परमेश्वर के दैनिक वचन : परमेश्वर का प्रकटन और कार्य | अंश 61

03 अगस्त, 2020

जब पूर्व से बिजली चमकती है, जो कि निश्चित रूप से वो क्षण भी होता है जब मैं बोलना आरम्भ करता हूँ—जब बिजली चमकती है, तो संपूर्ण ब्रह्मांड रोशन हो उठता है, और सभी तारों का रूपान्तरण हो जाता है। मानो पूरी मानवजाति को निपटा दिया जा चुका हो। पूर्व से आने वाले इस प्रकाश की रोशनी में, समस्त मानवजाति अपने मूल स्वरूप में प्रकट हो जाती है, उनकी आँखें चुँधिया जाती हैं, उन्हें समझ नहीं आता कि क्या करें और यह तो वे और भी नहीं समझ पाते कि अपने कुरूप स्वरूप को कैसे छिपाएँ। वे उन पशुओं की तरह भी हैं जो मेरे प्रकाश से दूर भागते हैं और पहाड़ी गुफाओं में शरण लेते हैं—फिर भी, उनमें से एक को भी मेरे प्रकाश में से मिटाया नहीं जा सकता। सभी मनुष्य भौचक्के हैं, सभी प्रतीक्षा कर रहे हैं, सभी देख रहे हैं; मेरे प्रकाश के आगमन के साथ ही, सभी उस दिन का आनन्द मनाते हैं जब वे पैदा हुए थे, और उसी प्रकार सभी उस दिन को कोसते हैं जब वे पैदा हुए थे। परस्पर-विरोधी भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त करना असंभव है; आत्म-ताड़ना के आँसुओं की नदियाँ बन जाती हैं और वे व्यापक जल प्रवाह में बह जाते हैं और फिर पल भर में ही उनका नामो-निशान मिट जाता है। एक बार फिर, मेरा दिन समस्त मानवजाति के नज़दीक आ रहा है, एक बार फिर मानवजाति को जाग्रत कर रहा है और मानवजाति को एक और नई शुरुआत दे रहा है। मेरा हृदय धड़कता है और मेरी धड़कनों की लय का अनुसरण करते हुए, पहाड़ आनन्द से उछलते हैं, समुद्र खुशी से नृत्य करता है और लहरें लय में चट्टानों की दीवारों से टकराती हैं। जो मेरे हृदय में है, उसे व्यक्त करना कठिन है। मैं सभी अशुद्ध चीज़ों को घूरकर भस्म कर देना चाहता हूँ; मैं चाहता हूँ कि सभी अवज्ञाकारी पुत्र मेरी नज़रों के सामने से ओझल हो जाएँ और आगे से उनका कोई अस्तित्व ही न रहे। मैंने न केवल बड़े लाल अजगर के निवास स्थान में एक नई शुरुआत की है, बल्कि विश्व में एक नए कार्य की शुरुआत भी की है। शीघ्र ही पृथ्वी के राज्य मेरा राज्य बन जाएँगे; शीघ्र ही पृथ्वी के राज्य, मेरे राज्य के कारण हमेशा के लिए अस्तित्वहीन हो जाएँगे, क्योंकि मैंने पहले ही विजय प्राप्त कर ली है, क्योंकि मैं विजयी होकर लौटा हूँ। पृथ्वी पर मेरे कार्य को मिटा देने की आशा में, बड़ा लाल अजगर मेरी योजना में रुकावट डालने का हर हथकंडा आज़मा चुका है, लेकिन क्या मैं उसकी छलपूर्ण कार्यनीतियों के कारण निराश हो सकता हूँ? क्या मैं उसकी धमकियों से डरकर आत्मविश्वास खो सकता हूँ? स्वर्ग या पृथ्वी पर कभी एक भी ऐसा प्राणी नहीं हुआ है जिसे मैंने अपनी मुट्ठी में न रखा हो; बड़े लाल अजगर के बारे में यह बात और भी सत्य है, क्या वह मेरे लिए एक विषमता की तरह है? क्या वह ऐसी चीज़ नहीं है जिसे मैं अपने हाथों अपने हिसाब से चलाता हूँ?

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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