Hindi Sermon Series | हम केवल परमेश्वर की वाणी सुनकर ही प्रभु का स्वागत क्यों कर सकते हैं?

20 जनवरी, 2022

अंत के दिनों में, उद्धारकर्ता सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने प्रकट होकर कार्य किया है, बहुत सारे सत्य व्यक्त किए और न्याय का कार्य कर रहा है। सभी संप्रदायों के बहुत से लोग जो सत्य से प्रेम करते हैं और परमेश्वर के प्रकटन के लिए तरसते हैं, उन्होंने सर्वशक्तिमान परमेश्वर के वचन पढ़े हैं, उन्होंने परमेश्वर की वाणी को पहचाना है और माना है कि सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही लौटकर आया हुआ प्रभु यीशु है। आनंद से भरकर, वे उसके पास लौट आए हैं, वे परमेश्वर के सिंहासन के सामने स्वर्गारोहित किए गए हैं और वे मेमने के विवाह-भोज में शामिल हो रहे हैं। यह प्रभु यीशु की इस भविष्यवाणी को पूरा करता है : "मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं; मैं उन्हें जानता हूँ, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं" (यूहन्ना 10:27)। "देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ" (प्रकाशितवाक्य 3:20)। लेकिन, बहुत से लोग अभी भी बाइबल के इन वचनों से चिपके हुए हैं कि प्रभु बादलों पर आएगा। वे परमेश्वर की वाणी सुनने की जरा-भी कोशिश नहीं करते। परिणामस्वरूप, वे प्रभु का स्वागत करने का मौका चूक गए हैं, आपदाओं में गिरकर विलाप कर रहे हैं और अपने दाँत पीस रहे हैं। तो, हम केवल परमेश्वर की वाणी सुनकर ही प्रभु का स्वागत क्यों कर सकते हैं? सच्ची आस्था की खोज की यह कड़ी सत्य की खोज करने और जवाब पाने में आपका मार्गदर्शन करेगा।

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