परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के समक्ष अपने हृदय को शांत रखने के बारे में" | अंश 421

परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के समक्ष अपने हृदय को शांत रखने के बारे में" | अंश 421

151 |11 सितम्बर, 2020

परमेश्वर के वचनों को अपने जीवन के रूप में स्वीकार करने हेतु उसके समक्ष आने के लिए तुम्हें पहले उसके समक्ष शांत होना होगा। जब तुम परमेश्वर के समक्ष शांत होगे, केवल तभी वह तुम्हें प्रबुद्ध करेगा और तुम्हें ज्ञान देगा। लोग परमेश्वर के समक्ष जितना अधिक शांत होते हैं, उतना अधिक वे प्रबुद्धता और रोशनी प्राप्त कर पाते हैं। इस सबके लिए आवश्यक है कि लोगों में भक्ति और विश्वास हो; केवल इसी प्रकार वे सिद्ध बनाए जा सकते हैं। आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश करने का बुनियादी सबक परमेश्वर की उपस्थिति में शांत रहना है। यदि तुम परमेश्वर की उपस्थिति में शांत होगे, तो केवल तभी तुम्हारा समस्त आध्यात्मिक प्रशिक्षण प्रभावी होगा। यदि तुम्हारा हृदय परमेश्वर के समक्ष शांत रहने में असमर्थ है, तो तुम पवित्र आत्मा के कार्य को प्राप्त नहीं कर पाओगे। यदि तुम्हारा हृदय परमेश्वर के समक्ष शांत है, तो चाहे तुम जो कुछ भी करो, तब तुम ऐसे व्यक्ति हो, जो परमेश्वर की उपस्थिति में जीता है। यदि तुम्हारा हृदय परमेश्वर के समक्ष शांत है और उसके समीप जाता है, तो चाहे तुम कुछ भी करो, इससे साबित होता है कि तुम ऐसे व्यक्ति हो, जो परमेश्वर के समक्ष शांत रहता है। यदि तुम लोगों से वार्तालाप करते समय, चलते-फिरते समय यह कह पाते हो, "मेरा हृदय परमेश्वर के समीप जा रहा है और बाहरी चीज़ों पर केंद्रित नहीं है, और मैं परमेश्वर के समक्ष शांत रह सकता हूँ," तो तुम ऐसे व्यक्ति हो, जो परमेश्वर के समक्ष शांत रहता है। ऐसी किसी चीज़ में, जो तुम्हारे हृदय को बाहरी मामलों की तरफ खींचती हो, या ऐसे लोगों के साथ, जो तुम्हारे हृदय को परमेश्वर से अलग करते हों, संलग्न मत हो। जो कुछ भी तुम्हारे हृदय को परमेश्वर के निकट आने से विचलित करता हो, उसे अलग रख दो, या उससे दूर रहो। यह तुम्हारे जीवन के लिए कहीं अधिक लाभदायक है। अभी निश्चित रूप से पवित्र आत्मा के महान कार्य का समय है, वह समय, जब परमेश्वर व्यक्तिगत रूप से लोगों को सिद्ध बना रहा है। यदि, इस क्षण, तुम परमेश्वर के समक्ष शांत नहीं रह सकते हो, तो तुम ऐसे व्यक्ति नहीं हो, जो परमेश्वर के सिंहासन के सामने लौटेगा। यदि तुम परमेश्वर के अलावा अन्य चीजों का अनुसरण करते हो, तो तुम्हें परमेश्वर द्वारा सिद्ध बनाए जाने का कोई मार्ग नहीं होगा। जो लोग परमेश्वर से ऐसे कथनों को सुन सकते हैं और फिर भी आज उसके समक्ष शांत रहने में असफल रहते हैं, वे ऐसे लोग हैं, जो सत्य और परमेश्वर से प्रेम नहीं करते। यदि इस क्षण तुम अपने आपको समर्पित नहीं करोगे, तो तुम किसकी प्रतीक्षा कर रहे हो? अपने आपको समर्पित करना परमेश्वर के समक्ष अपने