परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 83

परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 83

331 |12 जून, 2020

परमेश्वर सभी चीज़ों की सृष्टि करने के लिए वचनों को उपयोग करता है

(उत्पत्ति 1:3-5) जब परमेश्‍वर ने कहा, "उजियाला हो," तो उजियाला हो गया। और परमेश्‍वर ने उजियाले को देखा कि अच्छा है; और परमेश्‍वर ने उजियाले को अन्धियारे से अलग किया। और परमेश्‍वर ने उजियाले को दिन और अन्धियारे को रात कहा। तथा साँझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पहला दिन हो गया।

(उत्पत्ति 1:6-7) फिर परमेश्‍वर ने कहा, "जल के बीच एक ऐसा अन्तर हो कि जल दो भाग हो जाए।" तब परमेश्‍वर ने एक अन्तर बनाकर उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग किया; और वैसा ही हो गया।

(उत्पत्ति 1:9-11) फिर परमेश्‍वर ने कहा, "आकाश के नीचे का जल एक स्थान में इकट्ठा हो जाए और सूखी भूमि दिखाई दे," और वैसा ही हो गया। परमेश्‍वर ने सूखी भूमि को पृथ्वी कहा, तथा जो जल इकट्ठा हुआ उसको उसने समुद्र कहा: और परमेश्‍वर ने देखा कि अच्छा है। फिर परमेश्‍वर ने कहा, "पृथ्वी से हरी घास, तथा बीजवाले छोटे छोटे पेड़, और फलदाई वृक्ष भी जिनके बीज उन्हीं में एक एक की जाति के अनुसार हैं, पृथ्वी पर उगें," और वैसा ही हो गया।

(उत्पत्ति 1:14-15) फिर परमेश्‍वर ने कहा, "दिन को रात से अलग करने के लिये आकाश के अन्तर में ज्योतियाँ हों; और वे चिह्नों, और नियत समयों और दिनों, और वर्षों के कारण हों; और वे ज्योतियाँ आकाश के अन्तर में पृथ्वी पर प्रकाश देनेवाली भी ठहरें," और वैसा ही हो गया।

(उत्पत्ति 1:20-21) फिर परमेश्‍वर ने कहा, "जल जीवित प्राणियों से बहुत ही भर जाए, और पक्षी पृथ्वी के ऊपर आकाश के अन्तर में उड़ें।" इसलिये परमेश्‍वर ने जाति जाति के बड़े बड़े जल-जन्तुओं की, और उन सब जीवित प्राणियों की भी सृष्‍टि की जो चलते फिरते हैं जिन से जल बहुत ही भर गया, और एक एक जाति के उड़नेवाले पक्षियों की भी सृष्‍टि की: और परमेश्‍वर ने देखा कि अच्छा है।

(उत्पत्ति 1:24-25) फिर परमेश्‍वर ने कहा, "पृथ्वी से एक एक जाति के जीवित प्राणी, अर्थात् घरेलू पशु, और रेंगनेवाले जन्तु, और पृथ्वी के वनपशु, जाति जाति के अनुसार उत्पन्न हों," और वैसा ही हो गया। इस प्रकार परमेश्‍वर ने पृथ्वी के जाति जाति के वन-पशुओं को, और जाति जाति के घरेलू पशुओं को, और जाति जाति के भूमि पर सब रेंगनेवाले जन्तुओं को बनाया: और परमेश्‍वर ने देखा कि अच्छा है।

पहले दिन, परमेश्वर के अधिकार के कारण मानवजाति के दिन और रात उत्पन्न हुए और स्थिर बने हुए हैं

