Christian Song | सृष्टिकर्त्ता की सच्ची भावनाएँ मानवता के लिए | 2026 प्रशंसा की आवाजें
14 जनवरी, 2026
योना की पुस्तक 4:10-11 में यह अंश दर्ज किया गया है : "तब यहोवा ने कहा, तू रेंड़ के उस पेड़ को दिल में सँजोए है जिसे तूने न उगाया, न बड़ा करने में मेहनत की; जो एक रात में उग आया और एक रात में नष्ट हो गया : तो क्या मुझे उस बड़े शहर नीनवे को नहीं सँजोना चाहिए, जिसमें एक लाख बीस हजार से अधिक ऐसे लोग हैं जो अपने दाएँ-बाएँ हाथ का भेद नहीं पहचान सकते और साथ ही बहुत-सा पशुधन भी है?" ये यहोवा परमेश्वर के वास्तविक वचन हैं, जो परमेश्वर और योना के बीच हुई बातचीत के हैं। यद्यपि यह संवाद संक्षिप्त है, फिर भी यह मानवजाति को त्याग देने की सृष्टिकर्ता की अनिच्छा और मानवजाति के प्रति उसकी परवाह से भरा हुआ है। ये वचन उस सच्चे रवैये और भावनाओं को व्यक्त करते हैं जो परमेश्वर अपने सृजित प्राणियों के लिए अपने हृदय में रखता है। ये वचन परमेश्वर द्वारा स्पष्ट भाषा में मानवजाति के प्रति अपने सच्चे इरादों का ऐसा कथन भी हैं जिसे सुनना मनुष्य के लिए दुर्लभ है।
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सृष्टिकर्ता हर समय मनुष्य के बीच है; वह हमेशा मनुष्य और सभी चीजों के साथ वार्तालाप करता रहता है और वह प्रतिदिन नए कर्म कर रहा है। उसका सार और स्वभाव मनुष्य के साथ उसके संवाद में अभिव्यक्त होते हैं; उसके विचार और सोच पूरी तरह से उसके कर्मों में प्रकट होते हैं; वह हर समय मनुष्य के साथ रहता है और उसका अवलोकन करता है। वह अपने मौन वचनों का इस्तेमाल करके समस्त चीजों और मानवजाति को चुपचाप यह बताता है : "मैं स्वर्ग में हूँ और मैं सभी चीजों के मध्य हूँ। मैं रखवाली कर रहा हूँ, मैं इंतजार कर रहा हूँ; मैं तुम्हारे साथ हूँ...।"
2
उसके हाथ गर्माहट से भरे और मजबूत हैं, उसके कदम हल्के हैं, उसकी वाणी कोमल और सुखद है; समूची मानवजाति को आलिंगन में लिए हुए उसका स्वरूप गुजरता और घूमता है; उसका मुखमंडल सुंदर और सौम्य है। वह कभी हमें छोड़कर नहीं गया, कभी विलुप्त नहीं हुआ। दिन-रात, वह मानवजाति का निरंतर साथी है, वह उसका साथ कभी नहीं छोड़ता। मानवजाति के लिए उसकी समर्पित देखभाल और विशेष स्नेह, मनुष्य के लिए उसकी सच्ची चिंता और प्रेम, जब उसने नीनवे नगर को बचाया, तब धीरे-धीरे प्रकट हुए। विशेष रूप से यहोवा परमेश्वर और योना के बीच के संवाद ने उस मानवजाति के लिए सृष्टिकर्ता की कोमलता को पूरी तरह प्रकट किया, जिसे स्वयं उसने रचा था। इन वचनों से, तुम मानवजाति के प्रति परमेश्वर की सच्ची भावनाओं की गहरी समझ हासिल कर सकते हो ...
—वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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