ईसाइयों पर सीसीपी के क्रूर उत्पीड़न के तथ्य, एपिसोड 6 : बुजुर्ग ईसाइयों के खून और आँसू—अपनी आस्था पर कायम रहने के कारण 79 वर्षीया बुजुर्ग को सता-सताकर मार डाला गया
17 फ़रवरी, 2026
2024 सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया के खिलाफ सीसीपी के "तीन-वर्षीय कड़े संघर्ष" का पहला साल था। साल की शुरुआत से ही, देश भर में ईसाइयों की गिरफ्तारियाँ लगातार जारी रहीं। 23 मई 2024 को, अनहुई प्रांत के बोझोउ शहर में अधिकारियों ने एक समन्वित गिरफ्तारी अभियान चलाया। 79 वर्षीया चिन मेई और 21 अन्य ईसाइयों को परमेश्वर में उनके विश्वास के कारण उनके घरों से गिरफ्तार कर लिया गया। इस बार हिरासत में लिए जाने के बाद, हिरासत केंद्र के लोगों ने बार-बार चिन मेई और अन्य को "तीन कथन" (गारंटी पत्र, पश्चात्ताप पत्र और परित्याग पत्र) पर हस्ताक्षर करने और अपनी आस्था छोड़ने के लिए मजबूर करने की कोशिश की। चिन मेई और अन्य लोग नहीं झुके और उन्हें शारीरिक दंड दिया गया, उन्हें दिन में 13 से 14 घंटे सख्त लकड़ी के तख्ते पर बैठने के लिए मजबूर किया गया। उन्हें पालथी मारकर, अपने घुटनों पर हाथ रखकर और अपने शरीर को बिल्कुल सीधा और स्थिर रखकर बैठना पड़ता था। चिन मेई के नकली दाँत भी जब्त कर लिए गए, जिससे उनके लिए खाना मुश्किल हो गया। यह लंबा शारीरिक दंड उस बुजुर्ग और कमजोर महिला की बर्दाश्त से बाहर था। केवल 21 दिन बाद, हिरासत केंद्र में चिन मेई को यातना देकर मार डाला गया और वे सीसीपी के हाथों शहीद हो गईं। इसके अलावा, जीवित बचे ईसाइयों को सीसीपी की यातना के परिणामस्वरूप कई बीमारियों ने जकड़ लिया। यह रिपोर्ट ईसाइयों पर सीसीपी के उत्पीड़न की सच्चाई को उजागर करना जारी रखेगी।