परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारण का रहस्य (2)" | अंश 187

परमेश्वर के दैनिक वचन | "देहधारण का रहस्य (2)" | अंश 187

366 |19 अक्टूबर, 2020

अधिक देखें परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर को जानना

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अधिक देखें कलीसियाई जीवन की गवाहियाँ

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जिस समय यीशु ने यहूदिया में कार्य किया था, तब उसने खुलकर ऐसा किया, परंतु अब, मैं तुम लोगों के बीच गुप्त रूप से काम करता और बोलता हूँ। अविश्वासी लोग इस बात से पूरी तरह से अनजान हैं। तुम लोगों के बीच मेरा कार्य बाहर के लोगों के लिए बंद है। इन वचनों, इन ताड़नाओं और न्यायों को केवल तुम लोग ही जानते हो, और कोई नहीं। यह समस्त कार्य तुम लोगों के बीच ही किया जाता है और केवल तुम लोगों के लिए ही प्रकट किया जाता है; अविश्वासियों में से कोई भी इसे नहीं जानता, क्योंकि अभी समय नहीं आया है। यहाँ ये लोग ताड़ना सहने के बाद पूर्ण बनाए जाने के समीप हैं, परंतु बाहर के लोग इस बारे में कुछ नहीं जानते। यह कार्य बहुत अधिक छिपा हुआ है! उनके लिए परमेश्वर का देह बन जाना छिपा हुआ है, परंतु जो इस धारा में हैं, उनके लिए कहा जा सकता है कि वह खुला है। यद्यपि परमेश्वर में सब-कुछ खुला है, सब-कुछ प्रकट है और सब-कुछ मुक्त है, लेकिन यह केवल उनके लिए सही है, जो उसमें विश्वास करते हैं; जहाँ तक शेष लोगों का, अविश्वासियों का संबंध है, उन्हें कुछ भी ज्ञात नहीं करवाया जाता। वर्तमान में तुम्हारे बीच और चीन में जो कार्य किया जा रहा है, वह एकदम छिपाया हुआ है, ताकि उन्हें इसके बारे में पता न चले। यदि उन्हें इस कार्य का पता चल गया, तो वे सिवाय उसकी निंदा और उत्पीड़न के, कुछ नहीं करेंगे। वे उसमें विश्वास नहीं करेंगे। बड़े लाल अजगर के देश में, इस सबसे अधिक पिछड़े इलाके में, कार्य करना कोई आसान बात नहीं है। यदि इस कार्य को खुले तौर पर किया जाता, तो इसे जारी रखना असंभव होता। कार्य का यह चरण इस स्थान में किया ही नहीं जा सकता। यदि इस कार्य को खुले तौर पर किया जाता, तो वे इसे कैसे आगे बढ़ने दे सकते थे? क्या यह कार्य को और अधिक जोखिम में नहीं डाल देता? यदि इस कार्य को छिपाया नहीं जाता, बल्कि यीशु के समय के समान ही किया जाता, जब उसने असाधारण ढंग से बीमारों को चंगा किया और दुष्टात्माओं को निकाला था, तो क्या इसे बहुत पहले ही दुष्टात्माओं द्वारा "बंदी" नहीं बना लिया गया होता? क्या वे परमेश्वर के अस्तित्व को बरदाश्त कर पाते? यदि मुझे अब मनुष्य को उपदेश और व्याख्यान देने के लिए उपासना-गृहों में प्रवेश करना होता, तो क्या मुझे बहुत पहले ही टुकड़े-टुकड़े नहीं कर दिया गया होता? और यदि ऐसा होता, तो मेरा कार्य कैसे जारी रह पाता? चिह्न और चमत्कार खुले तौर पर बिलकुल भी अभिव्यक्त न करने का कारण अपने को छिपाना ही है। इसलिए, मेरा कार्य अविश्वासियों द्वारा देखा, खोजा या जाना नहीं जा सकता। यदि कार्य के इस चरण को अनुग्रह के युग में यीशु के तरीके से ही किया जाता, तो यह उतना सुस्थिर नहीं हो सकता था, जितना अब है। इसलिए, इस तरह गुप्त रूप से कार्य करना तुम लोगों के और समग्र कार्य के लाभ के लिए है। जब पृथ्वी पर परमेश्वर का कार्य समाप्त हो जाएगा, अर्थात् जब यह गुप्त कार्य पूरा हो जाएगा, तब कार्य का यह चरण एक झटके से प्रकट हो जाएगा। सब जान जाएँगे कि चीन में विजेताओं का एक समूह है; सब जान जाएँगे कि परमेश्वर ने चीन में देहधारण किया है और उसका कार्य समाप्ति पर आ गया है। केवल तभी मनुष्य पर यह प्रकट होगा : चीन ने अभी तक ह्रास या पतन का प्रदर्शन क्यों नहीं किया है? इससे पता चलता है कि परमेश्वर चीन में व्यक्तिगत रूप से अपना कार्य कर रहा है और उसने लोगों के एक समूह को विजेताओं के रूप में पूर्ण बना दिया है।

— 'देहधारण का रहस्य (2)' से उद्धृत

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