परमेश्वर के वचन | "परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे" | अंश 500

परमेश्वर के वचन | "परमेश्वर से प्रेम करने वाले लोग हमेशा के लिए उसके प्रकाश में रहेंगे" | अंश 500

0 |23 सितम्बर, 2020

परमेश्वर वास्तविकता का उपयोग करता है और लोगों को पूर्ण बनाने के लिए तथ्यों को लेकर आता है; परमेश्वर के वचन लोगों के लिए उसकी पूर्णता के भाग को पूर्ण करते हैं, और यह मार्गदर्शन और नए मार्ग के खोलने का कार्य है। अर्थात परमेश्वर के वचनों में तुम्हें अभ्यास का मार्ग ढूढंना होगा और दर्शनों के ज्ञान को प्राप्त करना होगा। इन बातों को समझने के द्वारा, मनुष्य के पास वास्तविक अभ्यास करने के लिए मार्ग और दर्शन होंगे और परमेश्वर के वचन से प्रबुद्धता प्राप्त होगी, और वे परमेश्वर से आने वाली इन बातों को समझने योग्य बन जाएंगे, और अत्यधिक प्रभेद करने लगेंगे। समझने के बाद, वे तुरन्त ही इस वास्तविकता में प्रवेश करेंगे और अपने वास्तविक जीवन में परमेश्वर को संतुष्ट करने के लिए उसके वचनों का उपयोग करेंगे। परमेश्वर तुम्हें सारी बातों में मार्गदर्शन देगा और अभ्यास का एक मार्ग प्रदान करेगा जिससे तुम परमेश्वर की सुन्दरता को महसूस करोगे और जिससे तुम्हें पूर्ण बनाने के लिए किए जाने वाले उसके कार्य के हर चरण को देख सकोगे। यदि तुम परमेश्वर के प्रेम को देखने की इच्छा रखते हो, यदि तुम वास्तव में उसके प्रेम को अनुभव करना चाहते हो, तो तुम्हें वास्तविकता की गहराई में जाना होगा, वास्तविक जीवन की गहराई में जाकर देखना होगा कि जो कुछ परमेश्वर करता है वह प्रेम और उद्धार है और इसलिए कि लोग अशुद्ध बातों को पीछे छोड़ दें और अपने भीतर चीज़ों को शुद्ध करें ताकि परमेश्वर की इच्छा को संतुष्ट करने के योग्य बन जाएं। परमेश्वर वचनों का उपयोग मनुष्य के पोषण के लिए करता है और साथ ही वास्तविक जीवन में वातावरण बनाता है और लोगों को अनुभव करने की अनुमति देता और यदि लोग परमेश्वर के कई वचनों को खाते और पीते हैं, तो जब वे उसे वास्तविकता में उनका अभ्यास के द्वारा वे परमेश्वर के वचन का उपयोग करके अपने जीवन की सभी समस्याओं का हल निकाल लेंगे। मतलब कि वास्तविकता की गहराई में जाने के लिए तुम्हारे पास परमेश्वर का वचन होना चाहिए; यदि तुम परमेश्वर के वचन को खाओगे और पीओगे नहीं और बिना परमेश्वर के कार्य के रहोगे, तो वास्तविक जीवन में कोई मार्ग नहीं पाओगे। यदि तुम परमेश्वर के वचन कभी भी खाओगे और पीओगे नहीं तो जब तुम्हारे साथ कुछ घटित होगा तो तुम भौचक्के रह जाओगे। तुम परमेश्वर को केवल प्रेम करना जानते हो, और किसी भी प्रकार का भेदभाव करने के काबिल नहीं हो, और तुम्हारे पास अभ्यास का कोई मार्ग भी नहीं है; तुम भ्रमित और परेशान हो और कभी-कभी तुम ऐसा तक विश्वास करते हो कि देह की संतुष्टि से तुम परमेश्वर को संतुष्ट कर रहे हो- यह सब कुछ परमेश्वर के वचन को न खाने और न पीने का परिणाम है। कहने का मतलब है कि यदि तुम परमेश्वर के वचन की सहायता के बिना हो, और केवल वास्तविकता के भीतर टटोलते रहते हो, तो तुम मौलिक तौर पर अभ्यास के मार्ग को खोजने के अयोग्य हो। इस प्रकार के लोग साधारण तौर पर नहीं समझते कि परमेश्वर पर विश्वास करने का अर्थ क्या है, इससे भी कम वे यह समझते हैं कि परमेश्वर को प्रेम करने का अर्थ क्या है। यदि, परमेश्वर के वचन के प्रबोधन और मार्गदर्शन का उपयोग करके, तुम अक्सर प्रार्थना, खोज, तलाश करते हो, जिनके ज़रिए, तुम्हें ज्ञात होता है वह जिसका तुम्हें अभ्यास करना है, तुम पवित्र आत्मा के कार्य की सम्भावनाओं को खोजते हो, परमेश्वर के साथ वास्तव में सहयोग देते हो और तुम भ्रमित एवं अव्यवस्थित नहीं होते, तो तुम्हारे पास वास्तविक जीवन का एक मार्ग होगा और तुम निश्चय ही