परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के समक्ष अपने हृदय को शांत रखने के बारे में" | अंश 419

परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के समक्ष अपने हृदय को शांत रखने के बारे में" | अंश 419

0 |31 अगस्त, 2020

परमेश्वर के वचनों में प्रवेश करने के लिए परमेश्वर के समक्ष अपने हृदय को शांत रखने से अधिक महत्वपूर्ण कदम कोई नहीं है। यह वह सबक है, जिसमें वर्तमान में सभी लोगों को प्रवेश करने की तत्काल आवश्यकता है। परमेश्वर के समक्ष अपने हृदय को शांत रखने में प्रवेश करने के निम्नलिखित मार्ग हैं:

1. अपने हृदय को बाहरी मामलों से हटा लो, परमेश्वर के समक्ष शांत रहो और अपना एकचित्त ध्यान परमेश्वर से प्रार्थना करने में लगाओ।

2. परमेश्वर के समक्ष शांत हृदय के साथ परमेश्वर के वचनों को खाओ, पीओ और उनका आनंद लो।

3. अपने हृदय में परमेश्वर के प्रेम पर ध्यान लगाओ और उस पर चिंतन करो और परमेश्वर के कार्य पर मनन करो।

सर्वप्रथम प्रार्थना के पहलू से आरंभ करो। एकचित्त होकर तथा नियत समय पर प्रार्थना करो। तुम्हारे पास समय की चाहे कितनी भी कमी हो, तुम कार्य में कितने भी व्यस्त हो, या तुम पर कुछ भी क्यों ना बीते, हर दिन सामान्य रूप से प्रार्थना करो, सामान्य रूप से परमेश्वर के वचनों को खाओ और पीओ। जब तक तुम परमेश्वर के वचनों को खाते और पीते रहोगे, तब तक चाहे तुम्हारा परिवेश कैसा भी क्यों ना हो, तुम्हें बहुत आत्मिक आनंद मिलेगा, और तुम लोगों, घटनाओं या अपने आसपास की चीज़ों से प्रभावित नहीं होगे। जब तुम अपने हृदय में साधारण रूप से परमेश्वर का मनन करते हो, तो बाहर जो कुछ भी होता है, वह तुम्हें परेशान नहीं कर सकता। आध्यात्मिक कद काठी प्राप्त करने का यही अर्थ है। प्रार्थना से आरंभ करो: परमेश्वर के सामने शांति के साथ प्रार्थना करना बहुत फलदायक है। इसके पश्चात्, परमेश्वर के वचनों को खाओ और पीओ, उसके वचनों पर मनन करके उनसे प्रकाश पाने का प्रयास करो, अभ्यास करने का मार्ग ढूँढ़ो, परमेश्वर के वचनों को कहने में उसके उद्देश्य को जानो, और उन्हें बिना भटके समझो। साधारणतया, बाहरी चीज़ों से विक्षुब्ध हुए बिना तुम्हारे लिए अपने हृदय में परमेश्वर के निकट आने, परमेश्वर के प्रेम पर मनन करने और उसके वचनों पर चिंतन करने में समर्थ होना सामान्य होना चाहिए। जब तुम्हारा हृदय एक हद तक शांत हो जाएगा, तो चाहे जैसा भी तुम्हारा परिवेश हो, तुम चुपचाप ध्यान लगाने और अपने भीतर परमेश्वर के प्रेम पर मनन करने और वास्तव में परमेश्वर के निकट आने में सक्षम हो जाओगे, जब तक कि अंतत: तुम ऐसी स्थिति में नहीं पहुँच जाओगे जहाँ तुम्हारे हृदय में परमेश्वर के लिए प्रशंसा उमड़ने लगे, और यह प्रार्थना करने से भी बेहतर है। तब तुम एक निश्चित आध्यात्मिक कद काठी के हो जाओगे। यदि तुम ऊपर वर्णित अवस्थाओं में होने की स्थिति प्राप्त कर पाते हो, तो यह इस बात का प्रमाण होगा कि तुम्हारा हृदय परमेश्वर के समक्ष सच में शांत है। यह पहला बुनियादी सबक है। जब लोग परमेश्वर के सामने शांत होने में सक्षम होते हैं, केवल तभी वे पवित्र आत्मा के द्वारा स्पर्श, प्रबुद्ध और रोशन किए जा सकते हैं, और केवल तभी वे परमेश्वर के साथ सच्ची सहभागिता कर पाते हैं और साथ ही परमेश्वर की इच्छा और पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन को समझ पाते हैं। तब वे अपने आध्यात्मिक जीवन में सही राह पर प्रवेश कर चुके होंगे। परमेश्वर के सामने रहने का उनका प्रशिक्षण जब एक निश्चित गहराई तक पहुँच जाता है, और वे अपने आपको