परमेश्वर के दैनिक वचन | "भ्रष्ट मनुष्यजाति को देहधारी परमेश्वर द्वारा उद्धार की अधिक आवश्यकता है" | अंश 121

24 अप्रैल, 2021

मनुष्य को शैतान ने भ्रष्ट कर दिया है, मनुष्य ही परमेश्वर के जीवधारियों में श्रेष्ठतम है, इसलिए मनुष्य को परमेश्वर के उद्धार की आवश्यकता है। परमेश्वर के उद्धार का लक्ष्य मनुष्य है, शैतान नहीं, और जिसे बचाया जाएगा वह मनुष्य की देह और आत्मा है, शैतान नहीं। शैतान परमेश्वर के विनाश का लक्ष्य है और मनुष्य परमेश्वर के उद्धार का लक्ष्य है। मनुष्य के देह को शैतान के द्वारा भ्रष्ट किया जा चुका है, इसलिए सबसे पहले मनुष्य की देह को ही बचाया जाएगा। मनुष्य की देह को इतना ज़्यादा भ्रष्ट किया जा चुका है कि वह परमेश्वर का इस हद तक विरोध करती है कि वह खुले तौर पर परमेश्वर का विरोध कर बैठती है और उसके अस्तित्व को ही नकारती है। यह भ्रष्ट देह बेहद अड़ियल है, देह के भ्रष्ट स्वभाव से निपटने और उसे परिवर्तित करने से ज़्यादा कठिन और कुछ भी नहीं। शैतान परेशानियाँ खड़ी करने के लिए मनुष्य की देह में आता है, और परमेश्वर के कार्य में व्यवधान उत्पन्न करने और उसकी योजना को बाधित करने के लिए मनुष्य की देह का उपयोग करता है। इस प्रकार इंसान शैतान बनकर परमेश्वर का शत्रु हो गया है। मनुष्य को बचाने के लिए, पहले उस पर विजय पानी होगी। इसी चुनौती से निपटने के लिए परमेश्वर जो कार्य करने का इरादा रखता है, उसकी खातिर देह में आता है और शैतान के साथ युद्ध करता है। उसका उद्देश्य भ्रष्ट मनुष्य का उद्धार, शैतान की पराजय और उसका विनाश है, जो परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोह करता है। परमेश्वर मनुष्य पर विजय पाने के अपने कार्य के माध्यम से शैतान को पराजित करता है, और साथ ही भ्रष्ट मनुष्यजाति को भी बचाता है। इस प्रकार, यह एक ऐसा कार्य है जो एक ही समय में दो लक्ष्यों को प्राप्त करता है। इंसान के साथ बेहतर ढंग से जुड़ने और उस पर विजय पाने के लिए वह देह में रहकर कार्य करता है, देह में रहकर बात करता है और देह में रहकर समस्त कार्यों की शुरुआत करता है। अंतिम बार जब परमेश्वर देहधारण करेगा, तो अंत के दिनों के उसके कार्य को देह में पूरा किया जाएगा। वह सभी मनुष्यों को उनके प्रकार के अनुसार वर्गीकृत करेगा, अपने सम्पूर्ण प्रबंधन को समाप्त करेगा, और साथ ही देह में अपने समस्त कार्यों को भी पूरा करेगा। पृथ्वी पर उसके सभी कार्यों के समाप्त हो जाने के बाद, वह पूरी तरह से विजयी हो जाएगा। देह में कार्य करते हुए, परमेश्वर मनुष्यजाति को पूरी तरह से जीत लेगा और उसे प्राप्त कर लेगा। क्या इसका अर्थ यह नहीं है कि उसका समस्त प्रबंधन समाप्त हो चुका होगा? शैतान को पूरी तरह से हराने और विजयी होने के बाद, जब परमेश्वर देह में अपने कार्य का समापन करेगा, तो शैतान के पास मनुष्य को भ्रष्ट करने का फिर और कोई अवसर नहीं होगा। परमेश्वर के प्रथम देहधारण का कार्य छुटकारा और मनुष्य के पापों को क्षमा करना था। अब यह मनुष्यजाति को जीतने और पूरी तरह से प्राप्त करने का कार्य है, ताकि शैतान के पास अपना कार्य करने का कोई मार्ग न बचेगा, और वह पूरी तरह से हार चुका होगा, और परमेश्वर पूरी तरह से विजयी हो चुका होगा। यह देह का कार्य है, और स्वयं परमेश्वर द्वारा किया गया कार्य है।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

अंत के दिनों में देहधारी परमेश्वर करता है परमेश्वर के प्रबन्धन का अंत

इंसान से बेहतर जुड़ने और उसे जीतने के लिए देह में कार्य करता है, बोलता है परमेश्वर। पहली बार देहधारी हुए परमेश्वर ने, काम किये इंसान के छुटकारे, पाप-क्षमा के। अब करने हैं काम, इंसान को जीतने और पाने के। आख़िरी बार जब देहधारी होता है परमेश्वर, अंत के दिनों के कामों को ख़त्म करेगा, सभी लोगों को उनकी किस्मों में बांटेगा। प्रबंधन को, देह में अपने सारे कामों को ख़त्म करेगा। धरती पर काम पूरा होने पर वो विजयी होगा, विजयी होगा।

जब इंसान को पूरी तरह जीत लेगा, पा लेगा परमेश्वर, तो क्या उसका प्रबंधन पूरा न हो चुका होगा? देह में अपने काम का अंत कर जब विजयी होता है परमेश्वर, शैतान हार जाता है, इंसान को दूषित करने का दूसरा मौका न होता है। यही है देह का कार्य, जिसे करता है स्वयं परमेश्वर! आख़िरी बार जब देहधारी होता है परमेश्वर, अंत के दिनों के कामों को ख़त्म करेगा, सभी लोगों को उनकी किस्मों में बांटेगा। प्रबंधन को, देह में अपने सारे कामों को ख़त्म करेगा। धरती पर काम पूरा होने पर वो विजयी होगा, विजयी होगा। आख़िरी बार जब देहधारी होता है परमेश्वर, अंत के दिनों के कामों को ख़त्म करेगा, सभी लोगों को उनकी किस्मों में बांटेगा। प्रबंधन को, देह में अपने सारे कामों को ख़त्म करेगा। धरती पर काम पूरा होने पर वो विजयी होगा, विजयी होगा।

"मेमने का अनुसरण करना और नए गीत गाना" से

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