परमेश्वर के दैनिक वचन | "सर्वशक्तिमान की आह" | अंश 261

02 अगस्त, 2020

संसार में सब कुछ तेज़ी से परिवर्तित हो रहा है, सर्वशक्तिमान के विचारों से, उसकी नजरों के नीचे। मानवजाति ने जिन चीज़ों के बारे में अब तक कभी सुना ही नहीं एकाएक टूट पड़ेगी। तथापि, मानवजाति ने जिन बातों को अब तक अपने अधिकार में रखा है, उसके हाथ से अनजाने में फिसल सकती हैं। सर्वशक्तिमान के ठौर-ठिकाने के बारे में कोई भी समझ नहीं सकता है, इसके अलावा सर्वशक्तिमान के जीवन की सामर्थ की उत्तमता और महानता को कोई महसूस नहीं कर पा रहा है। मनुष्य जो महसूस नहीं कर सकता उसे सर्वशक्तिमान महसूस कर सकता है, इसी में उसकी अलौकिकता होती है। जिस मनुष्य जाति ने, उससे नाता तोड़ लिया, वह फिर भी उसी को बचाता है, उसकी महानता इसमें है। उसे जीवन और मृत्यु का अर्थ मालूम है। इसके अलावा वह मानवजाति, जो उसकी रचना है, उसके जीवन के नियमों को जानता है। वह मनुष्य के अस्तित्व का मूल आधार है और मानवजाति को पुनर्जीवित करने के लिए उसको छुड़ाने वाला भी है। वह प्रसन्नचित हृदय को व्याकुलता से भर देता है और दुखित हृदयों को प्रसन्नता के साथ उठाता है। ये सब उसके कार्य, और उसकी योजनाओं के लिए है।

मनुष्य, जिन्होंने सर्वशक्तिमान के जीवन की आपूर्ति को त्याग दिया, नहीं जानते हैं आखिर वे क्यों अस्तित्व में हैं, और फिर भी मृत्यु से डरते रहते हैं। इस दुनिया में, जहां कोई सहारा नहीं है, सहायता नहीं है, वहाँ बहादुरी के साथ, बिन आत्माओं की चेतना के शरीरों में एक अशोभनीय अस्तित्व को दिखाते हुए मनुष्य, अपनी आंखों को बंद करने में, अभी भी अनिच्छुक है। तुम इनके समान जीते हो, आशाहीन; उसका अस्तित्व इसी प्रकार का, बिना किसी लक्ष्य का है। किंवदन्ती में मात्र एक ही पवित्र जन है जो उन्हें बचाने के लिए आएगा जो कष्ट से कराहते हैं और उसके आगमन के लिए हताश होकर तड़पते हैं। इन लोगों में जो अचेत हैं अभी यह विश्वास जगाया नहीं जा सकता है। फिर भी लोगों में ऐसा प्राप्त करने की लालसा है। वे जो बुरी तरह से दुख में हैं सर्वशक्तिमान उन पर करुणा दिखाता है। साथ ही, वह उन लोगों से ऊब चुका है जो होश में नहीं है, क्योंकि उसे उनसे प्रत्युत्तर पाने में लंबा इंतजार करना पड़ता है। वह खोजने की इच्छा करता है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारी आत्मा को ढूंढता है। वह तुम्हें भोजन-पानी देना चाहता है, जगाना चाहता है, ताकि तुम फिर और भूखे और प्यासे न रहो। जब तुम थके हो और इस संसार में खुद को तन्हा महसूस करने लगो तो, व्याकुल मत होना, रोना मत। सर्वशक्तिमान परमेश्वर, रखवाला, किसी भी समय तुम्हारे आगमन को गले लगा लेगा। वह तुम्हारे ऊपर नज़र रखे हुए है, वह तुम्हारे लौटने की प्रतीक्षा में बैठा है। वह उस दिन की प्रतीक्षा में है जब तुम्हारी याददाश्त एकाएक लौट आयेगी: और इस सत्य को पहचान लेगी कि तुम परमेश्वर से ही आए हो, किसी तरह और किसी जगह एक बार बिछड़ गए थे, सड़क के किनारे बेहोश पड़े थे, और फिर अनजाने में एक पिता आ गया। और फिर तुम्हें यह भी एहसास हो कि सर्वशक्तिमान निरंतर देख रहा था, तुम्हारे लौटकर आने की प्रतीक्षा कर रहा था। वह अत्यधिक लालायित है, बिना प्रत्युत्तर के जवाब के आस में बैठा है। उसका प्रतीक्षा करना अनमोल है, और यह मनुष्य के हृदय और उसकी आत्मा के लिए है। संभवतः यह प्रतीक्षा अनिश्चित है, शायद यह प्रतीक्षा अपनी अंतिम बेला में है। परंतु तुम्हें ठीक से जान लेना चाहिए कि तुम्हारा हृदय और तुम्हारी आत्मा इस क्षण कहाँ है।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

