परमेश्वर के दैनिक वचन : देहधारण | अंश 133

31 मार्च, 2021

परमेश्वर का कार्य ऐसा है जिसे तुम समझ नहीं सकते। यदि तुम न तो पूरी तरह से समझ सकते हो कि तुम्हारा निर्णय सही है या नहीं, और न ही तुम जान सकते हो कि परमेश्वर का कार्य सफल होगा या नहीं, तब तुम अपनी किस्मत क्यों नहीं आज़माते और क्यों नहीं यह देखते हो कि यह साधारण मनुष्य तुम्हारे बड़े काम का है या नहीं और परमेश्वर ने वास्तव में बहुत महान काम किया है या नहीं? हालांकि मैं तुम्हें बताना चाहता हूँ कि नूह के दिनों में लोग इस हद तक खाते और पीते थे, विवाहों में लगे रहते थे, कि यह सब देखना परमेश्वर के लिए असहनीय हो गया था, इसलिए उसने समस्त मानवजाति के विनाश के लिये एक बहुत बड़ी बाढ़ भेजी और बस नूह के परिवार के आठ सदस्यों, और सभी प्रकार के पशु-पक्षियों को बचाया। हालाँकि अंत के दिनों में जिन्हें परमेश्वर ने जीवित बचाकर रखा, ये वे लोग हैं जो अंत तक परमेश्वर के स्वामिभक्त रहे हैं। यद्यपि दोनों ही काल बहुत अधिक भ्रष्टाचार के युग थे जो परमेश्वर के लिये असहनीय था, और दोनों ही युगों में मानवजाति का इतना पतन हो चुका था कि उन्होंने यह नकार दिया कि परमेश्वर उनका प्रभु है, फिर भी परमेश्वर ने सिर्फ नूह के समय के सभी लोगों को नष्ट किया। दोनों युगों में मानवजाति ने परमेश्वर को बहुत दुखी किया, फिर भी परमेश्वर ने अंत के दिनों में मनुष्यों के प्रति संयम बरता है। ऐसा क्यों है? क्या तुम सबने कभी इस बात पर विचार नहीं किया? यदि तुम लोग सचमुच नहीं जानते, तो मैं तुम्हें बताता हूँ। अंत के दिनों में मनुष्यों के प्रति परमेश्वर का धीरज धरने का कारण यह नहीं है कि वे नूह के दिनों की तुलना में कमतर भ्रष्ट हैं या उन्होंने परमेश्वर के सामने पश्चाताप किया है और यह कारण तो बिलकुल नहीं है कि परमेश्वर तकनीकी विकास के अत्यंत उन्नत होने के कारण अंत के दिनों में मनुष्यों का सर्वनाश नहीं कर सकता। बल्कि कारण यह है कि अंत के दिनों में परमेश्वर को मनुष्यों के एक समूह में कार्य करना है, और यह कार्य परमेश्वर अपने देहधारण में स्वयं करना चाहता है। साथ ही परमेश्वर इस समूह के एक भाग को अपने उद्धार का पात्र, और अपनी प्रबंधन योजना का परिणाम बनाना चाहता है, और इन लोगों को अगले युग में प्रवेश कराना चाहता है। इसलिए चाहे कुछ भी हो जाए, परमेश्वर ने जो कीमत चुकाई है वह पूरी तरह से अंत के दिनों में उसके देहधारी देह द्वारा किये जाने वाले कार्य की तैयारी में है। जिस तथ्य तक तुम लोग आज पहुँचे हो यह इसी देह के कारण है। क्योंकि परमेश्वर इस देह में जीता है इसीलिए तुम सबके पास जीवित रहने का मौका है। यह सभी उत्तम भाग्य जो तुम सबने पाया है, वह इस साधारण मनुष्य के कारण है। न केवल इतना, बल्कि अंत में समस्त जातियाँ इस साधारण मनुष्य की उपासना करेंगी साथ ही साथ उसे धन्यवाद देंगी और इस मामूली व्यक्ति की आज्ञा का पालन करेंगी, क्योंकि उसके द्वारा लाये गए सत्य, जीवन और मार्ग ने समस्त मानवजाति को बचाया है, परमेश्वर और मनुष्यों के बीच के संघर्ष को शांत किया है, परमेश्वर और मनुष्यों के बीच की दूरी कम की है, और परमेश्वर और मनुष्यों के बीच के विचारों के संपर्क का रास्ता खोला है। इसी ने परमेश्वर को और अधिक महान महिमा प्रदान की है। क्या ऐसा साधारण व्यक्ति तुम्हारे विश्वास और श्रद्धा के योग्य नहीं है? क्या यह साधारण देह, मसीह कहलाने के योग्य नहीं है? क्या ऐसा साधारण मनुष्य, मनुष्यों के बीच परमेश्वर की अभिव्यक्ति नहीं हो सकता? क्या ऐसा व्यक्ति जिसने मानवजाति को आपदा से बचाया है, वह तुम लोगों के प्रेम और अवलंबन के योग्य नहीं हो सकता? यदि तुम लोग उसके मुख से निकले सत्य को नकारते हो, और तुम लोग अपने बीच में उसके अस्तित्व का तिरस्कार करते हो, तो तुम लोगों का अंत में क्या होगा?

