परमेश्वर के दैनिक वचन | "अभ्यास (7)" | अंश 211

परमेश्वर के दैनिक वचन | "अभ्यास (7)" | अंश 211

175 |31 अगस्त, 2020

आज मैं तुम पर जो कार्य कर रहा हूँ, वो तुम्हें सामान्य मानवीयता के जीवन में ले जाने के लिए है; यह नए युग के आरंभ और इंसान को नए युग में ले जाने के लिए है। यह कार्य कदम-दर-कदम किया जाता है और प्रत्यक्ष रूप से तुम लोगों के मध्य विकसित होता है : मैं तुम लोगों को रूबरू शिक्षा देता हूँ; मैं तुम्हें हाथ पकड़कर ले जाता हूँ; मैं तुम लोगों को वो बातें बताता हूँ जिसकी तुम्हें समझ नहीं है; तुम्हें वो चीज़ें प्रदान करता हूँ जिनका तुम्हारे अंदर अभाव है। यह कहा जा सकता है कि यह सारा कार्य तुम लोगों के जीवन-पोषण के लिए है, तुम लोगों को सामान्य मानवीयता के जीवन में ले जाने के लिए है; यह खास तौर से अंत के दिनों में लोगों के इस समूह को जीवन के लिए पोषण मुहैया कराने के लिए है। मेरे लिये, यह सारा कार्य पुराने युग का अंत करने और नए युग में ले जाने के लिए है; जहाँ तक शैतान का सवाल है, मैंने उसी को पराजित करने के लिए देहधारण किया। मैं तुम लोगों के बीच अब जो कार्य कर रहा हूँ, वह तुम्हारा आज का पोषण और सही समय पर तुम्हारा उद्धार है, लेकिन इन थोड़े-से वर्षों में, मैं तुम लोगों को सारा सत्य, जीवन का सारा मार्ग बता दूँगा, यहाँ तक कि भविष्य का कार्य भी बता दूँगा; भविष्य में यह तुम लोगों को सही तौर पर चीज़ों का अनुभव करने में समर्थ बनाने के लिए पर्याप्त होगा। मैंने बस अपने सारे वचन तुम लोगों को सौंप दिए हैं। मैं और कोई उपदेश नहीं देता हूँ; आज, मैंने तुम लोगों से जो सारे वचन बोले हैं, वे ही मेरे उपदेश हैं, क्योंकि आज तुम लोगों को मेरे बोले गए वचनों का कोई अनुभव नहीं है, और तुम लोग उनके गहन अर्थ को नहीं समझते। एक दिन, तुम लोगों के अनुभव फलीभूत होंगे, जैसा कि आज मैंने कहा है। ये वचन तुम्हारे आज के दर्शन हैं, और भविष्य में तुम इन्हीं पर निर्भर रहोगे; वे आज जीवन के लिए पोषण हैं और भविष्य के लिए उपदेश हैं, इससे बेहतर उपदेश नहीं हो सकते थे। क्योंकि मेरे पास कार्य करने के लिए धरती पर उतना समय नहीं है जितना मेरे वचनों का अनुभव करने के लिए तुम्हारे पास है; मैं मात्र अपना कार्य पूरा कर रहा हूँ, जबकि तुम लोग जीवन का अनुसरण कर रहे हो, एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें जीवन की लंबी यात्रा शामिल है। बहुत-सी चीज़ों का अनुभव करने के बाद ही तुम जीवन के मार्ग को पूरी तरह से प्राप्त कर पाओगे; तभी तुम मेरे आज बोले गए वचनों के अंदर छिपे हुए अर्थ को समझ पाओगे। जब तुम्हारे हाथों में मेरे वचन होंगे, जब तुम सब लोगों को मेरे सारे आदेश प्राप्त हो जाएँगे, एक बार जब मैं तुम्हें वो सारे कार्य सौंप दूँगा जो मुझे सौंपने चाहिए, और जब वचनों का कार्य समाप्त हो जाएगा, बिना इस बात की परवाह किए कि कितना विशाल प्रभाव प्राप्त हुआ है, तब परमेश्वर की इच्छा का कार्यांवयन भी हो चुका होगा। ऐसा नहीं है जैसा तुम सोचते हो कि तुम्हें एक निश्चित स्थिति तक बदलना चाहिए; परमेश्वर तुम्हारी धारणाओं के अनुसार कार्य नहीं करता।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

परमेश्वर के कथन मनुष्य के लिए सर्वोत्तम निर्देश हैं

आज परमेश्वर करता है काम तुम सब में, ताकि सामान्य इंसानी जीवन में ले जा सके तुम्हें। ताकि कर सके शुरुआत नये युग की, जियोगे नया जीवन तुम सब उस जहाँ में।

कदम-दर-कदम तुम सब पर काम किया जाता है। सामने बिठा कर, हाथ थाम कर सिखाया जाता है। जिसकी कमी है तुममें वो देता है परमेश्वर, तुम जो नहीं समझते समझाता है परमेश्वर।

परमेश्वर कहता है जो वचन हैं तुम्हारे लिए उसके इकलौते निर्देश। परमेश्वर कहता है जो वचन, हैं ये वचन आज तुम्हारे दर्शन। आगे जाकर, इन पर, करोगे तुम निर्भर। आज जीवन का है ये पोषण, जो आने वाला है, उसके लिए निर्देश उत्तम।

ये कार्य जीवन का पोषण है, उचित जीवन जीना तुम सबको सिखाता है। विशेष रूप से, अंत के दिनों में, एक समूह के लोगों को जीवन देने के लिए है ये।

अब जो काम तुम्हारे बीच करता है परमेश्वर वर्तमान पोषण है वो तुम सबके लिए, समय रहते मिलने वाला उद्धार है ये। इन कुछ सालों में परमेश्वर सारे सत्य दिखाता है।

और वो तुम्हें जीवन का मार्ग, भविष्य का काम दिखाता है। उचित और सामान्य ढंग से अनुभव करने के लिए ये काफ़ी है।

परमेश्वर कहता है जो वचन हैं तुम्हारे लिए उसके इकलौते निर्देश। परमेश्वर कहता है जो वचन, हैं ये वचन आज तुम्हारे दर्शन। आगे जाकर, इन पर, करोगे तुम निर्भर। आज जीवन का है ये पोषण, जो आने वाला है, उसके लिए निर्देश उत्तम।

'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से

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