ईसाइयों पर सीसीपी के क्रूर उत्पीड़न के तथ्य, एपिसोड 15 : उत्पीड़न का अग्रिम मोर्चा बने परिसर : परमेश्वर में आस्था के कारण छात्र-छात्राएँ कॉलेज छोड़ने को बाध्य, उनका ब्रेनवॉश और उन्हें जेल की सजा
06 मई, 2026
सीसीपी ने हमेशा धार्मिक विश्वास का उत्पीड़न किया है, यह देश भर के परिसरों में आस्था रखने वाले छात्र-छात्राओं को भी नहीं बख्शती। यह लंबे समय से परिसरों में धर्म-विरोधी दुष्प्रचार भी फैला रही है, सभी धर्मों को बाहर रखने की कोशिश कर रही है। यह छात्र-छात्राओं को परमेश्वर में विश्वास रखने से पूरी तरह से मना करती है, परिसरों में सुसमाचार का प्रचार करने की बात तो दूर है। सीसीपी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में प्रचार करती है, "विज्ञान में विश्वास करना मुझसे शुरू होता है," "विज्ञान की वकालत करें और धार्मिक विश्वास को परिसरों से बाहर रखें," "अपने मन को विज्ञान से लैस करें," "विज्ञान की वकालत करने का माहौल बनाने के लिए परिसरों में कुपंथ-विरोधी शिक्षा लाएँ," "पार्टी का इतिहास पढ़ें, अपने दृढ़ विश्वास को मजबूत करें, कुपंथों का बहिष्कार करें और पार्टी का अनुसरण करें," "कुपंथों का बहिष्कार करें और परिसरों में घुसपैठ रोकें" और "कुपंथों का विरोध बच्चों से शुरू होता है।" सीसीपी विशेष रूप से कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अक्सर धर्म-विरोधी सामग्री बाँटती है और विषयगत व्याख्यान आयोजित करती है। यह छात्र-छात्राओं से एक प्रतिज्ञा-पत्र पर हस्ताक्षर करवाती है जिसमें कहा जाता है कि उनका कोई धार्मिक विश्वास नहीं है और छात्र-छात्राओं को परमेश्वर को नकारने और उसकी ईशनिंदा करने के लिए मजबूर करने की हर मुमकिन कोशिश करती है। यह सभी छात्र-छात्राओं को कैमरे के सामने परमेश्वर को नकारने और उसकी ईशनिंदा करने वाली सामग्री सार्वजनिक रूप से पढ़ने को मजबूर करती है ताकि यह तय किया जा सके कि वे परमेश्वर में विश्वास करते हैं या नहीं। यह परमेश्वर में विश्वास करने वाले लोगों को ढूँढ़ निकालने के लिए इन घृणित और दुष्ट तरीकों का इस्तेमाल करती है। जो लोग परमेश्वर में विश्वास करते रहते हैं, उन्हें स्कूल छोड़ने को मजबूर किया जाता है या निष्कासित कर दिया जाता है और कुछ को तो सार्वजनिक सुरक्षा अधिकारियों को भी सौंप दिया जाता है। इस एपिसोड में, हम उन कॉलेज छात्र-छात्राओं की सच्चाई के बारे में रिपोर्ट करेंगे जिन्होंने परमेश्वर में अपनी आस्था के कारण सीसीपी का क्रूर उत्पीड़न सहा है।
00:20 मुख्य अंश
04:21 कॉलेज छात्रा, चेन यांग ने परमेश्वर की ईशनिंदा करने से इनकार किया; जबरन ब्रेनवॉशिंग, निगरानी और उत्पीड़न की शिकार हुई; और उसे निलंबन स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ा
10:31 कॉलेज की एक छात्रा, झांग लिन की स्कूल द्वारा जाँच-पड़ताल की जाती है और अन्य छात्र-छात्राओं के साथ उसे भी कोई धर्म न मानने की प्रतिज्ञा पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा जाता है
14:49 कॉलेज छात्रा, ली शियाओ ने सीसीपी की माँग के अनुसार सवालों के जवाब देने या परमेश्वर को नकारने से इनकार किया; जबरन गिरफ्तार कर उसका ब्रेनवॉश किया गया; उसने शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से भारी पीड़ा सही
26:10 कॉलेज छात्रा, सू वानकिंग परमेश्वर में अपनी आस्था के कारण गिरफ्तार हुई और हिरासत में ली गई, उसे स्कूल छोड़ने के लिए मजबूर किया गया
28:17 कुछ विश्वविद्यालय और डॉक्टरेट छात्र-छात्राओं ने अंतर-प्रांतीय गिरफ्तारियाँ झेलीं, जबकि अन्य को दीर्घकालिक हिरासत में रहने और दिन में तीन बार पूछताछ किए जाने का सामना करना पड़ा
30:48 स्नातकोत्तर छात्रा, लिन शिउवेन सालों पहले अपनी आस्था के कारण गिरफ्तार हुई थी और हिरासत में ली गई थी, स्कूल द्वारा निष्कासित की गई और उसके करियर की संभावनाएँ बर्बाद कर दी गईं