अंत के दिनों में परमेश्वर के सभी काम इस साधारण मनुष्य के द्वारा किये जाते हैं। वह तुम्हें सब कुछ प्रदान करेगा और वह तुमसे जुड़ी हर बात तय कर सकेगा। क्या ऐसा व्यक्ति वैसा हो सकता है जैसा तुम लोग सोचते हो : एक ऐसा व्यक्ति जो इतना अधिक साधारण है कि वह उल्लेख करने योग्य भी नहीं है? क्या उसका सत्य तुम लोगों को पूर्ण रूप से आश्वस्त करने योग्य नहीं है? क्या उसके कार्य की गवाही तुम लोगों को पूर्ण रूप से आश्वस्त करने योग्य नहीं है? या फिर वह मार्ग जिस पर वह तुम्हारी अगुवाई करता है, इस योग्य नहीं है कि तुम लोग उसका अनुसरण करो? सबकुछ कहने करने के बाद वह कौन-सी बात है जिसके कारण तुम लोग उससे घृणा करते हो और उसे अपने आप से दूर रखते हो और उससे बचकर रहते हो? यही व्यक्ति सत्य की अभिव्यक्ति करता है, यह वही व्यक्ति है जो सत्य प्रदान करता है, और यह वही व्यक्ति है जो तुम लोगों को अनुसरण करने का मार्ग प्रदान करता है। क्या अब भी तुम लोगों को इन सत्यों के भीतर परमेश्वर के कार्य के संकेत नहीं मिल पा रहे? यीशु के कार्य के बिना मानवजाति सूली से उतर नहीं सकती थी, परन्तु बिना आज के देहधारण के वे लोग कभी परमेश्वर की सराहना नहीं पा सकते या नये युग में प्रवेश नहीं कर सकते जो सूली से उतर गए हैं। इस साधारण मनुष्य के आगमन के बिना, तुम लोगों को कभी भी यह अवसर नहीं मिलता या तुम लोग कभी भी इस योग्य नहीं हो सकते थे कि परमेश्वर के सच्चे मुखमंडल का दर्शन कर सको, क्योंकि तुम लोग ऐसी वस्तु हो जिसे बहुत पहले ही नष्ट कर दिया जाना चाहिए था। परमेश्वर के द्वितीय देहधारण के आगमन के कारण, परमेश्वर ने तुम लोगों को क्षमा कर दिया है और तुम लोगों पर दया दिखाई है। खैर, मैं अंत में इन वचनों के साथ तुम लोगों से विदा लेना चाहता हूँ : यह साधारण मनुष्य जो देहधारी परमेश्वर है, तुम लोगों के लिये बहुत महत्वपूर्ण है। यही वह सबसे बड़ा काम है जिसे परमेश्वर ने मनुष्यों के बीच पहले ही कर दिया है।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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