"मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना" | अंश 3

"मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना" | अंश 3

64 |13 जून, 2020

परमेश्वर के दैनिक वचन | "मनुष्य के सामान्य जीवन को पुनःस्थापित करना और उसे एक अद्भुत मंज़िल पर ले जाना" | अंश 3

परमेश्वर में जीवधारियों के प्रति कोई द्वेष नहीं है और वह केवल शैतान को पराजित करना चाहता है। उसके सम्पूर्ण कार्य-चाहे वह ताड़ना हो या न्याय—को शैतान की ओर निर्देशित किया गया है; इसे मानवजाति के उद्धार के लिए सम्पन्न किया जाता है, यह सब शैतान को पराजित करने के लिए है, और इसका एक उद्देश्य है: बिलकुल अन्त तक शैतान के साथ युद्ध करना! और परमेश्वर जब तक शैतान पर विजय प्राप्त ना कर ले वह कभी विश्राम नहीं करेगा! वह विश्राम तभी करेगा जब वह एक बार शैतान को हरा दे। क्योंकि परमेश्वर के द्वारा किए गए समस्त कार्य को शैतान की ओर निर्देशित किया गया है, और क्योंकि ऐसे लोग जिन्हें शैतान के द्वारा भ्रष्ट कर दिया गया है वे सभी शैतान के प्रभुत्व के नियन्त्रण में हैं और सभी शैतान के प्रभुत्व में जीवन बिताते हैं, यदि परमेश्वर ने शैतान के विरुद्ध युद्ध नहीं किया होता या उन्हें उससे छुड़ाकर अलग नहीं किया होता, तो शैतान ने इन लोगों पर से अपने शिकंजे को ढीला नहीं किया होता, और उन्हें अर्जित नहीं किया जा सकता था। यदि उन्हें अर्जित नहीं किया जाता, तो यह साबित करेगा कि शैतान को पराजित नहीं किया गया है, यह कि उसे परास्त नहीं किया गया है। और इस प्रकार, परमेश्वर की 6,000 साल की प्रबंधकीय योजना में, प्रथम चरण के दौरान उसने व्यवस्था का कार्य किया था, दूसरे चरण के दौरान उसने अनुग्रह के युग का कार्य किया था, अर्थात्, क्रूसारोहण का कार्य, और तीसरे चरण के दौरान उसने मनुष्य पर विजय प्राप्त करने का कार्य किया था। इस समस्त कार्य को उस मात्रा की ओर निर्देशित किया गया है जिसके तहत शैतान ने मानवजाति को भ्रष्ट किया है, यह सब शैतान को पराजित करने के लिए है, और केवल एक ही चरण शैतान को पराजित करने के लिए नहीं है। परमेश्वर के प्रबंधन के 6,000 साल के कार्य का मूल-तत्व उस बड़े लाल अजगर के विरुद्ध युद्ध है, और मानवजाति का प्रबधं करने का कार्य भी शैतान को हराने का कार्य है, और शैतान के साथ युद्ध करने का कार्य है। परमेश्वर ने 6,000 सालों से युद्ध किया है, और इस प्रकार से उसने अन्ततः मनुष्य को उस नए आयाम में पहुंचाने के लिए 6,000 सालों से कार्य किया है। जब शैतान पराजित हो जाता है, तो मनुष्य पूरी तरह से स्वतन्त्र हो जाएगा। क्या यह आज परमेश्वर के कार्य का निर्देशन नहीं है? यह बिलकुल आज के कार्य का निर्देशन है: सम्पूर्ण छुटकारा और मनुष्य को स्वतन्त्र करना, ताकि वह किसी प्रकार नियमों के अधीन न हो, न ही किसी प्रकार के बन्धनों या प्रतिबंधों के द्वारा सीमित हो। इस समस्त कार्य को आप लोगों के डीलडौल (आकृति) के अनुसार और आप लोगों की आवश्यकताओं के अनुसार किया गया है, जिसका अर्थ है कि जो कुछ आप सब पूरा कर सकते हैं उसे आप लोगों को प्रदान किया गया है। यह "किसी बत्तख को शाखा में ज़बरदस्ती बैठाने" का मामला नहीं है, या आप लोगों को ऐसी चीज़ें करने के लिए मजबूर करना नहीं है जो आप सब की योग्यता से बाहर है; इसके बजाए, इस समस्त कार्य को आप लोगों की वास्तविक ज़रूरतों के अनुसार सम्पन्न किया गया है। कार्य का प्रत्येक चरण मनुष्य की वास्तविक ज़रूरतों एवं अपेक्षाओं के अनुसार है, और यह शैतान को हराने के लिए है। वास्तव में, प्रारम्भ में सृष्टिकर्ता एवं उसके प्राणियों के बीच में किसी प्रकार की बाधाएं नहीं थीं। उन सब को शैतान के द्वारा खड़ा किया गया है। मनुष्य शैतान की गड़बड़ी और उसकी भ्रष्टता के कारण किसी भी चीज़ को देखने या स्पर्श करने में असमर्थ हो गया है। मनुष्य ही वह पीड़ित व्यक्ति है, ऐसा व्यक्ति है जिसे धोखा दिया गया है। जब एक बार शैतान को हरा दिया जाता है, तो जीवधारी सृष्टिकर्ता को देखेंगे, और सृष्टिकर्ता जीवधारियों के ऊपर निगाह डालेगा और व्यक्तिगत तौर पर उनकी अगुवाई करने में सक्षम होगा। केवल यह ही वह जीवन है जो पृथ्वी पर मनुष्य के पास होना चाहिए। और इस प्रकार, परमेश्वर का कार्य मुख्य रूप से शैतान को हराने के लिए है, और जब एक बार शैतान को हरा दिया जाता है, तो हर एक चीज़ का समाधान हो जाएगा।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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