हृदय को शांत करना है। यही एक वास्तविक बलि होगी। जो कोई भी अब सचमुच अपना हृदय परमेश्वर को समर्पित करता है, वह परमेश्वर द्वारा पूर्ण बनाए जाने के लिए आश्वस्त किया जाता है। कोई भी चीज़, चाहे वह कुछ भी क्यों न हो, तुम्हें विक्षुब्ध नहीं कर सकती है; चाहे वह तुम्हारी काट-छाँट करना हो या तुमसे निपटना हो, या चाहे तुम्हें कुंठा या असफलता का सामना करना पड़े, तुम्हारा हृदय परमेश्वर के समक्ष हमेशा शांत होना चाहिए। चाहे लोग तुम्हारे साथ कैसा भी व्यवहार करें, तुम्हारा हृदय परमेश्वर के समक्ष शांत होना चाहिए। चाहे तुम्हें कैसी भी परिस्थिति का सामना करना पड़े—चाहे तुम विपत्ति, पीड़ा, उत्पीड़न या विभिन्न परीक्षणों से घिर जाओ—तुम्हारा हृदय परमेश्वर के समक्ष हमेशा शांत होना चाहिए; सिद्ध किए जाने के ऐसे ही मार्ग हैं। जब तुम परमेश्वर के समक्ष शांत होते हो, केवल तभी परमेश्वर के वर्तमान वचन तुम्हें स्पष्ट होंगे। तब तुम अधिक सही तरीके से और बिना विचलन के पवित्र आत्मा की रोशनी और प्रबुद्धता का अभ्यास कर सकते हो, परमेश्वर के इरादों को और अधिक स्पष्टता से समझ सकते हो, जो तुम्हारी सेवा को एक स्पष्ट दिशा प्रदान करेंगे, और तुम अधिक परिशुद्धता से पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन और प्रेरणा को समझ सकते हो, और पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन के अधीन रहने के बारे में आश्वस्त हो सकते हो। परमेश्वर के समक्ष सचमुच शांत रहने के ऐसे ही परिणाम प्राप्त होते हैं। जब लोग परमेश्वर के वचनों के बारे में स्पष्ट नहीं होते, उनके पास अभ्यास करने का कोई मार्ग नहीं होता, वे परमेश्वर के इरादों को समझने में असफल रहते हैं, या उनमें अभ्यास के सिद्धांतों का अभाव होता है, तो ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि परमेश्वर के समक्ष उनका हृदय शांत नहीं होता। परमेश्वर के समक्ष शांत रहने का उद्देश्य ईमानदार और व्यावहारिक होना, परमेश्वर के वचनों में यथार्थता और पारदर्शिता ढूँढ़ना, और अंततः सत्य को समझने और परमेश्वर को जानने की स्थिति में पहुँचना है।

यदि तुम्हारा हृदय प्रायः परमेश्वर के समक्ष शांत नहीं रहता, तो परमेश्वर के पास तुम्हें सिद्ध करने का कोई साधन नहीं है। संकल्पहीन होना हृदयहीन होने के बराबर है, और हृदयहीन व्यक्ति परमेश्वर के समक्ष शांत नहीं हो सकता; ऐसा व्यक्ति नहीं जानता कि परमेश्वर कितना कार्य करता है, या वह कितना कुछ बोलता है, न ही वह यह जानता है कि अभ्यास कैसे किया जाए। क्या यह व्यक्ति हृदयहीन नहीं है? क्या हृदयहीन व्यक्ति परमेश्वर के समक्ष शांत रह सकता है? हृदयहीन लोगों को सिद्ध बनाने का परमेश्वर के पास कोई साधन नहीं है—और वे बोझ ढोने वाले जानवरों से भिन्न नहीं हैं। परमेश्वर इतने स्पष्ट और पारदर्शी तरीके से बोला है, फिर भी तुम्हारा हृदय प्रेरित नहीं होता और तुम परमेश्वर के समक्ष शांत रहने में असमर्थ रहते हो। क्या तुम एक गूँगे जानवर