परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है IV" | अंश 142

मनुष्य पर किए गए शैतान के कार्य के द्वारा किस प्रकार का प्रतीकात्मक लक्षण दिखाया गया है? तुम लोगों को अपने स्वयं के अनुभवों से इसके विषय में जानना चाहिए—शैतान का अत्यंत प्रतीकात्मक लक्षण, वह कार्य जिसे वह सबसे अधिक करता है, वह कार्य जिसे वह हर एक व्यक्ति के साथ करने की कोशिश करता है। उसके पास एक लक्षण है जिसे शायद तुम सब देख नहीं सकते हो, ताकि तुम सब यह न सोचो कि शैतान कितना भयावह एवं घृणित है। क्या कोई जानता है कि यह लक्षण क्या है? मुझे बताओ। (हर एक चीज़ जिसे वह करता है उसे मनुष्य को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाता है।) वह मनुष्य को नुकसान पहुंचाने के लिये कार्य करता है। वह मनुष्य को कैसे नुकसान पहुंचाता है? क्या तुम सब मुझे और अधिक विशिष्टता से तथा और अधिक विस्तार से दिखा सकते हो? (वह मनुष्य को लुभाता, फुसलाता एवं प्रलोभन देता है।) यह सही है, यह विभिन्न पहलुओं को दिखाता है। और कुछ? (यह मनुष्य को ठगता है।) वह ठगता है, आक्रमण करता है एवं दोष लगाता है। हाँ, इनमें से सब कुछ। क्या और भी कुछ है? (वह झूठ बोलता है।) धोखा देना और झूठ बोलना शैतान में स्वाभाविक रीति से आता है। वह ऐसा इतनी बार करता है कि झूठ उसके मुंह से होकर बहता है और इसके विषय में सोचने की जरुरत भी नहीं है। और कुछ? (वह मतभेद प्रकट करता है।) यह उतना महत्वपूर्ण नहीं है। मैं तुम लोगों को कुछ चीज़ें बताऊंगा जो तुम लोगों को भयभीत कर देगा, परन्तु मैं तुम लोगों को डराने के लिए इसे नहीं करूंगा। परमेश्वर मनुष्य पर कार्य करता और मनुष्य परमेश्वर की मनोवृत्ति एवं उसके हृदय में पोषित होता है। इसके विपरीत, क्या शैतान मनुष्य को पोषित करता है? वह मनुष्य को पोषित नहीं करता है। वह मनुष्य से क्या चाहता है? वह मनुष्य को हानि पहुंचाना चाहता है, वह जो कुछ सोचता है वह मनुष्य को हानि पहुंचाने के विषय में होता है। क्या यह सही नहीं है? अतः जब वह मनुष्य को हानि पहुंचाने का विचार करता है, तो क्या वह ऐसा मस्तिष्क के दबाव की स्थिति में करता है? (हाँ।) अतः जब मनुष्य पर शैतान के कार्य की बात आती है, तो यहाँ मेरे पास दो शब्द हैं जो शैतान की दुर्भावना एवं दुष्ट स्वभाव की बहुतायत से व्याख्या कर सकते हैं, जो सचमुच में तुम लोगों को शैतान की घृणा को जानने की अनुमति दे सकता है: मनुष्य तक शैतान की पहुंच में, वह हमेशा बलपूर्वक "कब्जा" करता है और स्वयं को उनमें से प्रत्येक के साथ "जोड़ता" है ताकि वह उस बिन्दु तक पहुंच सके जहाँ वह मनुष्य को पूरी तरह से नियन्त्रण में रखता है, और मनुष्य को नुकसान पहुंचता है, ताकि वह इस उद्देश्य एवं अनियन्त्रित महत्वाकांक्षाओं को हासिल कर सके। "बलपूर्वक कब्जा" करने का अर्थ क्या है? क्या यह आपकी सहमति के साथ होता है, या बिना आपकी सहमति से होता है? क्या यह तुम्हारी जानकारी से होता है, या तुम्हारी जानकारी के बगैर होता है? यह पूरी तरह से तुम्हारी जानकारी के बगैर होता है। ऐसी परिस्थितियों में जहाँ तू अनजान रहता है, संभवतः जब उसने कुछ भी नहीं कहा है या संभवतः जब उसने कुछ भी नहीं किया है, जब कोई प्रतिज्ञा नहीं है, और कोई सन्दर्भ नहीं है, वहाँ वह आपके चारों ओर है, और आपको घेरे हुए है। वह तेरा शोषण करने के लिए एक अवसर तलाशता है, तब वह बलपूर्वक तुझ पर कब्जा करता है, स्वयं को तुझसे जोड़ देता है, और पूरी तरह से तुझ पर नियन्त्रण करने एवं तुझे नुकसान पहुँचाने के अपने उद्देश्य को हासिल करता है। मानवजाति के लिए परमेश्वर के विरुद्ध शैतान की लड़ाई में यह एक अति प्रतीकात्मक इरादा एवं व्यवहार है। जब तुम लोगों ने इसे सुना तो तुम सब को कैसा महसूस हुआ? (अपने हृदय में भयभीत एवं डरे हुए।) क्या तुम सब घृणा महसूस करते हो? (हाँ, हम घृणा महसूस करते हैं।) तो जब तुम लोग घृणित