परमेश्वर के दैनिक वचन | "तुम विश्वास के बारे में क्या जानते हो?" | अंश 322

65 |07 अगस्त, 2020

मनुष्य केवल विश्वास के अनिश्चित शब्द पर बना रहता है, फिर भी मनुष्य यह नहीं जानता है कि वह क्या है जो विश्वास का निर्माण करता है, और यह तो बिलकुल ही नहीं जानता है कि उसके पास विश्वास क्यों है। मनुष्य बहुत ही कम जानता है और स्वयं मनुष्य में बहुत सारी कमियाँ हैं; वह बस लापरवाही और अज्ञानता से मुझ पर विश्वास रखता है। यद्यपि वह नहीं जानता है कि विश्वास क्या है न ही वह यह जानता है कि वह क्यों मुझ पर विश्वास रखे हुए है, वह सनक के साथ निरन्तर ऐसा करता रहता है। जो मैं मनुष्य से चाहता हूँ वह मात्र यह नहीं है कि वह सनक के साथ मुझे इस तरह पुकारे या अव्यवस्थित रीति से मुझ पर विश्वास करे। क्योंकि जो काम मैं मनुष्य के लिए करता हूँ वह इसलिए है कि वह मुझे देखे और मुझे जान पाए, और इसलिए नहीं है कि मनुष्य मुझ से प्रभावित हो और मेरे कार्य के कारण एक नए प्रकाश में मुझे देखे। मैंने पहले बहुत चिन्ह और चमत्कार दिखाए थे और अनेक चमत्कारों को अंजाम दिया था। इस्राएलियों ने उस समय मेरी बहुत प्रशंसा की थी और बीमारों को चंगा करने और दुष्टात्माओं को निकालने की मेरी विलक्षण प्रतिभा का बड़ा सम्मान किया था। उस समय, यहूदी सोचते थे कि मेरी चंगाई की सामर्थ्य अति उत्तम और असाधारण है। क्योंकि ऐसे अनेक कार्यों के लिए, वे मेरा बड़ा सम्मान करते थे; वे मेरी सारी सामर्थ्य की बहुत प्रशंसा करते थे। अतः जो भी मुझे चमत्कार करते देखता था वो करीब से मेरा अनुसरण करने लग जाता था, इतना कि हज़ारों की भीड़ ने मुझे बीमारों को चंगाई देते हुए देखने के लिए घेर लिया था। मैं ने बहुत सारे चिन्हों और चमत्कारों को प्रकट किया था, फिर भी मनुष्य मुझे बस एक माहिर चिकित्सक ही मानता है; मैं ने उस समय लोगों को शिक्षा देने के लिए बहुत सारे वचन भी कहे थे, फिर भी उन्होंने मुझे मात्र एक अच्छे शिक्षक के रूप में ही माना था जो उसके चेलों से बढ़कर था! आज के दिन तक, जब मनुष्य ने मेरे कार्य के ऐतिहासिक लेखों को देख लिया है, तब भी उनका अनुवाद निरन्तर वैसा ही है कि मैं एक महान चिकित्सक हूँ जो बीमारों को चंगा करता है और निर्बुद्धियों का शिक्षक है। और उन्होंने मुझे दयावान प्रभु यीशु मसीह के रूप में निर्धारित किया है। ऐसे लोग जो पवित्र शास्त्र का अनुवाद करते हैं शायद वे चंगाई की मेरी कुशलता से बढ़कर श्रेष्ठ हो गए हैं, या शायद वे ऐसे चेले हैं जो अपने गुरू से बढ़कर श्रेष्ठ हो गए हैं, फिर भी ऐसे प्रसिद्ध मनुष्य, जिनका नाम सारे संसार में जाना जाता है, मुझे मात्र चिकित्सक मानकर कितना छोटा समझते हैं! मेरे कार्यों की संख्या समुद्र के किनारे रेत के कणों से भी ज़्यादा है, मेरी बुद्धि सुलैमान के सभी पुत्रों से बढ़कर है, फिर भी मनुष्य सोचता है कि मैं कम महत्व का मात्र एक चिकित्सक हूँ और मनुष्य का एक अज्ञात शिक्षक हूँ! कितने लोग केवल इसलिए मुझ पर विश्वास करते हैं कि मैं उनको चंगा करूँगा? कितने लोग सिर्फ इसलिए मुझ पर विश्वास करते हैं कि मैं उनके शरीर से अशुद्ध आत्माओं को निकालने के लिए अपने सामर्थ्य का