परमेश्वर के दैनिक वचन | आरंभ में मसीह के कथन : अध्याय 42" | अंश 57

महान हैं सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कर्म! कितने आश्चर्यजनक! कितने अद्भुत! सात तुरहियाँ बजती हैं, सात गर्जनाएँ होती हैं, सात कटोरे उँड़ेले जाते हैं—ये तुरंत खुले तौर पर प्रकट होंगे, और इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता। परमेश्वर का प्यार हमारे लिए रोज़ आता है। केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर ही हमें बचा सकता है; हमें दुर्भाग्य मिलता है या आशीष, यह पूरी तरह से उस पर निर्भर है, और हम मनुष्यों के पास इसका निर्णय करने का कोई उपाय नहीं है। जो लोग स्वयं को पूरे दिल से समर्पित करते हैं, वे निश्चित रूप से भरपूर आशीष प्राप्त करेंगे, जबकि अपने जीवन को संरक्षित करने के आकांक्षी अपने जीवन को ही खो देंगे; सभी चीज़ें और सभी मामले सर्वशक्तिमान परमेश्वर के हाथों में हैं। अब और अपने कदम मत रोको। स्वर्ग और पृथ्वी में ज़बरदस्त बदलाव आ रहा है, जिससे बचने का मनुष्य के पास कोई उपाय नहीं है। उसके लिए कटु पीड़ा से क्रंदन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा। पवित्र आत्मा जो कार्य आज कर रहा है, उसका अनुसरण करो। उसके काम की प्रगति किस चरण तक हो गई है, इसके बारे में तुम्हें अपने भीतर स्वयं स्पष्ट होना चाहिए, दूसरों के द्वारा याद दिलाए जाने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। अब जितनी ज्यादा बार संभव हो, सर्वशक्तिमान परमेश्वर की उपस्थिति में लौटो। उससे सब-कुछ माँगो। वह निश्चित रूप से तुम्हें भीतर से प्रबुद्ध करेगा और संकट के क्षणों में तुम्हारी रक्षा करेगा। बिलकुल मत डरो! तुम्हारा संपूर्ण अस्तित्व पहले से ही उसके अधिकार में है। उसकी सुरक्षा और देखभाल के होते हुए तुम्हारे लिए डरने की क्या बात है? आज परमेश्वर की इच्छा फलित होने को है, और जो भी भयभीत है, वह केवल नुकसान में रहेगा। मैं तुमसे जो कह रहा हूँ, वह सच है। अपनी आध्यात्मिक आँखें खोलो: स्वर्ग एक पल में बदल सकता है, लेकिन तुम्हारे लिए डरने की क्या बात है? उसके हाथ की एक हलकी-सी हरकत से स्वर्ग और पृथ्वी तुरंत नष्ट हो जाते हैं। तो झल्लाने से मनुष्य क्या हासिल कर सकता है? क्या सब-कुछ परमेश्वर के हाथों में नहीं है? अगर वह स्वर्ग और पृथ्वी को बदलने की आज्ञा देता है, तो वे बदल जाएँगे। अगर वह कहता है कि हमें पूर्ण किया जाना है, तो हम पूर्ण किए जाएँगे। मनुष्य को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि उसे शांति से आगे बढ़ना चाहिए। फिर भी, तुम्हें जितना हो सके, ध्यान देना चाहिए और सजग रहना चाहिए। स्वर्ग एक पल में बदल सकता है! मनुष्य अपनी नग्न आँखें चाहे जितनी खोल ले, वह ज्यादा कुछ नहीं देख पाएगा। अब चौकस रहो। परमेश्वर की इच्छा पूरी हो गई है, उसकी परियोजना पूरी हो गई है, उसकी योजना सफल हो गई है, और उसके सभी पुत्र उसके सिंहासन पर पहुँच गए हैं। वे मिलकर सर्वशक्तिमान परमेश्वर के साथ सभी राष्ट्रों और सभी लोगों का न्याय करने बैठते हैं। जो लोग कलीसिया को सताते रहे हैं, और परमेश्वर के पुत्रों को नुकसान पहुँचाते रहे हैं, उन्हें कड़ी सज़ा मिलेगी: यह निश्चित है! जो ईमानदारी से स्वयं को परमेश्वर को अर्पित कर देते हैं, जो सब-कुछ कायम रखते हैं, परमेश्वर निश्चित रूप से उन्हें, कभी भी बदले बिना, अनंत काल तक प्यार करेगा!