महसूस करते हो, तो क्या तुम लोग सोचते हो कि शैतान निर्लज्ज है? (हाँ।) जब तुम लोग सोचते हो कि शैतान निर्लज्ज है, तो क्या तुम सबने उन लोगों के प्रति घृणा महसूस की जो तुम लोगों को नियन्त्रित करना चाहते हैं, ऐसे लोग जिनके पास हैसियत एवं रुचियों के लिए अनियन्त्रित महत्वाकांक्षाएं हैं? (हाँ।) अतः शैतान मनुष्य के साथ अपने आपको बलपूर्वक जोड़ने और उस पर कब्जा करने के लिए कौन से तरीकों का उपयोग करता है? क्या तुम लोग इसके विषय में स्पष्ट हो? जब तुम सब बलपूर्वक "कब्जे" एवं "जुड़ने" जैसे दो शब्दों को सुनते हो, तो तुम लोगों को अजीब सा एवं घृणा का एहसास होता है, क्या तुम लोगों को नहीं होता है? क्या तुम लोगों ने उसके बुरे स्वाद को चखा है? तेरी सहमति या तेरी जानकारी के बिना वह स्वयं को तुझसे जोड़ लेता है, और तुझ पर कब्जा करता है एवं तुझे भ्रष्ट करता है। तू अपने हृदय में क्या महसूस कर सकता है? घृणा? (हाँ!) घृणा? (हाँ!) अतः जब तू शैतान के इस तरीके के लिए नफ़रत एवं घृणा महसूस करता है, तो तेरे पास परमेश्वर के लिए किस प्रकार का एहसास होता है? (कृतज्ञ।) तुझे बचाने के लिए परमेश्वर का कृतज्ञ। अतः अब, इस घड़ी, क्या तेरे पास वह चाहत या वह इच्छा है कि परमेश्वर तेरी समस्त जिम्मेदारी ले ले और तेरे सर्वस्व पर शासन करे? (हाँ।) किस सन्दर्भ में? क्या तू इसलिए हाँ कहता है क्योंकि तुझे शैतान के द्वारा बलपूर्वक कब्जा किए जाने एवं जोड़े जाने का डर है? तेरे पास इस किस्म की मानसिकता नहीं हो सकती है, यह सही नहीं है। डरो मत, परमेश्वर यहाँ है। यहाँ डरने के लिए कुछ भी नहीं है, ठीक है? जब एक बार तू शैतान के बुरे सार को समझ जाता है, तो तेरे पास परमेश्वर के प्रेम, परमेश्वर के अच्छे इरादों, तथा मनुष्य और उसकी धार्मिक रुचि के लिए परमेश्वर की करुणा एवं उदारता के विषय में और अधिक सटीक समझ या अधिक गहराई से पालन करना चाहिए। शैतान कितना घृणित है, फिर भी यदि यह अभी भी परमेश्वर के विषय में तेरे प्रेम और परमेश्वर पर तेरी निर्भरता एवं परमेश्वर में तेरे भरोसे को प्रेरित नहीं करता है, तो तू किस प्रकार का व्यक्ति होगा? क्या तू तैयार है कि शैतान तुझे इस प्रकार से नुकसान पहुंचाए? शैतान की दुष्टता एवं भयंकरता को देखने के पश्चात्, हम उसे घुमाते हैं और तब परमेश्वर को देखते हैं। क्या परमेश्वर के विषय में तुम्हारी जानकारी किसी बदलाव से होकर गुज़री है? (हाँ।) किस तरह का बदलाव? क्या हम कह सकते हैं परमेश्वर पवित्र है? क्या हम कह सकते हैं कि परमेश्वर दोष रहित है? (हाँ।) "परमेश्वर अद्वितीय पवित्रता है"—क्या परमेश्वर इस उपाधि के अंतर्गत प्रसन्नता से बना रह सकता है? (हाँ।) अतः इस संसार में और सब चीजों के मध्य, क्या यह केवल स्वयं परमेश्वर ही है जो मनुष्य की इस समझ के अंतर्गत प्रसन्नता से बना रह सकता है? क्या अन्य लोग भी हैं? (नहीं।) अतः परमेश्वर ने ठीक-ठीक मनुष्य को क्या दिया है? जब तू ध्यान नहीं दे रहा होता है क्या उसने तुझे सिर्फ थोड़ी सी देखरेख, देखभाल एवं विचार करता है? परमेश्वर ने मनुष्य को क्या दिया है? परमेश्वर ने मनुष्य को जीवन दिया है, और उसने मनुष्य को सब कुछ दिया है, और किसी चीज़ की मांग किए बगैर, और किसी गुप्त इरादे के बगैर वह बिना किसी शर्त के मनुष्य को आपूर्ति करता है। वह मनुष्य की अगुवाई एवं मार्गदर्शन करने के लिए सच्चाई का उपयोग करता है, अपने वचनों का उपयोग करता है, एवं अपने जीवन का उपयोग करता है, और मनुष्य को शैतान के नुकसान से दूर ले जाता है, शैतान के प्रलोभन से दूर ले जाता है, शैतान के बहकावे से दूर ले जाता है और वह मनुष्य को अनुमति देता है कि वह शैतान के दुष्ट स्वभाव एवं उसके भयंकर चेहरे के आर पार साफ साफ देखे। अतः क्या मानवजाति के लिए परमेश्वर का प्रेम एवं चिंता सही है? क्या यह कुछ ऐसा है जिसे तुम लोगों में से हर कोई अनुभव कर सकता है? (हाँ।)

