परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 22 | अंश 370

परमेश्वर के दैनिक वचन | "संपूर्ण ब्रह्मांड के लिए परमेश्वर के वचन : अध्याय 22 | अंश 370

0 |30 अगस्त, 2020

मनुष्य प्रकाश के बीच जीता है, फिर भी वह प्रकाश की बहुमूल्यता से अनभिज्ञ है। वह प्रकाश के सार तथा प्रकाश के स्रोत से, और इसके अतिरिक्त, वह इस बात से अनजान है कि यह किस का है। जब मैंने मनुष्य के बीच प्रकाश प्रदान किया, तब मैंने तुरन्त ही मनुष्यों के बीच की स्थितियों का निरीक्षण किया प्रकाश के कारण सभी लोग बदल रहे हैं और पनप रहे हैं और उन्होंने अन्धकार को छोड़ दिया है। विश्व के हर कोनों पर मैं नज़र डालता हूँ और देखता हूँ कि पर्वत कोहरे में समा गए हैं, यह कि समुद्र शीत के बीच जम गए हैं, और यह कि, प्रकाश के आगमन की वजह से, लोग पूरब की ओर देखते हैं ताकि शायद उन्हें कुछ अधिक मूल्यवान मिल जाए—फिर भी मनुष्य कोहरे के बीच एक सही दिशा को समझने में अक्षम रहता है। क्योंकि सारा संसार कोहरे से आच्छादित है, इसलिए जब मैं बादलों के बीच में से देखता हूँ, तो मनुष्य के द्वारा मेरा अस्तित्व कभी नहीं खोजा जाता हैः मनुष्य पृथ्वी पर किसी चीज की तलाश कर रहा है, वह भोजन की तलाश में घूमता-फिरता हुआ प्रतीत होता है, ऐसा प्रतीत होता है कि वह मेरे आगमन का इन्तज़ार करता है—फिर भी वह मेरे दिन को नहीं जानता है और वह अक्सर पूर्व में केवल प्रकाश की झिलमिलाहट को ही देख सकता है। सभी लोगों के बीच, मैं उन लोगों को खोजता हूँ जो सचमुच में मेरे अपने हृदय के अनुकूल हैं। मैं सभी लोगों के बीच चलतफिरता हूँ और सभी लोगों के बीच रहता हूँ, लेकिन मनुष्य पृथ्वी पर सुरक्षित और स्वस्थ है, और इसलिए ऐसा कोई नहीं जो मेरे हृदय के अनुसार हो लोग नहीं जानते हैं कि मेरी इच्छा का ध्यान कैसे रखें, वे मेरे कार्यों को नहीं देख सकते हैं, और वे प्रकाश के बीच हरकत नहीं कर सकते हैं और उन्हें प्रकाश के द्वारा चमकाया नहीं जा सकता है। यद्यपि मनुष्य ने हमेशा से मेरे वचनों को सँजोकर रखा है, फिर भी वह शैतान धोखेबाज योजनाओं की सही प्रकृति का पता लगाने में असमर्थ है; क्योंकि मनुष्य का कद बहुत छोटा है, वह अपने हृदय की इच्छाओं के अनुसार कार्य करने में असमर्थ है। मनुष्य ने कभी भी मुझसे ईमानदारी से प्रेम नहीं किया है। जब मैं उसकी बढ़ाई करता हूँ, तो वह अपने आपको अयोग्य महसूस करता है, किन्तु इससे वह मुझे संतुष्ट करने की कोशिश नहीं करता है। वह मात्र उस स्थान को पकड़े रहता है जो मैंने उसके हाथों में दिया है और वह उसकी बारीकी से जाँच करता है; मेरी मनोरमता के प्रति असंवेदनशील होते हुए, वह इसके बजाए अपने स्थान के आशीषों को ठूँसने में लगा रहता है। क्या यह मनुष्य की कमी नहीं है? जब पहाड़ सरकते हैं, तो क्या वे तुम्हारे स्थान के वास्ते एक चक्कर लगा सकते हैं? जब समुद्र बहते हैं, तो क्या वे तुम्हारे स्थान के सामने रूक सकते हैं? क्या तुम्हारे स्थान के द्वारा आकाश और पृथ्वी को पलटा जा सकता है? मैं किसी समय मनुष्य के प्रति दयावान था, और बार बार दयावान था—फिर भी कोई भी इसे मन में नहीं लाता है या इसे सँजोकर नहीं रखता है, उन्होंने मात्र एक कहानी के रूप में इसे सुना, या एक उपन्यास के रूप में इसे पढ़ा है। क्या मेरे वचन वास्तव में मनुष्य के हृदय को स्पर्श नहीं करते हैं? क्या मेरे कथनों का वास्तव में कोई प्रभाव नहीं पड़ता है? क्या ऐसा हो सकता है कि कोई भी मेरे अस्तित्व में विश्वास नहीं करता है? मनुष्य अपने आप से प्रेम नहीं करता है; इसके बजाए, वह मुझ पर आक्रमण करने के लिए शैतान के साथ मिल जाता है और शैतान को एक "परिसम्पत्ति" के रूप में उपयोग करता है जिसके द्वारा मेरी सेवा की जाए। मैं शैतान की सभी धोखेबाज़ योजनाओं को भेद दूँगा और पृथ्वी से लोगों को शैतान के धोखों को स्वीकार करने से रोक दूँगा, ताकि वे शैतान के अस्तित्व की वजह से मेरा विरोध न करें।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

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