परमेश्वर के वचन | "वह व्यक्ति उद्धार प्राप्त करता है जो सत्य का अभ्यास करने को तैयार है" | अंश 428

परमेश्वर के वचन | "वह व्यक्ति उद्धार प्राप्त करता है जो सत्य का अभ्यास करने को तैयार है" | अंश 428

593 |12 सितम्बर, 2020

बहुत लोग अभ्यास के बारे में थोड़ी बात कर सकते हैं और वे अपने व्यक्तिगत विचारों के बारे में बात कर सकते हैं, लेकिन इसमें से अधिकांश दूसरों के वचनों से प्राप्त होने वाला प्रकाश होता है। इसमें उनके अपने व्यक्तिगत अभ्यासों से कुछ भी शामिल नहीं होता, न ही इसमें ऐसा कुछ शामिल होता है, जिसे उन्होंने अपने अनुभवों से देखा हो। मैं पहले इस मुद्दे की चीर-फाड़ कर चुका हूँ; यह मत सोचो कि मुझे कुछ पता नहीं है। तुम केवल कागज़ी शेर हो, और बात तुम शैतान पर विजय पाने, विजय के साक्ष्य वहन करने और परमेश्वर की छवि को जीने की करते हो? यह सब बकवास है! क्या तुम्हें लगता है कि आज परमेश्वर द्वारा बोले गए सभी वचन तुम्हारी सराहना पाने के लिए हैं? मुँह से तुम अपने पुराने स्वभाव को त्यागने और सत्य का अभ्यास करने की बात करते हो, और तुम्हारे हाथ दूसरे कर्म कर रहे हैं और तुम्हारा हृदय दूसरी योजनाओं की साजिश कर रहा है—तुम किस तरह के व्यक्ति हो? तुम्हारा हृदय और तुम्हारे हाथ एक क्यों नहीं हैं? इतने सारे उपदेश खोखले शब्द हो गए हैं; क्या यह हृदय तोड़ने वाली बात नहीं है? यदि तुम परमेश्वर के वचन का अभ्यास करने में असमर्थ हो, तो इससे यह साबित होता है कि तुमने अभी तक पवित्र आत्मा के कार्य के तरीके में प्रवेश नहीं किया है, तुम्हारे अंदर अभी तक पवित्र आत्मा का कार्य नहीं हुआ है, और तुम्हें अभी तक उसका मार्गदर्शन नहीं मिला है। यदि तुम कहते हो कि तुम केवल परमेश्वर के वचन को समझने में समर्थ हो, लेकिन उसका अभ्यास करने में समर्थ नहीं हो, तो तुम एक ऐसे व्यक्ति हो, जो सत्य से प्रेम नहीं करता। परमेश्वर इस तरह के व्यक्ति को बचाने के लिए नहीं आता। यीशु को जब पापियों, गरीबों और सभी विनम्र लोगों को बचाने के लिए सलीब पर चढ़ाया गया था, तो उसे बहुत पीड़ा हुई थी। उसके सलीब पर चढ़ने की प्रक्रिया ने पापबलि का काम किया था। यदि तुम परमेश्वर के वचन का अभ्यास नहीं कर सकते, तो तुम्हें जितनी जल्दी हो सके, चले जाना चाहिए; एक मुफ्तखोर के रूप में परमेश्वर के घर में पड़े मत रहो। बहुत-से लोग तो स्वयं को ऐसी चीज़ें करने से रोकने में भी कठिनाई महसूस करते हैं, जो स्पष्टत: परमेश्वर का विरोध करती हैं। क्या वे मृत्यु नहीं माँग रहे हैं? वे परमेश्वर के राज्य में प्रवेश की बात कैसे कर सकते हैं? क्या उनमें परमेश्वर का चेहरा देखने की धृष्टता होगी? वह भोजन करना, जो परमेश्वर तुम्हें प्रदान करता है; कुटिल चीज़ें करना, जो परमेश्वर का विरोध करती हैं; दुर्भावनापूर्ण, कपटी और षड्यंत्रकारी बनना, तब भी जबकि परमेश्वर तुम्हें अपने द्वारा दिए गए आशीषों का आनंद लेने देता है—क्या तुम उन्हें प्राप्त करते हुए अपने हाथों को जलता हुआ महसूस नहीं करते? क्या तुम अपने चेहरे को शर्म से लाल होता महसूस नहीं करते? परमेश्वर के विरोध में कुछ करने के बाद, "दुष्ट बनने" के लिए षड्यंत्र रचने के बाद, क्या तुम्हें डर नहीं लगता? यदि तुम्हें कुछ महसूस नहीं होता, तो तुम किसी भविष्य के बारे में बात कैसे कर सकते हो? तुम्हारे लिए पहले से ही कोई भविष्य नहीं था, तो अभी भी तुम्हारी और बड़ी अपेक्षाएँ क्या हो सकती हैं? यदि तुम कोई बेशर्मी की बात करते हो और कोई धिक्कार महसूस नहीं करते, और तुम्हारे ह्रदय में कोई जागरूकता नहीं है, तो क्या इसका अर्थ यह नहीं है कि तुम परमेश्वर द्वारा पहले ही त्यागे जा चुके हो? मज़ा लेते हुए और अनर्गल ढंग से बोलना और कार्य करना तुम्हारी प्रकृति बन गया है; तुम इस तरह कैसे कभी परमेश्वर द्वारा पूर्ण किए जा सकते हो? क्या तुम दुनिया भर में चल पाने में सक्षम होगे? तुम पर कौन विश्वास करेगा? जो लोग तुम्हारी सच्ची प्रकृति को जानते हैं, वे तुमसे दूरी बनाए रखेंगे। क्या यह परमेश्वर का दंड नहीं है? कुल मिलाकर, अगर केवल बात होती है और कोई अभ्यास नहीं होता, तो कोई विकास नहीं होता। यद्यपि तुम्हारे बोलते समय पवित्र आत्मा तुम पर कार्य कर रहा हो सकता है, किंतु यदि तुम अभ्यास नहीं करते, तो पवित्र आत्मा कार्य करना बंद कर देगा। यदि तुम इसी तरह से करते रहे, तो भविष्य के बारे में या अपना पूरा अस्तित्व परमेश्वर के कार्य को सौंपने के बारे में कोई बात कैसे हो सकती है? तुम केवल अपना पूरा अस्तित्व सौंपने की बात कर सकते हो, लेकिन तुमने अपना सच्चा प्यार परमेश्वर को नहीं दिया है। उसे तुमसे केवल मौखिक भक्ति मिलती है, उसे तुम्हारा सत्य का अभ्यास करने का इरादा नहीं मिलता। क्या यह तुम्हारा असली आध्यात्मिक कद हो सकता है? यदि तुम ऐसा ही करते रहे, तो तुम परमेश्वर द्वारा पूर्ण कब बनाए जाओगे? क्या तुम अपने अंधकारमय और विषादपूर्ण भविष्य के बारे में चिंता महसूस नहीं करते? क्या तुम्हें नहीं लगता कि परमेश्वर ने तुममें आशा खो दी है? क्या तुम नहीं जानते कि परमेश्वर अधिक और नए लोगों को पूर्ण बनाना चाहता है? क्या पुरानी चीज़ें कायम रह सकती हैं? तुम आज परमेश्वर के वचनों पर ध्यान नहीं दे रहे हो : क्या तुम कल की प्रतीक्षा कर रहे हो?

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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