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

दुनिया आपदा से घिर गई है। यह हमें क्या चेतावनी देती है? आपदाओं के बीच हम परमेश्वर द्वारा कैसे सुरक्षित किये जा सकते हैं? इसके बारे में ज़्यादा जानने के लिए हमारे साथ हमारी ऑनलाइन मीटिंग में जुड़ें।
WhatsApp पर हमसे संपर्क करें
Messenger पर हमसे संपर्क करें

संबंधित सामग्री

परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर I" | अंश 23

आदम के लिए परमेश्वर की आज्ञा (उत्पत्ति 2:15-17) तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को लेकर अदन की वाटिका में रख दिया, कि वह उसमें काम करे और उसकी...

परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है X" | अंश 192

जब अविश्वासियों की बात आती है, तो क्या परमेश्वर की कार्यवाइयों की पृष्ठभूमि में भलों को प्रतिफल देने और दुष्टों को दण्ड देने का सिद्धांत...

परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है II" | अंश 109

क्या तुम सब सदोम के विनाश में परमेश्वर के क्रोध के आवश्यक तत्व को देख सकते हो? क्या उसके क्रोध में कोई चीज़ मिली हुई है? क्या परमेश्वर का...

परमेश्वर के दैनिक वचन | "परमेश्वर का कार्य, परमेश्वर का स्वभाव और स्वयं परमेश्वर II" | अंश 46

अय्यूब के विषय में लोगों की अनेक ग़लतफहमियां अय्यूब के द्वारा सही गई कठिनाईयां परमेश्वर के द्वारा भेजे गए स्वर्गदूतों का कार्य नहीं था, न ही...