परमेश्वर के दैनिक वचन : बाइबल के बारे में रहस्य | अंश 266
परमेश्वर द्वारा व्यवस्था के युग का कार्य कर लेने के बाद पुराना विधान बनाया गया और तब से लोगों ने बाइबल पढ़ना शुरू किया। यीशु ने आने के बाद...
हम परमेश्वर के प्रकटन के लिए बेसब्र सभी साधकों का स्वागत करते हैं!
आज मैं तुम पर जो कार्य कर रहा हूँ, वो तुम्हें सामान्य मानवीयता के जीवन में ले जाने के लिए है; यह नए युग के आरंभ और इंसान को नए युग में ले जाने के लिए है। यह कार्य कदम-दर-कदम किया जाता है और प्रत्यक्ष रूप से तुम लोगों के मध्य विकसित होता है : मैं तुम लोगों को रूबरू शिक्षा देता हूँ; मैं तुम्हें हाथ पकड़कर ले जाता हूँ; मैं तुम लोगों को वो बातें बताता हूँ जिसकी तुम्हें समझ नहीं है; तुम्हें वो चीज़ें प्रदान करता हूँ जिनका तुम्हारे अंदर अभाव है। यह कहा जा सकता है कि यह सारा कार्य तुम लोगों के जीवन-पोषण के लिए है, तुम लोगों को सामान्य मानवीयता के जीवन में ले जाने के लिए है; यह खास तौर से अंत के दिनों में लोगों के इस समूह को जीवन के लिए पोषण मुहैया कराने के लिए है। मेरे लिये, यह सारा कार्य पुराने युग का अंत करने और नए युग में ले जाने के लिए है; जहाँ तक शैतान का सवाल है, मैंने उसी को पराजित करने के लिए देहधारण किया। मैं तुम लोगों के बीच अब जो कार्य कर रहा हूँ, वह तुम्हारा आज का पोषण और सही समय पर तुम्हारा उद्धार है, लेकिन इन थोड़े-से वर्षों में, मैं तुम लोगों को सारा सत्य, जीवन का सारा मार्ग बता दूँगा, यहाँ तक कि भविष्य का कार्य भी बता दूँगा; भविष्य में यह तुम लोगों को सही तौर पर चीज़ों का अनुभव करने में समर्थ बनाने के लिए पर्याप्त होगा। मैंने बस अपने सारे वचन तुम लोगों को सौंप दिए हैं। मैं और कोई उपदेश नहीं देता हूँ; आज, मैंने तुम लोगों से जो सारे वचन बोले हैं, वे ही मेरे उपदेश हैं, क्योंकि आज तुम लोगों को मेरे बोले गए वचनों का कोई अनुभव नहीं है, और तुम लोग उनके गहन अर्थ को नहीं समझते। एक दिन, तुम लोगों के अनुभव फलीभूत होंगे, जैसा कि आज मैंने कहा है। ये वचन तुम्हारे आज के दर्शन हैं, और भविष्य में तुम इन्हीं पर निर्भर रहोगे; वे आज जीवन के लिए पोषण हैं और भविष्य के लिए उपदेश हैं, इससे बेहतर उपदेश नहीं हो सकते थे। क्योंकि मेरे पास कार्य करने के लिए धरती पर उतना समय नहीं है जितना मेरे वचनों का अनुभव करने के लिए तुम्हारे पास है; मैं मात्र अपना कार्य पूरा कर रहा हूँ, जबकि तुम लोग जीवन का अनुसरण कर रहे हो, एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें जीवन की लंबी यात्रा शामिल है। बहुत-सी चीज़ों का अनुभव करने के बाद ही तुम जीवन के मार्ग को पूरी तरह से प्राप्त कर पाओगे; तभी तुम मेरे आज बोले गए वचनों के अंदर छिपे हुए अर्थ को समझ पाओगे। जब तुम्हारे हाथों में मेरे वचन होंगे, जब तुम सब लोगों को मेरे सारे आदेश प्राप्त हो जाएँगे, एक बार जब मैं तुम्हें वो सारे कार्य सौंप दूँगा जो मुझे सौंपने चाहिए, और जब वचनों का कार्य समाप्त हो जाएगा, बिना इस बात की परवाह किए कि कितना विशाल प्रभाव प्राप्त हुआ है, तब परमेश्वर की इच्छा का कार्यांवयन भी हो चुका होगा। ऐसा नहीं है जैसा तुम सोचते हो कि तुम्हें एक निश्चित स्थिति तक बदलना चाहिए; परमेश्वर तुम्हारी धारणाओं के अनुसार कार्य नहीं करता।
—वचन, खंड 1, परमेश्वर का प्रकटन और कार्य, अभ्यास (7)
परमेश्वर के बिना जीवन कठिन है। यदि आप सहमत हैं, तो क्या आप परमेश्वर पर भरोसा करने और उसकी सहायता प्राप्त करने के लिए उनके समक्ष आना चाहते हैं?
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