगों ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि जिस परमेश्वर के सार्वजनिक रूप से प्रकट होने की वे लालसा करते हैं वह पहले से हीगुप्त रूप से चीन मेंअवतरित हो गया है और उसने विजय और उद्धार के काम का एक चरण पूराकर लिया है।

अंतिम दिनों में, जब युग लगभग समाप्त होने ही वाला है, तो परमेश्वर महान लाल अजगर के निवास स्थान, तानाशाही शासकों केविशाल जमघट: चीन चीन, नास्तिकता के कट्टर गढ़ में देहधारण करता है और गुप्त रूप से अवतरित होता है। अपने बहुविध विवेक और शक्ति से, परमेश्वर शैतान के विरुद्ध लड़ाई करता है और अपनी प्रबंधन योजना का केंद्रीय काम करता है- शैतान की पूरी तरह पराजय और सभी मानव-जाति का उद्धार। फिर भी, सत्तासीन सीसीपी के निराधार आरोपों, निंदा, छलरचना और अपयश की वजह से, तथ्यों से अनजान कई लोग वास्तव में सीसीपी की अफवाहों पर विश्वास करते हैं। धार्मिक समूह, विशेष रूप से, आज के दिन भी परमेश्वर के आगमन की निंदा और ईशनिंदा करते रहते हैं, और वे परमेश्वर के काम का विरोध करने के लिएपूरी तरह से नास्तिक सीसीपी सरकार के पक्ष में खड़े हैं। यह कितना दुःखद है! ये लोग कभी अपेक्षा नहीं करते हैं कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर, जिसका वे विरोध करते हैं, वास्तव में वापस आए हुए प्रभु यीशु हैं। परमेश्वर के सार्वजनिक रूप से प्रकट होने पर, वे अपने दाँतों को पीसते और अपनी छाती को पीटते हुए केवल रोएँगे। यह पूरी तरह से प्रकाशितवाक्य की पुस्तक के वचनों को पूरा करता है, "देखो, वह बादलों के साथ आनेवाला है, और हर एक आंख उसे देखेगी, वरन जिन्होंने उसे बेधा था वे भी उसे देखेंगे, और पृथ्वी के सारे कुल उसके कारण छाती पीटेंगे। हां। आमीन" (प्रकाशितवाक्य 1:7) अंततः महान श्वेत सिंहासन का न्याय आरम्भ होता है! सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "राज्य में, सृष्टि की असंख्य चीज़ें पुनःजीवित होना प्रारम्भ हो रही हैं और अपनी जीवन शक्ति फिर से प्राप्त करती हैं। पृथ्वी की दशा में परिवर्तन के कारण, पुरानी भूमि और दूसरी भूमि के बीच की सीमाएँ भी परिवर्तित हो रही हैं। मैं ने पहले से ही भविष्यवाणी की थीः जब भूमि से भूमि विभाजित हो जाती है, और भूमि से भूमि जुड़कर एक हो जाती है, तो यह वह समय है जब मैं राष्ट्र को टुकड़े टुकड़े कर दूँगा। इस समय, मैं सारी सृष्टि को फिर से नया करूँगा और पूरी सृष्टि को पुनःविभाजित करूँगा, इस प्रकार पूरे विश्व को क्रम में रखूँगा, और उसकी पुरानी दशा को रूपान्तरित करके नया कर दूँगा। यह मेरी योजना है। ये मेरे कार्य हैं। जब संसार के सभी राष्ट्र और सभी लोग मेरे सिंहासन के सामने आते हैं, तब मैं स्वर्ग की सारी भेंटों को लेकर उन्हें मानवीय संसार को दे दूँगा, जिससे, मेरे कारण, वह बेजोड़ उपहारों से लबालब भर जाएगा। किन्तु जितने लम्बे समय तक पुराना संसार निरन्तर बना रहता है, मैं अपने प्रचण्ड क्रोध को सभी राष्ट्र के ऊपर तेजी से भेजूँगा, सारे विश्व में खुले तौर पर अपनी प्रशासनिक आज्ञाओं की घोषणा करूँगा, और जो कोई उनका उल्लंघन करता है उनको ताड़ना दूँगा । जैसे ही मैं बोलने के लिए विश्व की तरफ आपने चेहरे को