ईसाइयों पर सीसीपी के क्रूर उत्पीड़न के तथ्य, एपिसोड 11 : अपनी आस्था पर अडिग रहने के कारण एक ईसाई को पाँच साल की जेल
01 अप्रैल, 2026
सितंबर 2020 में सर्वशक्तिमान परमेश्वर की कलीसिया को पूरी तरह से समाप्त करने के लिए सीसीपी अधिकारियों ने तीन साल का "पूर्ण युद्ध" शुरू किया। शानदोंग प्रांत में, जो ईसाइयों के उत्पीड़न वाले सबसे गंभीर क्षेत्रों में से एक है, नवंबर 2020 में सीसीपी पुलिस द्वारा एक समन्वित सामूहिक गिरफ्तारी के जरिए जीबो शहर में एक ही दिन में कम से कम 120 ईसाइयों को हिरासत में लिया गया। उन्हें यातना देकर उनसे पूछताछ की गई, उनका जबरन वैचारिक परिवर्तन किया गया, अपनी आस्था छोड़ने के लिए उन पर "तीन कथन" पर हस्ताक्षर करने का दबाव डाला गया और उन्हें क्रूर यातनाएँ दी गईं या जेल की सजा भी सुनाई गई। हाल ही में हमने लियू चिंग नामक एक ईसाई का साक्षात्कार लिया जो हाल ही में अपनी सजा पूरी करने के बाद रिहा हुई है। अपनी आस्था पर अडिग रहने के कारण सीसीपी द्वारा उसे पाँच साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। अपनी गिरफ्तारी के समय वह केवल 24 वर्ष की थी और उसने क्रूर उत्पीड़न और अमानवीय दुर्व्यवहार सहा। इस कार्यक्रम में उसकी यादों और कहानी के माध्यम से हम उस दुखद यातना के बारे में जानेंगे जो उसने अपनी आस्था पर अडिग रहने के कारण सही थी।
00:21 मुख्य अंश
03:06 अपनी आस्था के कारण लियू चिंग गिरफ्तार
05:38 पुलिस द्वारा लियू चिंग की पिटाई और पूछताछ, हिरासत केंद्र में जबरन ब्रेनवॉश
07:48 लियू चिंग और 120 से अधिक ईसाइयों को एक महीने से अधिक समय तक ब्रेनवॉश के लिए एक होटल में हिरासत में रखा गया
12:46 अपनी आस्था के लिए 5 साल की सजा, लियू चिंग ने लंबे समय यातना और ब्रेनवॉश को झेला
16:39 यातना का पहला दौर : जबरन मिलिट्री-स्टाइल में उकडूँ बिठाया, पिटाई की और भूखा रखा गया
25:17 यातना का दूसरा दौर : सामूहिक पिटाई की, ठंडा पानी डाला, परिवार को कोसने वाली बातें लिखने के लिए मजबूर किया गया और छोटे स्टूल पर बैठने की सजा दी गई
32:37 यातना का तीसरा दौर : चिलचिलाती धूप में जबरन मिलिट्री-स्टाइल में खड़े रहने और हाथ हिलाने का अभ्यास कराया गया
37:55 ब्रेनवॉश और यातना विफल रही; लियू चिंग से जबरन कड़ी मेहनत करवाई गई, जिसके कारण कई स्थायी स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा हो गईं