परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के बारे में तुम्हारी समझ क्या है?" | अंश 466

परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के बारे में तुम्हारी समझ क्या है?" | अंश 466

0 |30 अगस्त, 2020

यद्यपि तुम लोगों का विश्वास बहुत सच्चा है, फिर भी तुम लोगों में से कोई भी मेरे बारे में अच्छी तरह से समझाने में समर्थ नहीं है और तुम लोगों में से एक भी उन वास्तविकताओं की गवाही देने में समर्थ नहीं है जिन्हें तुम लोग देखते हो। इसके बारे में सोचो। अभी तुम लोगों में से ज्यादातर अपने कर्तव्य में लापरवाह हो, इसके बजाये देह की बातों के पीछे भाग रहे हो, देह को संतुष्ट कर रहे हो और लालच से देह का आनंद ले रहे हो। तुम लोगों के पास थोड़ा सा ही सत्य है। तो फिर कैसे तुम लोग उस सब की गवाही दे सकते हो जिसे तुम लोगों ने देखा है? क्या तुम लोगों को वास्तव में विश्वास है कि तुम लोग मेरे गवाह बन सकते हो? यदि एक दिन उन सब चीजों की गवाही देने में असमर्थ होते हो जो तुमने आज देखी हैं, तो तुम एक सृजन किए गए प्राणी के प्रकार्य को खो चुके होगे। तुम्हारे अस्तित्व का कुछ भी अर्थ नहीं होगा। तुम एक मनुष्य होने के अपात्र होगे। कोई यह भी कह सकता है कि तुम एक मानव नहीं हो! मैंने तुम लोगों पर असीम मात्रा में कार्य किया है। परन्तु क्योंकि वर्तमान में तुम कुछ नहीं सीखते हो, कुछ नहीं जानते हो, और व्यर्थ में कार्य करते हो, इसलिए जब मुझे अपना कार्य का विस्तार करने की आवश्यकता होती है, तो तुम, अवाक और सर्वथा निष्प्रयोजन, भावशून्य दृष्टि से घूरोगे। क्या यह तुम्हें हर समय पापी नहीं बना देगा? जब वह समय आएगा, तो क्या संभवतः तुम सबसे अधिक पछतावा महसूस नहीं कर सकते हो? क्या तुम संभवतः उदासी में नहीं डूब सकते हो? मैं अब यह सारा कार्य ऊबने के कारण नहीं कर रहा हूँ, बल्कि भविष्य के अपने कार्य के लिए नींव रखने के लिए कर रहा हूँ। ऐसा नहीं है कि मैं किसी गतिरोध पर हूँ और मुझे कुछ नया लेकर आना पड़ेगा। तुम्हें समझना चाहिए कि जो कार्य मैं करता हूँ वह बच्चों का खेल नहीं है बल्कि यह मेरे पिता के प्रतिनिधित्व में है। तुम लोगों को यह जानना चाहिए कि यह केवल मैं नहीं हूँ जो यह सब अपने आप कर रहा हूँ। बल्कि, मैं अपने पिता का प्रतिनिधित्व कर रहा हूँ। इसी बीच, तुम लोगों की भूमिका दृढ़ता से अनुसरण करना, आज्ञापालन करना, बदलना और गवाही देना है। तुम लोगों को जो समझना चाहिए वह है कि तुम लोगों को मुझ पर विश्वास क्यों करना चाहिए। यह सबसे अधिक महत्वपूर्ण प्रश्न जो तुम लोगों में से प्रत्येक को समझना चाहिए। मेरे पिता ने, अपनी महिमा के वास्ते, तुम सब लोगों को उसी क्षण मेरे लिए पूर्वनियत कर दिया था जिस समय उसने इस संसार की सृष्टि की थी। यह मेरे कार्य के वास्ते, और उसकी महिमा के वास्ते के अलावा और कुछ नहीं था, कि उसने तुम लोगों को पूर्वनियत कर दिया। यह मेरे पिता के कारण ही है कि तुम लोग मुझ पर विश्वास करते हो; यह मेरे पिता द्वारा पूर्वनियत करने के कारण ही है कि तुम मेरा अनुसरण करते हो। इसमें से कुछ भी तुम्हारा अपना चुनना नहीं है। यहाँ तक कि अधिक महत्वपूर्ण यह है कि तुम लोग यह समझो कि तुम लोग वे हो जिन्हें मेरे लिए गवाही देने के लिए मेरे पिता ने मुझे प्रदान किया है। क्योंकि उसने तुम लोगों को मुझे प्रदान किया है, इसलिए तुम लोगों को उन तौर-तरीकों का जो मैं तुम लोगों को प्रदान करता हूँ और उन तौर-तरीकों और वचनों का जो मैं तुम लोगों को सिखाता हूँ, पालन करना चाहिए, क्योंकि मेरे तौर-तरीकों का पालन करना तुम लोगों का कर्तव्य है। यह मुझ में तुम्हारे विश्वास का मूल उद्देश्य है। इसलिए मैं तुम लोगों से कहता हूँ, कि तुम मात्र वे लोग हो, जिन्हें मेरे पिता ने मेरे तौर-तरीकों का पालन करने के लिए मुझे प्रदान किया है। हालाँकि, तुम लोग सिर्फ़ मुझ में विश्वास करते हो; तुम लोग मेरे नहीं हो क्योंकि तुम इस्राएली परिवार के नहीं हो बल्कि इसके बजाय एक प्रकार के प्राचीन साँप हो। मैं तुम लोगों से सिर्फ़ मेरी गवाही देने के लिए कह रहा हूँ, परन्तु आज तुम लोगों को मेरे तौर-तरीकों में अवश्य चलना चाहिए। यह सब भविष्य की गवाहियों के लिए है। यदि तुम केवल उन लोगों की तरह प्रकार्य करते हो जो मेरे तौर-तरीकों को सुनते हैं, तो तुम्हारा कोई मूल्य नहीं होगा और तुम्हें मेरे पिता के द्वारा तुम लोगों को मुझे प्रदान करना गँवाया हुआ हो जायेगा। तुम्हें कहते हुए जिस पर मैं जोर दे रहा हूँ वह है: कि "तुम्हें मेरे तौर-तरीकों पर चलना चाहिए।"

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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