परमेश्वर को संतुष्ट कर पाओगे। जब तुम परमेश्वर को संतुष्ट करोगे, तुम्हारे भीतर परमेश्वर का मार्गदर्शन होगा और तुम परमेश्वर के द्वारा खासतौर पर आशीषित होगे, जो तुम्हें सुख की भावना प्रदान करेगाः तुम विशेषतौर पर सम्मानित महसूस करोगे कि तुमने परमेश्वर को संतुष्ट किया है, अपने भीतर तुम एक उजाला महसूस करोगे और अपने हृदय में तुम स्पष्ट और शान्ति महसूस करोगे, तुम्हारी अंतरात्मा संतुष्ट होगी और प्रत्येक आरोपों से स्वतंत्र होगी, और जब तुम अपने भाइयों और बहनों को देखोगे तो मन में खुशी होगी। यही परमेश्वर के प्रेम के आनन्द का अर्थ होता है, और यही परमेश्वर में वास्तविक आनन्द लेना है। लोग परमेश्वर के आनंद को अनुभव से हासिल करते हैं कठिनाइयों को महसूस करते हुए और सत्य को अभ्यास में लाते हुए, वे परमेश्वर की आशीषों को प्राप्त करते हैं। यदि तुम केवल यह कहते हो कि परमेश्वर तुम से वास्तव में प्रेम करता है, कि परमेश्वर ने लोगों में एक भारी मूल्य चुकाया है, कि उसके इतने सारे वचन धैर्य और नम्रता से कहे हैं और हमेशा लोगों को बचाया है, तुम्हारा इन शब्दों का कहना केवल परमेश्वर के आनन्द का एक ही पक्ष है। और भी अधिक वास्तविक आनन्द तुम्हारे लिए वास्तविक जीवन में सत्य को अभ्यास में लाने से होगा, जिसके बाद उनका हृदय और भी अधिक शान्तिमय और स्पष्ट हो जाएगा, वे अपने भीतर बहुत ही प्रेरित महसूस करेंगे और यह महसूस करेंगे कि परमेश्वर बहुत ही प्रेम करने योग्य है और तुम यह महसूस करोगे कि जो कीमत तुमने चुकाई है वह उपयुक्त है। अपने प्रयासों में एक भारी कीमत अदा करने के बाद तुम भीतर से विशेष तौर पर एक चमक महसूस करोगे: तुम यह महसूस करोगे कि तुम परमेश्वर के प्रेम का सही आनन्द ले रहे हो और इस बात को समझोगे कि परमेश्वर ने लोगों में उद्धार का कार्य किया है और उसका लोगों को निर्मल करना उन्हें शुद्ध बनाने के लिए है और परमेश्वर मनुष्यों का परीक्षण करता है ताकि वह जान सके कि वे उसे वास्तव में प्रेम करते हैं या नहीं। यदि तुम हमेशा सत्य को इस प्रकार से अभ्यास में लाओगे तो तुम परमेश्वर के कार्य की स्पष्ट जानकारी को धीरे-धीरे विकसित करोगे, और उस समय में तुम महसूस करोगे कि तुम्हारे सामने परमेश्वर का वचन बिल्कुल ही शीशे के समान स्पष्ट है। यदि तुम वास्तव में कई सत्यों को स्पष्ट तौर पर समझ जाओगे तो तुम यह महसूस करोगे कि सभी मामलों को अभ्यास में लाना आसान है, और तुम इन मामलों पर काबू पा सकते हो और उस प्रलोभन पर विजय प्राप्त कर सकते हो और तुम देखोगे कि तुम्हारे लिए कुछ भी समस्या नहीं है, यह तुम्हें कितना स्वतंत्र और मुक्त कर देगा। इस क्षण में तुम परमेश्वर के प्रेम का आनन्द लोगे और परमेश्वर के सच्चे प्रेम का तुम्हारे ऊपर आगमन होगा। परमेश्वर उन्हें आशीषित करता है जिनके पास दर्शन होता है और जिनके पास सत्य, ज्ञान होता है और जो उसे वास्तविक तौर पर प्रेम करते हैं। यदि लोग परमेश्वर के प्रेम को देखने की इच्छा रखते हैं तो उन्हें अपने वास्तविक जीवन में सत्य को अभ्यास में लाना होगा, दर्द सहने के लिये तैयार रहना होगा और परमेश्वर को संतुष्ट करने वाली बातों को छोड़ना होगा और आँखों में आंसुओं के बावजूद, उन्हें परमेश्वर के हृदय को संतुष्ट करना होगा। इस प्रकार से, परमेश्वर तुम्हें निश्चय आशीषित करेगा और यदि तुम इस प्रकार से कठिनाइयों को सहोगे, तो इसके बाद पवित्र आत्मा का कार्य होगा। वास्तविक जीवन के माध्यम से, और परमेश्वर के वचन के अनुभव के द्वारा, लोग परमेश्वर की सुन्दरता को देख सकते हैं, और परमेश्वर के प्रेम का स्वाद लेने के बाद ही वे वास्तव में उसे प्रेम कर सकेंगे।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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