त्यागने, अपना तिरस्कार करने और परमेश्वर के वचनों में जीने में समर्थ हो जाते हैं, तब उनके हृदय वास्तव में परमेश्वर के समक्ष शांत होते हैं। स्वयं का तिरस्कार करने, स्वयं को कोसने और स्वयं का त्याग करने में समर्थ होना, वह प्रभाव है जो परमेश्वर के कार्य द्वारा प्राप्त होता है, और लोगों के द्वारा अपने दम पर नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार, अपने हृदय को परमेश्वर के समक्ष शांत करने का अभ्यास वह सबक है, जिसमें लोगों को तत्काल प्रवेश करना चाहिए। कुछ लोगों के लिए, न केवल वे साधारण तौर पर परमेश्वर के समक्ष शांत होने में असमर्थ होते हैं, बल्कि वे प्रार्थना करते समय भी अपने हृदय को शांत नहीं रख सकते। यह परमेश्वर के मानकों से बहुत कम है! यदि तुम्हारा हृदय परमेश्वर के समक्ष शांत नहीं हो सकता, तो क्या तुम पवित्र आत्मा द्वारा प्रेरित किए जा सकते हो? यदि तुम ऐसे व्यक्ति हो, जो परमेश्वर के समक्ष शांत नहीं रह सकता, तो किसी के आने से या दूसरों के बात करने पर तुम्हारा ध्यान भंग हो सकता है, और जब दूसरे लोग कार्य करते हैं तो तुम्हारा हृदय दूर खिंच सकता है, ऐसे मामले में तुम परमेश्वर की उपस्थिति में नहीं जीते हो। यदि तुम्हारा हृदय वास्तव में परमेश्वर के समक्ष शांत रहता है, तो बाहरी दुनिया में होने वाली किसी भी बात से तुम अशांत नहीं होगे, या तुम पर किसी भी व्यक्ति, घटना या वस्तु द्वारा कब्जा नहीं किया जा सकेगा। यदि तुम्हारा इसमें प्रवेश है, तो वे नकारात्मक अवस्थाएँ और समस्त नकारात्मक चीज़ें—मानवीय धारणाएँ, जीवन-दर्शन, लोगों के बीच असामान्य संबंध तथा मत और विचार, इत्यादि—स्वाभाविक रूप से गायब हो जाएँगी। चूँकि तुम सदा परमेश्वर के वचनों पर चिंतन कर रहे हो, और तुम्हारा हृदय हमेशा परमेश्वर के निकट आ रहा है और हमेशा परमेश्वर के वर्तमान वचनों से घिरा रहता है, इसलिए वे नकारात्मक चीज़ें अनजाने ही तुमसे दूर हो जाएँगी। जब नई और सकारात्मक चीज़ें तुम पर कब्जा करेंगी, तब पुरानी नकारात्मक चीज़ों के लिए कोई जगह नहीं रहेगी, इसलिए उन नकारात्मक चीज़ों पर ध्यान न दो। तुम्हें उन्हें नियंत्रित करने के लिए कोई प्रयास करने की आवश्यकता नहीं है। तुम्हें परमेश्वर के समक्ष शांत रहने, परमेश्वर के वचनों को अधिक से अधिक खाने, पीने और उनका आनंद लेने, परमेश्वर की स्तुति में अधिकाधिक भजन गाने, और परमेश्वर को अपने ऊपर कार्य करने का अवसर देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, क्योंकि परमेश्वर इस समय मानव-जाति को व्यक्तिगत रूप से सिद्ध बनाना चाहता है, और वह तुम्हारे हृदय को हासिल करना चाहता है; उसका आत्मा तुम्हारे हृदय को प्रेरित करता है, और यदि पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन का अनुसरण करके तुम परमेश्वर की उपस्थिति में आ जाते हो, तो तुम परमेश्वर को संतुष्ट करोगे। यदि तुम परमेश्वर के वचनों में जीने पर ध्यान देते हो, और पवित्र आत्मा की प्रबुद्धता और रोशनी प्राप्त करने के लिए सत्य के बारे में संगति करने में अधिक संलग्न होते हो, तो वे धार्मिक धारणाएँ और तुम्हारा दंभ और अहम्मन्यता, सब गायब हो जाएँगे, और तुम जान जाओगे कि किस प्रकार अपने आपको परमेश्वर के लिए व्यय करना है, किस प्रकार परमेश्वर से प्रेम करना है, और किस प्रकार उसे संतुष्ट करना है। और बिना तुम्हारे जाने परमेश्वर के लिए असंगत चीज़ें तुम्हारी चेतना में से गायब हो जाएँगी।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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