परमेश्वर के दैनिक वचन : मंज़िलें और परिणाम | अंश 594

19 सितम्बर, 2020

आरंभ में परमेश्वर विश्राम में था। उस समय पृथ्वी पर कोई मनुष्य या अन्य कुछ भी नहीं था और परमेश्वर ने तब तक किसी भी तरह का कोई कार्य नहीं किया था। उसने अपने प्रबंधन का कार्य केवल तब आरंभ किया, जब मानवता अस्तित्व में आ गई और जब मानवता भ्रष्ट कर दी गई; उस पल से, उसने विश्राम नहीं किया बल्कि इसके बजाय उसने स्वयं को मानवता के बीच व्यस्त रखना आरंभ कर दिया। मानवता के भ्रष्ट होने की वजह से और प्रधान स्वर्गदूत के विद्रोह के कारण भी परमेश्वर को विश्राम से उठना पड़ा। यदि परमेश्वर शैतान को परास्त नहीं करता और भ्रष्ट हो चुकी मानवता को नहीं बचाता, तो वह पुनः कभी भी विश्राम में प्रवेश नहीं कर पाएगा। मनुष्य के समान ही परमेश्वर को भी विश्राम नहीं मिलता और जब वह एक बार फिर विश्राम करेगा, तो मनुष्य भी करेंगे। विश्राम में जीवन का अर्थ है युद्ध के बिना, गंदगी के बिना और स्थायी अधार्मिकता के बिना जीवन। कहने का अर्थ है कि यह जीवन शैतान की रुकावटों (यहाँ "शैतान" शत्रुतापूर्ण शक्तियों के संदर्भ में है) और शैतान की भ्रष्टता से मुक्त है और इसे परमेश्वर विरोधी किसी भी शक्ति के आक्रमण का ख़तरा नहीं है; यह ऐसा जीवन है, जिसमें हर चीज़ अपनी किस्म का अनुसरण करती है और सृष्टि के प्रभु की आराधना कर सकती है और जिसमें स्वर्ग और पृथ्वी पूरी तरह शांत हैं—"मनुष्यों का विश्रामपूर्ण जीवन", इन शब्दों का यही अर्थ है। जब परमेश्वर विश्राम करेगा, तो पृथ्वी पर अधार्मिकता नहीं रहेगी, न ही शत्रुतापूर्ण शक्तियों का फिर कोई आक्रमण होगा और मानवजाति एक नए क्षेत्र में प्रवेश करेगी—शैतान द्वारा भ्रष्ट मानवता नहीं होगी, बल्कि ऐसी मानवता होगी, जिसे शैतान के भ्रष्ट किए जाने के बाद बचाया गया है। मानवता के विश्राम का दिन ही परमेश्वर के विश्राम का दिन भी होगा। मानवता के विश्राम में प्रवेश करने में असमर्थता के कारण परमेश्वर ने अपना विश्राम खोया था, इसलिए नहीं कि वह मूल रूप से विश्राम करने में असमर्थ था। विश्राम में प्रवेश करने का अर्थ यह नहीं कि सभी चीज़ों का चलना या विकसित होना बंद हो जाएगा, न ही इसका यह अर्थ है कि परमेश्वर कार्य करना बंद कर देगा या मनुष्यों का जीवन रुक जाएगा। विश्राम में प्रवेश करने का चिह्न होगा जब शैतान नष्ट कर दिया गया है, जब उसके साथ बुरे कामों में शामिल दुष्ट लोग दंडित किए गए हैं और मिटा दिए गए हैं और जब परमेश्वर के प्रति सभी शत्रुतापूर्ण शक्तियों का अस्तित्व समाप्त हो गया है। परमेश्वर के विश्राम में प्रवेश करने का अर्थ है कि वह मानवता के उद्धार का कार्य अब और नहीं करेगा। मानवता के विश्राम में प्रवेश करने का अर्थ है कि समस्त मानवता परमेश्वर के प्रकाश के भीतर और उसके आशीष के अधीन, शैतान की भ्रष्टता के बिना जिएगी और कोई अधार्मिकता नहीं होगी। परमेश्वर की देखभाल में मनुष्य सामान्य रूप से पृथ्वी पर रहेंगे। जब परमेश्वर और मनुष्य दोनों एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे, तो इसका अर्थ होगा कि मानवता को बचा लिया गया है और शैतान का विनाश हो चुका है, कि मनुष्यों के बीच परमेश्वर का कार्य पूरी तरह समाप्त हो गया है। परमेश्वर मनुष्यों के बीच अब और कार्य नहीं करता रहेगा और वे अब शैतान के अधिकार क्षेत्र में और नहीं रहेंगे। वैसे तो, परमेश्वर अब और व्यस्त नहीं रहेगा और मनुष्य लगातार गतिमान नहीं रहेंगे; परमेश्वर और मानवता एक साथ विश्राम में प्रवेश करेंगे। परमेश्वर अपने मूल स्थान पर