Hindi Christian Testimony Video Based on a True Story | शोहरत और रुतबे से मिला दर्द

21 अक्टूबर, 2021

मुख्य किरदार जब सिंचन कार्य की समूह अगुआ चुनी जाती है, तो उसे फ़िक्र हो जाती है कि अगर वह गहरी अंतर्दृष्टि वाली संगति नहीं कर पायी, और भाई-बहनों की समस्याओं को नहीं सुलझा पायी, तो उसकी नाक कट जाएगी और उसे नीची नज़र से देखा जाएगा। इन विचारों से उसका मन अक्सर भटक जाता है और वह सभाओं में भाग लेने से भी डरने लगती है। एक सभा के दौरान, इस फ़िक्र से कि वह भाई-बहनों की समस्याएँ हल नहीं कर पायेगी, वह अचानक हारी हुई महसूस करती है, इतनी घबरा जाती है कि वह सही ढंग से सोच भी नहीं पाती। वह बस सैद्धांतिक ज्ञान के आधार पर जबरन संगति ही कर सकती है, लेकिन वह अपने भाई-बहनों की समस्याएँ सुलझा नहीं पाती। इससे वह दुखी हो जाती है, उसे इतना ज्यादा तनाव हो जाता है कि वह अपना कर्तव्य किसी दूसरे को सौंप देने पर भी विचार करने लगती है...। मुख्य किरदार अपने दुख से कैसे उबर पाती है, शोहरत और रुतबे के बंधनों को तोड़ कर कैसे आध्यात्मिक मुक्ति हासिल कर पाती है? जानने के लिए देखिए यह वीडियो।

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