परमेश्वर के दैनिक वचन | "स्वयं परमेश्वर, जो अद्वितीय है I" | अंश 99

शैतान की "विशिष्ट" पहचान ने बहुत से लागों से उसके विभिन्न पहलुओं के प्रकटीकरण में गहरी रूचि का प्रदर्शन करवाया है। यहाँ तक कि बहुत से मूर्ख लोग भी हैं जो यह विश्वास करते हैं कि, परमेश्वर के साथ ही साथ, शैतान भी आधिकार रखता है, क्योंकि शैतान आश्चर्यकर्म करने में सक्षम है, और ऐसी चीज़ें करने में सक्षम है जो मानवजाति के लिए असंभव हैं। और इस प्रकार, परमेश्वर की आराधना करने के अतिरिक्त, मानवजाति अपने हृदय में शैतान के लिए भी एक स्थान आरक्षित रखता है, और परमेश्वर के रूप में शैतान की भी आराधना करता है। ये लोग दयनीय और घृणित दोनों हैं। उनकी अज्ञानता के कारण वे दयनीय हैं, और अपनी झूठी शिक्षाओं और अंतर्निहित बुराई के तत्व के कारण घृणित हैं। इस बिन्दु पर, मैं महसूस करता हूँ कि तुम लोगों को जानकारी दूँ कि अधिकार क्या है, और यह किस की ओर संकेत करता है, और यह किसे दर्शाता है। व्यापक रूप से कहें, परमेश्वर स्वयं ही अधिकार है, उसका अधिकार उसकी श्रेष्ठता और हस्ती की ओर संकेत करती है, और स्वयं परमेश्वर का अधिकार परमेश्वर के स्थान और पहचान को दर्शाता है। इस स्थिति में, क्या शैतान यह कहने की हिम्मत करता है कि वह स्वयं परमेश्वर है? क्या शैतान यह कहने की हिम्मत करता है कि उसने सभी चीज़ों को बनाया है; और सभी चीज़ों के ऊपर प्रधान है? वास्तव में बिलकुल नहीं! क्योंकि वह किसी भी चीज़ को बनाने में असमर्थ है; अब तक, उसने परमेश्वर के द्वारा सृजी गई वस्तुओं में से कुछ भी नहीं बनाया है, और कभी ऐसा कुछ नहीं बनाया है जिसमें जीवन हो। क्योंकि उसके पास परमेश्वर का अधिकार नहीं है, इसलिए उसके लिए कभी भी परमेश्वर की हैसियत और पहचान प्राप्त करना सम्भव नहीं होगा, और यह उसकी हस्ती के द्वारा निश्चित होता है। क्या उसके पास परमेश्वर के समान सामर्थ है? वास्तव में उसके पास बिलकुल नहीं है! हम शैतान के ऐसे कार्यों को, और शैतान द्वारा प्रदर्शित चमत्कारों को क्या कहते हैं? क्या यह सामर्थ है? क्या इसे अधिकार कहा जा सकता है? वास्तव में नहीं! शैतान बुराई की लहर को दिशा देता है, और परमेश्वर के कार्य के हर एक पहलू में अस्थिरता, बाधा, और रूकावट डालता है। पिछले कई हज़ार सालों से, मानवजाति को बिगाड़ने और शोषित करने, और भ्रष्ट करने हेतु लुभाने और धोखा देने, और परमेश्वर का तिरस्कार करने के अलावा उसने क्या किया है, इसलिए मनुष्य अँधकार से भरी मृत्यु की घाटी की ओर चला जाता है, क्या शैतान ने ऐसा कुछ किया है जिससे वह मनुष्य के द्वारा उत्सव मनाने, तारीफ करने, या दुलार पाने हेतु ज़रा सा भी योग्य है? यदि शैतान के पास अधिकार और सामर्थ होता, तो क्या उससे मानवजाति भ्रष्ट हो जाती? यदि शैतान के पास अधिकार और सामर्थ होता, तो क्या उससे मानवजाति को नुकसान पहुँचा दिया गया होता? यदि शैतान के पास अधिकार और सामर्थ होता, तो क्या मनुष्य परमेश्वर को छोड़कर मृत्यु की ओर मुड़ जाता? जबकि शैतान के पास कोई अधिकार और सामर्थ नहीं है, तो वह सब कुछ जो वह करता है उनकी हस्ती के विषय में हमें क्या निष्कर्ष निकालना चाहिए? ऐसे लोग भी हैं जो यह अर्थ निकालते हैं कि जो कुछ भी शैतान करता है वह महज एक छल है, फिर भी मैं विश्वास करता हूँ कि ऐसी परिभाषा उतनी उचित नहीं है। क्या मानवजाति को भ्रष्ट करने के लिए उसके बुरे कार्य महज एक छल हैं? वह बुरी शक्ति जिसके द्वारा शैतान ने अय्यूब का शोषण किया, और उसका शोषण करने और उसे नष्ट करने की