परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 140

19 मार्च, 2021

शैतान और यहोवा परमेश्वर के मध्य वार्तालाप

(अय्यूब 1:6-11) एक दिन यहोवा परमेश्‍वर के पुत्र उसके सामने उपस्थित हुए, और उनके बीच शैतान भी आया। यहोवा ने शैतान से पूछा, "तू कहाँ से आता है?" शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, "पृथ्वी पर इधर-उधर घूमते-फिरते और डोलते-डालते आया हूँ।" यहोवा ने शैतान से पूछा, "क्या तू ने मेरे दास अय्यूब पर ध्यान दिया है? क्योंकि उसके तुल्य खरा और सीधा और मेरा भय माननेवाला और बुराई से दूर रहनेवाला मनुष्य और कोई नहीं है।" शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, "क्या अय्यूब परमेश्‍वर का भय बिना लाभ के मानता है? क्या तू ने उसकी, और उसके घर की, और जो कुछ उसका है उसके चारों ओर बाड़ा नहीं बाँधा? तू ने तो उसके काम पर आशीष दी है, और उसकी सम्पत्ति देश भर में फैल गई है। परन्तु अब अपना हाथ बढ़ाकर जो कुछ उसका है, उसे छू; तब वह तेरे मुँह पर तेरी निन्दा करेगा।"

(अय्यूब 2:1-5) फिर एक और दिन यहोवा परमेश्‍वर के पुत्र उसके सामने उपस्थित हुए, और उनके बीच शैतान भी उसके सामने उपस्थित हुआ। यहोवा ने शैतान से पूछा, "तू कहाँ से आता है?" शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, "इधर-उधर घूमते-फिरते और डोलते-डालते आया हूँ।" यहोवा ने शैतान से पूछा, "क्या तू ने मेरे दास अय्यूब पर ध्यान दिया है कि पृथ्वी पर उसके तुल्य खरा और सीधा और मेरा भय माननेवाला और बुराई से दूर रहनेवाला मनुष्य और कोई नहीं है? यद्यपि तू ने मुझे बिना कारण उसका सत्यानाश करने को उभारा, तौभी वह अब तक अपनी खराई पर बना है।" शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, "खाल के बदले खाल; परन्तु प्राण के बदले मनुष्य अपना सब कुछ दे देता है। इसलिये केवल अपना हाथ बढ़ाकर उसकी हड्डियाँ और मांस छू, तब वह तेरे मुँह पर तेरी निन्दा करेगा।"

