2021 Hindi Christian Testimony Video | बोझ परमेश्वर का वरदान होती है

12 सितम्बर, 2021

मुख्य किरदार कलीसिया की अगुआ के रूप में चुन ली जाती है। चूंकि वह युवा है और उसका जीवन अनुभव सीमित है, इसलिए उसे फ़िक्र होती है कि वह उस भूमिका के काबिल नहीं है और दूसरे लोग उसे नीची नज़र से देखेंगे। एक सभा में, एक मसले को लेकर उसका नज़रिया गलत साबित हो जाता है, इससे वह निराश हो जाती है और उसे लगता है कि कलीसिया के अन्य अगुआओं के मुकाबले उसमें कमी है। इसलिए वह कलीसिया की अगुआ के रूप में अपना कर्तव्य नहीं निभाना चाहती। परमेश्वर के वचनों को खाने-पीने के बाद वह जान पाती है कि वह अपने कर्तव्य से इसलिए कतरा रही है क्योंकि उसे डर है कि दूसरे लोग उसकी कमज़ोरियाँ जान लेंगे और उसका अपमान होगा। वह यह भी समझ पाती है कि वह शोहरत और रुतबे को इतना संजोती है कि उसकी नज़र में ये सबसे बढ़कर हैं, जोकि एक मसीह-विरोधी स्वभाव है। साथ ही वह समझ लेती है कि मनुष्य को उसका कर्तव्य परमेश्वर द्वारा सौंपा गया आदेश और एक अनिवार्य बोझ है, और उसे यह निभाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए। जब वह अपना नज़रिया सुधार लेती है और बोझ समझ कर अपना कर्तव्य निभाती है, तो उसे परमेश्वर से प्रबुद्धता और मार्गदर्शन मिलता है। वह सच्चे दिल से महसूस करती है कि बोझ परमेश्वर का एक वरदान है।

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