घुमाता हूँ, सारी मानवजाति मेरी आवाज़ को सुनती है, और इस प्रकार उन सभी कार्यों को देखती है जिसे मैं ने समूचे विश्व में किया है। वे जो मेरी इच्छा के विरूद्ध जाते हैं, दूसरे शब्दों में, जो मनुष्य के कार्यों से मेरा विरोध करते हैं, वे मेरी ताड़ना के अधीन नीचे गिर जाएँगे। मैं स्वर्ग के असंख्य तारों को लूँगा और उन्हें फिर से नया कर दूँगा, और मेरे कारण सूर्य और चन्द्रमा को नया बना दिया जाएगा-आकाश आगे से वैसा नहीं रहेगा जैसा वह था; पृथ्वी पर बेशुमार चीज़ों को फिर से नया बना दिया जाएगा। सब मेरे वचनों के जरिए पूरे हो जाएँगे। विश्व के भीतर अनेक राष्ट्रों को नए सिरे से अलग अलग हिस्सों में बाँट दिया जाएगा और मेरे राष्ट्र के द्वारा बदल दिया जाएगा, जिससे पृथ्वी के राष्ट्र हमेशा हमेशा के लिए विलुप्त हो जाएँगे और एक राष्ट्र बन जाएँगे जो मेरी आराधना करता है; पृथ्वी के सभी राष्ट्रों को नष्ट कर दिया जाएगा, और वे बने नहीं रहेंगे। विश्व के भीतर मनुष्यों में, वे सभी जो शैतान के हैं उनका सर्वनाश कर दिया जाएगा; वे सभी जो शैतान की आराधना करते हैं उन्हें जलती हुई आग के द्वारा नीचा किया जाएगा-अर्थात्, उनको छोड़कर जो इस धारा के अन्तर्गत हैं, बाकियों को राख में बदल दिया जाएगा। जब मैं बहुत से लोगों को अर्थात् उनको जो धार्मिक संसार में हैं ताड़ना देता हूँ, तो मेरे कार्यों के द्वारा जीत लिए जाने के बाद वे धीरे धीरे मेरे राज्य में वापस आएँगे, क्योंकि उन्होंने बादलों पर सवार पवित्र जन के आगमन को देख लिया होगा। सारी मानवता अपने अपने स्वभाव का अनुसरण करेगी, और जो कुछ उन्होंने किया है उससे भिन्न भिन्न ताड़नाएँ प्राप्त करेगी। वे जो मेरे विरूद्ध खड़े थे सभी नाश हो जाएँगे; जहाँ तक उनकी बात है जिन्होंने पृथ्वी पर अपने कार्यों में मुझे शामिल नहीं किया था, वे, क्योंकि उन्होंने जिस प्रकार अपने आपको दोषमुक्त किया है, पृथ्वी मेरे पुत्रों और मेरे लोगों के शासन के आधीन निरन्तर बने रहेगी। मैं अपने आपको बेशुमार लोगों और असंख्य राष्ट्रों के सामने प्रकट करूँगा, और सारी मानवजाति के लिए किए गए महान कार्य की समाप्ति पर घोषणा करने के लिए अपनी आवाज़ में जोर से चिल्लाऊँगा ताकि वे अपनी आँखों से देख सकें।" (परमेश्वर का सम्पूर्ण ब्रह्मांड के लिए कथनों से वचन देह में प्रकट होता है के "छब्बीसवें कथन" से लिया गया) मानवजाति के इतिहास में, हम देखते हैं कि कैसे सभी दुष्ट ताकतें, जो खुले तौर पर परमेश्वर का विरोध और उन्मत्त रूप से परमेश्वर का प्रतिरोध करती हैं, परमेश्वर द्वारा नष्ट कर दी जाती हैं। तीन हजार साल पहले, उनके गंभीर पापों के परिणामस्वरूप, सदोम और अमोरा के शहर आग और गंधक से झुलस गए थे जिसे परमेश्वर ने स्वर्ग से भेजा था। ऐसे ही रोमन साम्राज्य भी प्रभु यीशु के प्रति इसके प्रतिरोध एवं निंदा और मसीहियों के इसके उत्पीड़न की वजह से परमेश्वर से भेजी गई विपत्तियों द्वारा नष्ट कर दिया गया था। अंतिम दिनों में, परमेश्वर की निंदा और प्रतिरोध करने वाली कोई भी दुष्ट ताकत परमेश्वर द्वारा अभिशप्त हो जाएगी और निश्चित रूप से उसके द्वारा नष्ट कर दी जाएगी। यह वास्तव में परमेश्वर का धर्मी स्वभाव है!

