परमेश्वर के दैनिक वचन | "पतरस ने यीशु को कैसे जाना" | अंश 522

परमेश्वर के दैनिक वचन | "पतरस ने यीशु को कैसे जाना" | अंश 522

0 |04 मार्च, 2021

अब तुम्हें उस मार्ग को स्पष्ट रूप से देखने में समर्थ हो जाना चाहिए जो पतरस द्वारा लिया गया था। यदि तुमने इसे स्पष्ट रूप से से देख लिया, तो तुम उस कार्य का निर्धारण कर चुके होगे जो आज किया जा रहा है, इसलिए तुम शिकायत नहीं करोगे या निष्क्रिय नहीं होगे, या किसी भी चीज़ की लालसा नहीं करोगे। तुम्हें पतरस की उस समय की मनोदशा का अनुभव करना चाहिएः वह दुख से व्यथित था; उसने किसी भविष्य या किसी आशीष के लिए अब और नहीं कहा था। उसने लाभ, प्रसन्नता, प्रसिद्धि या संसार के भाग्य की इच्छा नहीं की, और केवल एक अर्थपूर्ण जीवन जीना चाहा, जो कि परमेश्वर के प्रेम को चुकाने और परमेश्वर के प्रति अपना सबसे बहुमूल्य को समर्पित करने के लिए था। तब वह अपने हृदय में संतुष्ट हो होगा। उसने प्रायः इन शब्दों के साथ परमेश्वर से प्रार्थना कीः "प्रभु यीशु मसीह, मैंने एक बार तुझे प्रेम किया, किन्तु मैंने तुझे वास्तव में प्रेम नहीं किया था। यद्यपि मैंने कहा था कि तुझ पर मेरा विश्वास है, किन्तु मैंने तुझे कभी भी एक सच्चे हृदय से प्रेम नहीं किया। मैंने केवल तेरी ओर देखा, तेरी सराहना की, और तुझे याद किया, किन्तु कभी भी तुझे प्रेम नहीं किया या तुझ पर वास्तव में विश्वास नहीं किया।" वह हमेशा इस प्रकार का संकल्प करने के लिए प्रार्थना करता था, वह यीशु के वचनों के द्वारा निरंतर प्रोत्साहित होता था और उन्हें प्रेरणा में बदलता था। बाद में, एक अवधि तक अनुभव करने के बाद, यीशु ने, अपने लिए उसमें और अधिक तड़प भड़काते हुए, उसकी परीक्षा ली। उसने कहाः "प्रभु यीशु मसीह! मैं तुझे कितना याद करता हूँ, तुझे देखने के लिए कितना लालायित रहता हूँ। मुझमें बहुत कमी है, और तेरे प्रेम को पूरा नहीं कर सकता हूँ। मैं तुझसे प्रार्थना करता हूँ कि मुझे शीघ्र ही ले जा। तुझे मेरी कब आवश्यकता होगी? तू मुझे कब ले जाएगा? मैं कब एक बार फिर से तेरा चेहरा देखूँगा? मैं, भ्रष्ट होते रहने के लिए, इस शरीर में अब और नहीं जीना चाहता हूँ, और न ही अब और विद्रोह करना चाहता हूँ। मेरे पास जो कुछ भी है वह मैं जितना शीघ्र कर सकता हूँ तुझे समर्पित करने के लिए तैयार हूँ, और अब मैं आगे तुझे उदास नहीं करना चाहता हूँ।" इस तरह से उसने प्रार्थना की, किन्तु उस समय उसे नहीं पता था कि यीशु उसमें क्या पूर्ण बनाएगा। अपनी परीक्षा की पीड़ा के दौरान, यीशु पुनः उसके सामने प्रकट हुआ और उसने कहाः "पतरस, मैं तुझे पूर्ण बनाना चाहता हूँ, इतना कि तू फल का एक टुकड़ा बन जा, एक ऐसा जो मेरे द्वारा तेरी पूर्णता का निश्चित रूप हो, और जिसका मैं आनन्द लूँगा। क्या तू वास्तव में मेरे लिए गवाही दे सकता है? क्या तूने वह किया जो मैं तुझे करने के लिए कहता हूँ? क्या मेरे कहे शब्दों को तुमने जिया है? तूने एक बार मुझे प्रेम किया, किन्तु यद्यपि तूने मुझे प्रेम किया, क्या तूने मुझे जीया है? तूने मेरे लिए क्या किया है? तू महसूस करता है कि तू मेरे प्रेम के अयोग्य है, किन्तु तूने मेरे लिए क्या किया है?" पतरस ने देखा कि उसने यीशु के लिए कुछ नहीं किया था और परमेश्वर के लिए अपना जीवन देने का पिछला वादा स्मरण किया। और इसलिए, उसने अब और शिकायत नहीं की, और उसकी प्रार्थनाएँ बाद में और बेहतर हो गईं। उसने यह कहते हुए प्रार्थना कीः "प्रभु यीशु मसीह! एक बार मैंने तुझे छोड़ा था, और एक बार तूने भी मुझे छोड़ा था। हमने अलग होकर, और साहचर्य में एक साथ समय बिताया। फिर भी तू मुझे अन्य सभी की अपेक्षा सबसे ज्यादा प्रेम करता है। मैंने बार-बार तेरे विरुद्ध विद्रोह किया और तुझे बार-बार दुःखी किया। ऐसी बातों को मैं कैसे भूल सकता हूँ? जो कार्य तूने मुझमें किया है और जो कुछ तूने मुझे सौंपा है मैं उसे हमेशा मन में रखता हूँ, मैं कभी नहीं भूलता हूँ। जो कार्य तूने मुझमें किया है उसके साथ मैंने अपना सर्वोत्तम प्रयास किया है। तू जानता है कि मैं क्या कर सकता हूँ, और तू आगे यह भी जानता है कि मैं क्या भूमिका निभा सकता हूँ। तेरी इच्छा मेरे लिए आदेश है और मेरे पास जो कुछ भी है वह सब मैं तेरे प्रति समर्पित कर दूँगा। केवल तू ही जानता है कि मैं तेरे लिए क्या कर सकता हूँ। यद्यपि शैतान ने मुझे बहुत अधिक मूर्ख बनाया और मैंने तेरे विरूद्ध विद्रोह किया, किन्तु मुझे विश्वास है कि तू मुझे उन अपराधों के लिए स्मरण नहीं करेगा, कि तू मेरे साथ उनके आधार पर व्यवहार नहीं करेगा। मैं अपना सम्पूर्ण जीवन तुझे समर्पित करना चाहता हूँ। मैं कुछ नहीं माँगता हूँ, और न ही मेरी अन्य आशाएँ या योजनाएँ हैं; मैं केवल तेरे इरादे के अनुसार कार्य करना चाहता हूँ और तेरी इच्छा को पूरा करना चाहता हूँ। मैं तेरे कड़वे कटोरे में से पीऊँगा और मैं तेरे आदेशों के लिए हूँ।"

