परमेश्वर के दैनिक वच | "परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे" | अंश 502

परमेश्वर के दैनिक वच | "परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे" | अंश 502

0 |21 सितम्बर, 2020

प्रायः लोग कहते हैं कि उन्होंने परमेश्वर को अपना जीवन बना लिया है, परन्तु फिर भी उन्हें उस हद तक के अनुभव की आवश्यकता है। तुम मात्र दिखावे के लिए कहते हो कि परमेश्वर ही तुम्हारा जीवन है, वह प्रतिदिन तुम्हारा मार्गदर्शन करता है, तुम हर दिन उसके वचन खाते और पीते हो, और तुम प्रतिदिन उससे प्रार्थना करते हो, और इसलिए वह तुम्हारा जीवन बन गया है। जो लोग ऐसा कहते हैं उनका ज्ञान बहुत ही सतही है। कुछ लोगों में कोई आधार नहीं होता है; परमेश्वर के वचन उनमें बोए तो गए हैं, लेकिन उनका अंकुरित होना शेष है, फलित होने के योग्य तो वह अभी है ही नहीं। आज तुमने किस हद तक अनुभव किया है? केवल अब, जब परमेश्वर ने तुम्हें यहां तक आने के लिए मजबूर किया है, तब तुम्हें लगता है कि तुम परमेश्वर को नहीं छोड़ सकते एक दिन, जब तुम एक निश्चितबिन्दु तक अनुभव कर लोगे, तो यदि परमेश्वर तुम्हें जाने के लिए मजबूर करे, तो तुम ऐसा न कर सकोगे। तुम हमेशा महसूस करोगे कि तुम अपने भीतर परमेश्वर के बिना नहीं रह सकते हो; तुम पति के बिना, पत्नी, या बच्चे, परिवार, माता-पिता के बिना, देह के आनन्द के बिना रह सकते हो, परन्तु तुम परमेश्वर के बिना नहीं रह सकते हो। बिना परमेश्वर के रहना ऐसा लगेगा जैसे तुम बेजान हो गए हो, तुम परमेश्वर के बिना जी नहीं पाओगे। जब तुम इस बिन्दु तक अनुभव कर लेते हो, तो तुम परमेश्वर पर विश्वास में सफल हो जाओगे और इस प्रकार से परमेश्वर तुम्हारा जीवन बन जाएगा, वह तुम्हारे अस्तित्व का आधार बन जाएगा और तुम फिर कभी भी परमेश्वर को नहीं छोड़ पाओगे। जब तुम इस हद तक अनुभव करलेते हो, तो तुम सही मायने में परमेश्वर के प्रेम का आनन्द लेते हो, परमेश्वर के साथ तुम्हारा सम्बन्ध बहुत निकटता का बन जाएगा, परमेश्वर तुम्हारा जीवन होगा, तुम्हारा प्रेम होगा औरउस समय तुम परमेश्वर से प्रार्थना करोगे और कहोगे: हे परमेश्वर! मैं तुम्हें नहीं छोड़ सकता हूं, तुम मेरा जीवन हो, मैं किसी भी चीज़ के बिना रह सकता हूं—परन्तु तुम्हारे बिना मैं जीवित नहीं रह सकता हूं। यही लोगों की असली स्थिति है; यही वास्तविक जीवन है। कुछ लोग आज जिस स्थान पर हैं वहां तक आने में उन्हें अत्यधिक मजबूर किया गया हैः उन्हें चलते तो जाना है चाहे उनकी इच्छा हो या न हो, उन्हें लगता है कि उनकी स्थिति ऐसी है कि जैसे इधर कुआं और उधर खाई। तुम ऐसा महसूस करोगे कि परमेश्वर ही तुम्हारा वास्तविक जीवन है, यदि परमेश्वर को तुमसे दूर कर दिया गया तो तुम मर जाओगे; परमेश्वर ही तुम्हारा जीवन है और तुम उसे छोड़ नहीं पाओगे। इस प्रकार से, तुम वास्तव में परमेश्वर का अनुभव कर पाते हो, और ऐसे में, जब तुम फिर परमेश्वर को प्रेम करोगे, तो तुम वास्वत में परमेश्वर से प्रेम करोगे, और यह एक विलक्षण, शुद्ध प्रेम होगा। एक दिन जब तुम ऐसा अनुभव करोगे कि तुम्हारा जीवन एक बिन्दु तक पहुंच गया है, तब तुम परमेश्वर से प्रार्थना करोगे, उसके वचन को खाओगे और पीओगे, और परमेश्वर को आंतरिक तौर पर छोड़ नहीं पाओगे, और यदि तुम ऐसा करना भी चाहोगे तो भी तुम उसे भूल नहीं पाओगे। परमेश्वर तुम्हारा जीवन बन चुका होगा; तुम संसार को भूल सकते हो, तुम अपनी पत्नी और बच्चों को भूल सकते हो, परन्तु तुम परमेश्वर को नहीं भूल पाओगे—यह असम्भव है, यही तुम्हारा सच्चा जीवन है, और परमेश्वर के लिए सच्चा प्रेम है। जब परमेश्वर के लिए लोगों का प्रेम एक निश्चिति बिन्दु तक पहुंच जाता है, तो परमेश्वर के प्रति उनके प्रेम की बराबरी किसी से नहीं हो सकती है, वह उनका पहला प्रेम है, और इस प्रकार वे अन्य सब-कुछ छोड़ सकते हैं, और परमेश्वर की ओर से सब कुछ लेन-देन और छंटाई को स्वीकार करने को तैयार रहते हैं जब तुमने परमेश्वर के ऐसे प्रेम को प्राप्त कर लिया हो जो सभी बातों से बढ़कर है, तब तुम हकीकत और परमेश्वर के प्रेम में जिओगे।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

सब
दुनिया आपदा से घिर गई है। यह हमें क्या चेतावनी देती है? आपदाओं के बीच हम परमेश्वर द्वारा कैसे सुरक्षित किये जा सकते हैं? इसके बारे में ज़्यादा जानने के लिए हमारे साथ हमारी ऑनलाइन मीटिंग में जुड़ें।
WhatsApp पर हमसे संपर्क करें
Messenger पर हमसे संपर्क करें

साझा करें

रद्द करें