परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के सबसे नए कार्य को जानो और उसके चरण-चिन्हों का अनुसरण करो" | अंश 395

परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर के सबसे नए कार्य को जानो और उसके चरण-चिन्हों का अनुसरण करो" | अंश 395

194 |30 अगस्त, 2020

अब, तुम लोगों को परमेश्वर की प्रजा बनने की कोशिश करनी है, और तुम सब पूरी प्रविष्टि को सही राह पर शुरू करोगे। परमेश्वर के लोग होने का अर्थ है राज्य के युग में प्रवेश करना। आज, तुम सब आधिकारिक तौर पर राज्य के प्रशिक्षण में प्रवेश करना शुरू कर रहे हो, और तुम लोगों के भावी जीवन अब पहले की तरह सुस्त और लापरवाह नहीं रहेंगे; ऐसे जीवन परमेश्वर द्वारा अपेक्षित मानकों को प्राप्त करने में असमर्थ होते हैं। अगर तुम्हें कोई अत्यावश्यकता महसूस नहीं होती है, तो यह दिखाता है कि तुम खुद को सुधारने की कोई इच्छा नहीं रखते हो, कि तुम्हारा अनुसरण उलझा हुआ और भ्रमित है, और तुम परमेश्वर की इच्छा को पूरा करने में असमर्थ हो। राज्य के प्रशिक्षण में प्रवेश करने का तात्पर्य है परमेश्वर के लोगों के जीवन की शुरुआत करना—क्या तुम इस तरह के प्रशिक्षण को स्वीकार करने के लिए तैयार हो? क्या तुम तात्कालिकता की एक भावना को महसूस करने के लिए तैयार हो? क्या तुम परमेश्वर के अनुशासन के तहत जीने के लिए तैयार हो? क्या तुम परमेश्वर की ताड़ना के तहत जीने के लिए तैयार हो? जब परमेश्वर के वचन तुम पर आते हैं और तुम्हारी परीक्षा लेते हैं, तब तुम कैसे पेश आओगे? और जब तुम सभी तरह के तथ्यों का सामना करोगे तो तुम क्या करोगे? अतीत में, तुम्हारा ध्यान जीवन पर केन्द्रित नहीं था; आज, तुम्हें जीवन की वास्तविकता में प्रवेश करना होगा, और अपने जीवन के स्वभाव में बदलावों को लाने की कोशिश करनी होगी। यही है जो कि राज्य के लोगों के द्वारा हासिल किया जाना चाहिए। उन सब के पास जो परमेश्वर के लोग हैं जीवन होना चाहिए, उन्हें राज्य के प्रशिक्षण को स्वीकार करना चाहिए और उनके जीवन के स्वभाव में परिवर्तनों का अनुसरण करना चाहिए। यही है वह जो राज्य के लोगों से परमेश्वर की अपेक्षा है।

राज्य के लोगों से परमेश्वर की अपेक्षाएँ निम्नानुसार हैं:

1. उन्हें परमेश्वर के आदेशों को स्वीकार करना चाहिए, जिसका अर्थ है, उन्हें परमेश्वर के आखिरी दिनों के कार्य के दौरान कहे गए सभी वचनों को स्वीकार करना होगा।

2. उन्हें राज्य के प्रशिक्षण में प्रवेश करना चाहिए।

3. उन्हें इसका प्रयास करना चाहिए कि परमेश्वर उनके दिलों को स्पर्श करे। जब तुम्हारा दिल पूरी तरह से परमेश्वर की ओर मुड़ जाता है, और तुम्हारे पास एक सामान्य आध्यात्मिक जीवन होता है, तो तुम स्वतंत्रता के क्षेत्र में रहोगे, जिसका अर्थ है कि तुम परमेश्वर के प्रेम की देखभाल और उसके संरक्षण के तहत जिओगे। केवल जब तुम परमेश्वर की देखभाल और संरक्षण में रहते हो तभी तुम परमेश्वर के होते हो।

