Hindi Christian Song | परमेश्वर का स्वभाव पवित्र और निर्दोष है
01 जुलाई, 2026
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परमेश्वर नीनवे के लोगों से चाहे जितना भी क्रोधित रहा हो, लेकिन जैसे ही उन्होंने उपवास की घोषणा की और टाट ओढ़कर राख पर बैठ गए, उसका हृदय धीरे-धीरे नरम पड़ने लगा और उसने अपना मन बदलना शुरू कर दिया। उनसे यह घोषणा करने के एक क्षण पहले कि वह उनके नगर को नष्ट कर देगा—उनके द्वारा अपने पाप स्वीकार करने और पश्चात्ताप करने से पहले के क्षण तक भी—परमेश्वर अभी भी उनसे क्रोधित था। लेकिन जब उन्होंने पश्चात्ताप के एक के बाद एक अनेक कदम उठाए तो नीनवे के लोगों के प्रति परमेश्वर का क्रोध धीरे-धीरे उनके प्रति दया और क्षमाशीलता में बदल गया।
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प्रचंड कोप परमेश्वर द्वारा लोगों के बुरे कर्मों के प्रत्युत्तर में व्यक्त किया जाता है; उसका कोप दोषपूर्ण नहीं है। परमेश्वर का हृदय लोगों के पश्चात्ताप की प्रतिक्रिया में द्रवित हो जाता है, और यह पश्चात्ताप ही उसके हृदय में परिवर्तन लाता है। जब वह द्रवित महसूस करता है, जब उसका हृदय-परिवर्तन होता है और जब वह मनुष्य के प्रति अपनी दया और सहिष्णुता दिखाता है तो ये सब पूरी तरह से दोषमुक्त होते हैं; ये स्वच्छ, शुद्ध, निष्कलंक और मिलावट-रहित हैं। परमेश्वर की सहिष्णुता विशुद्ध सहिष्णुता है, उसकी दया विशुद्ध दया है।
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उसका स्वभाव मनुष्य की विभिन्न अभिव्यक्तियों और उसके पश्चात्ताप के अनुसार कोप प्रकट करता है या दया और सहिष्णुता व्यक्त करता है। वह चाहे जो कुछ भी प्रकट और व्यक्त करता हो, यह सब शुद्ध और सीधा होता है; इसका सार किसी भी सृजित प्राणी के सार से अलग होता है। परमेश्वर जो कार्य सिद्धांत, विचार और ख्याल व्यक्त करता है और साथ ही वह जो भी निर्णय लेता है और जो भी कदम उठाता है, उनमें कोई भी त्रुटि या दाग नहीं होता है।
—वचन, खंड 2, परमेश्वर को जानने के बारे में, स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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