Hindi Christian Song | जब मानवजाति विश्राम में प्रवेश कर चुकी होगी

23 जून, 2026

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जब एक बार मानवजाति विश्राम में प्रवेश कर लेगी तो बुरे कर्म करने वाले नष्ट किए जा चुके होंगे और समस्त मानवता सही मार्ग पर होगी; जो भूमिकाएँ उन्हें निभानी चाहिए उनके आधार पर सभी प्रकार के लोग अपनी-अपनी किस्म के अनुसार छाँटे जाएँगे। केवल यही मानवता के विश्राम का दिन होगा, केवल यही मानवता के विकास की अपरिहार्य प्रवृत्ति है। जब मानवता विश्राम में प्रवेश करेगी, केवल तभी परमेश्वर के महान कार्य का अंततः समापन होगा; यह उसके कार्य का अंतिम भाग होगा। यह कार्य मानवता के समस्त पतनशील दैहिक जीवन का अंत करेगा, साथ ही यह भ्रष्ट मानवता के जीवन का अंत करेगा। इसके बाद से मनुष्य एक नए क्षेत्र में प्रवेश करेंगे।

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यद्यपि सभी मनुष्य देह में जिएँगे, किंतु इस जीवन के सार और भ्रष्ट मानवता के जीवन में उल्लेखनीय अंतर होगा। इस अस्तित्व का अर्थ और भ्रष्ट मानवता के अस्तित्व का अर्थ भी भिन्न होगा। यूँ तो यह एक नए प्रकार के व्यक्ति का जीवन नहीं होगा, लेकिन इसे उस मानवता का जीवन कहा जा सकता है जिसे बचा लिया गया है, साथ ही एक ऐसा जीवन जिसमें मानवता और विवेक को पुनः प्राप्त कर लिया गया है। ये वे लोग होंगे जो कभी परमेश्वर के खिलाफ विद्रोहशील थे, जिन्हें परमेश्वर द्वारा जीत लिया गया है और फिर उसके द्वारा बचा लिया गया है; ये वे लोग होंगे जिन्होंने परमेश्वर का अनादर किया और बाद में उसकी गवाही दी। उसकी परीक्षा से गुजर चुकने और बचने के बाद उनका अस्तित्व सबसे अधिक सार्थक अस्तित्व होगा; ये वे लोग होंगे जिन्होंने शैतान के सामने परमेश्वर की गवाही दी और वे मनुष्य होंगे जो जीने के योग्य हैं।

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पूरी तरह असफल हो चुकने के बाद शैतान फिर कभी मानवता को परेशान नहीं करेगा और इसलिए मनुष्यों में अब और भ्रष्ट शैतानी स्वभाव नहीं होंगे। वे विद्रोही लोग पहले ही नष्ट किए जा चुके होंगे और केवल समर्पण करने वाले लोग ही बचे रहेंगे। ऐसे में बहुत थोड़े से परिवार पूरी तरह बचेंगे, तो दैहिक संबंध कैसे बने रह सकते हैं? मानवजाति का अतीत का दैहिक जीवन पूरी तरह निषिद्ध होगा। भ्रष्ट शैतानी स्वभावों के बिना, मानव जीवन अब अतीत का पुराना जीवन नहीं रहेगा, बल्कि एक नया जीवन होगा। अभी लोगों के बीच दैहिक संबंध विद्यमान हैं, लेकिन जब सभी विश्राम में प्रवेश कर लेंगे तो ये संबंध आगे विद्यमान नहीं रहेंगे। केवल इस प्रकार की मानवता में ही धार्मिकता और पवित्रता होगी; केवल इस प्रकार की मानवता ही परमेश्वर की आराधना कर सकती है।

—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, परमेश्वर और मनुष्य साथ-साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे

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