परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 67

परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर III" | अंश 67

249 |12 जून, 2020

यह वाक्य "मनुष्य का पुत्र तो सब्त के दिन का भी प्रभु है" लोगों को बताता है कि परमेश्वर का सब कुछ आध्यात्मिक है, और यद्यपि परमेश्वर तुम्हारी सारी भौतिक जरूरतों को पूरा कर सकता है, और जब एक बार तुम्हारी भौतिक आवश्यकताएँ पूरी कर दी जाती हैं, तो क्या इन चीज़ों की सन्तुष्टि तुम्हें सत्य की खोज के बदले हो सकती हैं? यह बिल्कुल भी संभव नहीं है! परमेश्वर का स्वभाव और जो उसके पास है तथा जो वह है जिसके बारे में हमने सभाओं में विचार विमर्श किया है दोनों सत्य हैं। इसे भारी कीमत के भौतिक पदार्थों के द्वारा तौला नहीं जा सकता है और ना ही उसके मूल्य को पैसे में गिना जा सकता है, क्योंकि वह एक भौतिक पदार्थ नहीं है, और यह प्रत्येक व्यक्ति के हृदय की आवश्यकताओं को प्रदान करता है। प्रत्येक मनुष्य के लिए, इन अस्पृश्य सच्चाईयों का मूल्य किसी भी भौतिक चीज़ से जिन्हें तुम अच्छा, और सही समझते हो बढ़कर होना चाहिए, सही है न? यह कथन ऐसा है जिस पर तुम लोगों को लम्बे समय तक बने रहने की आवश्यकता है। जो कुछ मैंने कहा था उसका मुख्य बिन्दु यह है कि परमेश्वर का स्वरूप और उसका सब कुछ हर एक व्यक्ति के लिए अति महत्वपूर्ण चीज़ें हैं और इन्हें किसी भौतिक पदार्थ के द्वारा बदला नहीं जा सकता है। मैं तुम्हें एक उदाहरण दूँगाः जब तुम्हें भूख लगती है, तो तुम्हें भोजन की आवश्यकता होती है। यह भोजन तुम्हारे लिए अच्छा हो सकता है या इसमें तुम्हारे लिए अभाव हो सकता है, किन्तु जब तक यह तुम्हें तृप्त करता है, भूखे होने का वह अप्रिय एहसास वहां नहीं होगा—वह चला जाएगा। तुम वहां आराम से बैठ सकते हो, और तुम्हारा शरीर आराम से रहेगा। लोगों की भूख का भोजन से समाधान किया जा सकता है, किन्तु जब तुम परमेश्वर का अनुसरण करते हो, और तुम्हें यह एहसास होता है कि तुम्हारे पास उसकी कोई समझ नहीं है, तो तुम अपने हृदय के खालीपन का समाधान कैसे करोगे? क्या इसका समाधान भोजन से किया जा सकता है? या जब तुम परमेश्वर का अनुसरण कर रहे हो और उसकी इच्छा को नहीं समझते हो, तो तुम अपने हृदय की उस भूख को मिटाने के लिए किस चीज़ का प्रयोग कर सकते हो? परमेश्वर के द्वारा उद्धार के तुम्हारे अनुभव की प्रक्रिया में, जब तुम अपने स्वभाव में एक परिवर्तन का अनुसरण कर रहे हो, यदि तुम उसकी इच्छा को नहीं समझोगे या यह नहीं जानोगे कि सच्चाई क्या है, और यदि तुम परमेश्वर के स्वभाव को नहीं समझोगे, तो क्या तुम अति व्याकुलता का एहसास नहीं करोगे? क्या तुम अपने हृदय में एक बड़ी भूख और प्यास का एहसास नहीं करते हो? क्या इन एहसासों ने तुम्हें तुम्हारे हृदय में शांति का एहसास करने से रोक नहीं दिया है? तो तुम अपने हृदय की भूख के लिए क्या कर सकते हो—क्या