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सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया अस्तित्व में कैसे आई?

ईसाई धर्म की कलीसियाओं की तरह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया भी देहधारी परमेश्वर के कार्य के कारण अस्तित्व में आई। ईसाई धर्म की कलीसियाएँ देहधारी प्रभु यीशु के प्रकटन और कार्य के कारण बनीं, और सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया आख़िरी दिनों के देहधारी सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रकटन और कार्य के कारण अस्तित्व में आई। इस प्रकार, सभी युगों में कलीसियाओं की उत्पत्ति देहधारी परमेश्वर के प्रकटन और कार्य के कारण हुई है। परमेश्वर के देह्धारण के प्रत्येक चरण का कार्य कई सच्चाइयों को अभिव्यक्त करता है, और बहुत से लोग परमेश्वर द्वारा अभिव्यक्त इन सत्यों की वजह से परमेश्वर को स्वीकारते हैं और उनका अनुसरण करते हैं, इस तरह कलीसियाओं को जन्म देते हैं। इससे यह देखा जा सकता है कि कलीसियाएँ उन लोगों से बनती हैं जो परमेश्वर के कार्य को स्वीकारते हैं और उनका अनुसरण करते हैं। परमेश्वर के चुने हुए लोगों के इन समागम को कलीसियाएँ कहा जाता है। ईसाई धर्म की कलीसियाओं को दो हज़ार साल पहले देहधारी प्रभु यीशु के प्रकटन और कार्य द्वारा उत्पादित किया गया। प्रभु यीशु ने प्रचार किया, "मन फिराओ क्योंकि स्वर्ग का राज्य निकट आया है।" (मत्ती 4:17)। और उन्होंने छुटकारे का कार्य किया, और उन सच्चाइयों को व्यक्त किया जिन्हें अनुग्रह के युग के लोगों को व्यवहार में लाना था और जिनमें उन्हें प्रवेश करना था, बहुत से लोग तब परमेश्वर पर विश्वास करने लगे और उनका अनुसरण करने लगे, और इस तरह से उस समय की कलीसियाएँ अस्तित्व में आईं। बाद में, प्रभु यीशु का सुसमाचार हर देश और क्षेत्र में फैल गया, आखिरी दिनों तक जब यह पृथ्वी के छोर तक फैल चूका था और इस प्रकार ईसाई कलीसियाएँ हर देश में उभर आईं। ये अनुग्रह के युग की कलीसियाएँ थीं। आखिरी दिनों के अंतिम चरण के दौरान, देहधारी सर्वशक्तिमान परमेश्वर मुख्य भूमि चीन में प्रकट होते हैं और कार्य करते हैं। अनुग्रह के युग के दौरान प्रभु यीशु द्वारा किये गए छुटकारे के कार्य की नींव पर सर्वशक्तिमान परमेश्वर बाइबल में की गई भविष्यवाणी के अनुसार यह कार्य करते हैं "पहले परमेश्‍वर के लोगों का न्याय किया जाए" (1 पतरस 4:17))। सभी मानव जाति के लिए, परमेश्वर की छह हजार वर्षीय प्रबंधन योजना के सभी रहस्यों को सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रकट करते हैं, और मानव जाति की शुद्धि और उद्धार के लिए सभी सच्चाइयों को व्यक्त करते हैं। आखिरी दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रकटन और कार्य के कारण, धार्मिक जगत के हर पंथ और संप्रदाय के कई लोगों ने, उन लोगों ने जिन्होंने परमेश्वर पर कई वर्षों से विश्वास किया है, अंततः परमेश्वर की आवाज़ को सुना है और यह देखा है कि प्रभु यीशु आ गए हैं और उन्होंने आखिरी दिनों के न्याय का कार्य किया है। उन्होंने यह सत्यापित किया है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रभु यीशु की वापसी हैं, और इसी वजह से उन्होंने आखिरी दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य को स्वीकार किया है। मुख्य भूमि चीन में कम से कम लाखों लोगों ने (चीनी कम्युनिस्ट सरकार के आंकड़ों के मुताबिक कई-कई लाख लोगों ने) सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार किया है और अब उनका अनुसरण करते हैं। इस प्रकार, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया देहधारी सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रकटन और कार्य का परिणाम है। यह स्वयं सर्वशक्तिमान परमेश्वर के द्वारा स्थापित की गई थी, और किसी व्यक्ति के द्वारा नहीं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया में हर ईसाई पूरी तरह से स्वीकार करता है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर प्रभु यीशु, अंतिम दिनों के मसीह, की