Hindi Christian Testimony Video, एपिसोड 684: मैं क्यों अपनी राय व्यक्त करने से हमेशा डरती थी
12 जून, 2026
उसने कलीसिया में धर्मोपदेशों का मूल्यांकन करने का कर्तव्य निभाया। कुछ समय बाद, उसने चर्चाओं के दौरान बार-बार गलतियाँ कीं, जिससे वह अत्यधिक सतर्क हो गई। जब उसके पास विचार होते थे, तब भी वह अपनी सहयोगी के पहले बोलने का इंतजार करती थी, जिससे काम की प्रगति धीमी हो गई। पर्यवेक्षक द्वारा सुधारे जाने और मदद किए जाने के बाद ही उसने सत्य की खोज शुरू की। आत्म-चिंतन के माध्यम से, उसने अपने विचारों को व्यक्त करने में लगातार झिझक के पीछे कौन-सा भ्रष्ट स्वभाव छिपा पाया? आइए शिन चुन का अनुभव सुनें।
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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