Hindi Christian Song | सृजित प्राणी का अपना कर्तव्य अच्छे से पूरा करना सबसे उत्तम बात है
20 मई, 2026
1
सृजित प्राणी के लिए एक सृजित प्राणी का कर्तव्य पूरा कर पाना, सृष्टिकर्ता को संतुष्ट कर पाना मानवजाति के बीच सबसे सुंदर चीज होती है और यह कुछ ऐसा है जिसे उनके बीच प्रशंसा की कथा के रूप में फैलाया जाना चाहिए। सृजित प्राणियों को सृष्टिकर्ता जो कुछ भी सौंपता है उसे बिना शर्त स्वीकार कर लेना चाहिए; मानवजाति के लिए यह खुशी और सौभाग्य दोनों की बात है और उन सबके लिए जो एक सृजित प्राणी का कर्तव्य पूरा करते हैं, कुछ भी इससे अधिक सुंदर या याद किए जाने लायक नहीं होता—यह एक सकारात्मक चीज है। और जहाँ तक प्रश्न यह है कि सृष्टिकर्ता उन लोगों के साथ कैसा व्यवहार करता है जो सृजित प्राणी का कर्तव्य पूरा कर सकते हैं और वह उनसे क्या वादा करता है, यह सृष्टिकर्ता का मामला है; सृजित मानवजाति का इससे कोई सरोकार नहीं है।
2
सृष्टिकर्ता की ओर से, वो तुम लोगों में से हर एक को वे कर्तव्य सौंपने का इच्छुक है जो लोगों को निभाने चाहिए; और सृजित मानवजाति की ओर से, लोगों को यह कर्तव्य सहर्ष स्वीकार करना चाहिए, इसे अपने जीवन के दायित्व और उस मूल्य के रूप में मानना चाहिए जिसे उन्हें इस जीवन में जीना है। यहाँ कोई लेन-देन नहीं है, यह एक समान आदान-प्रदान नहीं है, इसमें ऐसा कोई भी प्रतिफल या अन्य कथन तो और भी शामिल नहीं हैं जिनकी लोग कल्पना करते हैं। यह किसी भी तरह से एक व्यापार नहीं है; इसका मतलब लोगों के अपने कर्तव्य निभाते हुए चुकाई जाने वाली कीमत या की जाने वाली कड़ी मेहनत के बदले किसी चीज के आदान-प्रदान से नहीं है। परमेश्वर ने कभी भी यह नहीं कहा है, न ही लोगों को इसे इस तरीके से समझना चाहिए।
3
एक सृजित प्राणी के रूप में व्यक्ति जब सृष्टिकर्ता के सामने आता है तो उसे अपना कर्तव्य निभाना ही चाहिए। यह करना बहुत उचित चीज है और उसे यह जिम्मेदारी पूरी करनी चाहिए। इस शर्त पर कि सृजित प्राणी अपने कर्तव्य निभाएँ, सृष्टिकर्ता ने मानवजाति के बीच और भी बड़ा कार्य किया है, उसने लोगों पर कार्य का एक और आगे का चरण संपन्न किया है। वह मानवजाति को सत्य प्रदान करता है, उसे यह अनुमति देता है कि वह अपने कर्तव्य निभाते हुए परमेश्वर से सत्य हासिल करे और इस प्रकार अपने भ्रष्ट स्वभाव त्यागे और शुद्ध हो जाए, परमेश्वर के इरादे पूरे करने और जीवन में सही मार्ग पर चलने और अंततः परमेश्वर का भय मानने और बुराई से दूर रहने, पूर्ण उद्धार हासिल करने और आइंदा शैतान की पीड़ाओं के अधीन न आने में सक्षम हो। यही वह अंतिम प्रभाव है जिसे परमेश्वर मानवजाति से कर्तव्य निर्वहन के द्वारा प्राप्त करना चाहता है।
—वचन, खंड 4, मसीह-विरोधियों को उजागर करना, मद नौ (भाग सात)
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
अन्य प्रकार की वीडियो