परमेश्वर के दैनिक वचन : जीवन में प्रवेश | अंश 414
परमेश्वर में विश्वास रखने के लिए एक सामान्य आध्यात्मिक जीवन का होना आवश्यक है, जो कि परमेश्वर के वचनों का अनुभव करने और वास्तविकता में...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
जब अंत के दिनों के दौरान उद्धारकर्त्ता का आगमन होता है, यदि उसे तब भी यीशु कहकर पुकारा जाता, और उसने एक बार फिर से यहूदिया में जन्म लिया होता, और यहूदिया में अपना काम किया होता, तो इससे यह प्रमाणित होता कि मैंने केवल इस्राएलियों की रचना की और केवल इस्राएलियों के लोगों को ही छुटकारा दिलाया, और यह कि अन्य जातियों से मेरा कोई वास्ता नहीं है। क्या यह मेरे वचनों के विपरीत नहीं होगा कि "मैं वह प्रभु हूँ जिसने आकाश और पृथ्वी और सभी वस्तुओं को बनाया है?" मैंने यहूदिया को छोड़ दिया है और अन्य जातियों के बीच में कार्य करता हूँ क्योंकि मैं मात्र इस्राएल के लोगों का ही परमेश्वर नहीं हूँ, बल्कि सभी प्राणियों का परमेश्वर हूँ। मैं अंत के दिनों के दौरान अन्य जातियों के बीच में प्रकट होता हूँ क्योंकि मैं न केवल इस्राएल के लोगों का परमेश्वर यहोवा हूँ, बल्कि, इसके अतिरिक्त, क्योंकि मैं अन्य जातियों के बीच में अपने चुने हुए सभी लोगों का रचयिता भी हूँ। मैंने न केवल इस्राएल, मिस्र और लेबनान की रचना की, बल्कि मैंने इस्राएल से बाहर के सभी अन्य जाति के राष्ट्रों की भी रचना की। और इस कारण, मैं सभी प्राणियों का प्रभु हूँ। मैंने इस्राएल को मात्र अपने कार्य के आरंभिक बिन्दु के रूप में उपयोग किया था, और यहूदिया और गलील को मेरे छुटकारे के कार्य के लिए केन्द्रों के रूप में नियुक्त किया था, और मैं अन्य जाति के राष्ट्रों को ऐसे आधार के रूप में उपयोग करता हूँ जहाँ से मैं पूरे युग को समाप्त करूँगा। मैंने कार्य के दो चरणों को इस्राएल में पूरा किया (व्यवस्था के युग और अनुग्रह के युग के कार्य के दो चरण), और मैं कार्य के आगे के दो चरणों (अनुग्रह के युग और राज्य के युग) को इस्राएल के बाहर तमाम देशों में करता आ रहा हूँ। अन्य जाति के राष्ट्रों के बीच मैं जीतने का कार्य करूँगा, और इसलिए उस युग को समाप्त करूँगा। यदि मनुष्य हमेशा मुझे यीशु मसीह कहकर सम्बोधित करता है, किन्तु यह नहीं जानता है कि मैंने इन अंतिम दिनों के दौरान एक नए युग की शुरूआत कर दी है और एक नया साहसिक कार्य प्रारम्भ कर दिया है, और यदि मनुष्य हमेशा सनकियों की तरह उद्धारकर्त्ता यीशु के आगमन का इन्तज़ार करता रहता है, तो मैं कहूँगा कि ऐसे लोग उसके समान हैं जो मुझ पर विश्वास नहीं करते हैं। वे ऐसे लोग हैं जो मुझे नहीं जानते हैं, और मुझ पर उनका विश्वास एक ढकोसला है। क्या ऐसे लोग उद्धारकर्त्ता यीशु के स्वर्ग से आगमन का दर्शन कर सकते हैं? वे मेरे आगमन का इन्तज़ार नहीं करते हैं, बल्कि वे यहूदियों के राजा के आगमन का इन्तज़ार करते हैं। वे मेरे द्वारा इस पुराने अशुद्ध संसार के सम्पूर्ण विनाश की लालसा नहीं करते हैं, बल्कि इसके बजाए यीशु के द्वितीय आगमन की लालसा करते हैं, जिसके पश्चात उन्हें छुटकारा दिया जाएगा; वे यीशु की प्रतीक्षा करते हैं कि वह एक बार फिर से पूरी मानवजाति को इस अशुद्ध और अधर्मी भूमि से छुटकारा दिलाए। ऐसे लोग उनके समान कैसे बन सकते हैं जो अंत के दिनों के दौरान मेरे काम को पूरा करते हैं? मनुष्य की कामनाएँ मेरी इच्छाओं को प्राप्त करने या मेरे कार्य को पूरा करने में अक्षम हैं, क्योंकि मनुष्य मात्र उस कार्य की प्रशंसा करता है और उससे प्यार करता है जिसे मैंने पहले किया है, और उसे कोई अंदाजा नहीं है कि मैं परमेश्वर स्वयं हूँ जो हमेशा से नया है और कभी पुराना नहीं होता है। मनुष्य केवल इतना जानता है कि मैं यहोवा, और यीशु हूँ, और उसको कोई आभास नहीं है कि मैं ही अंतिम, वह एक हूँ जो मानवजाति को समाप्त करेगा। वह सब जिसके लिए मनुष्य तरसता है और जिसे जानता है वह उसकी स्वयं की धारणा है, और मात्र वह है जिसे वह अपनी आँखों से देख सकता है। यह उस कार्य के अनुसार नहीं है जो मैं करता हूँ, बल्कि उसके असंगत है। यदि मेरा कार्य मनुष्य की अवधारणा के अनुसार किया गया होता, तो यह कब समाप्त होता? मानवजाति विश्राम में कब प्रवेश करती? और मैं सातवें दिन, विश्राम के दिन में प्रवेश करने में कैसे सक्षम होता? मैं अपनी योजना के अनुसार, अपने लक्ष्य के अनुसार कार्य करता हूँ, और मैं मनुष्य की नीयत के अनुसार काम नहीं करता हूँ।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, उद्धारकर्ता पहले ही एक “सफेद बादल” पर सवार होकर वापस आ चुका है
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