इस्तेमाल करूँगा? और कितने लोग बस मुझ से शांति और आनन्द प्राप्त करने के लिए मुझ पर विश्वास करते हैं? कितने लोग सिर्फ और अधिक भौतिक सम्पत्ति मांगने के लिए मुझ पर विश्वास करते हैं, और कितने लोग सिर्फ इस जीवन को सुरक्षित गुज़ारने के लिए और आनेवाले संसार में सुरक्षित और अच्छे से रहने के लिए मुझ पर विश्वास करते हैं? कितने लोग केवल नरक की पीड़ा से बचने के लिए और स्वर्ग का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए मुझ पर विश्वास करते हैं? कितने लोग केवल अस्थायी आराम के लिए मुझ पर विश्वास करते हैं लेकिन आने वाले संसार में कुछ हासिल करने की कोशिश नहीं करते हैं? जब मैंने अपने क्रोध को नीचे मनुष्यों के ऊपर भेजा और सारे आनन्द और शांति को ले लिया जो उसके पास पहले से था, तो मनुष्य सन्देहास्पद हो गया। जब मैंने मनुष्य को नरक का कष्ट दिया और स्वर्ग की आशीषों को वापस ले लिया, तो मनुष्य की लज्जा क्रोध में बदल गई। जब मनुष्य ने मुझ से कहा कि मैं उसको चंगा करूँ, फिर भी मैंने उसको नहीं स्वीकारा और उसके लिए घृणा का एहसास किया, तो मनुष्य मेरे सामने से चला गया और तांत्रिक और जादू टोने के मार्ग को खोजा। जब मैं ने मनुष्य का सबकुछ ले लिया जिसको उसने मुझ से मांगा था, तो सभी बिना किसी नामो निशान के गायब हो गए। इसलिए मैं कहता हूँ कि मनुष्य मुझ पर विश्वास करता है क्योंकि मैं बहुत अनुग्रह रखता हूँ, और प्राप्त करने के लिए और भी बहुत कुछ है। मेरे अनुग्रह के कारण यहूदी मुझ पर विश्वास करते थे, और जहाँ कहीं मैं जाता था मेरा अनुसरण करते थे। सीमित ज्ञान और अनुभव के ये निर्बुद्धि मनुष्य केवल उन चिन्हों और चमत्कारों की खोज करते थे जो मैं प्रकट करता था। वे मुझे यहूदियों के घराने के मुखिया के रूप में मानते थे जो बड़े चमत्कार कर सकता था। इसलिए, जब मैं मनुष्यों में से दुष्टात्माओं को निकालता था, तो वे बड़े भ्रम में पड़कर आपस में बात करते थे, यह कहते हुए कि मैं एलिय्याह हूँ, मैं मूसा हूँ, मैं सभी भविष्यवक्ताओं में अति प्राचीन हूँ, और यह कि मैं सब से बड़ा चिकित्सक हूँ। मेरे यह कहने के बावजूद भी कि मैं मार्ग, सत्य और जीवन हूँ, कोई मेरी हस्ती और मेरी पहचान को नहीं जान सकता था। मेरे यह कहने के अलावा कि स्वर्ग वह जगह है जहाँ मेरा पिता रहता है, कोई यह जान नहीं पाया कि मैं परमेश्वर का पुत्र हूँ, और स्वयं परमेश्वर हूँ। मेरे यह कहने के बावजूद भी मैं सारी मानवजाति के लिए छुटकारा लाऊँगा और मनुष्यों को दाम देकर छुड़ाऊँगा, कोई नहीं जान पाया कि मैं मनुष्यों का छुड़ानेवाला हूँ; मनुष्य ने मुझे केवल एक विश्वासयोग्य और तरस से भरा मनुष्य समझा। और मुझ में जो कुछ है उसके बारे में सब कुछ समझाने के बावजूद भी, किसी ने मुझे नहीं पहचाना, और किसी ने यह विश्वास नहीं किया कि मैं परमेश्वर का पुत्र हूँ। मनुष्य के पास केवल इस प्रकार का ही विश्वास है, और वह मुझे इसी तरह से धोखा देता है। जब मनुष्य मेरे बारे में ऐसा विचार रखता है तो वह मेरा गवाह कैसे बन सकता है?

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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