राज्य का सुसमाचार वार्तालाप मंच, एपिसोड 6 : अमेरिका निवासी वरिष्ठ क्यूबाई मनोचिकित्सक नोर्मा पेरेज, एम.डी., के साथ एक विशेष साक्षात्कार

22 जून, 2026

नोर्मा पेरेज, एम.डी., बाल और किशोर मनोचिकित्सा की वरिष्ठ विशेषज्ञ हैं। वे एक विद्वान भी हैं जो लंबे समय से चिकित्सा शिक्षण और शोध से जुड़ी हैं। दशकों के दौरान उन्होंने कई किशोरों को उनके मानसिक संघर्षों से उबरने में मदद की है। फिर भी दूसरों की मदद करते हुए उन्होंने अपने खुद के जीवन में कई भारी झटके सहे। जीवन के शुरुआती दौर में ही उन्होंने अपने बेटे को खो दिया, जब वे तीस साल से अधिक की उम्र में थीं, तब उनके माता-पिता चल बसे और अधेड़ उम्र में उन्होंने अपने पति को खो दिया। लगातार हुए इन भारी नुकसानों ने उन्हें लंबे समय तक दुख और अवसाद में जीने को मजबूर कर दिया। मनोविज्ञान, चिकित्सा और विभिन्न उपचार विधियों को समझने वाली एक मनोचिकित्सा विशेषज्ञ होने के बावजूद, वे वास्तव में अपनी आंतरिक पीड़ा और अवसाद से मुक्त नहीं हो सकीं। उन्होंने दशकों तक अवसाद से लड़ाई लड़ी। फिर उनके जीवन में एक बड़े बदलाव का मोड़ आया। न केवल वे उस अवसाद से धीरे-धीरे बाहर निकलीं जिसने उन्हें इतने लंबे समय से परेशान किया था, बल्कि उन्होंने फिर से सच्ची आंतरिक शांति, आनंद और उम्मीद भी पा ली। आज 81 वर्ष की उम्र में भी वे ऊर्जा से भरी रहती हैं और उनके चेहरे पर अक्सर मुस्कान रहती है। यह कल्पना करना मुश्किल है कि यह आशावादी और शांत बुजुर्ग महिला कभी इतने लंबे समय तक अवसाद और पीड़ा में जी रही थीं। आखिर किस बात ने इतने लंबे समय तक अवसाद से जूझने वाली एक मनोचिकित्सक को आखिरकार इसके साए से कदम-दर-कदम बाहर निकलने में मदद की? "राज्य का सुसमाचार वार्तालाप मंच" का यह एपिसोड आपके लिए लेकर आया है डॉ. नोर्मा के जीवन की सच्ची और गहरी कहानी।

03:41 एक एम.डी. मनोचिकित्सक का करियर

08:06 21 साल की उम्र में बेटे को खोने से बदला उनका करियर

16:56 अवसाद के लक्षण और उपचार

35:14 पति के गुजरने से वे एक बार फिर दर्द में डूब गईं

42:29 सेवानिवृत्ति के बाद का अकेलापन और उलझन

47:02 उनके जीवन में आई रोशनी की एक किरण

53:06 जीवन और मृत्यु की एक नई समझ

59:28 आखिरकार यह समझना कि माता-पिता अपने बच्चों का जीवन नहीं चुन सकते

01:07:20 मूर्ति-पूजा वाले परिवेश में व्याकुलता और शांति

01:25:57 अवसाद से उबरने की 7 अंतर्दृष्टियाँ

01:37:24 दवाइयाँ वास्तव में आंतरिक पीड़ा का समाधान नहीं कर सकती हैं

02:01:39 81 साल की उम्र में वे आखिरकार अवसाद से बाहर आईं और फिर से शांति प्राप्त की

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