नहीं हो? कुछ लोग परमेश्वर की उपस्थिति में शांत रहने के अभ्यास में भटक जाते हैं। जब भोजन पकाने का समय होता है, तो वे भोजन नहीं पकाते, जब दैनिक काम-काज का समय होता है, तो वे उन्हें नहीं करते, बल्कि केवल प्रार्थना और ध्यान ही करते रहते हैं। परमेश्वर के समक्ष शांत रहने का अर्थ यह नहीं है कि भोजन मत पकाओ या दैनिक काम-काज मत करो, या अपना जीवन मत जीओ; बल्कि, यह सभी सामान्य अवस्थाओं में परमेश्वर के समक्ष अपने हृदय को शांत करने में सक्षम होना, और अपने हृदय में परमेश्वर के लिए एक स्थान रखना है। जब तुम प्रार्थना करते हो, तो प्रार्थना करने के लिए तुम्हें परमेश्वर के आगे ठीक तरह से घुटने टेककर झुकना चाहिए; जब तुम दैनिक काम-काज करते हो या भोजन पकाते हो, तो परमेश्वर के समक्ष अपने हृदय को शांत करो, परमेश्वर के वचनों पर चिंतन करो, या भजन गाओ। तुम चाहे अपने आपको किसी भी परिस्थिति में पाओ, तुम्हारे पास अभ्यास करने का अपना तरीका होना चाहिए, परमेश्वर के निकट आने के लिए तुम जो कुछ कर सकते हो, तुम्हें करना चाहिए, और परमेश्वर के समक्ष अपने हृदय को शांत रखने के लिए तुम्हें अपनी पूरी ताक़त से कोशिश करनी चाहिए। जब परिस्थितियाँ अनुमति दें, तो एकचित्त होकर प्रार्थना करो; और जब परिस्थितियाँ अनुमति न दें, तो अपने हाथों के काम को करते हुए अपने हृदय में परमेश्वर के निकट जाओ। जब तुम परमेश्वर के वचनों को खा और पी सकते हो, तो उसके वचनों को खाओ और पीओ; जब तुम प्रार्थना कर सकते हो, तो प्रार्थना करो; जब तुम परमेश्वर का मनन कर सकते हो, तब उसका मनन करो। दूसरे शब्दों में, अपने परिवेश के अनुसार प्रवेश के लिए अपने आपको प्रशिक्षित करने हेतु अपनी पूरी कोशिश करो। कुछ लोग परमेश्वर के समक्ष तभी शांत हो पाते हैं, जब कोई समस्या नहीं होती, लेकिन जैसे ही कुछ होता है, उनके मन भटक जाते हैं। यह परमेश्वर के समक्ष शांत होना नहीं है। इसे अनुभव करने का सही तरीका है: किसी भी परिस्थिति में हमारा हृदय परमेश्वर से दूर न जाए, या बाहरी लोगों, घटनाओं या चीज़ों से विक्षुब्ध महसूस न करे, और केवल तभी कोई व्यक्ति ऐसा होता है, जो परमेश्वर के समक्ष सचमुच शांत होता है। कुछ लोग कहते हैं कि जब वे सभाओं में प्रार्थना करते हैं, तो परमेश्वर के सामने उनका हृदय शांत रह सकता है, किंतु दूसरों के साथ संगति में वे परमेश्वर के समक्ष शांत रहने में असमर्थ रहते हैं, उनके विचार भटक जाते हैं। यह परमेश्वर के समक्ष शांत रहना नहीं है। आज अधिकांश लोग इसी अवस्था में हैं, उनके हृदय परमेश्वर के समक्ष हमेशा शांत रहने में असमर्थ हैं। इसलिए, तुम लोगों को इस क्षेत्र में अपने परिश्रम में अधिक प्रयास अवश्य लगाने चाहिए, जीवन-अनुभव के सही पथ पर कदम-दर-कदम प्रवेश करना चाहिए, और परमेश्वर के द्वारा सिद्ध बनाए जाने के मार्ग पर चलने की शुरुआत करनी चाहिए।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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