परमेश्वर तुम्हारे हृदय और रूह को खोज रहा

मानव, जिन्होंने त्यागा है सर्वशक्तिमान का दिया जीवन, अस्तित्व में क्यों वे हैं जानें ना, फिर भी डरते हैं मृत्यु से। न कोई सहारा, न मदद, फिर भी मानव आँखों को बंद करने में अनिच्छुक है, ज़ुर्रत कर, दिखाता है एक अशोभनीय अस्तित्व, इस जहां में, बिन आत्माओं की चेतना के शरीरों में। जीते हो तुम आशा के बिन। जैसे जीता है वो लक्ष्य के बिन। रिवायत में एक ही बस पवित्र जन है, रिवायत में एक ही बस पवित्र जन है, आएगा जो बचाने उन्हें रोएं जो कष्ट से और हताश हो तड़पते हैं उसके आगमन के लिए। इन लोगों में जो हैं अभी अचेत, यह विश्वास नहीं है जगाया जा सकता। फिर भी लोगों में इसे प्राप्त करने की इच्छा है।

सर्वशक्तिमान को है करुणा उनपे जो पीड़ा में हैं। और साथ ही वो ऊब चुका है इनसे जो हैं बेहोश, क्योंकि करना होता है उसको बहुत इंतज़ार मनुष्य से पाने को जवाब। वो चाहता है ढूंढना तुम्हारे दिल और रूह को। वो देना चाहता है भोजन और पानी तुम्हें। जगाना चाहता है, वो तुम्हें ताकि तुम भूखे और प्यासे न रहो। और जब तुम थक जाते हो, और जब तुम खुद को अकेला पाते हो, अपने इस संसार में, न घबराना तुम, न रोना तुम। सर्वशक्तिमान ईश्वर, किसी भी समय तुम्हारे आगमन को गले लगा लेगा।

निगरानी वो कर रहा, इंतज़ार में तुम्हारे लौटने के। तुम्हारे याददाश्त लौटने का इंतज़ार वो कर रहा, तुम्हारे जान जाने का कि तुम परमेश्वर से ही आये हो, यह सत्य कि आये हो तुम परमेश्वर से ही। एक दिन तुम राह खो कर, किसी तरह कहीं पे, पड़े थे बेहोश किनारे एक सड़क के, और फिर अनजाने में मिला तुमको "पिता"। तुम्हें हो एहसास कि सर्वशक्तिमान वहां पहरे पर है। इंतज़ार कर रहा है तुम्हारे वापस लौट आने का, एक अरसे से।

वो बेहद चाहता है। वो करता इंतज़ार प्रत्युत्तर के लिए बिन किसी जवाब के। उसका इंतज़ार है अनमोल और यह है दिल के लिए, मानव के रूह और दिल के लिए। ये इंतज़ार शायद सदा ही रहेगा, या शायद ये इंतज़ार अब अंत होने को है। पर जानना तुम्हें है चाहिए, कहाँ है तुम्हारा दिल और रूह? कहाँ हैं वे?

'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से

और देखें

सभी विश्वासी यीशु मसीह की वापसी के लिए तरस रहे हैं। क्या आप उनमें से एक हैं? हमारी ऑनलाइन सहभागिता में शामिल हों और आपको परमेश्वर से फिर से मिलने का अवसर मिलेगा।

साझा करें

रद्द करें