आओ हम पहले अंश को देखें: "जब परमेश्‍वर ने कहा, 'उजियाला हो,' तो उजियाला हो गया। और परमेश्‍वर ने उजियाले को देखा कि अच्छा है; और परमेश्‍वर ने उजियाले को अन्धियारे से अलग किया। और परमेश्‍वर ने उजियाले को दिन और अन्धियारे को रात कहा। तथा साँझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार पहला दिन हो गया" (उत्पत्ति 1:3-5)। यह अंश सृष्टि की शुरूआत में परमेश्वर के प्रथम कार्य का विवरण देता है, और पहला दिन जिसे परमेश्वर ने गुज़ारा जिसमें एक शाम और एक सुबह थी। परन्तु वह एक असाधारण दिन थाः परमेश्वर ने सभी चीज़ों के लिए उजियाले को तैयार किया, और इसके अतिरिक्त, उजियाले को अंधियारे से अलग किया। इस दिन, परमेश्वर ने बोलना शुरू किया, और उसके वचन और अधिकार अगल बगल अस्तित्व में थे। सभी चीज़ों के मध्य उसका अधिकार दिखाई देना शुरू हुआ, और उसके वचन के परिणामस्वरूप उसकी सामर्थ सभी चीज़ों में फैल गई। इस दिन के आगे से, परमेश्वर के वचन, परमेश्वर के अधिकार, और परमेश्वर की सामर्थ के कारण सभी चीजों को बनाया गया और वे स्थिर हो गए, और उन्होंने परमेश्वर के वचन, परमेश्वर के अधिकार, और परमेश्वर की सामर्थ की वज़ह से काम करना प्रारम्भ कर दिया। जब परमेश्वर ने वचनों को कहा "उजियाला हो," और उजियाला हो गया। परमेश्वर ने किसी जोखिम के काम का प्रारम्भ नहीं किया था; उसके वचनों के परिणामस्वरूप उजियाला प्रगट हुआ था। यह वो उजियाला था जिसे परमेश्वर ने दिन कहा, और जिस पर आज भी मनुष्य अपने अस्तित्व के लिए निर्भर रहता है। परमेश्वर की आज्ञाओं के द्वारा, उसकी हस्ती और मूल्य कभी भी नहीं बदले, और वे कभी भी ग़ायब नहीं हुए। उनकी उपस्थिति परमेश्वर के अधिकार और उसकी सामर्थ को दिखाते हैं, और सृष्टिकर्ता के अस्तित्व की घोषणा करते हैं, और बार बार सृष्टिकर्ता की हैसियत और पहचान को दृढ़ करते हैं। यह अस्पृश्य या माया नहीं है, लेकिन एक वास्तविक ज्योति है जिसे मनुष्य के द्वारा देखा जा सकता है। उस समय के उपरान्त, इस खाली संसार में जिसमें "पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी, और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था," पहली भौतिक वस्तु पैदा हुई। यह वस्तु परमेश्वर के मुँह के वचनों से आई, और परमेश्वर के अधिकार और उच्चारण के कारण सभी वस्तुओं की सृष्टि के प्रथम कार्य के रूप में प्रगट हुई। उसके तुरन्त बाद, परमेश्वर ने उजियाले और अंधियारे को अलग अलग होने की आज्ञा दी...। परमेश्वर के वचन के कारण हर चीज़ बदल गई और पूर्ण हो गई...। परमेश्वर ने इस उजियाले को "दिन" कहा और अंधियारे को उसने "रात" कहा। उस समय से, संसार में पहली शाम और पहली सुबह हुई जिन्हें परमेश्वर उत्पन्न करना चाहता था, और परमेश्वर ने कहा कि यह पहला दिन था। सृष्टिकर्ता के द्वारा सभी वस्तुओं की सृष्टि का यह पहला दिन था, और सभी वस्तुओं की सृष्टि का प्रारम्भ था, और यह पहली बार था जब सृष्टिकर्ता का अधिकार और सामर्थ इस संसार में जिसे उसने सृजा था प्रकट हुआ था।

इन वचनों के द्वारा, मनुष्य परमेश्वर के अधिकार, और परमेश्वर के वचनों का अधिकार, और परमेश्वर की सामर्थ को देखने के योग्य हुआ। क्योंकि परमेश्वर ही ऐसी सामर्थ धारण करता है, और इस प्रकार केवल परमेश्वर के पास ही ऐसा अधिकार है, और क्योंकि परमेश्वर ऐसे अधिकार को धारण करता है, और इस प्रकार केवल परमेश्वर के पास ही ऐसी सामर्थ है। क्या कोई मनुष्य या पदार्थ ऐसा अधिकार और सामर्थ धारण करता है? क्या तुम लोगों के दिल में कोई उत्तर है? परमेश्वर को छोड़, क्या कोई सृजा गया और न सृजा गया प्राणी ऐसा अधिकार धारण करता है? क्या तुम सबने किसी पुस्तक या पुस्तकों के प्रकाशन में कभी किसी ऐसी चीज़ का उदाहरण देखा है? क्या कोई लेखा जोखा है कि किसी ने आकाश और पृथ्वी और सभी चीज़ों की सृष्टि की थी? यह किसी अन्य पुस्तक या लेखे में पाया नहीं जाता हैः ये वास्तव में केवल परमेश्वर के महिमामय संसार की सृष्टि के विषय में अधिकारयुक्त और सामर्थी वचन हैं, जो बाईबिल में दर्ज हैं, और ये वचन परमेश्वर के अद्वितीय अधिकार, और परमेश्वर की अद्वितीय पहचान के विषय में बोलते हैं। क्या ऐसे अधिकार और सामर्थ के बारे में कहा जा सकता है कि वे परमेश्वर की अद्वितीय पहचान के प्रतीक हैं? क्या ऐसा कहा जा सकता है कि परमेश्वर, और सिर्फ परमेश्वर ही उनको धारण किए हुए है? बिना किसी सन्देह के, सिर्फ परमेश्वर ही ऐसा अधिकार और सामर्थ धारण करता है! इस अधिकार और सामर्थ को किसी सृजे गए या न सृजे गए प्राणी के द्वारा धारण नहीं किया जा सकता है और न बदला जा सकता है! क्या यह स्वयं अद्वितीय परमेश्वर के गुणों में से एक है? क्या तुम सब इसके साक्षी बने हो? ये वचन शीघ्रता और स्पष्टता से लोगों को सत्य को समझने की अनुमति देते हैं कि परमेश्वर अद्वितीय अधिकार, और अद्वितीय सामर्थ धारण करता है, और वह सर्वोच्च पहचान और हैसियत धारण किए हुए है। उपर्युक्त बातों की सहभागिता से, क्या तुम लोग कह सकते हो कि वह परमेश्वर जिस पर तुम सब विश्वास करते हो वह अद्वितीय परमेश्वर है?

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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