वापसी हैं और परमेश्वर के प्रकटन हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के ईसाई सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम प्रार्थना करते हैं। वे जो पढ़ते हैं, सुनते हैं, और जिस पर सहभागिता करते हैं, वे सब सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन हैं, और जिसे वे धारण किये रहते हैं वे सभी सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा व्यक्त सत्य हैं। ये सत्य अनन्त जीवन का मार्ग हैं जिसे आखिरी दिनों के दौरान परमेश्वर लाये। अपने कार्य में, आखिरी दिनों के देहधारी परमेश्वर ने व्यक्तिगत रूप से परमेश्वर द्वारा उपयोग में लाये गए मानव को नियुक्त और प्रमाणित भी किया, ताकि वह परमेश्वर के काम में सहयोग कर सके—ठीक उसी तरह जैसे जब प्रभु यीशु ने कार्य किया था, तो उन्होंने स्वयं बारह प्रेरितों को चुना और नियुक्त किया। तथापि, ये लोग जो परमेश्वर के द्वारा उपयोग में लाये जाते हैं, वे केवल परमेश्वर के कार्य में सहयोग करते हैं, और वे परमेश्वर के स्थान पर काम करने में असमर्थ हैं। कलीसियाएँ उनके द्वारा स्थापित नहीं हुई थीं, और जिन एक पर परमेश्वर के चुने हुए लोग विश्वास करते हैं और जिनका वे अनुसरण करते हैं, वे परमेश्वर द्वारा उपयोग किए जाने वाले व्यक्ति नहीं हैं। अनुग्रह के युग में कलीसियाएँ पौलुस और अन्य प्रेरितों द्वारा स्थापित नहीं की गई थीं, बल्कि प्रभु यीशु के कार्य से उत्पन्न हुई थीं; वे कलीसियाएँ व्यक्तिगत तौर पर प्रभु यीशु द्वारा स्थापित हुई थीं। इसी तरह, आखिरी दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया भी परमेश्वर द्वारा इस्तेमाल किए गए व्यक्ति द्वारा स्थापित नहीं की गई थी, बल्कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य से उत्पन्न हुई थी। यह व्यक्तिगत रूप से सर्वशक्तिमान परमेश्वर द्वारा स्थापित की गई थी, और स्वयं उनके द्वारा इसकी चरवाही होती है; परमेश्वर द्वारा इस्तेमाल किया गया मानव केवल अपने कर्तव्य की पूर्ति करते हुए कलीसियाओं का सिंचन, भरण-पोषण और मार्गदर्शन करता है। यद्यपि परमेश्वर द्वारा इस्तेमाल किए गए व्यक्ति द्वारा परमेश्वर के चुने हुए लोगों का नेतृत्व, सिंचन और भरण-पोषण किया जाता है, जिन एक को परमेश्वर के चुने हुए लोग मानते हैं और जिनका वे अनुसरण करते हैं, वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं--जो कि एक ऐसा तथ्य है जिससे कोई भी इनकार नहीं कर सकता। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के अधिकांश लोग कई पंथों और संप्रदायों से हैं, जिन्होंने कई वर्षों से प्रभु में विश्वास किया है। वे सभी बाइबल को समझते हैं, और इन विभिन्न पंथों और संप्रदायों में वे यह प्रमाणित करते हैं कि प्रभु यीशु आ गए हैं, कि वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर हैं, और उन्होंने आखिरी दिनों के न्याय का कार्य किया है। यह देखने के परिणामस्वरूप कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन सच्चाई हैं, और परमेश्वर की वाणी हैं, बहुत से लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर को स्वीकार करने के लिए आते हैं। वे लोगों के पहले समूह हैं जो परमेश्वर के सामने पहुँचे हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया ईसाई धर्म, कैथलिक पंथ, और अन्य पंथों और संप्रदायों के लोगों से उत्पन्न हुई थी जिन्होंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के नाम को स्वीकार कर लिया था। आज, विभिन्न पंथों और संप्रदायों के अधिकांश लोगों ने आखिरी दिनों के सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कार्य की जांच शुरू कर दी है, इस प्रकार बाइबल की इस भविष्यवाणी को पूरा करते हुए कि "हर जाति के लोग धारा के समान उसकी ओर चलेंगे।" (यशायाह 2:2)। अंततः, जो लोग परमेश्वर में वास्तव में विश्वास करते हैं, वे सर्वशक्तिमान परमेश्वर को लौट आएँगे; यह अनिवार्य है, क्योंकि यह लंबे समय से परमेश्वर द्वारा नियोजित था, यह परमेश्वर का आदेश है, और इसे कोई बदल नहीं सकता!