लौट जाएगा और प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने स्थान पर लौट जाएगा। ये वे गंतव्य हैं, जहाँ परमेश्वर का समस्त प्रबंधन पूरा होने पर परमेश्वर और मनुष्य रहेंगे। परमेश्वर के पास परमेश्वर की मंज़िल है, और मानवता के पास मानवता की। विश्राम करते समय, परमेश्वर पृथ्वी पर सभी मनुष्यों के जीवन का मार्गदर्शन करता रहेगा, जबकि वे उसके प्रकाश में, स्वर्ग के एकमात्र सच्चे परमेश्वर की आराधना करेंगे। परमेश्वर अब मानवता के बीच और नहीं रहेगा, न ही मनुष्य परमेश्वर के साथ उसके गंतव्य में रहने में समर्थ होंगे। परमेश्वर और मनुष्य दोनों एक ही क्षेत्र के भीतर नहीं रह सकते; बल्कि दोनों के जीने के अपने-अपने तरीक़े हैं। परमेश्वर वह है, जो समस्त मानवता का मार्गदर्शन करता है और समस्त मानवता परमेश्वर के प्रबंधन-कार्य का ठोस स्वरूप है। मनुष्य वे हैं, जिनकी अगुआई की जाती है और वे परमेश्वर के सार के समान नहीं हैं। "विश्राम" का अर्थ है अपने मूल स्थान में लौटना। इसलिए, जब परमेश्वर विश्राम में प्रवेश करता है, तो इसका अर्थ है कि परमेश्वर अपने मूल स्थान में लौट जाता है। वह पृथ्वी पर अब और नहीं रहेगा, या मानवता की ख़ुशियाँ या उसके दु:ख साझा नहीं करेगा। जब मनुष्य विश्राम में प्रवेश करते हैं, तो इसका अर्थ है कि वे सृष्टि की सच्ची वस्तु बन गए हैं; वे पृथ्वी से परमेश्वर की आराधना करेंगे और सामान्य मानवीय जीवन जिएंगे। लोग अब और परमेश्वर की अवज्ञा या प्रतिरोध नहीं करेंगे और वे आदम और हव्वा के मूल जीवन की ओर लौट जाएंगे। विश्राम में प्रवेश करने के बाद ये परमेश्वर और मनुष्य के अपने-अपने जीवन और गंतव्य होंगे। परमेश्वर और शैतान के बीच युद्ध में शैतान की पराजय अपरिहार्य प्रवृत्ति है। इसी तरह, अपना प्रबंधन-कार्य पूरा करने के बाद परमेश्वर का विश्राम में प्रवेश करना और मनुष्य का पूर्ण उद्धार और विश्राम में प्रवेश अपरिहार्य प्रवृत्ति बन गए हैं। मनुष्य के विश्राम का स्थान पृथ्वी है और परमेश्वर के विश्राम का स्थान स्वर्ग में है। जब मनुष्य विश्राम में परमेश्वर की आराधना करते हैं, वे पृथ्वी पर रहेंगे और जब परमेश्वर बाकी मानवता को विश्राम में ले जाएगा, वह स्वर्ग से उनका नेतृत्व करेगा न कि पृथ्वी से। परमेश्वर तब भी पवित्र आत्मा ही होगा, जबकि मनुष्य तब भी देह होंगे। परमेश्वर और मनुष्य दोनों अलग ढंग से विश्राम करते हैं। जब परमेश्वर विश्राम करता है, वह मनुष्यों के बीच आएगा और प्रकट होगा; जबकि मनुष्यों को विश्राम के दौरान स्वर्ग की यात्रा करने और साथ ही वहाँ के जीवन का आनंद उठाने के लिए परमेश्वर द्वारा अगुआई की जाएगी। परमेश्वर और मनुष्य के विश्राम में प्रवेश करने के बाद, शैतान का अस्तित्व नहीं रहेगा; उसी तरह, वे दुष्ट लोग भी अस्तित्व में नहीं रहेंगे। परमेश्वर और मनुष्यों के विश्राम में जाने से पहले, वे दुष्ट व्यक्ति जिन्होंने कभी पृथ्वी पर परमेश्वर को उत्पीड़ित किया था, साथ ही वे शत्रु जो पृथ्वी पर उसके प्रति अवज्ञाकारी थे, वे पहले ही नष्ट कर दिए गए होंगे; वे अंत के दिनों की बड़ी आपदा द्वारा नष्ट कर दिए गए होंगे। उन दुष्ट लोगों के पूर्ण विनाश के बाद, पृथ्वी फिर कभी शैतान का उत्पीड़न नहीं जानेगी। केवल तब मानवता पूर्ण उद्धार को प्राप्त करेगी और परमेश्वर का कार्य पूर्णतः समाप्त होगा। परमेश्वर और मनुष्य के विश्राम में प्रवेश करने के लिए ये पूर्व अपेक्षाएँ हैं।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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