परमेश्वर के दैनिक वचन | "अभ्यास (2)" | अंश 210

अन्तिम दिन आ चुके हैं, और विश्वभर के देशों में अशान्ति है। राजनीतिक अस्त-व्यस्तता, अकाल, महामारी और बाढ़ें हैं, प्रत्येक स्थान पर अकाल पड़ रहे हैं। मानव-संसार पर महाविपत्ति है; स्वर्ग ने भी विनाश को नीचे भेज दिया है। ये अन्तिम दिनों के चिह्न हैं। परन्तु लोगों को यह आनन्द और वैभव जैसा संसार प्रतीत होता है, ऐसा संसार लगता है जो अधिक आनंद और वैभव से भरता चला जा रहा है। लोगों के हृदय इसकी ओर आकर्षित होते हैं और अनेक लोग फंस जाते हैं और स्वयं को इसके बन्धन से मुक्त करने में असमर्थ रहते हैं; बहुत अधिक संख्या में लोग उनके द्वारा मोहित किए जाएँगे जो धोखेबाज़ी और जादूटोने में संलिप्त हैं। यदि तुम उन्नति का प्रयास नहीं करते और तुम आदर्शरहित हो, और तुमने सच्चे मार्ग में अपनी जड़ें नहीं जमायी हैं, तो तुम पाप की हिलोरे मारती लहरों के द्वारा बहा लिए जाओगे। सभी देशों में चीन सबसे पिछड़ा हुआ है; यह वह देश है जहाँ बड़ा लाल अजगर कुण्डली मार कर बैठा हुआ है, इसके पास सबसे अधिक ऐसे लोग हैं, जो मूर्तिपूजा करते और जादूटोने में संलिप्त हैं, सबसे ज़्यादा मन्दिर हैं, और यह एक ऐसा स्थान है जहाँ अशुद्ध प्रेत निवास करते हैं। तुम इसमें जन्में थे, तुमने यहाँ से शिक्षा पायी और इसका प्रभाव तुममें गहराई तक समाया है; तुम इसके द्वारा भ्रष्ट और पीड़ित किए गए हो, परन्तु जगा दिये जाने के पश्चात तुम इसे त्याग देते हो और परमेश्वर के द्वारा पूर्णत: प्राप्त कर लिए जाते हो। यही परमेश्वर की महिमा है, इसी कारण कार्य का यह चरण अत्यधिक महत्व रखता है। परमेश्वर ने इतने बड़े पैमाने पर कार्य किया है, इतने अधिक वचन बोले हैं, और अन्ततः वह तुम लोगों को पूरी तरह से प्राप्त कर लेगा—यह परमेश्वर के प्रबन्धन के कार्य का एक पक्ष है और तुम सब शैतान के साथ परमेश्वर के युद्ध में "विजय का लाभ" हो। तुम लोग जितना अधिक सत्य समझोगे, कलीसिया का जीवन जितना ही बेहतर होगा, उस बड़े लाल अजगर को उसके घुटनों पर उतना ही अधिक लाया जा सकेगा। ये आध्यात्मिक संसार के विषय हैं—ये आध्यात्मिक संसार के युद्ध हैं, और जब परमेश्वर जयवन्त है, तो शैतान लज्जित और धराशायी होगा। परमेश्वर के कार्य का यह चरण अत्यन्त महत्व रखता है। परमेश्वर इतने विशाल स्तर पर कार्य करता है और इस समूह के लोगों को पूरी तरह से बचाता है ताकि तुम शैतान के प्रभाव से बच सको, पवित्र देश में जीवनयापन कर सको, परमेश्वर की ज्योति में जीवनयापन कर सको, और ज्योति की अगुवाई और मार्गदर्शन पा सको। फिर तुम्हारे जीवन का अर्थ है। तुम सब क्या खाते और क्या पहनते हो, यह अविश्वासियों से भिन्न है; तुम सब परमेश्वर के वचनों का आनन्द उठाते हो, और एक अर्थपूर्ण जीवन जीते हो—और वे किस से आनन्दित होते हैं? वे मात्र अपने "पूर्वजों की विरासत" और अपनी "देशभक्ति" का आनन्द लेते हैं। उनमें मानवता का थोड़ा-भी अवशेष नहीं है! तुम सब के वस्त्र, शब्द और कार्य उनसे भिन्न होते हैं। तुम सब अन्ततः अशुद्धता से पूरी तरह बच जाओगे, शैतान के प्रलोभन के फन्दे में और फंसे नहीं रहोगे और परमेश्वर का प्रतिदिन का प्रावधान प्राप्त करोगे। तुम सबको सर्वदा सावधान रहना चाहिए। यद्यपि तुम लोग एक गंदी जगह में रहते हो, तुम लोग गंदगी से बेदाग हो और परमेश्वर के साथ रह सकते हो, उसकी महान सुरक्षा को प्राप्त कर सकते हो। इस पीले देश में समस्त लोगों में से परमेश्वर ने तुम सबको चुना है। क्या तुम सब सबसे आशीषित लोग नहीं हो? तुम एक सृष्ट प्राणी हो—तुम्हें निस्संदेह परमेश्वर की आराधना करनी चाहिए और एक अर्थपूर्ण जीवन जीना चाहिए। यदि तुम परमेश्वर की आराधना नहीं करते हो बल्कि अपने अशुद्ध शरीर में जीवनयापन करते रहते हो, तो क्या तुम बस मानव भेष में एक जानवर नहीं हो? चूँकि तुम एक मनुष्य हो, तुम्हें परमेश्वर के लिए खुद को खपाना और समस्त दुखों को सहना चाहिए! तुम्हें जो थोड़ा दुःख आज दिया जाता है, उसे तुम्हें प्रसन्नतापूर्वक और निश्चित ही स्वीकार करना चाहिए, अय्यूब और पतरस के समान एक अर्थपूर्ण जीवन जीना चाहिए। इस संसार में, मनुष्य शैतान का भेष धारण करता है, शैतान के द्वारा दिया गया भोजन खाता है, और शैतान के अधीन कार्य और सेवा करता है, और उसकी अशुद्धता में पूरी तरह कुचला जा रहा है। यदि तुम जीवन का अर्थ नहीं समझते हो या सच्चा मार्ग प्राप्त नहीं करते हो, तो इस तरह जीने का क्या महत्व है? तुम सब वे लोग हो, जो सही मार्ग का अनुसरण करते हो, सुधार को खोजते हो। तुम सब वे लोग हो, जो बड़े लाल अजगर के देश में ऊपर उठते हो, वे लोग जिन्हें परमेश्वर धर्मी बुलाता है। क्या यही सब से अर्थपूर्ण जीवन नहीं है?