उसकी प्रचण्ड इच्छा को, संभवतः महज छल के द्वारा प्राप्त नहीं की जा सकती था। पीछे मुड़कर देखने से, हम एक पल में यह देखते हैं कि अय्यूब के पशुओं का झुण्ड और समूह, पहाड़ों और पर्वतों में दूर दूर तक फैल हुआ है, और एक पल में; सब कुछ चला गया, अय्यूब का महान सौभाग्य ग़ायब हो गया। क्या इसे महज छल के द्वारा प्राप्त किया जा सकता था? उन सब कार्यों का स्वभाव जो शैतान करता है वे नकारात्मक शब्दों जैसे अड़चन डालना, रूकावट डालना, नुकसान पहुँचाना, बुराई, ईष्या, और अँधकार के साथ मेल खाते हैं और बिलकुल सही बैठते हैं, और इस प्रकार उन सबका घटित होना अधर्म और बुरा है और इसे पूरी तरह शैतान के कार्यों के साथ जोड़ा जाता है, और इसे शैतान के बुरी हस्ती से जुदा नहीं किया जा सकता है। इसके बावजूद कि शैतान कितना "सामर्थी" है, इसके बावजूद कि वह कितना ढीठ और महत्वाकांक्षी है, इसके बावजूद कि नुकसान पहुँचाने की उसकी क्षमता कितनी बड़ी है, इसके बावजूद कि उसकी तकनीक का दायरा कितना व्यापक है जिससे वह मनुष्य को बिगाड़ता और लुभाता है, इसके बावजूद कि उसके छल और प्रपंच कितने चतुर हैं जिससे वह मनुष्य को डराता है, इसके बावजूद कि वह रूप जिसमें वह अस्तित्व में रहता है कितना परिवर्तनशील है, वह एक भी जीवित प्राणी को बनाने में कभी सक्षम नहीं हुआ है, और सभी चीज़ों के अस्तित्व के लिए व्यवस्थाओं और नियमों को लिखने में कभी सक्षम नहीं हुआ है, और किसी तत्व, चाहे जीवित हो या निर्जीव, पर शासन और नियन्त्रण करने में भी कभी सक्षम नहीं हुआ है। पूरे विश्व के व्यापक फैलाव में, एक भी व्यक्ति या तत्व नहीं है जो उससे उत्पन्न हुआ है, या उसके द्वारा अस्तित्व में बना हुआ है; एक भी व्यक्ति या तत्व नहीं है जिस पर उसके द्वारा शासन किया जाता है, या उसके द्वारा नियन्त्रण किया जाता है। इसके विपरीत, उसे न केवल परमेश्वर के प्रभुत्व के अधीन जीना है, किन्तु, इसके अतिरिक्त, उसे परमेश्वर के सारे आदेशों और आज्ञाओं को भी मानना होगा। परमेश्वर की आज्ञा के बिना शैतान के लिए पानी की एक बूँद या रेत के एक कण को जो भूमि की सतह पर है छूना भी कठिन है; परमेश्वर की आज्ञा के बिना, शैतान के पास इतनी भी आज़ादी नहीं है कि वह भूमि की सतह पर से एक चींटी को हटा सके-यह काम केवल मनुष्य कर सकता है, जिसे परमेश्वर द्वारा सृजा गया था। परमेश्वर की नज़रों में शैतान पहाड़ों के सोसन फूलों, हवा में उड़ते हुए पक्षियों, समुद्र की मछलियों, और पृथ्वी के कीड़े मकौड़ों से भी कमतर है। सभी चीज़ों के बीच में उसकी भूमिका है कि वह सभी चीज़ों की सेवा करे, और मानवजाति के लिए सेवा करे, और परमेश्वर के कार्य और उसकी प्रबंधकीय योजना की सेवा करे। इसके बावजूद कि उसका स्वभाव कितना ईर्ष्यालु है, और उसकी हस्ती कितनी बुरी है, एकमात्र कार्य जो वो कर सकता है वह है आज्ञाकारिता से अपने कार्यों के साथ बना रहेः परमेश्वर की सेवा में लगा रहे, और परमेश्वर के कार्यों में सुर में सुर मिलाए। शैतान का सार-तत्व और हैसियत ऐसा ही है। उसकी हस्ती जीवन से जुड़ी हुई नहीं है, सामर्थ से जुड़ा हुआ नहीं है, अधिकार से जुड़ा हुआ नहीं है; वह परमेश्वर के हाथों में मात्र एक खिलौना है, परमेश्वर की सेवा में मात्र एक मशीन!

— 'वचन देह में प्रकट होता है' से उद्धृत

अब बड़ी-बड़ी विपत्तियाँ आ रही हैं और वह दिन निकट है जब परमेश्वर भलाई का प्रतिफल देगें और बुराई को दण्ड देंगे। हमें एक सुंदर गंतव्य कैसे मिल सकता है?

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