— ‘वचन देह में प्रकट होता है’ से उद्धृत

केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर इंसान को बचा सकता है

सर्वशक्तिमान परमेश्वर के कर्म हैं कितने अद्भुत, कितने महान! सात तुरहियाँ बजती हैं, सात गर्जनाएं गूँजती हैं, सर्वशक्तिमान परमेश्वर उंडेलता है सात कटोरे। दिखाया जाएगा इसे सबके सामने, कोई शक नहीं है।

जो अब पूरी तरह खुद को अर्पित करते हैं, पायेंगे परमेश्वर से आशीषें बड़ी; खो देंगे वो अपना जीवन, जो उसे बचाना चाहते हैं। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के हाथों में सब कुछ। न रोको तुम अब अपने क़दमों को। स्वर्ग और धरती बड़े बदलाव से गुज़रते हैं। नहीं छिपने की जगह, रोना ही है इंसान को; उसके भाग्य में यही लिखा है। हर दिन प्रेम करता हमसे परमेश्वर, वही बचा सकता है हमें। दुर्भाग्य मिलेगा या मिलेंगी आशीषें, है ये सर्वशक्तिमान परमेश्वर के हाथों में। हम इंसानों का इस पर कोई वश नहीं है।

करो अनुसरण उसका, जो पवित्र आत्मा अब कर रहा, रहो सब स्पष्ट अपने भीतर में, किसी के याद दिलाने की न ज़रूरत पड़े कि काम पहुंचा अब किस चरण में। सर्वशक्तिमान परमेश्वर के सामने अक्सर आओ, मन करे जो, मांगो उससे वो, और निश्चय ही वो तुम्हें प्रबुद्ध करेगा, ज़रूरत के समय तुम्हारी रक्षा करेगा। हर दिन प्रेम करता हमसे परमेश्वर, वही बचा सकता है हमें। दुर्भाग्य मिलेगा या मिलेंगी आशीषें, है ये सर्वशक्तिमान परमेश्वर के हाथों में। हम इंसानों का इस पर कोई वश नहीं है।

डरो नहीं, उसके पास है पूरा अस्तित्व तुम्हारा। उसकी सुरक्षा में, परवाह में, तुम्हें डर कैसा? पूरी होने ही वाली है परमेश्वर की इच्छा। आध्यात्मिक आँखें खोलो अपनी, स्वर्ग बदल जायेगा। डरते हो क्यों? परमेश्वर ने हाथ भी हिलाया तो, क्षण में बर्बाद हो जायेंगे स्वर्ग और धरा। तो इंसान की चिंता का काम है क्या? सारी चीज़ें परमेश्वर के हाथों में हैं ना? हर दिन प्रेम करता हमसे परमेश्वर, वही बचा सकता है हमें। दुर्भाग्य मिलेगा या मिलेंगी आशीषें, है ये सर्वशक्तिमान परमेश्वर के हाथों में। हम इंसानों का इस पर कोई वश नहीं है।

उसकी आज्ञा हो तो स्वर्ग, धरा बदल सकते हैं। उसकी आज्ञा हो तो हम पूर्ण किये जा सकते हैं। घबराओ नहीं, शांत मन से आगे बढ़ो, ध्यान दो, सावधान रहो। पूरी हो गयी है परमेश्वर की इच्छा, सफल हुई उसकी योजना, पूरी हुई परियोजना। उसके तख़्त के सामने, उसके सारे पुत्र आ पहुंचे, सर्वशक्तिमान परमेश्वर संग सभी राष्ट्रों, लोगों का वो न्याय करते। हर दिन प्रेम करता हमसे परमेश्वर, वही बचा सकता है हमें। दुर्भाग्य मिलेगा या मिलेंगी आशीषें, है ये सर्वशक्तिमान परमेश्वर के हाथों में। हम इंसानों का इस पर कोई वश नहीं है। कलीसिया को सताते हैं जो, ईश-पुत्रों को चोट पहुँचाते हैं जो, निश्चय ही गंभीर दंड पाएंगे वो! परमेश्वर को दिल देते हैं जो, नेकी में बने रहते हैं जो, सदा परमेश्वर प्रेम करेगा उनको।

‘मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ’ से

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