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

सबसे सार्थक जीवन

एक सृजित प्राणी के तौर पर, आराधना करनी चाहिये परमेश्वर की तुम्हें। एक सृजित प्राणी के तौर पर, बेहद सार्थक जीवन जीना चाहिये तुम्हें। सही राह पर चलते हैं जो वो इंसान हो तुम। तरक्की की खोज करते हैं जो वो इंसान हो तुम। बड़े लाल अजगर के देश में ऊपर उठते हैं जो वो इंसान हो तुम। धार्मिक कहता है जिन्हें परमेश्वर वो इंसान हो तुम। क्या यही नहीं है सबसे सार्थक जीवन, सबसे सार्थक जीवन?

इंसान के तौर पर, परमेश्वर की ख़ातिर ख़ुद को खपाना चाहिये तुम्हें। इंसान के तौर पर, हर दुख सहना चाहिये तुम्हें, तुम्हें, तुम्हें। दुख जो सहते हो थोड़ा-सा तुम, उसे ख़ुशी से स्वीकार करना चाहिये तुम्हें, पतरस और अय्यूब की तरह, सार्थक जीवन जीना चाहिये तुम्हें, तुम्हें, तुम्हें। सही राह पर चलते हैं जो वो इंसान हो तुम। तरक्की की खोज करते हैं जो वो इंसान हो तुम। बड़े लाल अजगर के देश में ऊपर उठते हैं जो वो इंसान हो। सही राह पर चलते हैं जो वो इंसान हो तुम। तरक्की की खोज करते हैं जो वो इंसान हो तुम। बड़े लाल अजगर के देश में ऊपर उठते हैं जो वो इंसान हो तुम। धार्मिक कहता है जिन्हें परमेश्वर वो इंसान हो तुम। क्या यही नहीं है सबसे सार्थक जीवन, सबसे सार्थक जीवन?

'मेमने का अनुसरण करो और नए गीत गाओ' से

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