Gospel Choral Work | "परमेश्वर बहाल कर देगा सृजन की पूर्व स्थिति"

Gospel Choral Work | "परमेश्वर बहाल कर देगा सृजन की पूर्व स्थिति"

14060 |24 अप्रैल, 2017

मानवजाति उस पवित्रता को पुनः प्राप्त करती है जिससे वह कभी संपन्न थी

1 बिजली की एक चमक पर, प्रत्येक जानवर अपने असली स्वरूप में प्रकट हो जाता है। इसी प्रकार, मेरे प्रकाश से रोशन हो कर मनुष्यों ने भी उस पवित्रता को पुनः प्राप्त कर लिया है जो उनके पास पहले कभी थी। ओह, अतीत का वह भ्रष्ट संसार! अंतत: यह गंदे पानी में पलट गया है, और सतह के नीचे डूब कर कीचड़ में घुल गया है! ओह, मैंने जो मानवजाति बनाई थी वह अंततः इस प्रकाश में पुनः जीवित हो गई है, उसने अस्तित्व की नींव खोज ली है और कीचड़ में संघर्ष करना बंद कर चुकी है! ओह, सृजन की असंख्य वस्तुएं जिन्हें मैं अपने हाथों में थामे हुये हूँ! मेरे वचनों के माध्यम से वे पुन: नई कैसे नहीं हो सकतीं? वे, इस प्रकाश में, अपने प्रयोजनों को कैसे कार्यान्वित नहीं कर सकतीं? पृथ्वी अब निष्प्राण रूप से स्थिर और मूक नहीं है, स्वर्ग अब उजाड़ और दुःखी नहीं है। स्वर्ग और पृथ्वी अब एक रिक्त स्थान द्वारा अलग नहीं हैं, कभी अलग ने होने के लिये एक हो गये हैं।

2 इस उल्लासपूर्ण अवसर पर, इस आनंदित क्षण में, मेरी धार्मिकता और मेरी पवित्रता पूरे ब्रह्मांड में फैल गई है, और समस्त मानव जाति उनकी निरंतर जयकार कर रही है। स्वर्ग के नगर आनंद से हंस रहे हैं, और पृथ्वी के साम्राज्य प्रसन्न हो कर नृत्य कर रहे हैं। इस समय कौन आनंदित नहीं है? और इस समय कौन रो नहीं रहा है? पृथ्वी अपनी मौलिक स्थिति में स्वर्ग से संबद्ध है और स्वर्ग पृथ्वी के साथ एक हो जाता है। मनुष्य, स्वर्ग और पृथ्वी को बाँधे रखने वाली डोर है, और मनुष्य की पवित्रता के कारण, मनुष्य के नवीनीकरण के कारण, स्वर्ग अब पृथ्वी से छुपा हुआ नहीं है, और पृथ्वी अब स्वर्ग की ओर मौन नहीं है। मानवजाति के चेहरे आभार की मुस्कान से खिले हुये हैं, और उनके हृदय में एक असीमित मिठास छिपी है। मनुष्य अन्य मनुष्य से झगड़ा नहीं करता, न ही वे एक दूसरे के साथ मार-पीट करते हैं। क्या कुछ लोग ऐसे भी हैं जो मेरे प्रकाश में, दूसरों के साथ शांति से नहीं रहते? क्या कुछ लोग ऐसे हैं, जो मेरे दिवस में, मेरा नाम बदनाम करते हैं?

3 सभी मनुष्य मेरी ओर श्रद्धा से देखते हैं, और अपने हृदय में वे मुझे चुपके से पुकारते हैं। मैंने मानवजाति के हर कर्म को जांचा है: जिन मनुष्यों की शुद्धि कर दी गई है, उनमें से कोई भी मेरे समक्ष अवज्ञाकारी नहीं है, कोई भी मेरी आलोचना नहीं करता। समस्त मानवजाति मेरे स्वभाव से ओतप्रोत हैं। हर कोई मेरे बारे में जान रहा है, मेरे निकट आ रहा है, और मेरी उपासना कर रहा है। मैं मनुष्य की आत्मा में अडिग खड़ा हूँ, उसके नेत्रों में उच्चतम शिखर तक पहुंच गया हूँ, और उसकी नसों में रक्त के साथ प्रवाहित हूँ। मनुष्यों के हृदय में आनंदमय उमंग पृथ्वी का हर स्थान भरती है, हवा तीव्र और ताज़ा है, घना कोहरा अब भूमि को नहीं ढकता, और सूरज अपनी दीप्ति से प्रकाशित है।

— "वचन देह में प्रकट होता है" में 'संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन' के 'अध्याय 18' से उद्धृत

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