Hindi Christian Song | पीड़ा और शोधन के जरिए ही तुम परमेश्वर द्वारा पूर्ण बनाए जा सकते हो
19 मार्च, 2026
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यदि तुम परमेश्वर के स्वभाव को नहीं जानते हो, तो तुम परीक्षणों के दौरान निश्चित रूप से गिर जाओगे, क्योंकि तुम इस बात से अनजान हो कि परमेश्वर लोगों को पूर्ण कैसे बनाता है, वह किन साधनों से उन्हें पूर्ण बनाता है, और जब परमेश्वर के परीक्षण तुम्हारे ऊपर आएँगे और वे तुम्हारी धारणाओं से मेल नहीं खाएँगे तो तुम अडिग नहीं रह पाओगे। परमेश्वर का सच्चा प्रेम उसका संपूर्ण स्वभाव है। जब परमेश्वर का धार्मिक स्वभाव लोगों को प्रकट होता है तो उनकी देह अपरिहार्य रूप से अत्यधिक पीड़ा भुगतेगी। यदि तुम इस पीड़ा को नहीं भुगतते हो तो तुम्हें परमेश्वर द्वारा पूर्ण नहीं बनाया जा सकता, न ही तुम परमेश्वर के प्रति सच्चा प्रेम अर्पित कर पाओगे। यदि परमेश्वर तुम्हें पूर्ण बनाता है तो वह तुम्हें निश्चित रूप से अपना संपूर्ण स्वभाव प्रकट करेगा।
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सृष्टि की रचना के समय से आज तक परमेश्वर ने अपना संपूर्ण स्वभाव मनुष्य को कभी प्रकट नहीं किया है— किंतु अंत के दिनों के दौरान वह इसे लोगों के इस समूह के सामने प्रकट करता है जिसे उसने पूर्वनियत किया और चुना है, और लोगों को पूर्ण बनाकर वह अपने स्वभाव प्रकट करता है, जिसके माध्यम से वह लोगों के एक समूह को पूर्ण बनाता है। लोगों के लिए परमेश्वर का सच्चा प्रेम ऐसा है। परमेश्वर के सच्चे प्रेम को अनुभव करना यह माँग करता है कि लोग अत्यंत पीड़ा सहें और एक ऊँची कीमत चुकाएँ। केवल तभी लोग अंततः परमेश्वर द्वारा प्राप्त किए जा सकते हैं और आखिरकार परमेश्वर को अपना सच्चा प्रेम वापस दे पाएँगे और केवल तभी परमेश्वर का हृदय संतुष्ट होगा।
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यदि लोग परमेश्वर के द्वारा पूर्ण बनाए जाने की इच्छा रखते हैं और यदि वे उसकी इच्छा के अनुसार चलना चाहते हैं, और अपना सच्चा प्रेम पूरी तरह परमेश्वर को देना चाहते हैं तो उन्हें अपनी परिस्थितियों से बहुत ही अधिक पीड़ा और बहुत सारी यंत्रणाओं का अनुभव करना होगा, मृत्यु से भी बदतर पीड़ा भोगनी होगी। अंततः वे अपना सच्चा हृदय परमेश्वर को लौटाने के लिए बाध्य होंगे। कोई व्यक्ति परमेश्वर से सचमुच प्रेम करता है कि नहीं यह पीड़ा भोगने और शोधन के दौरान प्रकट होता है। लोगों के प्रेम का परमेश्वर द्वारा शुद्धिकरण भी केवल पीड़ा भोगने और शोधन के जरिए संपन्न होता है।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, केवल परमेश्वर से प्रेम करना ही वास्तव में परमेश्वर पर विश्वास करना है
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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