परमेश्वर के दैनिक वचन | "आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 15" | अंश 52

सर्वशक्तिमान परमेश्वर! उसका गौरवशाली शरीर खुले रूप से प्रकट होता है, पवित्र आध्यात्मिक शरीर उदय होता है और वह स्वयं पूर्ण परमेश्वर है! दुनिया और देह दोनों बदल गए हैं और पहाड़ी पर उसका रूप-परिवर्तन परमेश्वर का व्‍यक्तित्‍व है। वह अपने सिर पर सुनहरा मुकुट पहने हुए है, उसके वस्त्र पूर्ण रूप से श्वेत हैं, छाती पर सोने की पटुका बाँधे हुए है और दुनिया की सभी चीज़ें उसकी चरण-पीठ हैं। उसकी आँखें आग की ज्वाला के समान हैं, उसके मुख में तेज़ दोधारी तलवार है और वह अपने दाहिने हाथ में सात तारे लिए हुए है। राज्य का मार्ग असीम उज्ज्वल है और उसकी महिमा उदित हो रही और चमक रही है; पर्वत आनंदित हैं और जल हास्‍य मग्‍न हैं, सूर्य, चंद्रमा और तारे सभी अपनी क्रमबद्ध व्यवस्था में घूमते हैं, और अद्वितीय, सच्चे परमेश्वर का स्वागत करते हैं, जिनकी विजयी वापसी उनके छह हज़ार वर्ष की प्रबंधन योजना को पूरा करती है। ख़ुशी से सब कूदते और नाचते हैं! जय हो! सर्वशक्तिमान परमेश्वर अपने गौरवशाली सिंहासन पर बैठा है! गाओ! सर्वशक्तिमान का विजयी ध्वज राजसी, भव्‍य सिय्योन की ऊंचाई पर लहराता है! सभी राष्ट्र उत्साहित हैं, सभी लोग गा रहे हैं, सिय्योन पर्वत प्रसन्‍नता से हँस रहा है, परमेश्वर की महिमा का उदय हुआ है! मैंने कभी सपनों में भी नहीं सोचा था कि मैं कभी परमेश्वर का चेहरा देखूंगा, लेकिन आज मैंने इसे देखा है। हर दिन उसके साथ आमने-सामने, मैं अपना दिल खोलकर रखता हूं। खाने पीने का सभी कुछ, वह प्रचुरता से प्रदान करता है। जीवन, वचन, कार्य, सोच, विचार—उसका महिमामय प्रकाश इन सभी को उज्जवल करता है। वह रास्ते के हर कदम पर अगुवाई करता है, और यदि कोई दिल विद्रोह करता है तो उसका न्याय तुरंत होगा।

परमेश्वर के साथ मिलकर खाना, साथ रहना, साथ जीना, साथ होना, साथ चलना, साथ आनंद लेना, साथ-साथ महिमा और आशीष प्राप्त करना, परमेश्वर के साथ शासन साझा करना और राज्य में एक साथ होना—ओह कितना आनंददायक है! ओह कितना प्यारा है! हम हर दिन उसके साथ आमने-सामने होते हैं, हर दिन बोलते हैं, निरंतर वार्तालाप करते हैं, हर दिन नई प्रबुद्धता और नई अंतर्दृष्टि प्राप्त करते हैं। हमारी आध्यात्मिक आंखें खुल गई हैं और हम सब कुछ देखते हैं, आत्मा के सभी रहस्य हमें प्रकट होते हैं। पवित्र जीवन कितना निश्चिंत है। तेज़ी से भागो और रुको मत, निरंतर आगे बढ़ो, आगे इससे भी अधिक अद्भुत एक जीवन है। केवल मीठे स्वाद से संतुष्ट न हो, बल्कि हमेशा परमेश्वर में प्रवेश करने का प्रयास करो। वह सर्वव्यापी और प्रचुर है, और उसके पास सभी प्रकार की चीज़ें हैं जिनकी हम में कमी है। सक्रियता से सहयोग करो, उसके अंदर प्रवेश करो और कुछ भी कभी भी पहले जैसा नहीं रहेगा। हमारे जीवन का उत्थान होगा और कोई भी व्यक्ति, मामला या बात हमें परेशान नहीं कर पाएगी।

उत्थान! उत्थान! सच्चा उत्थान! परमेश्वर का जीवन उत्थान भीतर है और सभी वस्तुएं वास्तव में शांत हो जाती हैं! हम दुनिया और सांसारिक चीज़ो से परे चले जाते हैं, पतियों या बच्चों से कोई मोह नहीं रहता। बीमारी और वातावरण के नियंत्रण के परे चले जाते हैं। शैतान हमें परेशान नहीं कर सकता है। सभी आपदाओं से हम ऊपर हो जाते हैं—यह परमेश्वर को शासन की अनुमति देना है! हम शैतान को अपने कदमों के तले कुचल देते हैं, कलीसिया के लिए गवाही देते हैं और पूरी तरह से शैतान के बदसूरत चेहरे को बेनकाब करते हैं। कलीसिया का निर्माण मसीह में है, गौरवशाली शरीर का उदय हुआ है—यह स्‍वर्गारोहण में जीना है!