तुम लोगों को उस मार्ग के बारे में स्पष्ट होना चाहिए जिस पर तुम लोग चलते हो; तुम लोगों को उस मार्ग के बारे में जिसे तुम भविष्य में लोगे, और इस बारे में कि यह क्या है जिसे परमेश्वर पूर्ण बनाएगा, और तुम्हें क्या सौंपा गया है, स्पष्ट होना चाहिए। एक दिन, शायद, तुम लोगों की परीक्षा ली जाएगी, और तब यदि तुम लोग पतरस के अनुभवों से प्रेरणा प्राप्त करने में समर्थ होगे, तो यह इस बात को दर्शाएगा कि तुम लोग वास्तव में पतरस के मार्ग पर चल रहे हो। पतरस के विश्वास और प्रेम के लिए, तथा परमेश्वर के प्रति उसकी निष्ठा के लिए उसकी परमेश्वर के द्वारा प्रशंसा की गई थी। और यह उसके हृदय में परमेश्वर के लिए ईमानदारी और ललक ही थी कि परमेश्वर ने उसे पूर्ण बनाया। यदि तुम लोगों के पास पतरस के जैसा प्रेम और विश्वास है, तो यीशु तुम लोगों को निश्चित रूप से पूर्ण बनाएगा।

— 'पतरस ने यीशु को कैसे जाना' से उद्धृत

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