परमेश्वर के दैनिक वचन : मंज़िलें और परिणाम | अंश 590

06 अक्टूबर, 2020

एक बार जब विजय का कार्य पूरा कर लिया जाएगा, तब मनुष्य को एक सुंदर संसार में लाया जाएगा। निस्संदेह, यह जीवन तब भी पृथ्वी पर ही होगा, किंतु यह मनुष्य के आज के जीवन के बिलकुल विपरीत होगा। यह वह जीवन है, जो संपूर्ण मानव-जाति पर विजय प्राप्त कर लिए जाने के बाद मानव-जाति के पास होगा, यह पृथ्वी पर मनुष्य के लिए एक नई शुरुआत होगी, और मनुष्य के पास इस प्रकार का जीवन होना इस बात का सबूत होगा कि मनुष्य ने एक नए और सुंदर क्षेत्र में प्रवेश कर लिया है। यह पृथ्वी पर मनुष्य और परमेश्वर के जीवन की शुरुआत होगी। ऐसे सुंदर जीवन का आधार ऐसा होना चाहिए, कि मनुष्य को शुद्ध कर दिए जाने और उस पर विजय पा लिए जाने के बाद वह परमेश्वर के सम्मुख समर्पण कर दे। और इसलिए, मानव-जाति के अद्भुत मंज़िल में प्रवेश करने से पहले विजय का कार्य परमेश्वर के कार्य का अंतिम चरण है। ऐसा जीवन ही पृथ्वी पर मनुष्य का भविष्य का जीवन है, पृथ्वी पर सबसे अधिक सुंदर जीवन, उस प्रकार का जीवन जिसकी लालसा मनुष्य करता है, और उस प्रकार का जीवन, जिसे मनुष्य ने संसार के इतिहास में पहले कभी प्राप्त नहीं किया है। यह 6,000 वर्षों के प्रबधंन के कार्य का अंतिम परिणाम है, यह वही है जिसकी मानव-जाति सर्वाधिक अभिलाषा करती है, और यह मनुष्य के लिए परमेश्वर की प्रतिज्ञा भी है। किंतु यह प्रतिज्ञा तुरंत पूरी नहीं हो सकती : मनुष्य भविष्य की मंज़िल में केवल तभी प्रवेश करेगा, जब अंत के दिनों का कार्य पूरा कर लिया जाएगा और उस पर पूरी तरह से विजय पा ली जाएगी, अर्थात् जब शैतान को पूरी तरह से पराजित कर दिया जाएगा। शुद्ध कर दिए जाने के बाद मनुष्य पापपूर्ण स्वभाव से रहित हो जाएगा, क्योंकि परमेश्वर ने शैतान को पराजित कर दिया होगा, अर्थात् विरोधी ताक़तों द्वारा कोई अतिक्रमण नहीं होगा, और कोई विरोधी ताक़तें नहीं होंगी जो मनुष्य की देह पर आक्रमण कर सकें। और इसलिए मनुष्य स्वतंत्र और पवित्र होगा—वह शाश्वतता में प्रवेश कर चुका होगा। अंधकार की विरोधी ताकतों को बंधन में रखे जाने पर ही मनुष्य जहाँ कहीं जाएगा, वहाँ स्वतंत्र होगा, और इसलिए वह विद्रोहशीलता या विरोध से रहित होगा। बस शैतान को क़ैद में रखना है, और मनुष्य के साथ सब ठीक हो जाएगा; वर्तमान स्थिति इसलिए विद्यमान है, क्योंकि शैतान अभी भी पृथ्वी पर हर जगह परेशानियाँ खड़ी करता है, और क्योंकि परमेश्वर के प्रबधंन का संपूर्ण कार्य अभी तक समाप्ति पर नहीं पहुँचा है। एक बार जब शैतान को पराजित कर दिया जाएगा, तो मनुष्य पूरी तरह से मुक्त हो जाएगा; जब मनुष्य परमेश्वर को प्राप्त कर लेगा और शैतान के अधिकार-क्षेत्र से बाहर आ जाएगा, तो वह धार्मिकता के सूर्य को देखेगा। सामान्य मनुष्य के लिए उचित जीवन पुन: प्राप्त कर लिया जाएगा; वह सब, जो सामान्य मनुष्य के पास होना चाहिए—जैसे भले और बुरे में भेद करने की योग्यता, और इस बात की समझ कि किस प्रकार भोजन करना है और किस प्रकार कपड़े पहनने हैं, और सामान्य मानव-जीवन जीने की योग्यता—यह सब पुनः प्राप्त कर लिया जाएगा। यदि हव्वा को साँप द्वारा प्रलोभन न दिया गया होता, तब शुरुआत में मनुष्य के सृजन के बाद उसके पास ऐसा ही सामान्य जीवन होना चाहिए था। उसे पृथ्वी पर भोजन करना, कपड़े पहनना और सामान्य मानव-जीवन जीना चाहिए था। किंतु मनुष्य के भ्रष्ट हो जाने के बाद यह जीवन एक अप्राप्य भ्रम बन गया, यहाँ तक कि आज भी मनुष्य ऐसी चीज़ों की कल्पना करने का साहस नहीं करता। वास्तव में, यह सुंदर जीवन, जिसकी मनुष्य अभिलाषा करता है, एक आवश्यकता है : यदि मनुष्य ऐसी मंज़िल से रहित होता, तब पृथ्वी पर उसका भ्रष्ट जीवन कभी समाप्त न होता, और यदि ऐसा कोई सुंदर जीवन न होता, तो शैतान के भाग्य का या उस युग का कोई समापन न होता, जिसमें शैतान पृथ्वी पर सामर्थ्य रखता है। मनुष्य को ऐसे क्षेत्र में पहुँचना चाहिए, जो अंधकार की ताक़तों के लिए अगम्य हो, और जब मनुष्य वहाँ पहुँच जाएगा, तो यह प्रमाणित हो जाएगा कि शैतान को पराजित कर दिया गया है। इस तरह से, एक बार जब शैतान द्वारा कोई व्यवधान नहीं रहेगा, तो स्वयं परमेश्वर मानव-जाति को नियंत्रित करेगा, और वह मनुष्य के संपूर्ण जीवन को आदेशित और नियंत्रित करेगा; केवल तभी शैतान वास्तव में पराजित होगा। आज मनुष्य का जीवन अधिकांशत: गंदगी का जीवन है; वह अभी भी पीड़ा और संताप का जीवन है। इसे शैतान की पराजय नहीं कहा जा सकता; मनुष्य को अभी भी संताप के सागर से बचना है, अभी भी मानव-जीवन की कठिनाइयों से या शैतान के प्रभाव से बचना है, और उसे अभी भी परमेश्वर का बहुत कम ज्ञान है। मनुष्य की समस्त कठिनाई शैतान द्वारा उत्पन्न की गई थी, यह शैतान ही था जो मनुष्य के जीवन में पीड़ा लाया, और शैतान को बंधन में रखने के बाद ही मनुष्य संताप के सागर से पूरी तरह से बचने में सक्षम होगा। मनुष्य को वह लाभ बनाकर जो शैतान के साथ हुए युद्ध में जीत के फलस्वरूप मिलाहै, और मनुष्य के हृदय पर विजय पाकर और उसे प्राप्त करके शैतान को बंदी बनाया जाता है।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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