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

सर्वशक्तिमान परमेश्वर का पवित्र आध्यात्मिक देह प्रकट हो चुका है

प्रकट कर दिया है अपना महिमामय देह, सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने सम्मुख सबके। हो चुका है प्रकट उसका पवित्र देह; स्वयं परमेश्वर है वो: पूर्ण सच्चा परमेश्वर है वो। जगत बदला है पूरा तो बदला है देह भी। परमेश्वर का व्यक्तित्व है रूपांतरण उसका, स्वर्ण मुकुट सिर पर उसके। सफ़ेद लबादा तन पर, स्वर्ण बंध वक्ष पर उसके। हर चीज़ जगत की है चरण-पीठ उसकी, आँखें अग्नि-लौ की मानिंद उसकी, दुधारी तलवार मुख में, दाएं हाथ में सप्त-तारे। राज्य-पथ असीम और प्रकाशमान, उदित होकर जगमगाती महिमा परमेश्वर की। पर्वत जयजयकार करें, जल ख़ुशियाँ मनाएँ; सूरज, चाँद-सितारे घूमें अपनी व्यवस्था में, करें अगवानी एक सच्चे परमेश्वर की, पूरी की जिसने प्रबंधन योजना छ: हज़ार वर्षों की, लौटा है जीतकर!

नाचें-कूदें आनंद मनाएं, जयजयकार करें परमेश्वर की सब। सच्चा सर्वशक्तिमान परमेश्वर! आसीन होता अपने सिंहासन पर सर्वशक्तिमान परमेश्वर! उसके पवित्र नाम का गुणगान करो! सर्वशक्तिमान की विजय-पताका लहराती, भव्य रूप में सिय्योन पर्वत पर! करता हर देश जयजयकार, गाता हर इक जन ऊँचे-साफ़ सुर में! आनंदित है सिय्योन पर्वत, उभर रही है महिमा परमेश्वर की! सोचा न था सपने में भी भेंट कभी होगी उससे, पर आज हुई भेंट सचमुच परमेश्वर से। रूबरू होता हूँ हर दिन, खोल देता हूँ दिल अपना आगे उसके। स्रोत है मेरे खान-पान का परमेश्वर, हर चीज़ की आपूर्ति करता परमेश्वर। जीवन, वचन, चिंतन, विचार और क्रियाएं, चमके उसकी महिमा उन पर जब वो हर कदम पर राह दिखाए। नाफ़रमानी करे कोई दिल अगर, न्याय फ़ौरन आ जाए, न्याय फ़ौरन आ जाए।

खाऊँ-पिऊँ, रहूँ साथ परमेश्वर के; आनंद मनाऊँ और साथ चलूँ परमेश्वर के। पाऊँ महिमा और आशीष एक साथ, राज करूँ उसके राज्य में उसके साथ। ओह, इतना आनंद! और इतनी मधुरता! रूबरू उसके हर दिन, वो हमसे बतियाँ करता। करते बातें उससे, प्रबुद्ध होते हर दिन, और देखते कुछ नया हर नये दिन। खुले हमारे नयन आत्मिक, हुए उजागर रहस्य आध्यात्मिक! मुक्त है जीना पवित्र जीवन। रोको न तुम अपने कदम। बढ़ते जाओ आगे-आगे, आगे है एक अद्भुत जीवन। मधुर ज़ायका पा लेना बस नाकाफ़ी है, परमेश्वर की ओर रहो गतिमान तुम। सब चीज़ों का समावेश है, और प्रचुर हैं, अगर कहीं कुछ कम है, तो वो है उसके हाथों में। करो सक्रिय सहयोग, करो प्रवेश उसके अंतर में, नहीं रहेगा फिर कुछ भी पहले जैसा। ऊँचा होगा जीवन हमारा, न कर पाएगा परेशान कोई इंसान, कोई बात, न चीज़ कोई।

'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से

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