सर्वशक्तिमान परमेश्वर कहते हैं, "परमेश्वर का राज्य मानवता के मध्य विस्तार पा रहा है, यह मानवता के मध्य बन रहा है, यह मानवता के मध्य खड़ा हो रहा है; ऐसी कोई भी शक्ति नहीं है जो मेरे राज्य को नष्ट कर सके। ... तुम निश्चय ही , मेरी रोशनी के नेतृत्व में, अंधकार की शक्तियों के गढ़ को तोड़ पाओगे। तुम अंधकार के मध्य निश्चय ही मार्गदर्शन करने वाली ज्योति से वंचित नहीं रहोगे। तुम निश्चय ही सम्पूर्ण सृष्टि पर स्वामी होगे। तुम शैतान पर निश्चय ही विजयी बनोगे। तुम निश्चय ही महान लाल ड्रैगन के राज्य के पतन को देखोगे और मेरी विजय की गवाही के लिए असंख्य लोगों की भीड़ में खड़े होगे। तुम निश्चय ही पाप के देश में दृढ़ और अटूट खड़े रहोगे। तुम जो कष्ट सह रहे हो, उनके मध्य तुम मेरे द्वारा आने वाली आशीषों को प्राप्त करोगे और मेरी महिमा के भीतर के ब्रह्माण्ड में निश्चय ही जगमगाओगे।" (सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के लिए परमेश्वर का कथन से वचन देह में प्रकट होता है के "उन्नीसवाँ कथन" से लिया गया) "जब कार्य के तीनों पड़ाव समाप्ति पर पहुँचेंगे, तो ऐसे लोगों का समूह बनेगा जो परमेश्वर के प्रति गवाही धारण करते हैं, ऐसे लोगों का एक समूह जो परमेश्वर को जानता होगा। ये सभी लोग परमेश्वर को जानेंगे और सत्य को व्यवहार में लाने में समर्थ होंगे। वे मानवता और बोध को धारण करेंगे और परमेश्वर के उद्धार के कार्य के तीनों पड़ावों को जानेंगे। यही कार्य अंत में पूर्ण होगा, और यही लोग 6000 साल के प्रबंधन के कार्य के सघन रूप हैं और शैतान की अंतिम पराजय के सबसे शक्तिशाली गवाह हैं। जो परमेश्वर के लिए गवाही धारण कर सकते हैं वे ही परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं और आशीषों को प्राप्त कर पाएँगे और ऐसा समूह होंगे जो अंत तब बना रहेगा, जो परमेश्वर के अधिकार को और उसकी गवाही को धारण करेगा। हो सकता है कि तुम्हारे बीच जो लोग हैं वे सभी इस समूह के एक सदस्य बन सकते हों, या शायद केवल आधे या केवल थोड़े से - यह तुम्हारी इच्छा-शक्ति और अनुसरण पर निर्भर करता है।" ("वचन देह में प्रकट होता है" में "परमेश्वर के कार्यों के तीन पड़ावों को जानना ही परमेश्वर के मार्गों को जानना है") से परमेश्वर का वचन पूरा हो जाएगा, और जो पूरा हो जाएगा वह हमेशा के लिए रहेगा। साम्राज्य का भविष्य उज्ज्वल और वैभवशाली है! सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने मुख्यभूमि चीन में पराजित करने वालों का एक समूह पहले से ही बना लिया है। परमेश्वर का अंतिम दिनों का काम पहले ही पूरा हो चुका है! अब, चीन में उसके गुप्, आगमन के दौरान परमेश्वर द्वारा किया गया प्रायोगिक काम महिमा में समाप्त हो गया है, और शीघ्र ही वह सभी राष्ट्रों और स्थानों पर सार्वजनिक रूप से दिखाई देगा। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के चुने हुए लोग पराजित करने वालों का एक समूह हैं जिसे परमेश्वर ने चीन में बनाया है। पवित्र मिशन का दायित्व ले कर, वे परमेश्वर के काम की गवाही दे रहे हैं और सभी देशों और स्थानों पर परमेश्वर का पवित्र नाम घोषित कर रहे हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार तेजी से दुनिया भर में फैल रहा है। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया पाने और खोजने के लिए सभी राष्ट्रों और स्थानों के लिए इंटरनेट पर निःशुल्क उपलब्ध है। कोई भी इनकार करने की हिम्मत नहीं करता है कि वे परमेश्वर के वचन हैं, और कोई भी इनकार करने की हिम्मत नहीं करता है कि वे सत्य हैं। सत्य के लिए प्यासे और प्रकाश के लिए लालायित अधिकाधिक लोगअंतिम दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के काम को तलाश रहे हैं और उसकी जाँच-पड़ताल कर रहे हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया की शाखाएँ दुनिया भर के दर्जनों प्रमुख देशों और क्षेत्रों में स्थापित की गई हैं क्योंकि अधिकाधिक लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर की ओर लौटते हैं। मानव-जाति परमेश्वर के वचन के बीच धीरे-धीरे जाग रही है, और उसने सत्य को स्वीकार करना और जानना शुरू कर दिया है। परमेश्वर का वचन समस्त मानव-जाति का मार्गदर्शन करेगा और हर चीज को पूरा करेगा। सभी लोग जो वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करते हैं और सही मार्ग की खोज करते हैं, निश्चित रूप से परमेश्वर की ओर लौट आएँगे और उसके सिंहासन के सामने आज्ञाकारी बनेंगे, और समस्त मानव-जाति जान जाएगी कि परमेश्वर आ गए हैं, और प्रकट हुए हैं, और यह कि उसका नाम समस्त मानव-जाति के बीच निश्चित रूप से महान होगा।