इसका समाधान करने के लिए कोई तरीका है? कुछ लोग खरीद फरोख्त के लिए बाज़ार जाते हैं, कुछ लोग भरोसा करने के लिए मित्रों को ढूँढ़ लेते हैं, कुछ लोग जी भरकर सोते हैं, कुछ अन्य लोग और ज़्यादा परमेश्वर के वचनों को पढ़ते हैं, या अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए कठिन मेहनत और अधिक कोशिश करते हैं। क्या ये चीज़ें तुम्हारी वास्तविक कठिनाईयों को सुलझा सकती हैं? तुम लोगों में से हर कोई इस प्रकार की रीतियों को पूर्णत: समझ ले। जब तुम निर्बलता का एहसास करते हो, जब तुम परमेश्वर से ज्योति पाने के लिए एक दृढ़ इच्छा का एहसास करते हो ताकि वह तुम्हें उसकी सच्चाई और उसकी इच्छा की वास्तविकता को जानने की अनुमति दे सके, तो तुम्हें सबसे ज़्यादा किस की आवश्यकता होगी? जो तुम्हें जरूरत है वह एक भरपेट आहार नहीं है, और वह कुछ भले वचन नहीं हैं। उससे बढ़कर, यह कुछ पल का आराम और देह की सन्तुष्टि नहीं है—जो तुम्हें आवश्यक है वह यह है कि परमेश्वर तुम्हें सीधे और साफ-साफ बताए कि तुम्हें क्या करना चाहिए और कैसे करना करना चाहिए, और तुम्हें साफ साफ बताए कि सत्य क्या है। तुम्हारे द्वारा इसे समझने के बाद, भले ही यह थोड़ा सा ही क्यों ना हो, क्या तुम एक अच्छा भोजन करने की तुलना में अपने हृदय में अधिक सन्तुष्टि का एहसास नहीं करते हो? जब तुम्हारा हृदय सन्तुष्ट हो जाता है, तो क्या तुम्हारा हृदय, तुम्हारा सम्पूर्ण व्यक्तित्व सच्ची शांति को प्राप्त नहीं करता है? इस उपमा और विश्लेषण के द्वारा, क्या तुम लोगों को अब समझ में आया कि मैं तुम लोगों के साथ यह वाक्य क्यों साझा करना चाहता था कि, "मनुष्य का पुत्र तो सब्त के दिन का भी प्रभु है"? इसका अर्थ वह है जो परमेश्वर से आता है, जो उसका स्वरूप है, और उसका सब कुछ किसी भी अन्य चीज़ से बढ़कर है, जिसमें वह चीज़ या वह व्यक्ति भी शामिल है जिस पर तुमने किसी समय विश्वास किया था और जिसे तुमने सब से बढ़कर सहेज कर रखा था। ऐसा कहना चाहिए, यदि एक मनुष्य के पास परमेश्वर के मुँह के वचन नहीं होते हैं या वे उसकी इच्छा को नहीं समझते हैं, तो वे शांति हासिल नहीं कर सकते हैं। अपने भविष्य के अनुभवों में, तुम लोग समझोगे कि मैं क्यों चाहता था कि आज तुम लोग इस अंश को देखो—यह बहुत महत्वपूर्ण है। सब कुछ जो परमेश्वर करता है वह सत्य और जीवन है। मानव जाति के लिए सत्य एक ऐसी चीज़ है जिसकी कमी उन के जीवन में नहीं हो सकती है, जिसके बिना वे कभी कुछ नहीं कर सकते हैं; तुम यह भी कह सकते हो कि यह सब से बड़ी चीज़ है। यद्यपि तुम उसे नहीं देख सकते हो या उसे नहीं छू सकते हो, फिर भी तुम्हारे लिए उसके महत्व की उपेक्षा नहीं की जा सकती है; यह ही वह एकमात्र चीज़ है जो तुम्हारे हृदय में शांति ला सकती है।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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