4. वे परमेश्वर द्वारा प्राप्त किये जाने चाहिए।

5. उन्हें पृथ्वी पर परमेश्वर की महिमा का एक प्रत्यक्षीकरण बन जाना चाहिए।

ये पाँच बातें तुम सब के लिए मेरे आदेश हैं। मेरे वचन परमेश्वर के लोगों से कहे जाते हैं, और यदि तुम इन आदेशों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हो, तो मैं तुम्हें मजबूर नहीं करूँगा—लेकिन अगर तुम सचमुच उन्हें स्वीकार करते हो, तो तुम परमेश्वर की इच्छा की पूर्ति करने में सक्षम होगे। आज, तुम सभी परमेश्वर के आदेशों को स्वीकार करना शुरू करो, और राज्य के लोग बनने का और राज्य के लोगों के लिए आवश्यक मानकों को हासिल करने का अनुसरण करो। यह प्रविष्टि का पहला चरण है। यदि तुम पूरी तरह से परमेश्वर की इच्छा पूर्ण करना चाहते हो, तो तुम्हें इन पाँच आदेशों को स्वीकार करना होगा, और यदि तुम उन्हें कर पाने में सक्षम होते हो, तो तुम परमेश्वर के दिल का अनुसरण करोगे, और निश्चित रूप से परमेश्वर तुम्हारा महान उपयोग करेगा। आज जो अत्यधिक महत्वपूर्ण है वह है राज्य के प्रशिक्षण में प्रवेश करना। राज्य के प्रशिक्षण में प्रवेश आध्यात्मिक जीवन को सन्निहित करता है। पहले, आध्यात्मिक जीवन की कोई बात नहीं होती थी, लेकिन आज, जैसे ही तुम राज्य के प्रशिक्षण में प्रवेश करना शुरू करते हो, तुम आधिकारिक तौर पर आध्यात्मिक जीवन में प्रवेश करते हो।

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

ईश्वर की इच्छा को निराश नहीं कर सकते तुम

ईश-वचनों के न्याय को, शुद्धिकरण और आज्ञाओं को, स्वीकार कर पाते हो तुम। पूर्वनियत किया इन्हें ईश्वर ने शुरू में ही। जब ताड़ना दी जाए तो, ज़्यादा दुखी मत होना।

तुम लोगों पर हुए काम को कोई ले न पाए, न ही तुम लोगों को मिले आशीष कोई ले पाए। जो तुम लोगों को मिला उसे कोई न ले पाए। धर्म के लोग तुलना तुमसे कर न पाएँ। माहिर नहीं तुम लोग बाइबल में, न धार्मिक सिद्धांत हैं तुम लोगों में; फिर भी सर्वाधिक मिला तुम लोगों को ईश-कार्य से। तुम लोगों का महानतम आशीष यही है।

ईश्वर के प्रति अधिक समर्पित हो जाओ, उसके प्रति अधिक निष्ठावान बन जाओ। ईश्वर उन्नत करता है तुम्हें, सो और अधिक प्रयास करो, ईश-आज्ञा स्वीकारने को आध्यात्मिक कद तैयार करो।

जो जगह दी तुमको ईश्वर ने वहाँ अटल रहो, ईश-जन बनने का प्रयास करो, राज्य की तालीम स्वीकारो, ईश्वर द्वारा प्राप्त हो जाओ, और उसकी शानदार गवाही बनो। अगर है ये संकल्प तुम्हारा, तो अंत में ईश्वर द्वारा प्राप्त हो जाओगे, और यकीनन ईश्वर की शानदार गवाही बन जाओगे। सबसे अहम आज्ञा है कि तुम ईश्वर द्वारा प्राप्त हो जाओ, ईश्वर की शानदार गवाही बन जाओ। यही दरअसल इच्छा है ईश्वर की।

'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से

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