परमेश्वर की छः हजार वर्षीय प्रबंधकीय योजना में, विशेष रूप से अय्यूब की किताब में, ये दो अंश जिन्हें शैतान कहता है और ऐसे कार्य जिन्हें शैतान करता है वे परमेश्वर के प्रति उसके प्रतिरोध के प्रतिनिधि हैं। क्या हम यह कह सकते है? (हाँ।) यह शैतान है जो अपना असली रंग दिखा रहा है। क्या आपने शैतान के कार्यों को उस जीवन में देखा है जिसे हम अब जीते हैं? जब आप उन्हें देखते हैं, तो आप नहीं सोच सकते हैं कि ये ऐसी बातें हैं जिन्हें शैतान के द्वारा बोला गया है, किन्तु इसके बजाए सोचते हैं कि ये ऐसी बातें हैं जिन्हें मनुष्य के द्वारा बोला गया है, सही है? जब ऐसी बातों को मनुष्य के द्वारा बोला जाता है, तो किस चीज़ को दर्शाया जाता है? शैतान को दर्शाया जाता है। भले ही आप इसे पहचान लें, आप तब भी यह एहसास नहीं कर सकते हैं कि इसे वास्तव में शैतान के द्वारा बोला जा रहा है। पर अभी और यहाँ आपने सुस्पष्ट ढंग से देखा है कि शैतान ने स्वयं क्या कहा है। अब आपके पास शैतान के भयानक चेहरे और उसकी दुष्टता की स्पष्ट, एवं बिलकुल साफ समझ है। अतः क्या ये दो अंश जिन्हें शैतान के द्वारा बोला गया था वे शैतान के स्वभाव को पहचानने के योग्य होने के लिए आज के ज़माने के लोगों के लिए मूल्यवान हैं। क्या ये अंश आज की मानवजाति के लिए संग्रह किए जाने के योग्य हैं जिससे वे शैतान के डरावने चेहरे को पहचानने, और शैतान के मूल एवं असली चेहरे को पहचानने के योग्य हों? यद्यपि ऐसा कहना बिलकुल भी उचित प्रतीत नहीं होता है, फिर भी उसे इस तरह से अभिव्यक्त करना फिर भी ठीक लग सकता है। मैं इसे केवल इसी रीति से कह सकता हूँ और यदि आप लोग इसे समझ सकते हैं, तो यह काफी है। शैतान उन कार्यों पर बार बार आक्रमण करता है जिन्हें यहोवा करता है, और यहोवा परमेश्वर के प्रति अय्यूब के भय के विषय में अनेक इल्ज़ाम लगाता है। वह विभिन्न तरीकों से यहोवा को क्रोधित करने का प्रयास करता है, और यहोवा को रज़ामंद करता है कि वह शैतान को अय्यूब की परीक्षा लेने की अनुमति दे। इसलिए उसके शब्द बहुत ही भड़काने वाले हैं। अतः मुझे बताओ, जब एक बार शैतान ने इन शब्दों को बोल दिया है, तो क्या परमेश्वर साफ साफ देख सकता है कि शैतान क्या करना चाहता है? (हाँ।) क्या परमेश्वर समझता है कि वह क्या करना चाहता है? (हाँ।) परमेश्वर के हृदय में, यह मनुष्य अय्यूब जिस पर परमेश्वर दृष्टि रखता है—परमेश्वर का यह सेवक, जिसे परमेश्वर धर्मी पुरुष, एवं एक पूर्ण पुरुष मानता है—क्या अय्यूब इस तरह की परीक्षा का सामना कर सकता है? (हाँ।) परमेश्वर ऐसे निश्चय के साथ "हाँ" कैसे कहता है? क्या परमेश्वर हमेशा मनुष्य के हृदय को जांचता रहता है? (हाँ।) अतः क्या शैतान मनुष्य के हृदय को जांचने के योग्य है? (नहीं।) शैतान जांच नहीं सकता है। हालाँकि शैतान देख सकता है कि मनुष्य के पास परमेश्वर का भय मानने वाला हृदय है, फिर भी उसका दुष्ट स्वभाव कभी विश्वास नहीं कर सकता है कि पवित्रता पवित्रता है, या घिनौनापन घिनौनापन है। दुष्ट शैतान कभी किसी ऐसी चीज़ को संजोकर नहीं रख सकता है जो पवित्र, धर्मी और उज्ज्वल है। शैतान अपने स्वभाव के माध्यम से, अपनी दुष्टता, और इन तरीकों के माध्यम से जिन्हें वह उपयोग करता है काम करने के लिए कोई कसर बाकी न रखने के सिवाए और कुछ नहीं कर सकता है। यहाँ तक कि परमेश्वर के द्वारा स्वयं को दण्डित या नष्ट किए जाने की कीमत पर भी, वह ढिठाई से परमेश्वर का विरोध करने से हिचकिचाता नहीं है—यह दुष्टता है, यह शैतान का स्वभाव है। अतः इस अंश में, शैतान कहता है: "खाल के बदले खाल; परन्तु प्राण के बदले मनुष्य अपना सब कुछ दे देता है। इसलिये केवल अपना हाथ बढ़ाकर उसकी हड्डियाँ और मांस छू, तब वह तेरे मुँह पर तेरी निन्दा करेगा।" वह क्या सोच रहा है? परमेश्वर के प्रति मनुष्य का भय इस कारण है क्योंकि मनुष्य ने परमेश्वर से बहुत सारा लाभ प्राप्त किया है। मनुष्य परमेश्वर से अनेक लाभ उठाता है, अतः वे कहते हैं कि परमेश्वर अच्छा है। परन्तु यह इसलिए नहीं है क्योंकि परमेश्वर अच्छा है, यह सिर्फ इसलिए है क्योंकि मनुष्य इतने सारे लाभ प्राप्त करता है कि वह इस रीति से परमेश्वर का भय मान सकता है: जब एक बार आप उसे इन लाभों से वंचित कर देते हैं, तब वह आपको त्याग देता है। अपने दुष्ट स्वभाव में, शैतान यह नहीं मानता है कि मनुष्य का हृदय सचमुच में परमेश्वर का भय मान सकता है। क्यों? अपने दुष्ट स्वभाव के कारण वह नहीं जानता है कि पवित्रता क्या है, और वह भययुक्त आदर सम्मान को तो बिलकुल भी नहीं जानता है। वह नहीं जानता कि परमेश्वर की आज्ञा मानना क्या है, कि परमेश्वर का भय मानना क्या है। क्योंकि वह खुद ही परमेश्वर का भय नहीं मानता है, वह सोचता है, "न ही मनुष्य परमेश्वर का भय मान सकता है। यह असंभव है।" क्या ऐसा नहीं है? (हाँ।) मुझे बताओ, क्या शैतान दुष्ट नहीं है? (हाँ।) शैतान दुष्ट है। अतः हमारी कलीसिया को छोड़कर, चाहे वे विभिन्न मत एवं मसीही समुदाय हों, या धार्मिक एवं सामाजिक समूह, वे परमेश्वर के अस्तित्व में विश्वास नहीं करते हैं, वे यह विश्वास नहीं करते हैं कि परमेश्वर कार्य कर सकता है और यह विश्वास नहीं करते हैं कि कोई ईश्वर नहीं है, अतः वे सोचते हैं "जिसमें आप विश्वास करते हैं वह भी ईश्वर नहीं है।" उदाहरण के लिए, एक व्यभिचारी मनुष्य को लीजिए। वह हर एक को व्यभिचारी मनुष्य के रूप में ही देखता एवं समझता है, जैसा वह खुद है। वह मनुष्य जो हर समय झूठ बोलता है वह देखता है और समझता है कि कोई भी ईमानदार नहीं है, वह समझता है कि सब के सब झूठ बोलने वाले हैं। एक दुष्ट मनुष्य हर किसी को दुष्ट समझता है और जिसे भी देखता है उससे लड़ना चाहता है। ऐसे लोग जिनमें थोड़ी बहुत ईमानदारी है वे हर किसी को ईमानदार समझते हैं, अतः वे हमेशा झांसे में आ जाते हैं, वे हमेशा धोखा खाते हैं, और वे इस बारे में कुछ नहीं कर सकते। क्या यह सही नहीं है? आप लोगों को और अधिक निश्चित करने के लिए मैं कुछ उदाहरण दे रहा हूँ: शैतान का बुरा स्वभाव अल्पकालिक विवशता नहीं है या कोई ऐसी चीज़ नहीं है जो इस वातावरण के द्वारा उत्पन्न हुआ है, न ही यह अल्पकालिक प्रगटीकरण है जो किसी कारण या पृष्ठभूमि के द्वारा उत्पन्न हुआ है। कदापि नहीं! वह जैसा है वैसा ही रहेगा! वह कुछ भी अच्छा नहीं कर सकता है। यहाँ तक कि उस समय भी जब वह कुछ ऐसा कहे जो सुनने में मनोहर हो, वह बस आपको लुभाता है। उसके शब्द जितने अधिक सुखद, जितने अधिक व्यवहार-कुशल, और जितने अधिक विनम्र होते हैं, इन शब्दों के पीछे उसके भयानक इरादे उतने ही अधिक विद्वेषपूर्ण होते हैं। इन दो अंशों में आपने शैतान का किस प्रकार का चेहरा, किस प्रकार का स्वभाव देखा है? (भयानक, विद्वेषपूर्ण एवं दुष्ट।) उसका प्रमुख लक्षण दुष्टता है, खास तौर पर दुष्ट एवं विद्वेषपूर्ण; विद्वेषपूर्ण एवं दुष्ट।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

और देखें

सभी विश्वासी यीशु मसीह की वापसी के लिए तरस रहे हैं। क्या आप उनमें से एक हैं? हमारी ऑनलाइन सहभागिता में शामिल हों और आपको परमेश्वर से फिर से मिलने का अवसर मिलेगा।

साझा करें

रद्द करें